Thursday, November 2, 2023

Zerodha के को-फाउंडर्स ने दान किए 110 करोड़ रुपये, निखिल कामत बने देश के सबसे युवा दानवीर

देश के शीर्ष दानवीरों की सूची में इस साल ऑनलाइन ब्रोकिंग फर्म जीरोधा (Zerodha) के दोनों को-फाउंडर्स नितिन और निखिल कामत भी शामिल हैं। हुरून इंडिया और एडेलगिव की ओर से जारी 'Hurun India Philanthropy List 2023' के मुताबिक कामत बंधुओं ने साल 2023 में 110 करोड़ रुपये का दान दिया है। उन्होंने यह दान क्लाइमेंट चेंज और पर्यावरण स्थिरता से निपटने वाले संगठनों को दिया है। इसके अलावा 37 वर्षीय निखिल कामत इस सूची में जगह बनाने वाले सबसे कम उम्र के दानवीर बन गए हैं। वहीं दोनों बंधु इस लिस्ट में संयुक्त रूप से 12वें नंबर पर हैं। हुरुन इंडिया की लिस्ट में सबसे ऊपर एचसीएल टेक के चेयरपर्सन शिव नाडर और उनकी फैमिली हैं, जिन्होंने कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए करीब 2,042 करोड़ रुपये दान दिए हैं। निखिल कामत को इससे पहले हुरुन इंडिया ने 40 साल से कम उम्र और अपनी बदौलत संपत्ति खड़ा करने वाले लोगों में सबसे अमीर व्यक्ति की लिस्ट में पहला स्थान दिया था। लिस्ट में निखिल कामत की संपत्ति करीब 17,500 करोड़ रुपये आंकी गई थी। निखिल कामत इस साल की शुरुआत में, बिल गेट्स और वॉरेन बफे की ओर से स्थापित किए गए 'द गिविंग प्लेज' में शामिल होने वाले भारत के सबसे युवा कारोबारी बने थे। इसके अलावा अजीम प्रेमजी, किरण मजूमदार-शॉ, रोहिणी और नंदन नीलेकणि के बाद इसमें शामिल होने वाले चौथे भारतीय हैं। 'द गिविंग प्लेज' फाउंडेशन के सदस्य अपनी संपत्ति का अधिकतर हिस्सा परोपकारी कार्यों के लिए दान करते हैं। यह भी पढ़ें- Berger Paints Q2 results: नेट प्रॉफिट 33% बढ़कर हुआ 292 करोड़ रुपये, रेवन्यू में 3.6% का इजाफा फोर्ब्स के अनुमान के मुताबिक, निखिल कामत की संपत्ति 1 अरब डॉलर से अधिक हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में दान देने की योजना बनाई है। इसके अलावा 37 वर्षीय निखिल कामत ने यंग इंडियन फिलैंथ्रोपिक प्लेज (YIPP) नाम से एक फाउंडेशन भी बनाया है, जो विभिन्न स्टार्टअप फाउंडर्स को एकजुट करने और उन्हें अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 25 प्रतिशत परोपकारी कार्यों के देने के प्रेरित करता है।

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MP Election 2023 : आजादी के 75 साल बाद भी जाति की छाया से बाहर नहीं निकल सकी है राजनीति

मध्य प्रदेश में Congress और BJP दोनों ने ही चुनावी रणनीति बनाने में जातीय संतुलन का ख्याल रखा है। इसकी वजह यह है कि आजादी के 75 साल बाद भी देश की राजनीति जाति की छाया से बाहर नहीं निकल सकी है। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी-सीएसडीएस के सर्वे के नतीजे बताते हैं कि 55 फीसदी भारतीय अपनी जाति के उम्मीदवार को वोट देना पसंद करते हैं। मध्य प्रदेश में तो यह आंकड़ा 65 फीसदी है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि एमपी में विधानसभा चुनावों में जीत वही पार्टी हासिल करेगी, जो जातीय संतुलन बनाने में सफल रहेगी। दोनों दलों की उम्मीदवारों की लिस्ट पर गौर करने से पता चलता है कि टिकट देने में जाति के पहलू का खास ध्यान रखा गया है। राज्य में हिंदू आबादी 91 फीसदी है। मुस्लिम 7 फीसदी और अन्य धर्म के लोग करीब 2 फीसदी हैं। आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 50 फीसदी, एसटी 20 फीसदी और एसटी 15 फीसदी है। 15 फीसदी हिस्सेदारी ऊपरी जाति के लोगों की है। दोनों दलों ने इन आंकड़ों को ध्यान में रखा है। भाजपा ने किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है। ब्राह्मण और ठाकुर उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा टिकट 39 फीसदी सीटों पर ओबीसी उम्मीदवारों की स्थिति मजबूत है। 48 फीसदी सीटों पर जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों की पकड़ मजबूत दिख रही है। 35-36 फीसदी सीटों पर एससी-एसटी उम्मीदवार मजबूत नजर आते हैं। मुस्लिम उम्मीदवार सिर्फ 1 फीसदी सीटों के लिए ताल ठोंक रहे हैं। दोनों दलों ने सबसे ज्यादा टिकट ब्राह्मण और ठाकुर को दिए हैं। ये दोनों ही राज्य में सबसे मजबूत समुदाय हैं। ऊपरी जाति और ओबीसी मतदाताओं में भाजपा की अच्छी पैठ है। 2008 के चुनावों में भाजपा सिर्फ अल्पसंख्यकों को छोड़ करीब सभी समुदायों और जातियों के बीच कांग्रेस से आगे थी। यह भी पढ़ें : Chhattishgarh Election 2023 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली रैली से क्या भाजपा कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा? ओबीसी वोटों पर दोनों दलों की निगाहें 2013 के विधानसभा चुनावों में भी इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिला था। उमा भारती के भाजपा में लौट आने से पार्टी को मजबूती मिली थी। इससे ओबीसी मतदाताओं में भाजपा की पैठ बढ़ी थी। 2013 के चुनावों में BSP ने बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल के इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया था। 2018 के चुनावों में भी भाजपा को ऊपरी जातियों और ओबीसी का समर्थन मिला था। 2018 में एससी-एसटी उत्पीडन अधिनियम के मसला काफी चर्चा में रहा था। सुप्रीम कोर्ट के इस कानून के प्रावधानों में बदलाव करने से नाराज दलित और आदिवासियों ने कांग्रेस का समर्थन किया था। हालांकि, केंद्र की भाजपा सरकार ने संवैधानिक संशोधन के जरिए पुरानी स्थिति बहाल कर दी थी। कांग्रेस के पास ओबीसी चेहरों की कमी इस बार भाजपा फिर से ओबीसी मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है। वह इस बात पर जोर देती रही है कि एक तरफ जहां केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओबीसी से आते हैं वही राज्य में शिवराज सिंह चौहान का संबंध इसी समुदाय से है। उधर, कांग्रेस के पास सीनियर लेवल पर ओबीसी नेताओं की कमी है। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों ही ऊपरी जाति से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस को ओबीसी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है।

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Gainers and Losers: सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में हुआ बंद, 02 नवंबर को इन शेयरों में रहा सबसे ज्यादा हलचल

Gainers and Losers:अच्छे ग्लोबल संकेतों से बाजार में जोश रहा और निफ्टी एक्सपायरी के दिन बाजार बढ़त पर बंद हुआ। आज के कारोबार में BSE के सभी सेक्टर इंडेक्स में खरीदरी रही । रियल्टी, PSE, मेटल शेयरों में तेजी रही। एनर्जी, FMCG, IT, शेयरों में बढ़त देखने को मिला। ऑटो, बैंकिंग शेयरों में तेजी रही। वहीं मिडकैप, स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी रही। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 489.57 अंक यानी 0.77 फीसदी की बढ़त के साथ 64,080.90 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 144.10अंक यानी 0.76 फीसदी की बढ़त के साथ 19133.25 के स्तर पर बंद हुआ। आज इन शेयरों में दिखा सबसे ज्यादा एक्शन REC | CMP Rs 302 | आज यह स्टॉक 6.77 फीसदी की बढ़त लेकर बंद हुआ। दूसरी तिमाही में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 30.72 फीसदी की बढ़त के साथ 3,789.90 करोड़ रुपये रहा हैं। Kansai Nerolac Paints | CMP Rs 311.6 | आज यह शेयर 1.1 फीसदी की गिरावट लेकर बंद हुआ। सितंबर तिमाही में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 56% बढ़कर 177.2 करोड़ रुपए रहा। जबकि आय 1.3% बढ़कर 1,957 करोड़ रुपए रहा। जबकि, EBITDA भी सालाना आधार 37.1% बढ़कर 273.2 करोड़ रुपए रही। मार्जिन 10.3% से बढ़कर 14% पर रही। Thangamayil Jewellery | CMP Rs 1,217.95 | आज यह शेयर लगातार दूसरे दिन लाल निशान में फिसला और स्टॉक 5.4 फीसदी की गिरावट लेकर बंद हुआ। इस तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ साल-दर-साल 47 प्रतिशत घटकर 8 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले की अवधि में 15 करोड़ रुपये था। Triveni Turbine | CMP Rs 392.55 |आज यह स्टॉक 9.39 फीसदी की बढ़त लेकर बंद हुआ। सितंबर तिमाही में कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 32 फीसदी बढ़कर 388 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एबिटा 34 फीसदी उछलकर 88 करोड़ रुपये हो गया। India Cements | CMP Rs 209.05 | आज यह स्टॉक 4.63 फीसदी की बढ़त लेकर बंद हुआ।सितंबर तिमाही में कंपनी का घाटा कम होकर 81 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 137.6 करोड़ रुपये था। GMDC | CMP Rs 323.6 | आज यह शेयर 8.04 फीसदी की गिरावट लेकर बंद हुआ। दूसरी तिमाही में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 50.7% घटकर 74.6 करोड़ रुपए रही। जबकि आय 29% घटकर 382.7 करोड़ रुपए रही। EBITDA भी 69.1% से घटकर 52.9 करोड़ रुपए रही । कंपनी की मार्जिन 13.8% के मुकाबले 31.8% रही। Britannia Industries | CMP Rs 4528 | आज यह स्टॉक 2.97 फीसदी की बढ़त लेकर बंद हुआ। ब्रिटानिया का मुनाफा पिछले साल के मुकाबले 490.6 करोड़ रुपए से बढ़कर 586.5 करोड़ रुपए रहा है। इसमें पिछले साल के मुकाबले 19.6% की बढ़त रही है। वहीं आय पिछले साल के मुकाबले 1.2% की बढ़त के साथ 4433 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। जो कि एक साल पहले 4379.6 करोड़ रुपए के स्तर पर थी।EBITDA पिछले साल के मुकाबले 22.6% बढ़कर 872.4 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। वहीं तिमाही में कंपनी के मार्जिन 19.7% पर रहे हैं जो कि एक साल पहले 16.3% पर थे। JK Tyre & Industries | CMP Rs 338.25 | आज यह स्टॉक 9.77 फीसदी की बढ़त लेकर बंद हुआ।दूसरी तिमाही में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 242 करोड़ रुपए रहा। जबकि आय 3.8% बढ़कर 3,897.5 करोड़ रुपए रही। EBITDA 98% बढ़कर 589 करोड़ रुपए रहा। जबकि मार्जिन 7.9% के मुकाबले 15.1% रही। VA Tech Wabag | CMP Rs 500.8 | आज यह स्टॉक 4.8 फीसदी की बढ़त लेकर बंद हुआ। कंपनी को दू कंसोर्शियम को 6.3 करोड़ यूरो का ऑर्डर मिला है। ट्यूनशिया में वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट के लिए ऑर्डर मिला है।

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दिवाली से पहले ICICI और BOI ने दिया झटका, बढ़ाया MCLR, महंगा हो जाएगा होम और कार लोन

प्राइवेट सेक्टर बैंक ICICI और पब्लिक सेक्टर बैंक बैंक ऑफ इंडिया (BOI) ने MCLR बढ़ा दिया है। दोनों बैंकों की ये दरें 1 नवंबर 2023 से लागू हो गई है। ये कदम बैंकों ने पिछले महीने RBI की मॉनेटरी कमेटी की मीटिंग के बाद लिया गया है। पिछली बैठक में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि अभी रेट में और बढ़ोतरी की गुंजाइश है। आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) MCLR में रिवीजन के बाद आईसीआईसीआई बैंक की ओवरनाइट, एक महीने की एमसीएलआर अब 8.50 प्रतिशत है। तीन महीने की एमसीएलआर वर्तमान में क्रमशः 8.55 प्रतिशत और 6 महीने की दर 8.90 प्रतिशत है। एक साल का एमसीएलआर 9 फीसदी है. बैंक ऑफ इंडिया एमसीएलआर (MCLR) में बढ़ोतरी के बाद बैंक ऑफ इंडिया की ओवरनाइट और एक महीने की एमसीएलआर क्रमशः 7.95 प्रतिशत और 8.20 प्रतिशत है। तीन महीने की एमसीएलआर अब 8.35 फीसदी और छह महीने की एमसीएलआर 8.55 फीसदी पर है। एक साल का एमसीएलआर में 8.75 प्रतिशत है, जबकि तीन साल का एमसीएलआर 8.95 प्रतिशत है। एमसीएलआर को आरबीआई ने 1 अप्रैल 2016 को लागू किया गया था। ये न्यूनतम लोन रेट है जिसके नीचे किसी बैंक को लोन देने की अनुमति नहीं है। एमसीएलआर तय करते समय कई कारकों को ध्यान में रखा जाता है जिसमें डिपॉजिट रेट, रेपो रेट, ऑपरेशनल कॉस्ट और कैश रिजर्स रेशो को बनाए रखने की कॉस्ट शामिल है। रेपो रेट में बदलाव का असर एमसीएलआर रेट पर पड़ता है। एमसीएलआर में बदलाव से लोन की ब्याज दर पर असर पड़ता है, जिससे कर्ज लेने वालों की ईएमआई बढ़ जाती है। ऑटो लोन, होम लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ेगी एमसीएलआर में बढ़ोतरी का असर होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन समेत इससे जुड़े सभी तरह के लोन की ब्याज दर पर देखने को मिलेगा। लोन ग्राहकों को पहले से अधिक EMI चुकनी होगी। नया लोन लेने वाले ग्राहकों को महंगा लोन मिलेगा। Jio लेकर आया शानदार दिवाली ऑफर, दे रहा है 23 दिनों की एक्स्ट्रा वैलिडिटी, कॉल और डेटा सब मुफ्त

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Wednesday, November 1, 2023

Israel-Hamas War: Netanyahu Vows 'Victory' Despite 'Painful Losses' in Gaza

More than 1,400 people in Israel have been killed, most of them civilians slain in the initial Oct. 7 Hamas rampage that started the fighting

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Death Rate for Babies in US Rose for the First Time in 20 Years: Here's Why

US infant mortality rises in a troubling trend, reflecting healthcare disparities. Researchers seek solutions to safeguard maternal-infant health

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Tuesday, October 31, 2023

Assembly Election 2023 : इस बार कांग्रेस ने उम्मीदवारों के चयन का तरीका बदला, सर्वे के नतीजों के आधार पर दिए गए टिकट

कांग्रेस ने 15 अक्टूबर को मध्य प्रदेश में 144 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। लिस्ट ने कई लोगों को चैंकाया। इसकी वजह यह है कि आम तौर पर यह पार्टी उम्मीदवारों के नामों के ऐलान के लिए अंतिम वक्त तक इंतजार. करती थी। इसका मकसद उन लोगों के विरोध से बचना था, जो टिकट नहीं मिलने के बाद अपने गुस्से का इजहार करते हैं। सवाल है कि इस बार कांग्रेस ने क्यों परंपरा से हटने का फैसला किया? दरअसल, इस बार पार्टी की सेंट्रल कमेटी (CEC) को राज्य इकाई से उम्मीदवारों की एक लिस्ट मिली थी। इस लिस्ट से उम्मीदवारों का चुनाव करने में हाई प्रोफाइल कमेटी को सिर्फ कुछ मिनट्स का समय लगा। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पहले ही आपसी खींचतान को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की है। इन दोनों नेताओं के एक साथ आ जाने का असर दूसरे नेताओं पर भी पड़ा है। कमलनाथ-दिग्विजय में सुलह कमलनाथ ने पहले भी दिग्विजय सिंह को साधने की कोशिश की थी। लेकिन, वे नाकाम रहे थे। लेकिन, बाद में दोनों नेताओं के बीच सुलह हो गई। 19 अक्टूबर को कांग्रेस ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की थी। साथ ही पहली सूची में शामिल तीन उम्मीदवारों के नाम बदल दिए थे, क्योंकि उनके निवार्चन क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का विरोध देखने को मिला था। अब ऐसा लगता है कि टिकट बंटवारे को लेकर आम तौर पर दिखने वाला विरोध इस बार देखने को नहीं मिला है। कहीं-कहीं कुछ विरोध दिखा है, लेकिन वह बहुत ताकतवर नहीं है। बताया जाता है कि कमलनाथ और उनकी टीम ने पिछले 2-3 सालों में कई सर्वे किए हैं। इनमें 230 विधानसभा क्षेत्रों की टोह लेने की कोशिश की गई। इससे उन उम्मीदवारों के चुनाव में मदद मिली, जो चुनाव जीत सकते हैं। सर्वे के आधार पर 70 फीसदी टिकटों का बंटवारा इस बार 60-70 फीसदी टिकट सर्वे के नतीजों के आधार पर दिए गए हैं। इस बार चंबल-ग्वालियर इलाके में उम्मीदवारों के चयन में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। इसकी वजह यह है कि इस इलाके के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधियां ने 2020 में कांग्रेस को छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। सिंधिया का हमेशा टिकट बंटवारे में ज्यादा असर होता था। इसकी वजह यह है कि इस इलाके में उनकी जबर्दस्त पकड़ मानी जाती है। उधर, छत्तीसगढ़ में भी इस बार कांग्रेस ने पहली बार स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों को भेजा। सदस्य हर जिले में जाकर वहां संभावित उम्मीदवारों से बातचीत की। इससे जमीनी स्तर पर संभावित उम्मीदवारों के बारे में जानकारी जानकारी जुटाने में मदद मिली। इससे टिकट बंटवारे में लॉबीइंग की भूमिका घट गई। बघेल और सिंहदेव के बीच संतुलन छत्तीसगढ़ में उम्मीदवारों के नाम तीन सूची में जारी किए गए। 71 वर्तमान विधायकों में से 22 को टिकट नहीं देने का फैसला लिया गया। दरअसल, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के सामने सत्ता विरोधी लहर से निपटने की भी चुनौती है, क्योंकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद दूसरी बार चुनावी मैदान में सीएम बनने के लिए ताल ठोंक रहे हैं। हालांकि, इस बार 90 सीटों के उम्मीदवारों के चयन में उनके और उनके प्रतिद्वंद्वी टीएस सिंहदेव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

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