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Wednesday, August 12, 2026

Lenskart Q1 Results: आईवियर कंपनी का मुनाफा 270% बढ़ा, रेवेन्यू ₹2714 करोड़ पहुंचा

Lenskart Q1 Results: आईवियर कंपनी Lenskart Solutions ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 270% बढ़कर ₹222 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में मुनाफा ₹60 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 43.3% बढ़कर ₹2,714.2 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल यह ₹1,894.5 करोड़ था। EBITDA 75.1% बढ़कर ₹588.5 करोड़ रहा। EBITDA मार्जिन भी 17.7% से बढ़कर 21.7% हो गया।

मार्जिन में भी बड़ा सुधार

Lenskart का PAT मार्जिन 4% से बढ़कर 8.4% हो गया। वहीं, कंसोलिडेटेड प्रोडक्ट मार्जिन पहली बार 70% के पार पहुंचा। यह 70.3% रहा, जो पिछले साल 68.7% था।

भारत में प्रोडक्ट मार्जिन 63.4% से बढ़कर 64.2% हुआ। कंपनी ने बताया कि इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बढ़ती बिक्री से इसे मदद मिली।

भारत में स्टोर और बिक्री दोनों बढ़े

भारत में समान स्टोर बिक्री यानी SSSG 18.3% रही। वहीं, प्रति स्टोर बिक्री 24.3% बढ़ी। कंपनी ने पहली तिमाही में 132 नए स्टोर जोड़े। इनमें 116 स्टोर भारत में खुले।

इसके साथ कंपनी के कुल एक्टिव स्टोर की संख्या 3,459 हो गई। भारत में कंपनी ने 50 नए शहरों में भी एंट्री की। खास बात यह है कि 83 नए स्टोर Tier-2 और उससे आगे के शहरों में खोले गए। Lenskart Gold के एक्टिव मेंबर्स की संख्या 93.5 लाख पहुंच गई। Gold सब्सक्रिप्शन फीस से रेवेन्यू 57.4% बढ़कर ₹66 करोड़ हो गया।

आंखों की जांच भी बढ़ी

तिमाही में लेंसकार्ट ने करीब 70 लाख आई टेस्ट किए। इसमें सालाना आधार पर 39.8% की बढ़ोतरी हुई। भारत में आई टेस्ट 42.7% बढ़कर करीब 60 लाख रहे। इनमें लगभग आधे लोगों की पहली बार आंखों की जांच हुई।

कंपनी की कुल आईवियर बिक्री की मात्रा 25.7% बढ़ी। भारत में औसत बिक्री कीमत 6.4% बढ़कर ₹1,856 हो गई।

इंटरनेशनल कारोबार में 38% ग्रोथ

अंतरराष्ट्रीय कारोबार का रेवेन्यू 38% बढ़कर ₹1,203 करोड़ रहा। जापान, दक्षिण-पूर्व एशिया और मिडिल ईस्ट जैसे बाजारों से कंपनी को अच्छी ग्रोथ मिली।

अंतरराष्ट्रीय कारोबार में आईवियर वॉल्यूम 37.6% बढ़ा। ट्रांजैक्टिंग कस्टमर अकाउंट 27.8% बढ़े। वहीं, आई टेस्ट 20.5% बढ़े।

चीन की कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाएगी

Lenskart ने चीन की ज्वाइंट वेंचर कंपनी Framekart में अपनी हिस्सेदारी 51% से बढ़ाकर 70% करने को मंजूरी दी है। इस सौदे पर करीब ₹10.6 करोड़ खर्च होंगे।

Framekart Lenskart ग्रुप की आईवियर जरूरतों का 30% से ज्यादा उत्पादन करती है। हिस्सेदारी बढ़ने से Lenskart को मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। कंपनी ने दक्षिण कोरिया में OWNDAYS Korea शुरू करने और चीन में एक नई सब्सिडियरी बनाने को भी मंजूरी दी है।

Lenskart के शेयरों का हाल

12 अगस्त को Lenskart का शेयर 0.71% गिरकर ₹585 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 14.04% बढ़ा है। एक साल में इसने 45.13% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 1.02 लाख करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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Tuesday, August 11, 2026

RVNL Q1 Results: सरकारी रेल कंपनी का मुनाफा 18.5% बढ़ा, EBITDA में जोरदार उछाल

RVNL Q1 Results: सरकारी रेल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Rail Vikas Nigam Ltd (RVNL) का जून तिमाही प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 18.5% बढ़कर 159.36 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 134.53 करोड़ रुपये था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 10.5% बढ़कर 4,321 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 3,909 करोड़ रुपये था। EBITDA में काफी तेज बढ़त हुई। यह 56 करोड़ रुपये यानी करीब 231% बढ़कर 185.4 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 1.43% से बढ़कर 4.3% पहुंच गया।

तिमाही आधार पर प्रदर्शन कमजोर

हालांकि, मार्च तिमाही के मुकाबले RVNL का प्रदर्शन कमजोर रहा। जून तिमाही में मुनाफा 14.8% घटकर 159.36 करोड़ रुपये रहा। मार्च तिमाही में यह 187.07 करोड़ रुपये था।

ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी तिमाही आधार पर 35.5% घटकर 4,321 करोड़ रुपये रह गया। मार्च तिमाही में यह 6,695.91 करोड़ रुपये था। कुल आय भी 6,780.89 करोड़ रुपये से घटकर 4,462.29 करोड़ रुपये रही।

₹358.97 करोड़ का रेलवे प्रोजेक्ट

RVNL ने 20 जुलाई को बताया था कि वह ईस्ट सेंट्रल रेलवे के 358.97 करोड़ रुपये के EPC कॉन्ट्रैक्ट में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही है। यह प्रोजेक्ट बिहार में रेल लाइन को डबल करने से जुड़ा है।

इसके तहत सीतामढ़ी-रक्सौल रेल लाइन के 41.04 किलोमीटर हिस्से में डबलिंग का काम होगा। इसमें पुल, स्टेशन, प्लेटफॉर्म, लेवल क्रॉसिंग और दूसरे निर्माण कार्य शामिल हैं।

₹99,262 करोड़ की ऑर्डर बुक

RVNL की ऑर्डर बुक 1 अगस्त 2026 तक 99,262 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का टर्नओवर 20,012.26 करोड़ रुपये रहा। RVNL अब तक 158 से ज्यादा प्रोजेक्ट पूरे कर चुकी है।

RVNL शेयर का हाल

मंगलवार को RVNL का शेयर 0.63% गिरकर 229.23 रुपये पर बंद हुआ। इस साल अब तक शेयर 35.62% गिर चुका है। पिछले एक साल में भी इसमें 32.85% की गिरावट आई है। हालांकि, तीन साल में शेयर ने 82.39% रिटर्न दिया है।

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Monday, August 10, 2026

टाटा ग्रुप की TCS ने डेटा लीक की खबरों को खारिज किया, कहा- सिस्टम में सेंध के कोई सबूत नहीं

TCS Data Breach: देश की सबसे बड़ी आईटी सर्विसेज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) ने कर्मचारियों का डेटा लीक होने की खबरों पर सफाई दी है। कंपनी ने कहा कि उसे कुछ थ्रेट इंटेलिजेंस अलर्ट मिले थे, जिनमें कुछ कर्मचारियों की जानकारी लीक होने का दावा किया गया था। हालांकि, जांच में TCS के सिस्टम या ग्राहकों के सिस्टम में किसी तरह की सेंध के कोई भरोसेमंद सबूत नहीं मिले।

चार साल से ज्यादा पुराना डेटा बताया

TCS ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि जिस डेटा का दावा किया जा रहा है, वह चार साल से भी ज्यादा पुराना है। इसमें सिर्फ कर्मचारियों की सामान्य जानकारी शामिल है। कंपनी ने साफ कहा कि ग्राहकों का डेटा, उनके सिस्टम या TCS के ऑपरेशनल सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ा है।

हमलावर ने क्या दावा किया?

टाटा ग्रुप की इस आईटी कंपनी के मुताबिक, हमलावर ने दावा किया है कि उसने Password Spray और Multi-Factor Authentication (MFA) Fatigue तकनीक का इस्तेमाल किया।

TCS ने कहा कि इन दोनों तरह के साइबर हमलों से बचाव के इंतजाम कंपनी दो साल से भी ज्यादा समय पहले लागू कर चुकी है। मौजूदा समीक्षा में भी ये सुरक्षा उपाय प्रभावी पाए गए हैं।

निगरानी जारी रहेगी

TCS ने कहा कि वह अपने सिस्टम की लगातार निगरानी कर रही है। अगर भविष्य में कोई नई जानकारी सामने आती है, तो उसके आधार पर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। कंपनी ने कहा कि कंपनी अपने सिस्टम की सुरक्षा और ग्राहकों की जानकारी की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सोमवार को TCS का शेयर 0.80% गिरकर 2,434 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 17.52% उछला है।

Market Outlook: सपाट बंद हुआ बाजार, जानिए 11 अगस्त को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

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Sunday, August 9, 2026

'खामोशी द म्यूजिकल' के 30 साल हुए पूरे, इन 7 वजहों से संजय लीला भंसाली की फिल्म बनीं क्लासिक

रिलीज के तीन दशक बाद भी, खामोशी द म्यूजिकल को इंडियन सिनेमा की सबसे दिल को छूने वाली और इमोशनल फिल्मों में से एक के तौर पर याद किया जाता है। सिर्फ़ एक क्रिटिक्स द्वारा सराही गई ड्रामा से कहीं ज़्यादा, यह संजय लीला भंसाली का डायरेक्टोरियल डेब्यू था, जिसने दर्शकों को एक ऐसे फिल्ममेकर से मिलवाया, जिसका कहानी कहने का पैशन इंडियन सिनेमा को फिर से डिफाइन करेगा। आज भी, यह फिल्म अनगिनत कारणों से पसंदीदा बनी हुई है।

1. इसने दुनिया को संजय लीला भंसाली के सिनेमैटिक विज़न से इंट्रोड्यूस कराया

खामोशी: द म्यूजिकल भंसाली की ज़बरदस्त कहानी कहने की कला की पहली झलक थी। इमोशन, म्यूजिक और शानदार विजुअल्स को मिलाने की उनकी काबिलियत उनकी पहली ही फिल्म से साफ़ थी, जिसने एक ऐसे फिल्ममेकिंग स्टाइल की नींव रखी जो बाद में आइकॉनिक बन गया।

2. एक कहानी जो आज भी टाइमलेस लगती है

असल में, खामोशी परिवार, प्यार, त्याग और हिम्मत के बारे में एक दिल को छू लेने वाली कहानी है। एक सुनने वाली बेटी और उसके बहरे-गूंगे माता-पिता के बीच के रिश्ते को ईमानदारी और दया के साथ दिखाकर, भंसाली ने एक ऐसी फिल्म बनाई जिसके इमोशन पीढ़ियों तक गूंजते रहेंगे।

3. म्यूज़िक जो एक इमोशनल भाषा बन गया

संजय लीला भंसाली के लिए, म्यूज़िक हमेशा मनोरंजन से कहीं ज़्यादा रहा है, यह कहानी कहने का ज़रिया है। खामोशी ने इस सोच को खूबसूरती से दिखाया, हर गाने ने कहानी को बेहतर बनाया और किरदारों के इमोशन को बढ़ाया। तीन दशक बाद भी, इसका साउंडट्रैक यादगार है।

4. भंसाली के सिग्नेचर विज़ुअल स्टाइल का जन्म

दर्शकों के देवदास या बाजीराव मस्तानी की शान देखने से पहले ही, खामोशी ने भंसाली की हर छोटी-बड़ी बात पर नज़र रखने की कला दिखाई। हर फ्रेम, हर रंग और हर कंपोज़िशन में वह विज़ुअल खूबसूरती झलकती थी जो बाद में उनका ट्रेडमार्क बन गई।

5. परफॉर्मेंस जो हमेशा असर छोड़ती हैं

भंसाली की अपनी कास्ट से गहरी इमोशनल परफॉर्मेंस निकलवाने की काबिलियत शुरू से ही साफ़ थी। फिल्म के किरदार अपनी असलियत, कमज़ोरी और इमोशनल गहराई की वजह से यादगार बने रहते हैं, जिससे खामोशी परफॉर्मेंस पर आधारित कहानी कहने के लिए एक बेंचमार्क बन जाती है।

6. अपने समय से आगे की फिल्म

इनक्लूसिविटी के बारे में बातचीत आम होने से बहुत पहले, खामोशी ने दिव्यांग किरदारों को अपनी कहानी के केंद्र में गरिमा, हमदर्दी और संवेदनशीलता के साथ रखा। भंसाली ने इस विषय को परंपरा के बजाय दया के साथ लिया, जिससे यह फिल्म आज भी उतनी ही रेलिवेंट है जितनी तीन दशक पहले थी।

7. एक असाधारण विरासत की शुरुआत

आज पीछे मुड़कर देखें तो, खामोशी: द म्यूजिकल एक शानदार डेब्यू से कहीं ज़्यादा है, यह भारत के सबसे महान फिल्ममेकर्स में से एक के जन्म की निशानी है। इस फ़िल्म ने संजय लीला भंसाली के शानदार सफ़र का रास्ता बनाया, जिसमें उन्होंने हम दिल दे चुके सनम, देवदास, ब्लैक, गोलियों की रासलीला राम-लीला, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत, गंगूबाई काठियावाड़ी और हीरामंडी: द डायमंड बाज़ार जैसी फ़िल्में कीं। इन सालों में, भंसाली ने सात नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड, कई फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड, पद्म श्री, एक BAFTA अवॉर्ड नॉमिनेशन जीता है, और रिपब्लिक डे पर एक झांकी, भारत गाथा डिज़ाइन करने वाले पहले फ़िल्ममेकर बने, जो भारतीय सिनेमा के कर्तव्य पथ पर सफ़र का जश्न मनाती है, जिससे भारत के सबसे महान सिनेमाई दूरदर्शी लोगों में से एक के रूप में उनकी जगह और पक्की हो गई।

तीस साल बाद, खामोशी: द म्यूज़िकल सिर्फ़ एक पसंदीदा फ़िल्म नहीं है, बल्कि यह संजय लीला भंसाली की असाधारण विरासत की नींव है। जैसे-जैसे दर्शक उनकी अगली फ़िल्म, लव एंड वॉर का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, यह इंतज़ार ही उस भरोसे और तारीफ़ का सबूत है जो भंसाली ने तीन दशकों में बनाया है। अगर खामोशी ने एक जीनियस के जन्म को दिखाया, तो लव एंड वॉर एक ऐसे फिल्ममेकर के शानदार सफ़र में एक और मील का पत्थर साबित होगी, जो इंडियन सिनेमा का भविष्य बना रहा है।



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Saturday, August 8, 2026

कश्मीरी पंडितों को फिर आतंकी धमकी! LeT से जुड़े टेरर ग्रुप ने जारी की हिट लिस्ट, घाटी के बाहर भी हमले की चेतावनी

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी संगठन ने कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को धमकी दी है। सीएनएन-न्यूज18 के मनोज गुप्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने एक नया धमकी भरा नोट जारी किया है, जिसमें कुछ कर्मचारियों की निजी जानकारी साझा की गई है। साथ ही, कश्मीर घाटी और जम्मू में उन्हें निशाना बनाकर हमले करने की चेतावनी दी गई है। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी यूएलसी को भारतीय खुफिया एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा का एक छद्म संगठन मानती हैं। यूएलसी ने कश्मीरी पंडित अधिकारियों की एक कथित ‘हिट लिस्ट’ जारी की है। इसमें छह सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर शामिल हैं।

यह धमकी खास तौर पर उन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को दी गई है, जो सरकारी रोजगार योजनाओं के तहत काम कर रहे हैं। संगठन ने यह भी धमकी दी है कि अगर आतंकियों और उनके समर्थकों की संपत्तियों को जब्त या कुर्क किया गया, तो सुरक्षा बलों और प्रशासन के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

‘हिट लिस्ट’ में कश्मीरी पंडित कर्मचारी

धमकी भरे नोट में दावा किया गया है कि संगठन सरकारी विभागों पर नजर रख रहा है। इनमें खास तौर पर राजस्व विभाग शामिल है, जहां सरकारी पैकेज के तहत कई कश्मीरी पंडित कर्मचारी तैनात हैं। नोट में छह कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी दिए गए हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस तरह निजी जानकारी सार्वजनिक करने का मकसद कर्मचारियों में डर पैदा करना और उन्हें संभावित टारगेट के रूप में पहचानना हो सकता है। हालांकि, सीएनएन-न्यूज18 ने सुरक्षा कारणों से धमकी में शामिल कर्मचारियों के नाम और उनके संपर्क नंबर सार्वजनिक नहीं किए हैं।

घाटी से जम्मू जाने पर भी हमले की धमकी

संगठन ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे कश्मीर घाटी से जम्मू चले भी जाते हैं, तो वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगे। धमकी में कहा गया है कि उन्हें कश्मीर के बाहर भी निशाना बनाया जा सकता है। संगठन ने प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए दी जा रही प्रशासनिक सुविधाओं का भी विरोध किया है। इनमें घर से काम करने और दूर रहकर काम करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। संगठन ने ऐसी सुविधाएं जारी रखने पर भी धमकी दी है।

एलजी, डीजीपी और केंद्र को खुली चेतावनी

धमकी भरे नोट में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और दिल्ली में मौजूद अधिकारियों को भी चेतावनी दी गई है। संगठन ने दावा किया है कि भविष्य में होने वाले हमलों के दौरान वह लोगों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगा। नोट के एक अन्य हिस्से में स्थानीय पुलिस को लेकर भी धमकी दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय पुलिसकर्मी स्थानीय इलाकों में ही रहते और आते-जाते हैं। संगठन ने इसी आधार पर पुलिसकर्मियों पर कहीं भी और कभी भी हमले का खतरा बताया है।

लश्कर ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए करता है काम: खुफिया सूत्र

भारत के वरिष्ठ खुफिया सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन कई बार अलग-अलग नामों से बने ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए काम करते हैं। इनमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) और पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) जैसे नाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन संगठनों का इस्तेमाल खास तौर पर आम लोगों और धार्मिक समुदायों के खिलाफ होने वाले हमलों की जिम्मेदारी लेने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य इन हमलों को पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के बजाय किसी स्थानीय और धर्मनिरपेक्ष प्रतिरोध के रूप में पेश करना हो सकता है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि ऐसे प्रॉक्सी संगठनों के जरिए आतंकी संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली जांच और आतंकवाद के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों से बचने की कोशिश भी करते हैं। इनमें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध शामिल हैं।

कर्मचारियों का डेटा जारी करना सोची-समझी साजिश

खुफिया जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत भर्ती किए गए कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर और उनकी तैनाती की जगहों की जानकारी सार्वजनिक करना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस जानकारी का इस्तेमाल इन कर्मचारियों को डराने या उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पाया है कि ‘हाइब्रिड आतंकियों’ द्वारा की जाने वाली लक्षित हत्याओं में छोटे और आसानी से छिपाए जा सकने वाले हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनमें पिस्तौल और रिवॉल्वर जैसे हथियार शामिल हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, हाइब्रिड आतंकी ऐसे लोग होते हैं जो सामान्य नागरिकों की तरह अपनी नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी जीते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। ऐसे लोगों का इस्तेमाल खास लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाई गई

सरकारी कर्मचारियों को मिल रही धमकियों और आतंकवादियों की मदद करने वालों की संपत्ति जब्त किए जाने के बाद सामने आई धमकियों को देखते हुए सुरक्षा बलों ने प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ा दी है। उनके रहने की जगहों के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां कर्मचारियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सुरक्षित रास्ते तय कर रही हैं। इसके साथ ही, कर्मचारियों की निजी जानकारी ऑनलाइन साझा करने वाले आतंकी गुटों के खिलाफ खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान भी तेज किए गए हैं। इन अभियानों का मकसद ऐसे आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना है।



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Friday, August 7, 2026

Sugar Price : इस साल फेस्टिवल सीजन में चीनी बिगाड़ सकती है मूड, 15% तक बढ़े शुगर के दाम

Sugar Price : फेस्टिवल सीजन में चीनी का स्वाद फीका पड़ सकता है। पिछले एक महीने में कुछ राज्यों में चीनी के दाम 15% तक बढ़े हैं। इसका उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी मिलों ने शुगर क्रशिंग पहले शुरू करने का फैसला लिया है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले एक महीने के अंदर चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़ गए हैं। ऐसे में चीनी का उत्पादन बढ़ा कर इसके बढ़ते दाम को थामने के लिए चीनी मिलों ने इस साल शुगर क्रशिंग पहले शुरू करने का फैसला किया है।

इस साल फेस्टिवल सीजन में चीनी का स्वाद फीका हो सकता है। दरअसल,इस साल अनुमान के मुताबिक चीनी का उत्पादन नहीं हुआ है। इस साल चीनी का उत्पादन 293 लाख टन रहने का अनुमान था लेकिन ये 280 लाख टन ही रहा,जो अनुमान के मुकाबले करीब 5% कम है। पिछले साल का करीब 50 लाख टन स्टॉक उपलब्ध है लेकिन देश में कुल चीनी की खपत 280 लाख टन होती है। इस साल करीब 8 लाख टन चीनी निर्यात हुई है। पिछले महीने चीनी के होलसेल दाम में 400 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इसे देखते हुए कंपनियों ने इस साल चीनी का उत्पादन 10-15 दिन पहले शुरू करने का फैसला किया है।

अगर सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली में 1 महीने पहले चीनी का दाम 45 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 49 रुपए प्रति किलो हो गया है। वहीं,पश्चिम बंगाल में 1 महीने पहले इसका दाम 49 रुपए प्रति किलो था जो अब 55 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। चेन्नई में 1 महीने पहले चीनी का दाम 46 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 53 रुपए प्रति किलो हो गया है। मुंबई में 1 महीने पहले चीनी का दाम 46 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 52 रुपए प्रति किलो हो गया है। इसी तरह रांची में 1 महीने पहले चीनी का दाम 47 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 51 रुपए प्रति किलो हो गया है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़े हैं। कुछ राज्यों में तो चीनी के दाम में 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई है। साथ ही चीनी मिलों के स्टॉक की भी जांच की है। लेकिन एल नीनो और अगले साल चीनी का उत्पादन कम होने की आशंका से दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

चीनी कंपनियों मार्जिन में आएगा सुधार

चीनी की कीमतों में बढ़त से उपभोक्ता भले ही परेशान हों लेकिन इससे चीनी मिल कंपनियों को फायदा होगा। चीनी के दाम बढ़ने से बलरामपुर चीनी,द्वारिकेश शुगर,श्री रेणुका शुगर और डालमिया भारत शुगर जैसी कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी की उम्मीद है। ऊंचे दाम से उनके मार्जिन सुधर सकते हैं। साथ ही यह सरकार के महत्वाकांक्षी इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए भी झटका साबित हो सकता है। ऊंची कीमतों की वजह से मिलें इथेनॉल बनाने के बजाय चीनी बेचना ज्यादा फायदेमंद समझ सकती हैं, जिससे देश में इथेनॉल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

 

 

Market Outlook : निफ्टी-सेंसेक्स गिरावट के साथ हुए बंद, जानिए 10 अगस्त को कैसी रह सकती है इनकी चाल



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Thursday, August 6, 2026

Retirement Planning: हर महीने ₹50000 की पेंशन के लिए कितना रिटायरमेंट फंड चाहिए? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Retirement Planning: नौकरी के दौरान हर महीने सैलरी खाते में आ जाती है। इसलिए खर्च की ज्यादा चिंता नहीं होती। लेकिन रिटायरमेंट के बाद यही सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। सैलरी बंद हो जाती है, लेकिन खर्च नहीं रुकते। हर महीने राशन खरीदना है, बिजली का बिल भरना है, दवाइयां लेनी हैं और रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी करनी हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रिटायरमेंट तक कितना पैसा जोड़ना होगा, ताकि हर महीने 50,000 रुपये आराम से मिलते रहें और बीच में पैसा खत्म होने का डर भी न रहे।

₹50000 पेंशन के लिए कितना फंड ?

अगर आपको हर महीने 50,000 रुपये चाहिए, तो सालभर में आपकी जरूरत होगी 6 लाख रुपये। फाइनेंशियल प्लानिंग में एक लोकप्रिय नियम है 4% Withdrawal Rule। इस नियम के मुताबिक, रिटायरमेंट के पहले साल आप अपने कुल कॉर्पस का 4% निकालते हैं। बाद के वर्षों में निकासी की रकम महंगाई के हिसाब से बढ़ाई जा सकती है। माना जाता है कि अगर निवेश पर ठीक-ठाक रिटर्न मिलता रहे, तो आपका पैसा 25-30 साल या उससे ज्यादा समय तक चल सकता है।

इस नियम के मुताबिक, अगर आपका रिटायरमेंट कॉर्पस करीब 1.5 करोड़ रुपये है, तो आप लगभग 50,000 रुपये महीना निकाल सकते हैं। इसमें कोशिश यह रहती है कि हर साल इतना ही पैसा निकाला जाए, जिससे बाकी रकम निवेश में बनी रहे और उस पर मिलने वाला रिटर्न भविष्य के खर्च में मदद करता रहे।

30 हजार से 1 लाख की पेंशन के जरूरी फंड

हर महीने चाहिएसालाना जरूरत

4% नियम के हिसाब से जरूरी कॉर्पस

₹30,000₹3.60 लाख₹90 लाख
₹50,000₹6 लाख₹1.50 करोड़
₹75,000₹9 लाख₹2.25 करोड़
₹1,00,000₹12 लाख₹3 करोड़

अगर रिटायरमेंट में 20 साल या 10 साल बाकी हैं

मान लीजिए आपका लक्ष्य रिटायरमेंट तक 1.5 करोड़ रुपये का कॉर्पस बनाना है। अगर आपकी उम्र 40 साल है और रिटायरमेंट में अभी 20 साल बाकी हैं, तो हर महीने अपेक्षाकृत कम SIP से भी यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। लेकिन अगर आप 50 साल की उम्र में निवेश शुरू करते हैं और रिटायरमेंट में सिर्फ 10 साल बचे हैं, तो हर महीने कहीं ज्यादा निवेश करना पड़ेगा।

अनुमानित सालाना रिटर्न20 साल बाकी (मासिक SIP)

10 साल बाकी (मासिक SIP)

10%₹19,800₹72,000
12%₹15,000₹66,000
15%₹10,500₹57,000

यह तुलना साफ दिखाती है कि रिटायरमेंट प्लानिंग में समय सबसे बड़ी ताकत है। 20 साल पहले शुरुआत करने वाला निवेशक 15-20 हजार रुपये की SIP से लक्ष्य तक पहुंच सकता है। वहीं, सिर्फ 10 साल बचे होने पर उसी लक्ष्य के लिए 60-70 हजार रुपये महीना निवेश करना पड़ सकता है। इसलिए जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, उतना कम मासिक बोझ पड़ेगा और कंपाउंडिंग का फायदा भी ज्यादा मिलेगा।

Chart SIPS

महंगाई आपकी सबसे बड़ी चुनौती है

रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी गलती यह मान लेना है कि आज जितने पैसों में खर्च चल रहा है, उतने ही पैसों में भविष्य में भी काम चल जाएगा। जबकि सच यह है कि समय के साथ महंगाई हर चीज को महंगा कर देती है। दवाइयों से लेकर बिजली, राशन और यात्रा तक लगभग हर खर्च बढ़ता रहता है।

मान लीजिए आज आपका मासिक खर्च 50,000 रुपये है। अगर महंगाई औसतन 6% सालाना रहती है, तो 20 साल बाद यही खर्च करीब 1.60 लाख रुपये महीना हो सकता है। वहीं, 25 साल बाद इसके लिए करीब 2.15 लाख रुपये महीने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए रिटायरमेंट प्लान बनाते समय हमेशा भविष्य की महंगाई को ध्यान में रखें।

रिटायरमेंट प्लानिंग में इन गलतियों से बचें

  • पूरा रिटायरमेंट फंड FD में न रखें, क्योंकि इससे महंगाई को मात देना मुश्किल हो सकता है।
  • जरूरत से ज्यादा निकासी न करें, वरना कॉर्पस तय समय से पहले खत्म हो सकता है।
  • हेल्थ इंश्योरेंस जरूर रखें, ताकि मेडिकल खर्च के लिए निवेश न तोड़ना पड़े।
  • महंगाई को नजरअंदाज न करें, क्योंकि भविष्य में खर्च आज से काफी ज्यादा हो सकते हैं।
  • हर 2-3 साल में प्लान की समीक्षा करें, ताकि जरूरत के हिसाब से निवेश और निकासी में बदलाव किया जा सके।
  • सारा पैसा एक ही निवेश विकल्प में न लगाएं, बल्कि अलग-अलग एसेट में संतुलित निवेश करें।

Retirement Planning: क्या हो रिटायरमेंट की बेस्ट प्लानिंग, कितना फंड रहेगा पर्याप्त? एक्सपर्ट ने समझा दिया पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।



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Wednesday, August 5, 2026

Mark Zuckerberg: भारत सरकार के सामने झुके मार्क जुकरबर्ग! Meta प्लेटफॉर्म पर डीपफेक कंटेंट और खामियों के लिए मांगी माफी

Mark Zuckerberg apologizes: दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी Meta के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार के साथ हालिया बातचीत के दौरान कंपनी के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM), डीपफेक कंटेंट और कामकाज में कमियों को लेकर खेद जताया है। यह जानकारी हमारे सहयोगी Moneycontrol को सूत्रों ने दी है।

सूत्रों के मुताबिक, जुकरबर्ग ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, डीपफेक कंटेंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गवर्नेंस में नाकामियों के लिए माफी मांगी है। रिपोर्ट के अनुसार, जुकरबर्ग ने इन घटनाओं पर अफसोस व्यक्त करते हुए स्वीकार किया कि हानिकारक और आपत्तिजनक कंटेंट से निपटने में Meta से कुछ कमियां रह गई थीं।

मेटा ने यह माना है कि कुछ खास तरह की सामग्री को बढ़ावा देने के लिए काफी धन दिया गया। अमेरिकी कंपनी ने इन गलतियों पर खेद जताया और माफी मांगी।सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार ने मेटा से कहा है कि वह 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) की परिभाषा में नहीं आती है, क्योंकि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही तय करता है कि कंटेंट किसे मिलेगा।

MeitY अधिकारियों से हुई अहम बैठक

5 अगस्त को Meta के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान और कंपनी के अन्य वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में भारत सरकार ने Meta के कंटेंट मॉडरेशन, यूजर सुरक्षा और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए।

सरकार ने 'सेफ हार्बर' पर उठाए सवाल

सूत्रों के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों ने Meta से कहा कि कंपनी केवल एक निष्क्रिय (Passive) इंटरमीडियरी की भूमिका नहीं निभाती। बल्कि यह तय करती है कि किस तरह का कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा और किन पोस्टों की सिफारिश (Recommendation) की जाएगी।

अधिकारियों का कहना था कि जब कोई प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम के जरिए कंटेंट के वितरण और प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) सुरक्षा का लाभ उसी रूप में मिलना चाहिए।

क्या है 'सेफ हार्बर' प्रावधान?

आईटी अधिनियम के तहत 'सेफ हार्बर' प्रावधान सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। बशर्ते वे कानून के अनुसार आवश्यक सावधानियां बरतें और अवैध सामग्री के खिलाफ निर्धारित नियमों का पालन करें।

हालांकि, यदि कोई प्लेटफॉर्म कंटेंट के चयन, प्रचार या वितरण में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो उसकी इस कानूनी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो सकते हैं। फिलहाल Meta या भारत सरकार की ओर से इस बैठक और कथित माफी को लेकर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए रिपोर्ट में सामने आई जानकारी सूत्रों के हवाले से बताई गई है।

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Tuesday, August 4, 2026

आपके पेट डॉग के लिए 67 मिनट की वॉक और 16 बार स्निफ जरूरी! सिर्फ 10 मिनट टहलाकर लाने वाले जान लें ये बात

आज के समय में बहुत से लोग अपने घर में कुत्ता पाल रहे हैं। कई लोग अपने पेट को सिर्फ पालतू जानवर नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। लेकिन कुत्ता पालना सिर्फ खाना देने और उसकी देखभाल करने तक ही सीमित नहीं है। कुत्ते को रोज बाहर घुमाना और खेलने का समय देना भी उसकी अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। वहीं अक्सर आपने देखा होगा टहलते समय आपका कुत्ता बार-बार रुककर आसपास की चीजों को सूंघता है, पानी में खेलने की कोशिश करता है या दूसरे कुत्तों के पास जाने लगता है। कई लोगों को यह बेवजह रुकना लग सकता है, लेकिन कुत्तों के लिए यही सैर का सबसे मजेदार हिस्सा होता है। वे सूंघकर अपने आसपास की नई-नई चीजों को पहचानते हैं और इसी तरह बाहर घूमने का आनंद लेते हैं।

अगर आप अपने कुत्ते को मात्र 10 मिनट में टहलाकर वापस ले जाते हैं तो ये खबर आपके लिए हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे में बताया गया है कि, कुत्तों के लिए 67 मिनट की सैर बेहतर मानी जाती है। आइए जानते हैं इसके बारे में

कुत्तों के लिए कितने मिनट का सैर बेहतर

हाल ही में सामने आए एक सर्वे में पता चला कि, कुत्तों के लिए अच्छी सैर सिर्फ चलना नहीं, बल्कि नई-नई चीजों को महसूस करना भी होती है। ब्रिटेन में 1,800 डॉग ओनर्स पर किए गए इस सर्वे के मुताबिक, एक कुत्ते के लिए करीब 67 मिनट की सैर सबसे बेहतर मानी गई। इस दौरान उसे अलग-अलग जगहों को सूंघने, खुली जगह में घूमने, पानी में खेलने और रास्ते में दूसरे कुत्तों से मिलने-जुलने का भी मौका मिलना चाहिए। ये जानकारी भारत के लिए काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि देश में खासकर बड़े शहरों में पालतू कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

कुत्ते को टहलाना मेंटल एक्सरसाइज

इंसान अपने आसपास की दुनिया को समझने के लिए सबसे ज्यादा आंखों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुत्ते अपनी नाक के जरिए चीजों को पहचानते और समझते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, कुत्तों की सूंघने की क्षमता इंसानों से कहीं अधिक तेज होती है। इसी वजह से वे सिर्फ गंध के आधार पर दूसरे जानवरों, लोगों और अपने आसपास के माहौल के बारे में कई तरह की जानकारी हासिल कर लेते हैं। उनके लिए पेड़, घास या रास्ते में मौजूद दूसरी चीजें सिर्फ सामान नहीं, बल्कि जानकारी का एक अहम स्रोत होती हैं। इसीलिए बिहेवियरिस्ट अक्सर वॉक को सिर्फ फिजिकल एक्टिविटी के बजाय “मेंटल एक्सरसाइज़” बताते हैं।

कुत्तों को टहलाना जरुरी

आजकल शहरों में रहने वाले कई पालतू कुत्ते सिर्फ थोड़ी देर के लिए ही बाहर घूम पाते हैं। ज्यादातर लोग उन्हें अपार्टमेंट या सोसाइटी के आसपास कुछ मिनट ही टहलाते हैं। ऐसे में कुत्तों को नई जगह देखने, चीजों को सूंघने और खुलकर घूमने का मौका नहीं मिल पाता। जानकारों का कहना है कि अगर कुत्तों को लंबे समय तक ऐसा मौका न मिले, तो वे बोर हो सकते हैं, ज्यादा भौंक सकते हैं, सामान चबा सकते हैं और बेचैन रहने लगते हैं। फिली पॉज क्लॉज़ के अनुसार, जिन कुत्तों को "लगातार एक्सरसाइज़ मिलती है, उन्हें ट्रेन करना आसान होता है और वे कमांड पर ज़्यादा रिस्पॉन्सिव होते हैं।"

आजकल ट्रेंड बन गया है कुत्ता पालना

पिछले कुछ सालों में लोगों का पालतू जानवरों को देखने का नजरिया काफी बदल गया है। अब ज्यादातर लोग उन्हें परिवार का हिस्सा मानते हैं और उनकी अच्छी देखभाल करते हैं। बढ़ती कमाई, छोटे परिवार और शहरों में रहने के कारण खासकर युवा बड़ी संख्या में कुत्ते पाल रहे हैं। लेकिन कुत्ता पालना सिर्फ उसे खाना खिलाने, नहलाने और टीका लगवाने तक ही सीमित नहीं है। उसे रोज बाहर घुमाना, नई जगहों को सूंघने और अपनी मर्जी से थोड़ा घूमने का मौका देना भी उसकी अच्छी सेहत और खुशी के लिए बहुत जरूरी है।



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Monday, August 3, 2026

Ather Energy Q1 Results: घाटे में बड़ी कमी, रेवेन्यू 88% उछला; 1 साल में 223% चढ़ा स्टॉक

Ather Energy Q1 Results: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी Ather Energy ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का शुद्ध घाटा घटकर ₹51 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹178.2 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 88.8% बढ़कर ₹1,217 करोड़ पहुंच गया।

कंपनी का EBITDA घाटा भी काफी कम होकर ₹33.4 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹134.3 करोड़ था। इसका मतलब है कि बिक्री बढ़ने के साथ कंपनी की ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी बेहतर हुई है।

EV बाजार में दिख रहा बड़ा मौका

Ather Energy का कहना है कि भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी के मुताबिक, दिल्ली EV पॉलिसी और केंद्र सरकार की PM E-Drive जैसी योजनाएं इस सेक्टर को मजबूती दे रही हैं।

इसके अलावा पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और ईंधन की उपलब्धता को लेकर चिंता भी है। इससे ग्राहक EV अपनाने की तरफ बढ़ रहे हैं। कंपनी का कहना है कि हालिया पेट्रोल कीमतों में बढ़ोतरी से पहले ही EV की मांग तेज होने लगी थी।

जल्द लॉन्च होगा नया स्कूटर

Ather अब अपने नए EL स्कूटर को लॉन्च करने की तैयारी में है। जून तिमाही में इसका होमोलोगेशन पूरा हो गया है और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन ट्रायल भी शुरू हो चुके हैं।

कंपनी के होसुर प्लांट में FY27 की दूसरी तिमाही से इसका कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होगा। अगस्त में होने वाले Ather Community Day के दौरान इस स्कूटर को लॉन्च किया जाएगा।

कंपनी आने वाले समय में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 60,000 गाड़ी प्रति माह करने की योजना पर काम कर रही है।

हाल ही में जुटाए ₹1,300 करोड़

Ather Energy ने इसी महीने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए ₹1,300 करोड़ जुटाए हैं। कंपनी ने 1.08 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,202 प्रति शेयर के भाव पर जारी किए।

टेक्नोलॉजी फीचर्स पर भी फोकस

एथर एनर्जी लगातार अपने सॉफ्टवेयर फीचर्स भी मजबूत कर रही है। हाल ही में उसने 'Pothole+ Alerts' फीचर लॉन्च किया है। यह फीचर 450 Apex, 450X और Rizta Z समेत Gen 2 और उसके बाद के स्कूटरों में उपलब्ध है।

यह फीचर Ather के कनेक्टेड स्कूटरों से मिले डेटा की मदद से रास्ते में गड्ढों, टूटी सड़कों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और स्पीड ब्रेकर की पहले से जानकारी देता है। इससे राइडिंग ज्यादा सुरक्षित और आसान हो सके।

Ather Energy के शेयरों का हाल

एथर एनर्जी का शेयर सोमवार को 1.56% की बढ़त के साथ 1,280 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में इसने 89.38% का रिटर्न दिया है। वहीं 1 साल में इसने 223.27% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 50.16 हजार करोड़ रुपये है।

आईपीओ टलते ही अनलिस्टेड मार्केट में मची खलबली! 5 दिनों में 23% टूटा जेप्टो का शेयर, ऑल-टाइम हाई से 60% गिरा भाव

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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Sunday, August 2, 2026

Tata Motors CV July Sales: एक्सपोर्ट डबल, घरेलू बिक्री में तेज उछाल, 3 अगस्त को शेयरों पर रहेगा फोकस

Tata Motors CV July Sales: टाटा ग्रुप की कमर्शियल वेईकल्स यूनिट टाटा मोटर्स सीवी के लिए पिछला महीना जुलाई धमाकेदार रहा। न सिर्फ घरेलू मार्केट में इसकी कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में तेज इजाफा हुआ बल्कि निर्यात तो दोगुना से अधिक बढ़ गया। कंपनी ने इसकी जानकारी 1 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में दी और अब इसका असर 3 अगस्त को स्टॉक मार्केट खुलने पर शेयरों पर दिख सकता है। अभी इसके शेयरों के सेहत की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 31 जुलाई को बीएसई पर यह 5.23% की बढ़त के साथ ₹436.95 (Tata Motors CV Share Price) पर बंद हुआ था।

Tata Motors CV के लिए कैसी रही जुलाई?

टाटा मोटर्स कमर्शियल वेईकल्स की पिछले महीने में घरेलू मार्केट में बिक्री सालाना आधार पर 28% बढ़कर 33,876 यूनिट्स पर पहुंच गई तो निर्यात इस दौरान 2,524 यूनिट्स से 128% बढ़कर 5,765 यूनिट्स पर पहुंच गया। ओवरऑल यानी देशी-विदेशी बिक्री को मिलाकर बात करें तो कंपनी की टोटल सेल्स जुलाई 2026 में सालाना आधार पर 37% बढ़कर 39,641 यूनिट्स हो गई।

घरेलू बिक्री में अलग-अलग वेईकल सेगमेंट्स में बात करें तो जुलाई में एचसीवी (हैवी कमर्शियल वेईकल) ट्रक्स की बिक्री 6735 यूनिट्स से 33% बढ़कर 8973 यूनिट्स, ILMCV (इंटरमीडिएट, लाइट एंड मीडियम कमर्शियल वेईकल) ट्रक्स की बिक्री 5,068 यूनिट्स से 20% बढ़कर 6,100 यूनिट्स, पैसेंजर कैरियर की बिक्री 4,749 यूनिट्स से 25% उछलकर 5,938 यूनिट्स पर पहुंच गई तो SCV (स्मॉल कमर्शियल वेईकल) कार्गो और पिकअप्स की बिक्री 30% बढ़कर 9,880 यूनिट्स से 12,865 यूनिट्स पर पहुंच गई। इस दौरान MH&ICV (मीडियम एंड हैवी इंटरमीडिएट कमर्शियल वेईकल्स) की घरेलू बिक्री 12,378 यूनिट्स से 25% बढ़कर 15,435 यूनिट्स और निर्यात को मिलाकर कुल बिक्री 13,669 यूनिट्स से 20% बढ़कर 16,364 यूनिट्स पर पहुंच गया।

अब तक कैसी रही टाटा मोटर्स सीवी के शेयरों की चाल

टाटा मोटर्स सीवी के शेयरों ने कम समय में ही निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। टाटा मोटर्स से अलग होकर यानी डिमर्जर के बाद इसके शेयर बीएसई और एनएसई पर 12 नवंबर को लिस्ट हुए थे। बीएसई पर यह ₹330.25 और बीएसई पर ₹335 पर लिस्ट हुआ था। लिस्टिंग के बाद 14 नवंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹306.00 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था। इस निचले स्तर से तीन ही महीने में यह 66.32% उछलकर 27 फरवरी 2026 को ₹508.95 के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया था।

Trump का बिजनेस आइडिया! हर महीने ₹9500000 के खर्च में Truth Social पर दिखेगी सबसे पहले पोस्ट, सांसदों ने की शिकायत

Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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Saturday, August 1, 2026

Rashmika Mandanna: शूटिंग के दौरान रश्मिका मंदाना के हिप टेंडन में चोट लगी, डॉक्टरों ने छह हफ्ते आराम करने की दी सलाह

Rashmika Mandanna: खबरों के मुताबिक, रश्मिका मंदाना अपनी आने वाली फिल्म के सेट पर एक डांस सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान बुरी तरह घायल हो गईं। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, एक मुश्किल डांस और एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान गिरने से उनके हिप का टेंडन पूरी तरह से अलग हो गया।

बताया जा रहा है कि यह घटना 'रणबाली' या 'मैसा' इनमें से किसी एक फिल्म के सेट पर हुई। पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। हादसे के तुरंत बाद शूटिंग रोक दी गई और क्रू मेंबर्स उन्हें इलाज के लिए पास के अस्पताल ले गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठीक होने में उन्हें कई हफ़्ते लगेंगे और उसके बाद ही वह काम पर लौट पाएंगी।

डॉक्टरों का कहना है कि एक्टर्स के मामले में ऐसी चोट कम ही देखने को मिलती है। उन्हें चोट की गंभीरता देखकर हैरानी हुई। उन्होंने बताया कि टेंडन को इस तरह का नुकसान अक्सर उन प्रोफेशनल एथलीट्स को होता है, जो बहुत ज़्यादा ट्रेनिंग करते हैं।

उनकी पूरी मेडिकल जांच हो चुकी है और उन्हें छह हफ़्ते तक पूरी तरह आराम करने की सलाह दी गई है। इसके बाद एक खास रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम से गुजरना होगा, ताकि शूटिंग फिर से शुरू करने से पहले टेंडन ठीक से ठीक हो जाए। उनके बिज़ी शूटिंग शेड्यूल और कमर्शियल असाइनमेंट को अब रोक दिया जाएगा क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। रश्मिका और उनकी टीम ने सेट पर लगी चोट के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

यह एक्ट्रेस कई एंडोर्समेंट कैंपेन में भी व्यस्त हैं। वह 'रणबाली' और 'मैसा' जैसी कुछ बड़े बजट की फ़िल्मों पर भी काम कर रही हैं। रश्मिका ने एक्टर विजय देवरकोंडा से शादी के बाद अपनी आने वाली फ़िल्म 'मैसा' की शूटिंग फिर से शुरू की। नए डायरेक्टर रविंद्र पुल्ले के निर्देशन में बनी और अनफ़ॉर्मूला फ़िल्म्स द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म को गोंड जनजाति की सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पृष्ठभूमि पर आधारित एक इमोशनल एक्शन थ्रिलर बताया जा रहा है। रश्मिका इस फ़िल्म में एक गोंड महिला की मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जिसे उनके पिछले किरदारों से बिल्कुल अलग और बोल्ड भूमिका के तौर पर पेश किया जा रहा है।

जहां तक 'रणबाली' की बात है, तो इस फ़िल्म के डायरेक्टर राहुल सांकृत्यायन हैं। ब्रिटिश राज के समय पर आधारित यह तेलुगु पीरियड ड्रामा भारतीय इतिहास के कम ज्ञात अध्यायों से प्रेरित एक काल्पनिक कहानी है। 11 सितंबर को रिलीज़ होने वाली इस फ़िल्म में विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह उनकी एक साथ तीसरी फ़िल्म होगी।



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Friday, July 31, 2026

पानी पर तैरेंगे सोलर पैनल! जानिए क्या है प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना और किसे मिलेगा फायदा

Pradhan Mantri Surya Sarovar Yojana - PM-SSY: देश में रीन्यूबल एनर्जी को बढ़ावा देने और जल निकायों का सही इस्तेमाल करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के साथ फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (FSPV) यानी पानी पर तैरने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स को डेवलप करना है। सरकार ने इस योजना के लिए कुल 5070 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की है।

क्या है योजना का लक्ष्य और क्षमता?

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के साथ 5000 मेगावाट (MW) क्षमता की फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को विकसित करने का लक्ष्य बनाया गया है। इन परियोजनाओं के साथ कम से कम दो घंटे की न्यूनतम भंडारण क्षमता वाली एनर्जी स्टोरेज सिस्टम होगी। यानी कुल 10,000 MWh की स्टोरेज क्षमता जोड़ी जाएगी। इन परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान मंजूरी दी जाएगी जबकि वित्तीय सहायता का भुगतान वित्तीय वर्ष 2032-33 तक जारी रहेगा। अभी भारत में फ्लोटिंग सोलर पीवी क्षमता केवल सिर्फ 700 मेगावाट है। इस योजना से इसमें 5000 मेगावाट की बड़ी वृद्धि होगी।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी द्वारा हाल ही में किए गए एक आकलन के मुताबिक देश में जलाशयों और दूसरे इनलैंड वॉटर बॉडीज में करीब 102,18 GWp फ्लोटिंग सोलर की क्षमता का अनुमान लगाया गया है।

कितना मिलेगा वित्तीय अनुदान?

योजना को सफल बनाने और इससे जुड़े जोखिम कम करने के लिए सरकार वित्तीय मदद भी देगी। एलिजिबल फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक चालू होने के बाद 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा परियोजना विकास के जोखिमों को कम करने के लिए जरूरी फिजिबिलिटी स्टडीज, बाथिमेट्री और हाइड्रोग्राफी एनालिसिस, पर्यावरणीय स्टडी और दूसरी तैयारियों के लिए प्रति प्रोजेक्ट 50 लाख रुपये तक अनुदान दिया जाएगा।

किसे और क्या-क्या मिलेगा फायदा?

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के फायदे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेंगे। ये परियोजनाएं मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का पूरा फायदा उठाने का मौका देंगी। इससे लैंड रिसोर्स के लिए होने वाली मारामारी खत्म होगी। ऊर्जा भंडारण प्रणाली के इंटिग्रेशन से पावर ग्रिड की विश्वसनीयता को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस योजना से सालाना लगभग 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी। परियोजना वैल्यू चेन में करीब 16000 से 17000 फुल टाइम जॉब के मौके क्रिएट होंगे। आपको बता दें कि यह योजना फ्लोटेशन सिस्टम के साथ-साथ सोलर पीवी सेल्स, मॉड्यूल्स और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम जैसे पूरे वैल्यू चेन के घरेलू निर्माण को भी बढ़ावा देगी।

यह भी पढ़ें: Taslima Nasreen: 'मैं बंगाल का हिस्सा बनकर आई हूं' 19 साल बाद कोलकाता लौटने पर बोलीं बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन



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Thursday, July 30, 2026

Swiggy Q1 results: जून तिमाही में लॉस घटकर 791 करोड़ पर आया, रेवेन्यू में 37 फीसदी उछाल

Swiggy Q1 results: स्विगी ने 30 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया। इस दौरान कंपनी का लॉस साल दर साल आधार पर करीब 34 फीसदी घटकर 791 करोड़ रुपये पर आ गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी को 1,197 करोड़ रुपये का लॉस हुआ था। मार्च तिमाही में कंपनी का लॉस 800 करोड़ रुपये था। स्विगी का फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म है।

जून तिमाही में रेवेन्यू 6812 करोड़ रुपये

जून तिमाही में स्विगी के लॉस में कमी में अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ का हाथ रहा। इस दौरान कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 37 फीसदी बढ़कर 6,812 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,961 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 6,383 करोड़ रुपये था।

घट रहा क्विक कॉमर्स बिजनेस का लॉस

स्विगी इंस्टामार्ट पर निवेश बढ़ा रही है। हालांकि, कंपनी के कुल खर्च बढ़ने की रफ्तार रेवेन्यू बढ़ने की रफ्तार से कम रही। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी के क्विक कॉमर्स बिजनेस के लॉस में कमी आ रही है। हालांकि, कंपनी का मुख्य फूड डिलीवरी बिजनेस मुनाफे में है। स्विगी की प्रतिद्वंद्वी कंपनी जोमैटो जून तिमाही में 92 करोड़ रुपये के मुनाफे में रही। इसका रेवेन्यू 17 फीसदी बढ़कर 20,211 करोड़ रुपये रहा।

जून तिमाही में कुल खर्च 7813 करोड़ रुपये 

जून तिमाही में स्विगी का कुल खर्च 7,813 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 6,244 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में यह 7,448 करोड़ रुपये था। कंपनी के एमडी एवं ग्रुप सीईओ हर्ष मजेटी ने कहा, "फूड डिलीवरी इकोनॉमिक्स में मजबूती दिख रही है। आउट ऑफ होम कंजम्प्शन प्रॉफिट में है। यह बिजनेस का तेजी से बढ़ता हिस्सा है। इससे प्रोग्रेस अच्छा है।"

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स्विगी के शेयरों में 30 जुलाई को तेजी

30 जुलाई को स्विगी के शेयरों में तेजी दिखी। यह 2.25 फीसदी चढ़कर 293.80 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक हफ्ते में यह शेयर करीब 19 फीसदी चढ़ा है। उधर, शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक भी चढ़कर बंद हुए। निफ्टी 66 अंक चढ़कर 24,317 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 273 की मजबूती के साथ 77,928 पर क्लोज हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।



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Wednesday, July 29, 2026

Bajaj Housing Q1 Results: बजाज ग्रुप की कंपनी को ₹715 करोड़ का मुनाफा, शेयरों पर रहेगी नजर

Bajaj Housing Q1 Results: बजाज ग्रुप की दिग्गज कंपनी बजाज हाउसिंग फाइनेंस ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। हाउसिंग फाइनेंस कंपनी का शुद्ध मुनाफा 22.6% बढ़कर 715 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 583 करोड़ रुपये था। बेहतर कारोबार और लोन पर कम प्रावधान का फायदा नतीजों में दिखा।

NII और रेवेन्यू दोनों बढ़े

जून तिमाही में बजाज हाउसिंग फाइनेंस की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9% बढ़कर 968 करोड़ रुपये रही। एक साल पहले यह 887 करोड़ रुपये थी।

वहीं, नेट टोटल इनकम 16% बढ़कर 1,175 करोड़ रुपये हो गई। पिछले साल यह 1,009 करोड़ रुपये थी। इस हाउसिंग फाइनेंस कंपनी का रेवेन्यू भी 17.2% बढ़कर 3,063 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले यह 2,613 करोड़ रुपये था।

AUM 24% बढ़ा

30 जून 2026 तक बजाज हाउसिंग फाइनेंस का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 24% बढ़कर 1,49,624 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 1,20,420 करोड़ रुपये था।

तिमाही के दौरान फर्म की ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बेहतर हुई। ऑपरेटिंग खर्च और नेट टोटल इनकम का अनुपात घटकर 19.6% रह गया। पिछले साल यह 21.2% था। वहीं, लोन लॉस और प्रावधान घटकर 16 करोड़ रुपये रह गए। एक साल पहले यह 38 करोड़ रुपये थे।

एसेट क्वालिटी मजबूत रही

बजाज हाउसिंग फाइनेंस की ग्रॉस एनपीए (GNPA) 30 जून 2026 तक 0.29% रही। पिछले साल यह 0.30% थी। वहीं, नेट एनपीए (NNPA) घटकर 0.12% रह गया। एक साल पहले यह 0.13% था। स्टेज-3 एसेट्स पर प्रोविजनिंग कवरेज रेशियो 59% रहा।

जून तिमाही के आखिर में हाउसिंग फाइनेंस कंपनी का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (Tier-II पूंजी सहित) 21.59% रहा। यह मजबूत बैलेंस शीट की ओर इशारा करता है।

बजाज हाउसिंग फाइनेंस क्या करती है?

बजाज हाउसिंग फाइनेंस, बजाज फाइनेंस की सब्सिडियरी है। यह हाउसिंग लोन देने वाली नॉन-डिपॉजिट टेकिंग हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है। इसे 2015 में नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) से रजिस्ट्रेशन मिला था।

इसने 2017 में कारोबार शुरू किया। बजाज हाउसिंग फाइनेंस के शेयर सितंबर 2024 से NSE और BSE पर लिस्टेड हैं। कंपनी का रेगुलेशन RBI, SEBI और IRDAI करते हैं, जबकि NHB इसकी निगरानी करता है।

बजाज हाउसिंग के शेयरों का हाल

जून तिमाही के नतीजों से पहले बजाज हाउसिंग फाइनेंस का शेयर 2.6% की बढ़त के साथ 87.89 रुपये पर बंद हुआ। हालंकि, पिछले 1 साल में स्टॉक 24.18% गिरा है। कंपनी का मार्केट कैप 72.94 हजार करोड़ रुपये है।

SML Mahindra Share Price: M&M का ट्रक-बस बिजनेस SML महिंद्रा के नाम होगा, शेयर में 20% का अपर सर्किट लगा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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Tuesday, July 28, 2026

दक्षिण कोरिया का बाजार 11% क्रैश, सिर्फ इन दो शेयरों ने निकाली कोस्पी की हवा

बीते एक महीने में कोरिया के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई है। बाजार के प्रमुख सूचकांक इस दौरान 28 फीसदी से ज्यादा गिरा है। 28 जुलाई को कोस्पी करीब 11 फीसदी फिसला। इसमें चिप बनाने वाली दो कंपनियों के शेयरों का बड़ा हाथ है। हालांकि, इस गिरावट के बावजूद दक्षिण कोरिया का बाजार दुनिया में बीते एक साल में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला बाजार है।

SK Hynix का शेयर एक महीने में 41 फीसदी क्रैश

दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार बीते एक साल में करीब 88 फीसदी चढ़ा है। बीते एक महीने से दक्षिण कोरिया के बाजार पर बिकवाली का दबाव है। सबसे ज्यादा गिरावट SK Hynix और Samsung Electronics के शेयरों में दिखी है। 28 जुलाई को SK Hynix का शेयर 14 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया। बीते एक महीने में यह शेयर 41 फीसदी गिरा है।

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का शेयर एक महीने में 32 फीसदी फिसला

Samsung Electronics का शेयर 28 जुलाई को 13.39 फीसदी क्रैश कर गया। बीते एक महीने में यह शेयर करीब 32 फीसदी गिरा है। इन दोनों शेयरों में आई गिरावट ने दक्षिण कोरिया के बाजार को आसमान से जमीन पर ला पटका है। इन दोनों शेयरों ने ही दक्षिण कोरिया के बाजार को बीते एक साल में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला शेयर बाजार बनाया था।

एसके हायनिक्स का शेयर एक साल में 491% चढ़ा

SK Hynix और Samsung Electronics चिप बनाती हैं। बीते एक-डेढ़ साल में दुनियाभर में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में ग्लोबल इनवेस्टर्स ने खूब दिलचस्पी दिखाई थी। इससे एस के हायनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। हालिया गिरावट के बावूजद इन दोनों कंपनियों के शेयरों का रिटर्न हैरान करता है। एसके हायनिक्स का शेयर बीते एक साल में 491 फीसदी चढ़ा है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का शेयर इस दौरान 212 फीसदी चढ़ा है।

चीन में CXMT की जोरदार लिस्टिंग ने बढ़ाया दबाव 

कोस्पी में इन दोनों कंपनियों का वेटेज करीब 60 फीसदी है। अब चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी घट रही है। इसका असर एसके हायनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों पर दिख रहा है। उधर, चीन से आने वाली खबरों ने इन दोनों शेयरों पर दबाव और बढ़ा दिया है। चीन की ChangXin Memory Technologies (CXMT) के शेयर की लिस्टिंग धमाकेदार रही।

यह भी पढ़ें: Bank of Baroda Share Price: नोमुरा ने जून तिमाही के नतीजों के बाद घटाया टारगेट प्राइस, शेयर गिरा

चीन की चिप बनाने की क्षमता बढ़ने से बढ़ा डर

CXMT का शेयर पहले ही दिन अपने इश्यू प्राइस से 466 फीसदी चढ़ गया। दूसरा, खबर है कि चीन की एक सरकारी कंपनी ने इमर्सन DUV लिथोग्राफी इक्विपमेंट का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया है। इससे माना जा रहा है कि चीन की चिप बनाने की क्षमता बहुत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर दक्षिण कोरिया में चिप बनाने वाली कंपनियों पर पड़ेगा। इस वजह से एसके हायनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रिॉनिक्स के शेयरों में बड़ी बिकवाली दिख रही है।



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Monday, July 27, 2026

2026 की ग्लोबल रैंकिंग में मारी बाजी! रहने के लिए स्वर्ग से कम नहीं ये 7 शहर

इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) ने 'ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026' (Global Liveability Index) जारी किया है, जिसमें दुनिया के सबसे रहने लायक शहरों की लिस्ट सामने आई है। दुनिया में कुछ शहर ऐसे हैं, जहां रहना सिर्फ आरामदायक ही नहीं, बल्कि बेहतर सुविधाओं और शानदार लाइफस्टाइल का एक्सपीरियंस भी देता है। हाल ही में जारी एक ग्लोबल रैंकिंग (global ranking) में ऐसे शहरों को चुना गया है, जो रहने के साथ-साथ घूमने के लिए भी लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं:

Geneva and Zurich, Switzerland (जिनेवा और ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड)

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जिनेवा लेक जिनेवा के किनारे बसा एक खूबसूरत शहर है, जो संयुक्त राष्ट्र (UN) और कई यूनाइटेड नेशन के मुख्यालय के लिए प्रसिद्ध है। साफ-सुथरा वातावरण, बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक सुविधाएं इसे रहने के लिए शानदार बनाती हैं। यहां घूमने के लिए जेट डी'ओ (Jet d'Eau) फाउंटेन, पुराना शहर (Old Town), म्यूजियम और झील के किनारे बने वॉकिंग ट्रैक काफी पॉपुलर हैं। यहां से फ्रांस और स्विट्जरलैंड के अन्य शहरों तक ट्रेन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

ज्यूरिख स्विट्जरलैंड का सबसे बड़ा शहर है, जो प्राकृतिक सुंदरता और मॉडर्न सुविधाओं का बेहतरीन ब्लेंड है। यह शहर ज्यूरिख झील और आल्प्स पर्वतों के खूबसूरत नजारों के लिए मशहूर है। साफ-सुथरी सड़कें, समय पर चलने वाला पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सुरक्षित माहौल इसे दुनिया के सबसे रहने योग्य शहरों में शामिल करते हैं। यहां ओल्ड टाउन, बानहोफस्ट्रासे (Bahnhofstrasse) और झील के किनारे घूमना खास एक्सपीरियंस माना जाता है।

Osaka, Japan (ओसाका, जापान)

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ओसाका जापान का एक मॉडर्न और वाइब्रेंट शहर है, जो अपने स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड, शानदार ट्रांसपोर्ट सिस्टम और ऊंचे स्टैण्डर्ड स्टैंडर्ड लेवल के लिए जाना जाता है। यहां का ओसाका कैसल, डोटोनबोरी, यूनिवर्सल स्टूडियोज जापान और कुरोमोन मार्केट पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। शहर का मजबूत रेल नेटवर्क क्योटो (Kyoto) और नारा जैसे पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन तक सफर को आसान बना देता है।

 

 

Sydney and Melbourne, Australia (सिडनी और मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया)

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सिडनी मॉडर्न शहर प्राकृतिक खूबसूरती का शानदार मिश्रण है। यह अपनी बेहतरीन लाइफस्टाइल, साफ-सुथरे समुद्र तटों और मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जाता है। यहां सिडनी ओपेरा हाउस, हार्बर ब्रिज, बॉन्डी बीच, डार्लिंग हार्बर और रॉयल बॉटैनिक गार्डन सबसे पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन (tourist destination) हैं। अच्छी पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था और खुले वातावरण की वजह से यह शहर रहने और घूमने, दोनों के लिए बेहतरीन माना जाता है।

मेलबर्न अपनी कला, संस्कृति, खेल और कैफे कल्चर के लिए दुनिया भर में पॉपुलर है। शहर में बड़े पार्क, शानदार ट्राम नेटवर्क और मॉडर्न सुविधाएं लोगों की जिंदगी को आसान बनाती हैं। यहां फेडरेशन स्क्वायर, रॉयल बॉटैनिक गार्डन, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) और क्वीन विक्टोरिया मार्केट मेन अट्रैक्शन हैं। इसके अलावा, यहां से ग्रेट ओशन रोड और यारा वैली जैसी खूबसूरत जगहों की ट्रिप भी की जा सकती है।

 

Vienna, Austria (वियना, ऑस्ट्रिया)

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ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना अपनी ऐतिहासिक इमारतों, संगीत और सांस्कृतिक विरासत के लिए फेमस है। बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षित माहौल और मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम इसे रहने के लिए बेहतरीन शहर बनाते हैं। यहां शॉनब्रुन पैलेस, सेंट स्टीफंस कैथेड्रल, बेल्वेडियर पैलेस और कई वर्ल्ड फेमस म्यूजियम (museum) देखने लायक हैं। क्लासिकल म्यूजिक और पारंपरिक कैफे भी इस शहर की खास पहचान हैं।

 

 

Copenhagen, Denmark (कोपेनहेगन, डेनमार्क)

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कोपेनहेगन ने EIU ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026 में पहला स्थान हासिल किया है। यह शहर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सुरक्षित माहौल और मॉडर्न बुनियादी ढांचे के लिए जाना जाता है। यहां साइकिल चलाना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है और शहर पर्यावरण संरक्षण पर भी खास ध्यान देता है। न्यहावन (Nyhavn), टिवोली गार्डन्स, द लिटिल मरमेड और खूबसूरत वाटरफ्रंट यहां के मेन अट्रैक्शन हैं।

 

Auckland, New Zealand (ऑकलैंड, न्यूजीलैंड)

Auckland Through My Experience: Best places to visit and more

ऑकलैंड भी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, सुरक्षित माहौल और बेहतरीन लाइफ क्वालिटी के लिए दुनिया के सबसे रहने योग्य शहरों में गिना जाता है। टूरिस्ट यहां स्काई टॉवर, वाइहेके आइलैंड (Waiheke Island), ऑकलैंड वॉर मेमोरियल म्यूजियम और खूबसूरत हार्बर का आनंद ले सकते हैं। बेहतरीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं और शांत वातावरण इसे रहने और घूमने, दोनों के लिए शानदार शहर बनाते हैं।



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Sunday, July 26, 2026

पिता असम सरकार में मंत्री...बेटी छात्र प्रदर्शन में हुई शामिल, अब CM हिमंता सरमा ने कही ये बात

नीट पेपर लीक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन में असम के मंत्री केशव महंत की बेटी के शामिल होने के वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान सामने आया है। मुख्‍यमंत्री ने कहा, ''हो सकता है वो (कैब‍िनेट मंत्री की बेटी) अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा को न मानती हों, इसके ल‍िए मेरे कैबिनेट सहयोगी को ट्रोल नहीं किया जाना चाहिएय़'' बता दें कि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दावा किया गया कि दिबिसा महंता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रही हैं और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। हालांकि, इन वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने  की ये अपील

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लोगों से अपील की कि मंत्री केशव महंता को उनकी बेटी के राजनीतिक विचारों के लिए निशाना न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी बालिग व्यक्ति की अपनी अलग सोच और राय हो सकती है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि केशव महंता की बेटी के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनके पिता पर हमला करना या उन्हें ट्रोल करना सही है। हो सकता है कि उनकी बेटी की राजनीतिक सोच अपने पिता से अलग हो।" अपना उदाहरण देते हुए हिमंत सरमा ने कहा, "कल जब मेरा बेटा वकील बनेगा, तो हो सकता है कि वह ऐसे किसी व्यक्ति का पक्ष रखे जिसे मैं पसंद नहीं करता। इसका मतलब यह नहीं कि उसके फैसलों के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जाए।"

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि किसी भी माता-पिता को उनके बालिग बेटे या बेटी के राजनीतिक विचारों और उनके फैसलों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह प्रदर्शन के दौरान दिबिसा महंता की ओर से लगाए गए कथित नारों से सहमत नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, "जब अगली बार मेरी उनसे मुलाकात होगी, तो मैं इस मुद्दे पर उनसे जरूर बात करूंगा और समझाने की कोशिश करूंगा कि उन्होंने जो बातें कही थीं, वे सही नहीं थीं।"

गुवाहाटी में भी हुआ था प्रदर्शन

गुवाहाटी में यह प्रदर्शन नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा में पारदर्शिता की मांग के साथ तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई थी।इस पूरे विवाद पर मंत्री केशव महंता की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उधर, कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों की कई प्रमुख मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 37 दिनों से चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा कर दी।



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Saturday, July 25, 2026

H1B Visa Fee: अमेरिका जाने वाले भारतीयों को बड़ी राहत! H-1B वीजा पर ट्रंप के ₹95 लाख की फीस पर कोर्ट ने दिया बड़ा झटका

US Court Blocks Trump H-1B Visa Fee: अमेरिका में रहने के लिए जारी होने वाले H-1B वीजा पर एक बड़ी राहत वाली खबर आई है। एक संघीय अपील अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने नए H-1B वीजा पर करीब 95 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस लगाने वाले आदेश पर रोक हटाने से साफ इनकार कर दिया है।

बोस्टन स्थित 'फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स' की तीन जजों की पीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें इस फीस को गैर-कानूनी करार दिया गया था। अदालत के इस फैसले से अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी टेक कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।

अदालत ने क्यों लगाई $100,000 की वीजा फीस पर रोक?

यूएस डिस्ट्रिक्ट जज लियो टी. सोरोकिन ने 8 जून 2026 के अपने आदेश में कहा था कि ट्रंप प्रशासन द्वारा इतनी बड़ी फीस वसूलना एक तरह का 'अवैध टैक्स' है, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति या कार्यपालिका को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं दिया है।

20 डेमोक्रेटिक शासित राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया कि राष्ट्रपति ने संसद से कानून पास कराने के बजाय सिर्फ एक राष्ट्रपति घोषणापत्र के जरिए इस फीस को लागू कर अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है।

अपील अदालत ने 1989 के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर सरकार नागरिकों या कंपनियों पर कोई बड़ा वित्तीय बोझ (टैक्स या फीस) डालती है, तो उसके लिए संसद की स्पष्ट मंजूरी अनिवार्य है। ट्रंप प्रशासन यह साबित करने में विफल रहा कि उनके पास इसकी कानूनी मंजूरी थी।

क्या था ट्रंप प्रशासन का तर्क और फैसला?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2025 में एक प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन के जरिए $100,000 की H-1B वीजा फीस लगाने का ऐलान किया था। प्रशासन का कहना था कि अमेरिकी कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए H-1B वीजा कार्यक्रम का गलत इस्तेमाल करती हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छिन जाती हैं। सरकार के मुताबिक, इस भारी फीस का मकसद कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने से हतोत्साहित करना था।

भारतीय IT प्रोफेशनल्स और टेक कंपनियों के लिए राहत क्यों?

H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को आईटी, इंजीनियरिंग और विज्ञान जैसे विशेष क्षेत्रों में विदेशी कुशल पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। अमेरिका हर साल कुल 85,000 H-1B वीजा करीब 65,000 रेगुलर कोटा और 20,000 अमेरिका से मास्टर डिग्री हासिल करने वालों के लिए जारी करता है। इस कोटे का बड़ा हिस्सा भारत और चीन के पेशेवरों को मिलता है।

इस नए नियम से पहले, अमेरिकी कंपनियों को एक H-1B कर्मचारी को स्पॉन्सर करने के लिए औसतन $2,000 से $5,000 (लगभग 1.6 लाख से 4.1 लाख रुपये) ही देने पड़ते थे। $100,000 की फीस लागू होने से कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं को बुलाना बेहद खर्चीला हो जाता।

आगे क्या होगा?

अपील अदालत का यह स्टे खारिज होने का मतलब है कि जब तक इस पूरे मामले की अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रंप प्रशासन $100,000 की इस बढ़ी हुई फीस को लागू नहीं कर सकता है। यानी फिलहाल पुरानी फीस प्रक्रिया के तहत ही H-1B वीजा आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।



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Friday, July 24, 2026

Apoorva Makhija: 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के विवादित एपिसोड के बाद सुसाइड करना चाहती थीं अपूर्वा मखीजा

Apoorva Makhija: कंटेंट क्रिएटर अपूर्वा मखीजा 'इंडियाज गॉट लेटेंट' विवाद के नतीजों को याद करते हुए भावुक हो गईं। इन्फ्लुएंसर ने बताया कि उस मुश्किल दौर में उन्हें सुसाइड के विचार आए थे और उन्होंने साथी कंटेंट क्रिएटर सूफी मोतीवाला का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उस समय उनका साथ दिया जब उन्हें सबसे ज़्यादा सहारे की जरूरत थी।

रियलिटी शो 'लॉक अप सीजन 2' में सूफी मोतीवाला के साथ खुलकर बातचीत के दौरान, अपूर्वा ने माना कि अगर सूफी उनके साथ नहीं होते, तो वह उस विवाद का सामना नहीं कर पातीं। लंबे समय बाद सूफी से मिलकर अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए अपूर्वा ने कहा, "मैंने तुम्हें सच में बहुत याद किया। ऐसा दोबारा मत करना। मुझे रोना आ रहा है। जब भी कोई मुझसे तुम्हारे बारे में पूछता है और कहता है, 'तुम उसकी दोस्त कैसे बनी थीं? वह तो बहुत मतलबी है,' तो मैं उनसे कहती हूं... अगर 'लेटेंट फियास्को' (विवाद) के समय सूफी मेरे साथ नहीं होते, तो मैं सुसाइड कर लेती।"

सूफी मोतीवाला ने अपूर्वा की बात सुनकर जवाब दिया, "ऐसा मत कहो। अपूर्वा ने फिर से कहा कि उस समय उनका साथ कितना जरूरी था। उन्होंने कहा, "मैं उस दौर से गुजर नहीं पाती। तुम ही अकेले इंसान थे जो मेरे साथ थे। मैं किसी को डेट नहीं कर रही थी। पर्सनल तौर पर, मेरी जिंदगी में, एक दोस्त के तौर पर।"

अपनी दोस्ती को याद करते हुए, सूफी मोतीवाला ने माना कि साथ बिताया गया वह समय उनकी ज़िंदगी के सबसे खुशनुमा दौर में से एक था। उन्होंने कहा, "सच कहूं तो भाई, वह एक साल मेरी ज़िंदगी का सबसे पसंदीदा साल था, जब हम दोस्त थे। मुझे आखिरकार लगा कि बॉम्बे में मेरा भी एक सोशल सर्कल है। मुझे लगा कि कोई है, जिसके पास मैं जब चाहूं जा सकता हूं। सच कहूं तो मुझे तुम्हारी बहुत याद आई।"

इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे से माफी मांगी और बातचीत खत्म हुई। अपूर्वा ने कहा कि मुझे भी सच में बहुत अफसोस है। मुझे पता है कि छोटी-छोटी बातें भी बहुत दुख पहुंचा सकती हैं। जब तुम्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब मैं तुम्हारे लिए वह सुरक्षित माहौल नहीं बना पाई, इसके लिए मुझे माफ करना।



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