Tuesday, March 3, 2026

Holi Special: बॉलीवुड की इन फिल्मों से बनीं होली की रंगीन यादें, मूवी के प्लॉट ने क्रिएट की जबरदस्त सीन

Holi Special: होली का त्योहार रंगों, उमंग और नई शुरुआत का प्रतीक है, और बॉलीवुड ने इसे अपनी कई यादगार फिल्मों में ऐसा इस्तेमाल किया कि ये सीन पूरी कहानी का टर्निंग पॉइंट बन गए। रंगों की भवें भरते ये दृश्य न केवल मनोरंजन देते हैं, बल्कि प्यार, दुश्मनी, रहस्य या संघर्ष को उजागर कर देते हैं। होली 2026 के उत्साह के बीच इन फिल्मों को याद करना मजेदार है, जहां त्योहार ने स्क्रिप्ट को हमेशा के लिए बदल दिया।

शोले:

रमेश सिप्पी की कल्ट क्लासिक 'शोले' (1975) में होली का गाना 'होली के दिन दिल खिल जाते हैं' फिल्म का पहला बड़ा एक्शन मोमेंट लाता है। अमिताभ बच्चन (जय) और धर्मेंद्र (वीरू) रंगों की होली खेलते गांववालों संग नाच-गान कर रहे होते हैं। तभी खूंखार डाकू गब्बर सिंह (अमजद खान) की धमाकेदार एंट्री होती है। जय रंगों की थाली फेंक गब्बर की आंखों में धूल झोंकता है, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो जाती है। यहीं ठाकुर के हाथ कटने की फ्लैशबैक स्टोरी भी खुलती है। यह सीन रामगढ़ की होली को खूनी रंग दे देता है और पूरी कहानी का क्लाइमैक्स तय कर देता है।

सिलसिला:

यश चोपड़ा की 'सिलसिला' (1981) में होली प्यार के त्रिकोण को उजागर करती है। अमिताभ बच्चन अपने भाई शशि कपूर की पत्नी रेखा से नशे में होली खेलते हैं, गाना 'रंग बरसे' गाते हुए। जया बच्चन और संजीव कुमार को यह नजदीकी नागवार गुजरती है। शादी के बाद भी बुझ न पाया प्यार यहां फूट पड़ता है, जो परिवार में दरार डाल देता है। यह इमोशनल सीन फिल्म को रोमांटिक ड्रामा से फैमिली कंफ्लिक्ट की ओर मोड़ देता है।

दामिनी:

राजकुमार संतोषी की 'दामिनी' (1993) में होली एक सामाजिक मुद्दे का ट्रिगर बनती है। सनी देओल की पत्नी दामिनी (मीनाक्षी शेषाद्री) होली के जश्न में अपने देवर को नौकरानी के साथ रेप करते देख लेती है। वह न्याय के लिए घर छोड़ देती है और कोर्ट में लड़ाई लड़ती है। यह सीन फिल्म को फैमिली ड्रामा से कोर्टरूम थ्रिलर में बदल देता है, जहां दामिनी का 'लहरों से डरकर नौका कभी पार नहीं होती' डायलॉग इतिहास बन जाता है।

मोहब्बतें:

अदित्य चोपड़ा की 'मोहब्बतें' (2000) में शाहरुख खान होली का बहाना बनाकर अमिताभ बच्चन के सख्त गुरुकुल नियम तोड़ते हैं। लड़के-लड़कियां कैंपस से बाहर पहली बार होली खेलते हैं। नारायण शंकर को यह विद्रोह बर्दाश्त नहीं होता, जो प्यार बनाम अनुशासन के संघर्ष को तेज कर देता है। यह सीन फिल्म के रोमांटिक म्यूजिकल टोन को ड्रामा से भर देता है।

गोलियों की रासलीला रामलीला:

संजय लीला भंसाली की 'रामलीला' (2013) में होली रासलीला के जरिए रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण के बीच प्यार फूटता है। गुंडों के बीच रंगों का खेल भेदभाव मिटा देता है और रोमांस शुरू होता है। यह सीन गुजराती संस्कृति से प्रेरित होकर फिल्म को गैंगस्टर लव स्टोरी का अनोखा रंग देता है।

ये सीन साबित करते हैं कि होली बॉलीवुड में सिर्फ गाना नहीं, बल्कि कहानी का दिल है। रंगों ने हमेशा इमोशंस को उभार दिया।

होली के सीन बॉलीवुड फिल्मों में सिर्फ रंगों की खूबसूरती नहीं दिखाते, बल्कि कई बार कहानी का टर्निंग पॉइंट बन जाते हैं। चाहे वह शोले का खौफनाक मोड़ हो या सिलसिलाका भावनात्मक खुलासा होली ने बार-बार साबित किया है कि यह त्योहार सिनेमा में सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि कहानी कहने का एक शक्तिशाली माध्यम भी है।



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Monday, March 2, 2026

Promoter Buying Stocks: इन तीन कंपनियों में प्रमोटर ने बढ़ाई हिस्सेदारी, क्या आप भी लगाएंगे दांव?

Promoter Buying Stocks: प्रमोटर हिस्सेदारी में बढ़ोतरी को आम तौर पर सकारात्मक संकेत माना जाता है। प्रमोटर कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, जोखिम और भविष्य की योजनाओं को सबसे बेहतर समझते हैं। जब वे बाजार से अपने ही शेयर खरीदते हैं, तो यह संकेत होता है कि उन्हें मौजूदा कीमत आकर्षक लग रही है और भविष्य पर भरोसा है। यहां तीन ऐसे शेयर हैं, जिनमें हाल की तिमाही में प्रमोटरों ने हिस्सेदारी बढ़ाई है।

Infosys

Infosys एक वैश्विक आईटी सर्विस और कंसल्टिंग कंपनी है, जो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, इंजीनियरिंग और आउटसोर्सिंग सेवाएं देती है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में प्रमोटर हिस्सेदारी 14.30% से बढ़कर 14.52% हो गई। यानी 0.22% की बढ़ोतरी। इसी दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी भी हल्की बढ़ी, जबकि म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी घटी।

हाल के हफ्तों में आईटी सेक्टर दबाव में रहा है। बाजार में चिंता है कि AI के कारण पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग और कीमतों पर असर पड़ सकता है। तीसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 45,479 करोड़ रुपये रहा, जो 8.8% की ग्रोथ दिखाता है। नेट प्रॉफिट 6,654 करोड़ रुपये रहा, जो 2.2% घटा। मुनाफे पर नए श्रम कोड लागू करने से जुड़ा 1,289 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च असर डाल गया।

कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान 2-3% से बढ़ाकर 3-3.5% कर दिया है। आगे की ग्रोथ काफी हद तक अमेरिका और यूरोप में टेक खर्च पर निर्भर करेगी। AI कंपनी के लिए अवसर भी है और जोखिम भी।

Vardhman Textiles

Vardhman Textiles यार्न और फैब्रिक सेगमेंट में मजबूत वैश्विक मौजूदगी वाली बड़ी टेक्सटाइल कंपनी है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में प्रमोटर हिस्सेदारी 64.21% से बढ़कर 64.44% हो गई। यानी 0.23% की बढ़ोतरी। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी में हल्की कमी आई।

इस तिमाही में रेवेन्यू 2.3% बढ़कर 2,533 करोड़ रुपये रहा। लेकिन नेट प्रॉफिट 16.5% घट गया। मार्जिन पर दबाव और 23.6 करोड़ रुपये के एकमुश्त श्रम कोड प्रावधान का असर दिखा।

कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 में बदलाव के दौर से गुजर रही है। यह पारंपरिक कॉटन यार्न से हटकर सिंथेटिक और टेक्निकल टेक्सटाइल पर ज्यादा फोकस कर रही है। साथ ही बड़ा पूंजीगत व्यय कार्यक्रम इसकी लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है।

Godrej Industries

यह गोदरेज ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। इसका कारोबार केमिकल, एग्री, रियल एस्टेट और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कई क्षेत्रों में फैला है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में प्रमोटर हिस्सेदारी 71.31% से बढ़कर 74.64% हो गई। यानी 3.33% की बड़ी बढ़ोतरी, जो तीनों कंपनियों में सबसे ज्यादा है। म्यूचुअल फंड ने भी हिस्सेदारी बढ़ाई, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी घटी।

इस तिमाही में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5,051 करोड़ रुपये रहा और नेट प्रॉफिट 241 करोड़ रुपये पहुंचा। कंपनी अब पारंपरिक होल्डिंग स्ट्रक्चर से आगे बढ़कर हाई ग्रोथ समूह बनने की दिशा में काम कर रही है। Godrej Capital को ग्रोथ इंजन के रूप में मजबूत किया जा रहा है। ग्रीन केमिस्ट्री और फाइनेंशियल सर्विसेज में विस्तार भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा है।

क्या सिर्फ प्रमोटर खरीद के आधार पर निवेश करें?

जब प्रमोटर अपनी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, तो यह मजबूत संकेत जरूर होता है। इसका मतलब है कि उन्हें लगता है मौजूदा बाजार कीमत कंपनी की असली वैल्यू से कम है।

लेकिन यह गारंटी नहीं है। प्रमोटर भी समय के मामले में गलत हो सकते हैं। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल, बैलेंस शीट और ग्रोथ संभावनाओं का एनालिसिस जरूरी है। प्रमोटर की खरीद को संकेत मानें, लेकिन अंतिम फैसला आंकड़ों के आधार पर लें।

Stock Market Crash: स्टॉक मार्केट क्रैश के बाद क्या करें निवेशक, एक्सपर्ट से जानिए आगे की रणनीति

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Sunday, March 1, 2026

US-Israel Attacks Iran: दो पूर्व विधायक और 84 छात्रों समेत 700 भारतीय यात्री UAE में फंसे, ईरान के हमलों से दुबई में दहशत

US-Israel Attacks Iran: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उड़ानें रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश के दो पूर्व विधायक समेत राज्य के 700 से ज्यादा यात्री संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में फंस गए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के पुणे स्थित एक संस्थान में MBA की पढ़ाई करने वाले 84 छात्र दुबई में फंसे हुए हैं। UAE ने इजरायल और अमेरिका के हमले के जवाब में दागे गए कई ईरानी मिसाइलों को रोका। इन हमलों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई। जबकि 7 लोग घायल हो गए हैं।

ट्रेवल एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की मध्य प्रदेश इकाई के चेयरमैन अमोल कटारिया ने पीटीआई को बताया, "फिलहाल प्रदेश के 700 से ज्यादा यात्री संयुक्त अरब अमीरात में फंसे हैं। ये लोग पर्यटन और कारोबार के लिए वहां गए थे।" उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के हालात के मद्देनजर प्रदेश के कई लोगों ने दुबई और शारजाह के अपने हवाई टिकट रद्द कराते हुए आगामी दिनों में यात्रा का कार्यक्रम निरस्त कर दिया है।

दुबई में फंसे यात्रियों में इंदौर-1 क्षेत्र के पूर्व विधायक और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता संजय शुक्ला शामिल हैं। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा, "वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण दुबई एयरपोर्ट अस्थायी रूप से बंद होने से हमारी आज (रविवार) भारत वापसी संभव नहीं हो सकी है। इस दौरान दुबई के प्रशासन और भारत सरकार द्वारा हमें पूरा सहयोग प्राप्त हो रहा है। परिस्थितियां सामान्य होते ही हम शीघ्र इंदौर लौटेंगे।"

शुक्ला के चिंतित परिजन ईश्वर से उनकी सुरक्षित घर वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। उनके बेटे सागर ने पीटीआई को बताया, "मेरे पिता तीन दिन पहले इंदौर जिले के देपालपुर क्षेत्र के पूर्व विधायक विशाल पटेल और अपने कुछ उद्योगपति दोस्तों के साथ दुबई गए थे। उन्हें आज (रविवार) इंदौर लौटना था। लेकिन उड़ान रद्द होने से वे दुबई में ही फंसे हैं।"

उन्होंने बताया, "मेरी कुछ देर पहले पिता से फोन पर बात हुई थी। मैंने खुद इस बातचीत के दौरान वहां (दुबई) में धमाके सुने। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर मेरे पिता और उनके दोस्त एक सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं।" पूर्व विधायक के बेटे ने उम्मीद जताई कि भारत सरकार के प्रयासों से उनके पिता और उनके दोस्तों की जल्द स्वदेश वापसी होगी।

इस बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा, "दुबई और शारजाह के हवाई अड्डों पर मध्य प्रदेश के 100 से अधिक नागरिक इजराइल-ईरान युद्ध की स्थिति के कारण फंसे हुए हैं। महिलाएं, बच्चे और परिजन कई घंटों से असुविधा में हैं। उनकी उड़ानें निरस्त होने के बाद चिंता बढ़ गई है।"

पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह तत्काल हस्तक्षेप करें और संयुक्त अरब अमीरात में फंसे सभी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उनकी शीघ्र स्वदेश वापसी की व्यवस्था कराएं। संयुक्त अरब अमीरात में एयरपोर्ट और कई अन्य स्थलों को निशाना बनाकर किए गए ईरान के हमलों ने शनिवार रात को लोगों को जगाए रखा।

84 MBA छात्र दुबई में फंसे

पुणे स्थित एक संस्थान में MBA की पढ़ाई करने वाले 84 छात्र पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर हवाई क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण दुबई में फंसे हुए हैं। इंदिरा स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज (ISBS) के अधिकारियों ने बताया कि संस्थान के छात्र वार्षिक पांच दिवसीय स्टडी टूर के तहत दुबई गए थे। उन्होंने बताया कि सभी स्टूडेंट सुरक्षित हैं। उन्हें एक होटल में ठहराया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि 40 छात्रों को शनिवार को पुणे लौटना था। बाकी 44 छात्र-छात्राओं को रविवार को उड़ान भरनी थी। हालांकि, पश्चिम एशिया में संघर्ष एवं उसके परिणामस्वरूप हवाई क्षेत्र को बंद किए जाने के कारण वे लौट नहीं सकें। शैक्षिक संस्थान के डीन जनार्दन पवार ने बताया, "सभी सुरक्षित हैं। उन्हें एक होटल में ले जाया गया है।"

ये भी पढ़ें- Karachi Protest: खामेनेई की मौत पर पाकिस्तान में भारी बवाल! कराची में अमेरिकी दूतावास पर भीड़ का हमला, फायरिंग में 9 लोगों की मौत

इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स की चेयरपर्सन तारिता शंकर ने बताया कि एमबीए के छात्र और स्टाफ सदस्य स्टडी टूर के तहत दुबई गए थे। लेकिन हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण वे वहीं फंस गए हैं। उन्होंने बताया, "सभी छात्र और स्टाफ सदस्य सुरक्षित हैं। हम उनके साथ लगातार संपर्क में हैं। हम विदेश मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय के साथ भी समन्वय कर रहे हैं। उन्हें जल्द से जल्द वापस लाया जाएगा।"



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Saturday, February 28, 2026

The Kerala Story 2 Review: रोंगटे खड़े कर देगी सच्ची घटना पर आधारित ये कहानी....

The Kerala Story 2 Review: ‘द केरल स्टोरी 2 गोज बियॉन्ड’ एक ऐसी फिल्म है, जो खोजबीन करने के बजाय तर्क पेश करती है। यह अपनी कहानी को ज़ोरदार और स्पष्ट रूप से अपनी बात कहती है। दर्शकों की राय बंटी हुई होगी, इस बात पर निर्भर करते हुए कि वे इसे चेतावनी मानते हैं या एकतरफा दावा।

कामाख्या नारायण सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' 28 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई और इसमें उल्का गुप्ता, ऐश्वर्या ओझा, अदिति भाटिया, सुमित गहलावत, अर्जन सिंह औजला और युक्तम खोसला ने अभिनय किया है।

‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ की कहानी रिश्तों में धोखे और जबरन धर्म परिवर्तन के इर्द-गिर्द बुनी गई है। यह खुद को वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म बताती है और अपने रुख को नरम करने का कोई प्रयास नहीं करती। शुरुआत से ही यह स्पष्ट है कि फिल्म एक सशक्त संदेश देना चाहती है।

इसका उद्देश्य हल्के-फुल्के ढंग से मनोरंजन करना नहीं है। इसके बजाय, यह अपने तीन लीड रोल के द्वारा झेले गए भय, विश्वासघात और भावनात्मक आघात पर केंद्रित है। फिल्म का लहजा शुरू से अंत तक गंभीर है और कहानी कहने का तरीका दर्शकों को सुकून देने के बजाय विचलित करने के लिए बनाया गया है। लेकिन फिर भी यह एक ऐसी फिल्म है जो शोरगुल भरी और बोझिल है, कमजोर लेखन और अपने तर्क के अनुरूप गढ़ी गई कहानी के कारण बोझिल हो जाती है।

यह फिल्म तीन युवतियों, सुरेखा (उल्का गुप्ता), दिव्या (अदिति भाटिया) और नेहा (ऐश्वर्या ओझा) की कहानी है, जिनके जीवन में तब बदलाव आता है जब वे ऐसे रिश्तों में बंध जाती हैं जो फिल्म के अनुसार धोखे और छिपे इरादों पर आधारित होते हैं। तीनों अलग-अलग पृष्ठभूमि और शहर से आती हैं। कोच्चि की सुरेखा को महत्वाकांक्षी और भरोसेमंद दिखाया गया है।

जोधपुर की दिव्या को भावनात्मक रूप से कमजोर दिखाया गया है। ग्वालियर की नेहा भाला फेंक में माहिर बनने की ख्वाहिश रखती है और उसके सपने अपने शहर से कहीं आगे तक फैले हुए हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, फिल्म दिखाती है कि कैसे उन्हें बहकाया जाता है, उनके परिवारों से अलग किया जाता है और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। हालात तेजी से बिगड़ते जाते हैं।

फिल्म की कमजोरी कहानी कहने के तरीके में है। यह लोगों के व्यवहार के कारणों को समझने के लिए शायद ही कभी रुकती है। फिल्म में पुरुषों को ज्यादातर एक ही रंग में दिखाया गया है, जिनमें गहराई का अभाव है। महिलाओं को अक्सर पहले पीड़ित और फिर एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है। इसी वजह से, कई सीन किसी बात को साबित करने के लिए रचे गए प्रतीत होते हैं, न कि वास्तविक लोगों के बारे में कुछ बताने के लिए।

कहानी कहने का तरीका मुखर और सीधा है। इसमें संदेह, जटिलता या विरोधाभास के लिए बहुत कम गुंजाइश है। जो दर्शक इसके संदेश से सहमत हैं, उन्हें यह मुखर लग सकता है। जो दर्शक असहमत हैं, उन्हें यह अतिरंजित और अनुचित लग सकता है।

‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को ज्यादा बांध नहीं पाती है। यह स्पष्ट रूप से एक विशेष नजरिए का समर्थन करती है और हर सीन को उसी के अनुरूप ढालती है। कुछ लोग इसे चेतावनी के रूप में देखेंगे, जबकि अन्य इसे एकतरफा और हानिकारक मानेंगे। सिनेमा के लिहाज से, यह एक ऐसी कहानी है जो बताने के बजाय मैसेज देने पर अधिक केंद्रित प्रतीत होती है। यह फिल्म दर्शकों को कितनी पसंद आती है, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप फिल्म से क्या अपेक्षा रखते हैं।



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Friday, February 27, 2026

Rising Bharat Summit: 'हम 5 साल नहीं, शताब्दियों के हिसाब से चलते हैं' RSS नेता सुनील आंबेकर संघ का आगे का प्लान

नई दिल्ली में आयोजित News18 Rising Bharat Summit 2026 में इस बार चर्चा का फोकस था- “स्ट्रेंथ विदइन”, यानी भारत की अंदरूनी ताकत। मंच पर देश की बदलती सोच, युवाओं की भूमिका और संगठनों के योगदान पर खुलकर बातचीत हुई। इसी दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने युवाओं और संघ के रिश्ते पर विस्तार से अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि आज का नौजवान सपने देखने वाला है, आगे बढ़ना चाहता है और कुछ बड़ा करना चाहता है। उनके मुताबिक संघ ऐसे युवाओं को एक तरह का “सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर” देता है, जहां वे जुड़कर काम कर सकें।

उन्होंने सवालों का जवाब देते हुए आंबेडकर ने कहा कि “भारत माता की जय” जैसे नारे किसी पर थोपे नहीं जाते। उनका कहना था कि यह भावना खुद युवाओं के भीतर से आती है। अगर ऐसा जबरदस्ती होता, तो संगठन इतना लंबा सफर तय नहीं कर पाता।

उन्होंने यह भी कहा कि आज देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग संघ से इसलिए जुड़ रहे हैं, क्योंकि वे अपने भविष्य को देश की तरक्की से जोड़कर देखते हैं। उनके मुताबिक, वंदे मातरम या भारत माता की जय जैसे नारे आज के युवाओं के लिए गर्व का विषय हैं, विवाद का नहीं।

इस समिट में कई बड़ी हस्तियों की मौजूदगी ने आयोजन को और खास बना दिया। पूरा कार्यक्रम इस बात पर केंद्रित रहा कि भारत किस तरह अपनी आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास के दम पर आगे बढ़ रहा है।

कुल मिलाकर, यह मंच देश के भविष्य की दिशा पर मंथन का बड़ा मौका बनकर सामने आया, जहां नए भारत की सोच और उसके विजन पर खुलकर चर्चा हुई।

Ashwini Vaishnaw: 'डीपफेक' के लिए सहमति जरूरी, कंटेंट क्रिएटर्स को मिले कमाई का उचित हिस्सा; IT मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान



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Market outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 2 मार्च को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Stock Market : 27 फरवरी को निफ्टी के 25,200 से नीचे रहने के साथ भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 961.42 अंक या 1.17 प्रतिशत गिरकर 81,287.19 पर और निफ्टी 317.90 अंक या 1.25 प्रतिशत गिरकर 25,178.65 पर बंद हुआ। आद लगभग 1615 शेयर बढ़े, 2392 शेयर गिरे और 173 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स 1 फीसदी नीचे बंद हुए।

डॉ रेड्डीज लैब्स, भारती एयरटेल, M&M, HDFC लाइफ, सन फार्मा निफ्टी पर सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में से थे,जबकि ट्रेंट, HCL टेक, इंफोसिस, अपोलो हॉस्पिटल्स को फ़ायदा हुआ। सेक्टर्स में, ऑटो, बैंक, FMCG, मेटल, रियल्टी, टेलीकॉम में 1-2% की गिरावट आई,जबकि IT, मीडिया, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स हरे निशान पर बंद हुए।

निफ्टी व्यू

थिनक्रेडब्लू सिक्योरिटीज (Thincredblu Securities) के संस्थापक गौरव उदानी का कहना है कि निफ्टी में बिकवाली देखने को मिली। ये 316 अंक गिरकर 25,180 पर बंद हुआ। इंडेक्स ने डिसेंडिंग ट्रायंगल पैटर्न से ब्रेकडाउन कन्फर्म किया और अहम सपोर्ट लेवल से नीचे सेटल हुआ। ये शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर में साफ बदलाव का इशारा है।

25,100 ज़ोन अब बहुत अहम हो गया है। इस लेवल से नीचे मूव करने से 24,800 मार्क की ओर गिरावट की रफ़्तार बढ़ सकती है। ऊपर की तरफ़, 25,350–25,400 रेंज जो पहले सपोर्ट का काम करती थी,अब रेजिस्टेंस का काम कर सकती है।

ब्रेकडाउन से पता चलता है कि सेलर्स ने फिर से कंट्रोल हासिल कर लिया है और रैली को ऊपरी लेवल पर सप्लाई का सामना करना पड़ सकता है। रियल्टी और ऑटो स्टॉक्स सबसे बड़े लूज़र्स में से रहे। ये बड़े लेवल पर दबाव का संकेत है।

अभी के सेटअप में, ट्रेडर्स को मौजूदा लॉन्ग पोजीशन पर सख्त स्टॉप-लॉस बनाए रखना चाहिए और जब तक इंडेक्स अपने टूटे हुए सपोर्ट लेवल को वापस नहीं ले लेता,तब तक सेल-ऑन-राइज़ अप्रोच अपनाना चाहिए । ऐसे करेक्टिव फेज में रिस्क मैनेजमेंट सबसे ज़रूरी हो जाता है।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौर का कहना है कि कमजोर ग्लोबल संकेतों और सभी सेक्टर्स में सावधानी के माहौल के बीच आज मार्केट नीचे ट्रेड करते दिखे। आगे इन्वेस्टर्स की नजर ग्लोबल बॉन्ड यील्ड,क्रूड ऑयल ट्रेंड्स और करेंसी मूवमेंट,खासकर डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर रहेगी। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल फ्लो,आने वाले मैक्रोइकोनॉमिक डेटा और सेक्टर स्पेसिफिक डेवलपमेंट्स शॉर्ट टर्म में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। ग्लोबल सेंट्रल बैंक पॉलिसी के रुख पर कोई भी क्लैरिटी (खासकर US फेडरल रिजर्व से) आगे के संकेत दे सकती है। मजबूत पॉजिटिव ट्रिगर्स की गैर-मौजूदगी में मार्केट रेंज बाउंड रह सकते हैं,जिसमें स्टॉक स्पेसिफिक मौके मिल सकते हैं।

बैंक निफ्टी व्यू

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 60,900-60,600 ज़ोन में है,जबकि रेजिस्टेंस 61,400-61,500 बैंड में बना हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि जब तक ये अहम सपोर्ट बने रहते हैं, कुल मिला कर बाजार का रुख अच्छा रहेगा।

ICICIDirect का कहना है कि बैंक निफ्टी बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले रिलेटिव मज़बूती दिखा रहा है और निफ्टी के मुकाबले अपने रिकॉर्ड हाई के ज़्यादा करीब है। हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि 61,800 के ऊपर की एक टिकाऊ क्लोजिंग हासिल करने में फेल होने का नतीजा ऊपरी लेवल के पास कंसोलिडेशन हो सकता है।

 

इंडिगो के शेयर में आज करीब 2.5% की गिरावट, DGCA के इस फैसले से लगा झटका

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।



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Tere Naam Re-Release: सीटियों और तालियों का साथ थिएटर में लौटे राधे भईया, फिल्म ‘तेरे नाम’ को मिला फैंस का प्यार

23 साल बाद सलमान खान का आइकॉनिक किरदार राधे एक बार फिर सिनेमागारों में लौट आया है। 27 फरवरी 2026 को री-रिलीज हुई 'तेरे नाम' ने फैंस में पुरानी यादें ताजा कर दीं। सीटी, तालियां और आंसुओं का मेला देखने को मिला, जब भूपिका चावला के साथ सलमान का ये ट्रेजिक लव स्टोरी थिएटर्स में छा गई।

2003 में रिलीज हुई सतीश कौशिक निर्देशित ये फिल्म उस समय बॉक्स ऑफिस पर एवरेज रही, लेकिन आज कल्ट स्टेटस हासिल कर चुकी है। राधे का रूहानी प्यार, हेयरस्टाइल, हिमेश रेशमिया के सुपरहिट गाने जैसे 'तेरे नाम' और 'चांदी की डोरी' ने इसे अमर बना दिया। PVR-INOX जैसे मल्टीप्लेक्स चेन्स ने वैलेंटाइन वीक के खास मौके पर री-रिलीज का ऐलान किया। फैंस ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'राधे भैया सुप्रीमेसी! दो दशक बाद प्यार का असली दर्द महसूस करो।'

री-रिलीज के पहले दिन ही थिएटर्स में सलमानिया का जलवा देखने लायक था। हैदराबाद, पुणे और मुंबई के सिनेमाघरों में 'चक दे फट्टे' और 'ओ ओ जाने जाना' पर भारीभरकम व्हिसलिंग हुई। एक फैन ने शेयर किया, 'स्क्रीन पर राधे को देख आंखों में आंसू आ गए। ये फिल्म जिंदगी का सबक है।' युवा दर्शक, जो टीवी पर ही फिल्म देख चुके थे, बड़े पर्दे का मजा लेने पहुंचे। फिल्म का बजट 12 करोड़ था, जो 24.5 करोड़ कमा चुकी। अब री-रिलीज से नई कमाई की उम्मीद है।

सलमान ने कभी 'तेरे नाम 2' का इशारा दिया था, लेकिन सतीश कौशिक के निधन के बाद प्रोजेक्ट रुका। इस री-रिलीज ने फैंस को सीक्वल की आस जगा दी। देवदास और युवा जैसी क्लासिक्स के बाद ये ट्रेंड जारी है। निर्देशक की याद में ये वापसी खास है।

फैन्स के लिए यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि उनके युवावस्था की यादों का हिस्सा है। कई लोगों ने कहा कि *तेरे नाम* को दोबारा देखना उनके लिए भावनात्मक सफर जैसा था। वहीं, युवा दर्शकों के लिए यह फिल्म पहली बार बड़े पर्दे पर देखने का मौका बनी।



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