Wednesday, June 10, 2026

Charu Pandey Success Story: उम्र 23 और 19 सरकारी नौकरी की परीक्षाएं पास करने की दिलचस्प सफलता है छत्तीसगढ़ की चारु के नाम दर्ज, अब 15 अगस्त को राष्ट्रपति मुर्मू से मिलेगा गोल्ड मेडल

Charu Pandey Success Story: छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक जगह है तिल्दा-नेवरा। यहीं की रहने वाले हैं चारु पांडे, जिनका आजकल अपनी एक अनोखी और दिलचस्प उपलब्धि के लिए सुर्खियों में बना हुआ है। सिर्फ इतना ही नहीं, इस साल 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर चारु के नाम एक और उपलब्धि जुड़ जाएगी। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद सम्मानित करेंगी और उन्हें गोल्ड मेडल पहनाएंगी। छोटी शहर की चारु ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर साबित किया है कि खुद पर भरोसा हो तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं है।

चारु महज 23 साल की हैं और इस उम्र में उन्होंने जो उपलब्धि हासिल की है, वो अच्छे-अच्छों के लिए मुश्किल है। चारु ने एसएससी, बैंकिंग, रेलवे और पुलिस भर्ती समेत 19 सरकारी भर्ती परीक्षाएं पास करने दिलचस्प रिकॉर्ड अपने नाम किया है। उनकी इसी शानदार उपलब्धि के लिए स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित करेंगी। चारु का इतनी कम उम्र में लगातार एक के बाद एक सरकारी परीक्षाएं पास करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं कहा जा सकता है। वर्तमान में चारु चेन्नई स्थित कैग (CAG) कार्यालय में असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी सफलता की चर्चा अब सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में हो रही है।

चारु ने स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की कई प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल की। उन्होंने एसएससी सीजीएल, एसएससी सीएचएसएल, एसएससी एमटीएस, एसएससी जीडी और एसएसएससी सीपीओ जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को पास किया। इन परीक्षाओं को देश की सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिना जाता है, लेकिन चारु ने अपनी लगातार मेहनत के दम पर इनमें शानदार प्रदर्शन किया।

बैंकिंग, पुलिस और रेलवे भर्ती परीक्षाओं में भी रहीं सफल

उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र की आईबीपीएस पीओ, एसबीआई पीओ और एसबीआई क्लर्क जैसी प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की। चारु की सफलता की सूची यहीं खत्म नहीं होती। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की एनटीपीसी और रेलवे ग्रुप-डी की महत्वपूर्ण परीक्षाओं में भी उन्होंने सफलता दर्ज की। उन्होंने दिल्ली पुलिस भर्ती और छत्तीसगढ़ सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन कर सफलता हासिल की। इसके अलावा उन्होंने छत्तीसगढ़ ट्रांसपोर्ट सब-इंस्पेक्टर परीक्षा और सीजी एनएचएम परीक्षा भी सफलतापूर्वक पास की।

इतनी सफलताओं से पहले मिलीं कई असफलताएं

चारु पांडे के सफर की शुरुआत सफलता से नहीं कई असफलताओं के साथ हुई थी। वह कई प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल रहीं। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हर असफलता के बाद उन्होंने अपनी कमियों को समझा और तैयारी को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। यही आदत आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी और उन्होंने एक के बाद एक परीक्षाओं में सफलता दर्ज की। उनका मानना है कि असफलता किसी भी यात्रा का अंत नहीं होती, बल्कि वह आपको बेहतर बनने का मौका देती है।

NEET UG 2026 re-exam: नीट री-एग्जाम में स्क्राइब के लिए 12 जून तक करें आवेदन, 9 जून से खुल गया है पोर्टल



from HindiMoneycontrol Top Headlines https://ift.tt/mXQZcGD
via

Tuesday, June 9, 2026

पहली बार हुआ ऐसा ट्रांसप्लांट, सूअर के अंगों ने इंसान में शुरू किया काम, जानिए पूरी खबर

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में चीन से आई एक नई उपलब्धि ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ब्रेन-डेड मरीज के शरीर में सूअर के लिवर और दोनों किडनी सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किए हैं। इस अनोखे प्रयोग को अब तक का पहला “मल्टी-ऑर्गन पिग-टू-ह्यूमन ट्रांसप्लांट” माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित परिस्थितियों में की गई, जिसमें जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर के अंगों का उपयोग किया गया। यह प्रयोग इसलिए भी खास है क्योंकि दुनिया भर में अंग दान की भारी कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह तकनीक आगे सफल होती है तो भविष्य में हजारों मरीजों की जान बचाई जा सकती है। हालांकि, अभी इसकी सुरक्षा, स्थायित्व और मानव शरीर पर लंबे समय के प्रभाव को लेकर और भी रिसर्च की जरूरत है।

ब्रेन-डेड मरीज पर किया गया अनोखा प्रयोग

रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रयोग 53 वर्षीय व्यक्ति पर किया गया, जिसे पहले ही ब्रेन-डेड घोषित किया जा चुका था। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने मरीज के लिवर और किडनी निकालकर उनकी जगह जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर के अंग लगाए। खास बात यह रही कि अंगों को उनके प्राकृतिक स्थान पर ही फिट किया गया, जिसे ऑर्थोटोपिक ट्रांसप्लांट कहा जाता है।

कुछ घंटों में ही काम करने लगे अंग

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रांसप्लांट के कुछ ही घंटों बाद सूअर के अंग शरीर में काम करने लगे। लिवर और किडनी लगभग पांच दिनों तक सक्रिय रहे, जिसके बाद यह रिसर्च परिवार की सहमति से समाप्त कर दी गई।

जेनेटिक बदलाव से बढ़ाई गई सफलता की संभावना

वैज्ञानिकों ने बताया कि सूअर के अंगों को मानव शरीर के अनुकूल बनाने के लिए उनमें जेनेटिक बदलाव किए गए थे। तीन ऐसे जीन हटाए गए जो शरीर में रेजेक्शन पैदा कर सकते थे, जबकि तीन मानव जीन जोड़े गए ताकि खून के थक्के और अस्वीकृति की संभावना कम हो सके।

अंगों की भारी कमी का संभावित समाधान

यह रिसर्च चीन की Guangxi Medical University की टीम ने किया, जिसका मकसद दुनिया में बढ़ती अंगों की कमी की समस्या का समाधान तलाशना है। अध्ययन को मेडिकल जर्नल Med में भी प्रकाशित किया गया है। आज भी हजारों मरीज हर साल अंगों की कमी के कारण अपनी जान गंवा देते हैं।

क्यों चुना गया सूअर?

वैज्ञानिकों के अनुसार सूअर को इस तरह के प्रयोगों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि उनके अंग आकार और कार्य में इंसानी अंगों से काफी मिलते-जुलते हैं। साथ ही उनमें कुछ अन्य जानवरों की तुलना में बीमारियों के फैलने का खतरा भी कम होता है।

एक साथ कई अंग ट्रांसप्लांट की बड़ी चुनौती

अब तक ज्यादातर रिसर्च एक ही अंग के ट्रांसप्लांट तक सीमित थी, लेकिन एक साथ कई अंगों का ट्रांसप्लांट करना कहीं ज्यादा जटिल माना जाता है। इसमें शरीर के रिएक्शन, इम्यून सिस्टम और अंगों के आपसी तालमेल जैसी कई चुनौतियां शामिल होती हैं।

भविष्य की ओर एक बड़ा कदम

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रयोग भविष्य में उन मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकता है, जिन्हें एक साथ कई अंगों की जरूरत होती है। हालांकि, अभी भी लंबे समय तक सुरक्षा, इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया और सफलता दर जैसी कई चुनौतियों पर काम करना बाकी है।

एक लाख रुपये से अधिक की सैलरी के बाद भी वीकेंड पर रैपिडो बाइक चलाता है ये MNC इंजीनियर! वजह भी जान लीजिए



from HindiMoneycontrol Top Headlines https://ift.tt/IQxCFJv
via

Monday, June 8, 2026

इंटरव्यू में हद पार! रिश्ते और परिवार से जुड़े सवालों पर भड़के लोग, वायरल हुआ पोस्ट

हाल ही में LinkedIn पर एक वायरल पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है, जिसमें एक जॉब इंटरव्यू के दौरान 24 साल की एक युवा उम्मीदवार के साथ हुए अनुभव ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। बताया गया कि इंटरव्यू की शुरुआत सामान्य सवालों से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे बातचीत का रुख निजी जिंदगी की ओर मुड़ गया। उम्मीदवार से उसके रिश्तों, शादी की योजना और पारिवारिक हालात जैसे सवाल पूछे गए, जिससे वह काफी असहज महसूस करने लगी। यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भर्ती प्रक्रिया और इंटरव्यू के तरीके को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

कई लोगों का कहना है कि इंटरव्यू केवल योग्यता और कौशल तक सीमित होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत जीवन तक पहुंचना चाहिए। इस घटना ने नौकरी चाहने वालों और कंपनियों के बीच संतुलन और पेशेवर सीमाओं पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

इंटरव्यू में प्रोफेशनल नहीं, पर्सनल सवालों की बौछार

यह मामला तब सामने आया जब लक्ष्मी लाया ने अपनी एक दोस्त का अनुभव साझा किया। उनके अनुसार, इंटरव्यू की शुरुआत तो सामान्य थी, लेकिन जल्द ही सवाल निजी जिंदगी की ओर मुड़ गए। उम्मीदवार से उसके रिश्तों, शादी की योजना और पारिवारिक स्थिति तक के बारे में पूछा गया, जिससे वह काफी परेशान हो गई।

पिता के निधन के बाद भी जारी रहे सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, जब उम्मीदवार ने बताया कि उसके पिता का निधन हो चुका है, तब भी इंटरव्यू में निजी सवाल पूछना बंद नहीं हुआ। उससे यह तक पूछा गया कि क्या वह अपनी मां के घर शिफ्ट होने की योजना बना रही है, क्योंकि वह जगह ऑफिस से दूर पड़ती है।

काम की शर्तें भी बनी चर्चा का विषय

इंटरव्यू के दौरान कंपनी की ओर से कुछ सख्त शर्तें भी बताई गईं, जैसे लंबे काम के घंटे, छह महीने की प्रोबेशन अवधि में छुट्टी न मिलना और सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही रविवार की छुट्टी देना।

बिना ऑफर लेटर के ही दबाव की बात

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अभी तक ऑफर लेटर भी जारी नहीं हुआ था, लेकिन उम्मीदवार से पहले ही व्यक्तिगत परिस्थितियों और त्याग के स्तर पर काफी चर्चा की गई।

 “क्या यह नॉर्मल है?” – उम्मीदवार का सवाल

इंटरव्यू के बाद युवती ने अपनी दोस्त से पूछा कि क्या हर जगह ऐसा ही होता है? यह सवाल इस बात को दिखाता है कि कई बार फ्रेशर्स को पता ही नहीं होता कि इंटरव्यू में क्या सही है और क्या गलत।

सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा

यह पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए। कुछ यूजर्स ने कहा कि शादी और रिश्तों से जुड़े सवाल इंटरव्यू का हिस्सा नहीं होने चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने इसे “रेड फ्लैग” बताते हुए ऐसी कंपनियों से दूर रहने की सलाह दी।

भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

कई यूजर्स ने यह भी कहा कि कुछ कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया ही गलत मानसिकता दिखाती है। उनका मानना है कि इंटरव्यू में उम्मीदवार की योग्यता से ज्यादा उसकी पर्सनल लाइफ पर ध्यान देना गलत है और इससे कंपनी की वर्क कल्चर का अंदाजा लग जाता है।

सीख क्या मिलती है इस घटना से?

यह घटना युवाओं के लिए एक बड़ा संकेत है कि इंटरव्यू सिर्फ नौकरी पाने का मौका नहीं, बल्कि कंपनी को समझने का भी अवसर होता है। अगर शुरुआत में ही असहज सवाल पूछे जाएं, तो आगे का माहौल भी वैसा ही हो सकता है।

 “रेड फ्लैग नहीं, वॉल है” – वायरल कमेंट

लक्ष्मी लाया ने अपनी पोस्ट में कहा कि कुछ संकेत सिर्फ रेड फ्लैग नहीं होते, बल्कि “वॉल” होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनकी यह बात सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रही।

अलास्का, नॉर्वे जैसे देशों में दिखने वाला दुर्लभ सौर तूफान Aurora भारत में कहां दिखेगा? नोट करें जगह का नाम



from HindiMoneycontrol Top Headlines https://ift.tt/UcYdSvq
via

Sunday, June 7, 2026

भारत से मिली हार को भुला नहीं पार रहे पाकिस्तान के क्रिकेटर, अब अंपायर को लेकर दिया विवादित बयान

भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट हमेशा ही चर्चा में रहता है। भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी मुकाबला टी20 वर्ल्ड कप में हुआ था, जहां भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी। वहीं हाल ही में पाकिस्तान के ऑलराउंडर खुशदिल शाह अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दिए एक इटरंव्यू में उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान मैचों में कई बार फैसले भारत के पक्ष में जाते हुए दिखाई देते हैं। खुशदिल शाह ने कहा कि अंपायरिंग से लेकर कुछ अन्य व्यवस्थाओं तक, कई मामलों में भारत को बेहतर स्थिति मिलती नजर आती है।

ARY पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान खुशदिल शाह ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबलों से जुड़े दबाव और इमोशनल माहौल पर खुलकर बात की। खुशदिल शाह ने कहा कि भारत-पाकिस्तान मैचों में खेल के अलावा भी कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जो अक्सर भारत के पक्ष में नजर आती हैं और मुकाबले पर असर डाल सकती हैं।

खुशदिल ने क्या कहा

खुशदिल शाह ने कहा, “मैचों में ज्यादातर चीजें उनके पक्ष में होती हैं। कई बार अंपायरिंग के फैसले भी उनके हक में जाते हैं, ड्रेसिंग रूम से जुड़े कुछ फैसले भी उनके पक्ष में नजर आते हैं और कभी-कभी मैच भी उनकी इच्छा के मुताबिक होते दिखाई देते हैं। इन सबके बावजूद जब पाकिस्तान जीतता है, तो वह जीत और भी ज्यादा खास और खुशी देने वाली होती है।”

भारत और पाकिस्तान का प्रदर्शन

हाल के वर्षों में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़े टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया है। भारत का पलड़ा पाकिस्तान पर हमेशा भारी रहा है। भारत ने 2026 टी20 विश्व कप, 2025 एशिया कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में लगातार पाकिस्तान को हराया। पाकिस्तान की टीम को भारत पर आखिरी जीत 2022 एशिया कप में मिली थी, वहीं वनडे में पाकिस्तान ने भारत को 2017 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में हराया था। वहीं इसके बाद पाकिस्तान को जीत नहीं मिली।



from HindiMoneycontrol Top Headlines https://ift.tt/JzNcWYi
via

Saturday, June 6, 2026

Tata की इलेक्ट्रिक कारें हुईं ₹2.75 लाख तक सस्ती, जानें कौन सी कार पर कितना मिल रहा छूट

Tata EV Discount 2026: Tata Motors ने जून 2026 के लिए अपने इलेक्ट्रिक कारों पर भारी छूट की घोषणा की है, जिसमें चुनिंदा वेरिएंट पर 3.35 लाख रुपये तक की छूट दी जा रही है। खरीदार अब ग्रीन बोनस, एक्सचेंज ऑफर, स्क्रैपेज बेनिफिट और लॉयल्टी बोनस का लाभ उठा सकते हैं, जो उनके चुने गए मॉडल पर निर्भर करता है। ये ऑफर्स टाटा के इलेक्ट्रिक वाहन पोर्टफोलियो के मौजूदा और पुराने दोनों वेरिएंट पर लागू हैं।

Tata Curvv EV

इस महीने Curvv EV पर सबसे अधिक छूट मिल रही है। चुनिंदा नॉन-एक्स वेरिएंट पर 3.35 लाख रुपये तक की छूट उपलब्ध है, जिसमें 3 लाख रुपये का ग्रीन बोनस, 30,000 रुपये का एक्सचेंज ऑफर या 35,000 रुपये का स्क्रैपेज बेनिफिट शामिल है। वहीं, क्रिएटिव वेरिएंट पर 2.85 लाख रुपये तक की छूट मिल रही है, जबकि Curvv EV एक्स वेरिएंट पर एक्सचेंज, स्क्रैपेज और लॉयल्टी बेनिफिट मिलाकर कुल 65,000 रुपये तक की छूट दी जा रही है।

Tata Harrier EV

Harrier EV के सभी वेरिएंट पर 2.75 लाख रुपये तक की छूट मिल रही है। इस ऑफर में 50,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस या 75,000 रुपये का स्क्रैपेज बेनिफिट, 1 लाख रुपये का लॉयल्टी बोनस और 1 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ शामिल है।

Tata Punch EV

Punch EV के मौजूदा वेरिएंट पर इस महीने 95,000 रुपये से लेकर 1.45 लाख रुपये तक की छूट मिल रही है। LR वेरिएंट पर 1.45 लाख रुपये तक की छूट, MR वेरिएंट पर 1.25 लाख रुपये तक की छूट, जबकि MR स्मार्ट वेरिएंट पर अधिकतम 95,000 रुपये की छूट दी जा रही है।

Tata Tiago EV

Outgoing Tiago EV पर 65,000 रुपये से लेकर 1.45 लाख रुपये तक की छूट उपलब्ध है। LR XT वेरिएंट पर सबसे अधिक 1.45 लाख रुपये की छूट के साथ 50,000 रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है। अन्य LR वेरिएंट पर 1.25 लाख रुपये तक की छूट मिल रही है, जबकि MR वेरिएंट पर 65,000 रुपये तक की छूट उपलब्ध है।

Tata Nexon EV

Nexon EV पर पूरी रेंज में 50,000 रुपये तक की छूट मिल रही है, जिसमें 15,000 रुपये का ग्रीन बोनस, 25,000 रुपये का एक्सचेंज ऑफर और 35,000 रुपये का स्क्रैपेज बेनिफिट शामिल है (एक्सचेंज और स्क्रैपेज को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता)।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी डीलरशिप स्तर के स्रोतों पर आधारित है। अंतिम ऑफर स्टॉक, लोकेशन और ग्राहक की पात्रता के अनुसार बदल सकता है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे सटीक जानकारी के लिए अपने नजदीकी डीलर से संपर्क करें।

यह भी पढ़ें: जून में Creta, Verna, i20 पर कितना डिस्काउंट दे रही है Hyundai, यहां चेक करिए लेटेस्ट डिटेल



from HindiMoneycontrol Top Headlines https://ift.tt/Q93gPLd
via

Friday, June 5, 2026

Chicken Vs Fish: चिकन या फिश..., कौन आपको देता है सबसे ज्यादा देता है प्रोटीन?

Chicken Vs Fish: प्रोटीन से भरपूर फूड आइटम की बात करें तो चिकन और मछली सबसे पॉपलर ऑप्शन में से हैं। ये दोनों ही आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, मांसपेशियों के विकास में सहायक होते हैं और एक स्वस्थ आहार का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, वसा की मात्रा, विटामिन, खनिज और स्वास्थ्य लाभों के मामले में ये अलग होते हैं। तो आपको प्रोटीन का कौन सा स्रोत चुनना चाहिए? चलिए बताते हैं।

प्रोटीन

चिकन और मछली दोनों ही प्रोटीन के सोर्स हैं। 100 ग्राम चिकन ब्रेस्ट में लगभग 31 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि 100 ग्राम मछली में किस्म के आधार पर लगभग 20-25 ग्राम प्रोटीन होता है। लेकिन चिकन में आमतौर पर प्रति सर्विंग थोड़ा ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है, इसलिए यह फिटनेस के शौकीनों और एथलीटों के बीच पहली पसंद है।

फैट

सबसे बड़ा अंतर इनमें मौजूद फैट के प्रकार में निहित है। चिकन के पतले हिस्से, जैसे कि ब्रेस्ट मीट, में फैट कम होता है, जबकि गहरे रंग के हिस्सों में फैट अधिक होता है। वहीं दूसरी ओर, सैल्मन, मैकेरल और सार्डिन जैसी वसायुक्त मछलियों में स्वस्थ ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं। ये ओमेगा-3 वसा हर्ट, दिमाग और आंखों के स्वास्थ्य के लिए सहायक होते हैं।

हर्ट हेल्थ

हृदय संबंधी लाभों के मामले में मछली अक्सर बेहतर मानी जाती है। वसायुक्त मछली का नियमित सेवन ओमेगा-3 की प्रचुर मात्रा के कारण ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने और हृदय के कार्य को सुचारू रखने में सहायक हो सकता है। चिकन, हालांकि स्वस्थ तरीके से तैयार किए जाने पर हृदय के लिए लाभकारी होता है, लेकिन इसमें प्राकृतिक रूप से उतनी मात्रा में लाभकारी वसा नहीं होती है।

विटामिन और खनिज

दोनों खाद्य पदार्थ महत्वपूर्ण पोषक तत्व प्रदान करते हैं। चिकन में बी विटामिन, विशेष रूप से नियासिन और विटामिन बी6, फास्फोरस और सेलेनियम पाए जाते हैं। वहीं मछली में विटामिन डी (विशेषकर वसायुक्त मछली), विटामिन बी12, आयोडीन, सेलेनियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं। मछली विटामिन डी के कुछ प्राकृतिक आहार स्रोतों में से एक है।

पाचन क्षमता

चिकन और मछली दोनों को आसानी से पचने वाले प्रोटीन माना जाता है। हालांकि, मछली अक्सर पेट के लिए हल्की होती है और जल्दी पच जाती है, इसलिए कुछ लोगों के लिए यह पसंदीदा विकल्प है।

मांसपेशियों का निर्माण

यदि आपका मुख्य लक्ष्य मांसपेशियों का निर्माण करना है, तो ये दोनों खाद्य पदार्थ सहायक हो सकते हैं। चिकन को अक्सर इसकी उच्च प्रोटीन मात्रा और अपेक्षाकृत कम कीमत के कारण चुना जाता है। मछली भी मांसपेशियों की रिकवरी में सहायक होती है और साथ ही अतिरिक्त पोषक तत्व प्रदान करती है जो समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

कैलोरी की मात्रा

कैलोरी की मात्रा प्रकार और पकाने की विधि पर निर्भर करती है। बिना त्वचा वाले चिकन ब्रेस्ट में आमतौर पर कैलोरी कम होती है। वसायुक्त मछली में कैलोरी अधिक होती है, लेकिन यह स्वस्थ वसा और अधिक पोषक तत्व प्रदान करती है।यह केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे चिकित्सा या पोषण संबंधी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। व्यक्तिगत आहार संबंधी आवश्यकताएं उम्र, स्वास्थ्य स्थितियों, एलर्जी और जीवनशैली कारकों के आधार पर भिन्न होती हैं।

Disclaimer- यह आर्टिकल आम जानकारी पर आधारित है। इसे चिकित्सा या पोषण संबंधी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। व्यक्तिगत आहार संबंधी आवश्यकताएं उम्र, स्वास्थ्य स्थितियों, एलर्जी और जीवनशैली कारकों के आधार पर भिन्न होती हैं।



from HindiMoneycontrol Top Headlines https://ift.tt/qBlWVDF
via

Thursday, June 4, 2026

RBI Monetary Policy: आरबीआई की 5 जून की मॉनेटरी पॉलिसी का बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

RBI Monetary Policy: आरबीआई 5 जून यानी शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेगा। केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक 3 जून को शुरू हुई। आरबीआई की यह मॉनेटरी पॉलिसी ऐसे वक्त आ रही है, जब हालात काफी मुश्किल हैं। क्रूड ऑयल की कीमतों में आग लगी हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है। महंगाई बढ़ने का खतरा है। अल नीनो की वजह से इस बार मानसून में बारिश कम होने का अनुमान है। सवाल है कि आरबीआई शुक्रवार को रेपो रेट बढ़ाएगा या इसे अपरिवर्तित बनाए रखेगा?

रायटर्स के पोल में शामिल ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि आरबीआई इस बार रेपो रेट में किसी तरह का परिवर्तन नहीं करेगा। लेकिन, ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप्स जैसे कुछ मार्केट इंडिकेटर्स रेपो रेट बढ़ने का संकेत दे रहे हैं।

ट्रेडर्स और एनालिस्ट्स का मानना है कि तीन तरह की स्थितियां बनती दिख रही हैं। उन्होंने हर स्थिति में मार्केट की प्रतिक्रिया का भी अंदाजा लगाया है।

1. इंटरेस्ट रेट अपरिवर्तित रहेगा, रुख आक्रामक होगा

आरबीआई रेपो रेट को अपरिवर्तित बनाए रख सकता है। लेकिन, वह आगे सख्त मॉनेटरी पॉलिसी का संकेत दे सकता है। वह अपना रुख "न्यूट्रल" से बदलकर 'विड्रॉल ऑफ एकॉमोडेशन' कर सकता है। रेपो रेट स्थिर रहने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन, ट्रेडर्स का मानना है कि आरबीआई स्थिति को संभालने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।

रेपो रेट अपरिवर्तित रहने पर शॉर्ट टर्म बॉन्ड्स में मजबूती आ सकती है। लेकिन, लंबी अवधि के बॉन्ड्स पर दबाव दिख सकता है। एएनजेड में फॉरेक्स स्ट्रेटेजिस्ट धीरज निम ने कहा कि आगे इनफ्लेशन बढ़ने की चिंता से लंबी अवधि के बॉन्ड पर दबाव दिख सकता है।

ट्रेडर्स का मानना है कि ऐसा होने पर 5 बेसिस प्वाइंट्स से ज्यादा का बदलाव नहीं दिखेगा। रेपो रेट नहीं बढ़ने पर शेयर बाजार में ज्यादा प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिलेगी। लेकिन, अगर केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन के अपने अनुमान को बढ़ाता है तो तो आगे मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होने की संभावना बढ़ेगी।

2. रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ेगा, रुख में बदलाव नहीं होगा

रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ने पर रुपये को सहारा मिल सकता है। इससे मार्केट में यह संकेत जाएगा कि केंद्रीय बैंक की दिलचस्पी रुपये को गिरने से बचाने में है। इस स्थिति में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.15 फीसदी के पार जा सकती है। शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है, क्योंकि रियल एस्टेट, फाइनेंशियल्स और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी शेयरों पर दबाव बढ़ जाएगा।

यह भी पढ़ें: Vodafone Idea का शेयर 15 रुपये के पार, होल्ड करें, बेचें या खरीदें?

3. रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ेगा, रुख में भी बदलाव

अगर रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाने के साथ ही आरबीआई अपने रुख में भी बदलाव करता है तो इससे रुपये को काफी सहारा मिलेगा। तीन एनालिस्ट्स ने बताया कि ऐसा होने पर डॉलर के मुकाबले रुपया 94.80 के लेवल पर आ सकता है। हालांकि, इसके लिए आरबीआई को रुपये को सहारा देने के लिए कुछ उपायों के भी ऐलान करने होंगे। बॉन्ड ट्रेडर्स का कहना है कि इससे 10 साल के बॉन्ड की यील्ड शॉर्ट टर्म में 7.15-7.20 फीसदी के बीच रह सकती है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।



from HindiMoneycontrol Top Headlines https://ift.tt/kF0MRny
via