Wednesday, August 12, 2026

Lenskart Q1 Results: आईवियर कंपनी का मुनाफा 270% बढ़ा, रेवेन्यू ₹2714 करोड़ पहुंचा

Lenskart Q1 Results: आईवियर कंपनी Lenskart Solutions ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 270% बढ़कर ₹222 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में मुनाफा ₹60 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 43.3% बढ़कर ₹2,714.2 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल यह ₹1,894.5 करोड़ था। EBITDA 75.1% बढ़कर ₹588.5 करोड़ रहा। EBITDA मार्जिन भी 17.7% से बढ़कर 21.7% हो गया।

मार्जिन में भी बड़ा सुधार

Lenskart का PAT मार्जिन 4% से बढ़कर 8.4% हो गया। वहीं, कंसोलिडेटेड प्रोडक्ट मार्जिन पहली बार 70% के पार पहुंचा। यह 70.3% रहा, जो पिछले साल 68.7% था।

भारत में प्रोडक्ट मार्जिन 63.4% से बढ़कर 64.2% हुआ। कंपनी ने बताया कि इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बढ़ती बिक्री से इसे मदद मिली।

भारत में स्टोर और बिक्री दोनों बढ़े

भारत में समान स्टोर बिक्री यानी SSSG 18.3% रही। वहीं, प्रति स्टोर बिक्री 24.3% बढ़ी। कंपनी ने पहली तिमाही में 132 नए स्टोर जोड़े। इनमें 116 स्टोर भारत में खुले।

इसके साथ कंपनी के कुल एक्टिव स्टोर की संख्या 3,459 हो गई। भारत में कंपनी ने 50 नए शहरों में भी एंट्री की। खास बात यह है कि 83 नए स्टोर Tier-2 और उससे आगे के शहरों में खोले गए। Lenskart Gold के एक्टिव मेंबर्स की संख्या 93.5 लाख पहुंच गई। Gold सब्सक्रिप्शन फीस से रेवेन्यू 57.4% बढ़कर ₹66 करोड़ हो गया।

आंखों की जांच भी बढ़ी

तिमाही में लेंसकार्ट ने करीब 70 लाख आई टेस्ट किए। इसमें सालाना आधार पर 39.8% की बढ़ोतरी हुई। भारत में आई टेस्ट 42.7% बढ़कर करीब 60 लाख रहे। इनमें लगभग आधे लोगों की पहली बार आंखों की जांच हुई।

कंपनी की कुल आईवियर बिक्री की मात्रा 25.7% बढ़ी। भारत में औसत बिक्री कीमत 6.4% बढ़कर ₹1,856 हो गई।

इंटरनेशनल कारोबार में 38% ग्रोथ

अंतरराष्ट्रीय कारोबार का रेवेन्यू 38% बढ़कर ₹1,203 करोड़ रहा। जापान, दक्षिण-पूर्व एशिया और मिडिल ईस्ट जैसे बाजारों से कंपनी को अच्छी ग्रोथ मिली।

अंतरराष्ट्रीय कारोबार में आईवियर वॉल्यूम 37.6% बढ़ा। ट्रांजैक्टिंग कस्टमर अकाउंट 27.8% बढ़े। वहीं, आई टेस्ट 20.5% बढ़े।

चीन की कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाएगी

Lenskart ने चीन की ज्वाइंट वेंचर कंपनी Framekart में अपनी हिस्सेदारी 51% से बढ़ाकर 70% करने को मंजूरी दी है। इस सौदे पर करीब ₹10.6 करोड़ खर्च होंगे।

Framekart Lenskart ग्रुप की आईवियर जरूरतों का 30% से ज्यादा उत्पादन करती है। हिस्सेदारी बढ़ने से Lenskart को मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। कंपनी ने दक्षिण कोरिया में OWNDAYS Korea शुरू करने और चीन में एक नई सब्सिडियरी बनाने को भी मंजूरी दी है।

Lenskart के शेयरों का हाल

12 अगस्त को Lenskart का शेयर 0.71% गिरकर ₹585 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 14.04% बढ़ा है। एक साल में इसने 45.13% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 1.02 लाख करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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Tuesday, August 11, 2026

RVNL Q1 Results: सरकारी रेल कंपनी का मुनाफा 18.5% बढ़ा, EBITDA में जोरदार उछाल

RVNL Q1 Results: सरकारी रेल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Rail Vikas Nigam Ltd (RVNL) का जून तिमाही प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 18.5% बढ़कर 159.36 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 134.53 करोड़ रुपये था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 10.5% बढ़कर 4,321 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 3,909 करोड़ रुपये था। EBITDA में काफी तेज बढ़त हुई। यह 56 करोड़ रुपये यानी करीब 231% बढ़कर 185.4 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 1.43% से बढ़कर 4.3% पहुंच गया।

तिमाही आधार पर प्रदर्शन कमजोर

हालांकि, मार्च तिमाही के मुकाबले RVNL का प्रदर्शन कमजोर रहा। जून तिमाही में मुनाफा 14.8% घटकर 159.36 करोड़ रुपये रहा। मार्च तिमाही में यह 187.07 करोड़ रुपये था।

ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी तिमाही आधार पर 35.5% घटकर 4,321 करोड़ रुपये रह गया। मार्च तिमाही में यह 6,695.91 करोड़ रुपये था। कुल आय भी 6,780.89 करोड़ रुपये से घटकर 4,462.29 करोड़ रुपये रही।

₹358.97 करोड़ का रेलवे प्रोजेक्ट

RVNL ने 20 जुलाई को बताया था कि वह ईस्ट सेंट्रल रेलवे के 358.97 करोड़ रुपये के EPC कॉन्ट्रैक्ट में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही है। यह प्रोजेक्ट बिहार में रेल लाइन को डबल करने से जुड़ा है।

इसके तहत सीतामढ़ी-रक्सौल रेल लाइन के 41.04 किलोमीटर हिस्से में डबलिंग का काम होगा। इसमें पुल, स्टेशन, प्लेटफॉर्म, लेवल क्रॉसिंग और दूसरे निर्माण कार्य शामिल हैं।

₹99,262 करोड़ की ऑर्डर बुक

RVNL की ऑर्डर बुक 1 अगस्त 2026 तक 99,262 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का टर्नओवर 20,012.26 करोड़ रुपये रहा। RVNL अब तक 158 से ज्यादा प्रोजेक्ट पूरे कर चुकी है।

RVNL शेयर का हाल

मंगलवार को RVNL का शेयर 0.63% गिरकर 229.23 रुपये पर बंद हुआ। इस साल अब तक शेयर 35.62% गिर चुका है। पिछले एक साल में भी इसमें 32.85% की गिरावट आई है। हालांकि, तीन साल में शेयर ने 82.39% रिटर्न दिया है।

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Monday, August 10, 2026

टाटा ग्रुप की TCS ने डेटा लीक की खबरों को खारिज किया, कहा- सिस्टम में सेंध के कोई सबूत नहीं

TCS Data Breach: देश की सबसे बड़ी आईटी सर्विसेज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) ने कर्मचारियों का डेटा लीक होने की खबरों पर सफाई दी है। कंपनी ने कहा कि उसे कुछ थ्रेट इंटेलिजेंस अलर्ट मिले थे, जिनमें कुछ कर्मचारियों की जानकारी लीक होने का दावा किया गया था। हालांकि, जांच में TCS के सिस्टम या ग्राहकों के सिस्टम में किसी तरह की सेंध के कोई भरोसेमंद सबूत नहीं मिले।

चार साल से ज्यादा पुराना डेटा बताया

TCS ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि जिस डेटा का दावा किया जा रहा है, वह चार साल से भी ज्यादा पुराना है। इसमें सिर्फ कर्मचारियों की सामान्य जानकारी शामिल है। कंपनी ने साफ कहा कि ग्राहकों का डेटा, उनके सिस्टम या TCS के ऑपरेशनल सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ा है।

हमलावर ने क्या दावा किया?

टाटा ग्रुप की इस आईटी कंपनी के मुताबिक, हमलावर ने दावा किया है कि उसने Password Spray और Multi-Factor Authentication (MFA) Fatigue तकनीक का इस्तेमाल किया।

TCS ने कहा कि इन दोनों तरह के साइबर हमलों से बचाव के इंतजाम कंपनी दो साल से भी ज्यादा समय पहले लागू कर चुकी है। मौजूदा समीक्षा में भी ये सुरक्षा उपाय प्रभावी पाए गए हैं।

निगरानी जारी रहेगी

TCS ने कहा कि वह अपने सिस्टम की लगातार निगरानी कर रही है। अगर भविष्य में कोई नई जानकारी सामने आती है, तो उसके आधार पर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। कंपनी ने कहा कि कंपनी अपने सिस्टम की सुरक्षा और ग्राहकों की जानकारी की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सोमवार को TCS का शेयर 0.80% गिरकर 2,434 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 17.52% उछला है।

Market Outlook: सपाट बंद हुआ बाजार, जानिए 11 अगस्त को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

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Sunday, August 9, 2026

'खामोशी द म्यूजिकल' के 30 साल हुए पूरे, इन 7 वजहों से संजय लीला भंसाली की फिल्म बनीं क्लासिक

रिलीज के तीन दशक बाद भी, खामोशी द म्यूजिकल को इंडियन सिनेमा की सबसे दिल को छूने वाली और इमोशनल फिल्मों में से एक के तौर पर याद किया जाता है। सिर्फ़ एक क्रिटिक्स द्वारा सराही गई ड्रामा से कहीं ज़्यादा, यह संजय लीला भंसाली का डायरेक्टोरियल डेब्यू था, जिसने दर्शकों को एक ऐसे फिल्ममेकर से मिलवाया, जिसका कहानी कहने का पैशन इंडियन सिनेमा को फिर से डिफाइन करेगा। आज भी, यह फिल्म अनगिनत कारणों से पसंदीदा बनी हुई है।

1. इसने दुनिया को संजय लीला भंसाली के सिनेमैटिक विज़न से इंट्रोड्यूस कराया

खामोशी: द म्यूजिकल भंसाली की ज़बरदस्त कहानी कहने की कला की पहली झलक थी। इमोशन, म्यूजिक और शानदार विजुअल्स को मिलाने की उनकी काबिलियत उनकी पहली ही फिल्म से साफ़ थी, जिसने एक ऐसे फिल्ममेकिंग स्टाइल की नींव रखी जो बाद में आइकॉनिक बन गया।

2. एक कहानी जो आज भी टाइमलेस लगती है

असल में, खामोशी परिवार, प्यार, त्याग और हिम्मत के बारे में एक दिल को छू लेने वाली कहानी है। एक सुनने वाली बेटी और उसके बहरे-गूंगे माता-पिता के बीच के रिश्ते को ईमानदारी और दया के साथ दिखाकर, भंसाली ने एक ऐसी फिल्म बनाई जिसके इमोशन पीढ़ियों तक गूंजते रहेंगे।

3. म्यूज़िक जो एक इमोशनल भाषा बन गया

संजय लीला भंसाली के लिए, म्यूज़िक हमेशा मनोरंजन से कहीं ज़्यादा रहा है, यह कहानी कहने का ज़रिया है। खामोशी ने इस सोच को खूबसूरती से दिखाया, हर गाने ने कहानी को बेहतर बनाया और किरदारों के इमोशन को बढ़ाया। तीन दशक बाद भी, इसका साउंडट्रैक यादगार है।

4. भंसाली के सिग्नेचर विज़ुअल स्टाइल का जन्म

दर्शकों के देवदास या बाजीराव मस्तानी की शान देखने से पहले ही, खामोशी ने भंसाली की हर छोटी-बड़ी बात पर नज़र रखने की कला दिखाई। हर फ्रेम, हर रंग और हर कंपोज़िशन में वह विज़ुअल खूबसूरती झलकती थी जो बाद में उनका ट्रेडमार्क बन गई।

5. परफॉर्मेंस जो हमेशा असर छोड़ती हैं

भंसाली की अपनी कास्ट से गहरी इमोशनल परफॉर्मेंस निकलवाने की काबिलियत शुरू से ही साफ़ थी। फिल्म के किरदार अपनी असलियत, कमज़ोरी और इमोशनल गहराई की वजह से यादगार बने रहते हैं, जिससे खामोशी परफॉर्मेंस पर आधारित कहानी कहने के लिए एक बेंचमार्क बन जाती है।

6. अपने समय से आगे की फिल्म

इनक्लूसिविटी के बारे में बातचीत आम होने से बहुत पहले, खामोशी ने दिव्यांग किरदारों को अपनी कहानी के केंद्र में गरिमा, हमदर्दी और संवेदनशीलता के साथ रखा। भंसाली ने इस विषय को परंपरा के बजाय दया के साथ लिया, जिससे यह फिल्म आज भी उतनी ही रेलिवेंट है जितनी तीन दशक पहले थी।

7. एक असाधारण विरासत की शुरुआत

आज पीछे मुड़कर देखें तो, खामोशी: द म्यूजिकल एक शानदार डेब्यू से कहीं ज़्यादा है, यह भारत के सबसे महान फिल्ममेकर्स में से एक के जन्म की निशानी है। इस फ़िल्म ने संजय लीला भंसाली के शानदार सफ़र का रास्ता बनाया, जिसमें उन्होंने हम दिल दे चुके सनम, देवदास, ब्लैक, गोलियों की रासलीला राम-लीला, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत, गंगूबाई काठियावाड़ी और हीरामंडी: द डायमंड बाज़ार जैसी फ़िल्में कीं। इन सालों में, भंसाली ने सात नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड, कई फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड, पद्म श्री, एक BAFTA अवॉर्ड नॉमिनेशन जीता है, और रिपब्लिक डे पर एक झांकी, भारत गाथा डिज़ाइन करने वाले पहले फ़िल्ममेकर बने, जो भारतीय सिनेमा के कर्तव्य पथ पर सफ़र का जश्न मनाती है, जिससे भारत के सबसे महान सिनेमाई दूरदर्शी लोगों में से एक के रूप में उनकी जगह और पक्की हो गई।

तीस साल बाद, खामोशी: द म्यूज़िकल सिर्फ़ एक पसंदीदा फ़िल्म नहीं है, बल्कि यह संजय लीला भंसाली की असाधारण विरासत की नींव है। जैसे-जैसे दर्शक उनकी अगली फ़िल्म, लव एंड वॉर का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, यह इंतज़ार ही उस भरोसे और तारीफ़ का सबूत है जो भंसाली ने तीन दशकों में बनाया है। अगर खामोशी ने एक जीनियस के जन्म को दिखाया, तो लव एंड वॉर एक ऐसे फिल्ममेकर के शानदार सफ़र में एक और मील का पत्थर साबित होगी, जो इंडियन सिनेमा का भविष्य बना रहा है।



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Saturday, August 8, 2026

कश्मीरी पंडितों को फिर आतंकी धमकी! LeT से जुड़े टेरर ग्रुप ने जारी की हिट लिस्ट, घाटी के बाहर भी हमले की चेतावनी

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी संगठन ने कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को धमकी दी है। सीएनएन-न्यूज18 के मनोज गुप्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने एक नया धमकी भरा नोट जारी किया है, जिसमें कुछ कर्मचारियों की निजी जानकारी साझा की गई है। साथ ही, कश्मीर घाटी और जम्मू में उन्हें निशाना बनाकर हमले करने की चेतावनी दी गई है। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी यूएलसी को भारतीय खुफिया एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा का एक छद्म संगठन मानती हैं। यूएलसी ने कश्मीरी पंडित अधिकारियों की एक कथित ‘हिट लिस्ट’ जारी की है। इसमें छह सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर शामिल हैं।

यह धमकी खास तौर पर उन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को दी गई है, जो सरकारी रोजगार योजनाओं के तहत काम कर रहे हैं। संगठन ने यह भी धमकी दी है कि अगर आतंकियों और उनके समर्थकों की संपत्तियों को जब्त या कुर्क किया गया, तो सुरक्षा बलों और प्रशासन के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

‘हिट लिस्ट’ में कश्मीरी पंडित कर्मचारी

धमकी भरे नोट में दावा किया गया है कि संगठन सरकारी विभागों पर नजर रख रहा है। इनमें खास तौर पर राजस्व विभाग शामिल है, जहां सरकारी पैकेज के तहत कई कश्मीरी पंडित कर्मचारी तैनात हैं। नोट में छह कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी दिए गए हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस तरह निजी जानकारी सार्वजनिक करने का मकसद कर्मचारियों में डर पैदा करना और उन्हें संभावित टारगेट के रूप में पहचानना हो सकता है। हालांकि, सीएनएन-न्यूज18 ने सुरक्षा कारणों से धमकी में शामिल कर्मचारियों के नाम और उनके संपर्क नंबर सार्वजनिक नहीं किए हैं।

घाटी से जम्मू जाने पर भी हमले की धमकी

संगठन ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे कश्मीर घाटी से जम्मू चले भी जाते हैं, तो वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगे। धमकी में कहा गया है कि उन्हें कश्मीर के बाहर भी निशाना बनाया जा सकता है। संगठन ने प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए दी जा रही प्रशासनिक सुविधाओं का भी विरोध किया है। इनमें घर से काम करने और दूर रहकर काम करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। संगठन ने ऐसी सुविधाएं जारी रखने पर भी धमकी दी है।

एलजी, डीजीपी और केंद्र को खुली चेतावनी

धमकी भरे नोट में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और दिल्ली में मौजूद अधिकारियों को भी चेतावनी दी गई है। संगठन ने दावा किया है कि भविष्य में होने वाले हमलों के दौरान वह लोगों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगा। नोट के एक अन्य हिस्से में स्थानीय पुलिस को लेकर भी धमकी दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय पुलिसकर्मी स्थानीय इलाकों में ही रहते और आते-जाते हैं। संगठन ने इसी आधार पर पुलिसकर्मियों पर कहीं भी और कभी भी हमले का खतरा बताया है।

लश्कर ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए करता है काम: खुफिया सूत्र

भारत के वरिष्ठ खुफिया सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन कई बार अलग-अलग नामों से बने ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए काम करते हैं। इनमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) और पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) जैसे नाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन संगठनों का इस्तेमाल खास तौर पर आम लोगों और धार्मिक समुदायों के खिलाफ होने वाले हमलों की जिम्मेदारी लेने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य इन हमलों को पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के बजाय किसी स्थानीय और धर्मनिरपेक्ष प्रतिरोध के रूप में पेश करना हो सकता है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि ऐसे प्रॉक्सी संगठनों के जरिए आतंकी संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली जांच और आतंकवाद के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों से बचने की कोशिश भी करते हैं। इनमें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध शामिल हैं।

कर्मचारियों का डेटा जारी करना सोची-समझी साजिश

खुफिया जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत भर्ती किए गए कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर और उनकी तैनाती की जगहों की जानकारी सार्वजनिक करना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस जानकारी का इस्तेमाल इन कर्मचारियों को डराने या उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पाया है कि ‘हाइब्रिड आतंकियों’ द्वारा की जाने वाली लक्षित हत्याओं में छोटे और आसानी से छिपाए जा सकने वाले हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनमें पिस्तौल और रिवॉल्वर जैसे हथियार शामिल हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, हाइब्रिड आतंकी ऐसे लोग होते हैं जो सामान्य नागरिकों की तरह अपनी नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी जीते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। ऐसे लोगों का इस्तेमाल खास लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाई गई

सरकारी कर्मचारियों को मिल रही धमकियों और आतंकवादियों की मदद करने वालों की संपत्ति जब्त किए जाने के बाद सामने आई धमकियों को देखते हुए सुरक्षा बलों ने प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ा दी है। उनके रहने की जगहों के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां कर्मचारियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सुरक्षित रास्ते तय कर रही हैं। इसके साथ ही, कर्मचारियों की निजी जानकारी ऑनलाइन साझा करने वाले आतंकी गुटों के खिलाफ खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान भी तेज किए गए हैं। इन अभियानों का मकसद ऐसे आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना है।



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Friday, August 7, 2026

Sugar Price : इस साल फेस्टिवल सीजन में चीनी बिगाड़ सकती है मूड, 15% तक बढ़े शुगर के दाम

Sugar Price : फेस्टिवल सीजन में चीनी का स्वाद फीका पड़ सकता है। पिछले एक महीने में कुछ राज्यों में चीनी के दाम 15% तक बढ़े हैं। इसका उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी मिलों ने शुगर क्रशिंग पहले शुरू करने का फैसला लिया है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले एक महीने के अंदर चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़ गए हैं। ऐसे में चीनी का उत्पादन बढ़ा कर इसके बढ़ते दाम को थामने के लिए चीनी मिलों ने इस साल शुगर क्रशिंग पहले शुरू करने का फैसला किया है।

इस साल फेस्टिवल सीजन में चीनी का स्वाद फीका हो सकता है। दरअसल,इस साल अनुमान के मुताबिक चीनी का उत्पादन नहीं हुआ है। इस साल चीनी का उत्पादन 293 लाख टन रहने का अनुमान था लेकिन ये 280 लाख टन ही रहा,जो अनुमान के मुकाबले करीब 5% कम है। पिछले साल का करीब 50 लाख टन स्टॉक उपलब्ध है लेकिन देश में कुल चीनी की खपत 280 लाख टन होती है। इस साल करीब 8 लाख टन चीनी निर्यात हुई है। पिछले महीने चीनी के होलसेल दाम में 400 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इसे देखते हुए कंपनियों ने इस साल चीनी का उत्पादन 10-15 दिन पहले शुरू करने का फैसला किया है।

अगर सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली में 1 महीने पहले चीनी का दाम 45 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 49 रुपए प्रति किलो हो गया है। वहीं,पश्चिम बंगाल में 1 महीने पहले इसका दाम 49 रुपए प्रति किलो था जो अब 55 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। चेन्नई में 1 महीने पहले चीनी का दाम 46 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 53 रुपए प्रति किलो हो गया है। मुंबई में 1 महीने पहले चीनी का दाम 46 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 52 रुपए प्रति किलो हो गया है। इसी तरह रांची में 1 महीने पहले चीनी का दाम 47 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 51 रुपए प्रति किलो हो गया है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़े हैं। कुछ राज्यों में तो चीनी के दाम में 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई है। साथ ही चीनी मिलों के स्टॉक की भी जांच की है। लेकिन एल नीनो और अगले साल चीनी का उत्पादन कम होने की आशंका से दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

चीनी कंपनियों मार्जिन में आएगा सुधार

चीनी की कीमतों में बढ़त से उपभोक्ता भले ही परेशान हों लेकिन इससे चीनी मिल कंपनियों को फायदा होगा। चीनी के दाम बढ़ने से बलरामपुर चीनी,द्वारिकेश शुगर,श्री रेणुका शुगर और डालमिया भारत शुगर जैसी कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी की उम्मीद है। ऊंचे दाम से उनके मार्जिन सुधर सकते हैं। साथ ही यह सरकार के महत्वाकांक्षी इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए भी झटका साबित हो सकता है। ऊंची कीमतों की वजह से मिलें इथेनॉल बनाने के बजाय चीनी बेचना ज्यादा फायदेमंद समझ सकती हैं, जिससे देश में इथेनॉल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

 

 

Market Outlook : निफ्टी-सेंसेक्स गिरावट के साथ हुए बंद, जानिए 10 अगस्त को कैसी रह सकती है इनकी चाल



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Thursday, August 6, 2026

Retirement Planning: हर महीने ₹50000 की पेंशन के लिए कितना रिटायरमेंट फंड चाहिए? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Retirement Planning: नौकरी के दौरान हर महीने सैलरी खाते में आ जाती है। इसलिए खर्च की ज्यादा चिंता नहीं होती। लेकिन रिटायरमेंट के बाद यही सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। सैलरी बंद हो जाती है, लेकिन खर्च नहीं रुकते। हर महीने राशन खरीदना है, बिजली का बिल भरना है, दवाइयां लेनी हैं और रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी करनी हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रिटायरमेंट तक कितना पैसा जोड़ना होगा, ताकि हर महीने 50,000 रुपये आराम से मिलते रहें और बीच में पैसा खत्म होने का डर भी न रहे।

₹50000 पेंशन के लिए कितना फंड ?

अगर आपको हर महीने 50,000 रुपये चाहिए, तो सालभर में आपकी जरूरत होगी 6 लाख रुपये। फाइनेंशियल प्लानिंग में एक लोकप्रिय नियम है 4% Withdrawal Rule। इस नियम के मुताबिक, रिटायरमेंट के पहले साल आप अपने कुल कॉर्पस का 4% निकालते हैं। बाद के वर्षों में निकासी की रकम महंगाई के हिसाब से बढ़ाई जा सकती है। माना जाता है कि अगर निवेश पर ठीक-ठाक रिटर्न मिलता रहे, तो आपका पैसा 25-30 साल या उससे ज्यादा समय तक चल सकता है।

इस नियम के मुताबिक, अगर आपका रिटायरमेंट कॉर्पस करीब 1.5 करोड़ रुपये है, तो आप लगभग 50,000 रुपये महीना निकाल सकते हैं। इसमें कोशिश यह रहती है कि हर साल इतना ही पैसा निकाला जाए, जिससे बाकी रकम निवेश में बनी रहे और उस पर मिलने वाला रिटर्न भविष्य के खर्च में मदद करता रहे।

30 हजार से 1 लाख की पेंशन के जरूरी फंड

हर महीने चाहिएसालाना जरूरत

4% नियम के हिसाब से जरूरी कॉर्पस

₹30,000₹3.60 लाख₹90 लाख
₹50,000₹6 लाख₹1.50 करोड़
₹75,000₹9 लाख₹2.25 करोड़
₹1,00,000₹12 लाख₹3 करोड़

अगर रिटायरमेंट में 20 साल या 10 साल बाकी हैं

मान लीजिए आपका लक्ष्य रिटायरमेंट तक 1.5 करोड़ रुपये का कॉर्पस बनाना है। अगर आपकी उम्र 40 साल है और रिटायरमेंट में अभी 20 साल बाकी हैं, तो हर महीने अपेक्षाकृत कम SIP से भी यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। लेकिन अगर आप 50 साल की उम्र में निवेश शुरू करते हैं और रिटायरमेंट में सिर्फ 10 साल बचे हैं, तो हर महीने कहीं ज्यादा निवेश करना पड़ेगा।

अनुमानित सालाना रिटर्न20 साल बाकी (मासिक SIP)

10 साल बाकी (मासिक SIP)

10%₹19,800₹72,000
12%₹15,000₹66,000
15%₹10,500₹57,000

यह तुलना साफ दिखाती है कि रिटायरमेंट प्लानिंग में समय सबसे बड़ी ताकत है। 20 साल पहले शुरुआत करने वाला निवेशक 15-20 हजार रुपये की SIP से लक्ष्य तक पहुंच सकता है। वहीं, सिर्फ 10 साल बचे होने पर उसी लक्ष्य के लिए 60-70 हजार रुपये महीना निवेश करना पड़ सकता है। इसलिए जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, उतना कम मासिक बोझ पड़ेगा और कंपाउंडिंग का फायदा भी ज्यादा मिलेगा।

Chart SIPS

महंगाई आपकी सबसे बड़ी चुनौती है

रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी गलती यह मान लेना है कि आज जितने पैसों में खर्च चल रहा है, उतने ही पैसों में भविष्य में भी काम चल जाएगा। जबकि सच यह है कि समय के साथ महंगाई हर चीज को महंगा कर देती है। दवाइयों से लेकर बिजली, राशन और यात्रा तक लगभग हर खर्च बढ़ता रहता है।

मान लीजिए आज आपका मासिक खर्च 50,000 रुपये है। अगर महंगाई औसतन 6% सालाना रहती है, तो 20 साल बाद यही खर्च करीब 1.60 लाख रुपये महीना हो सकता है। वहीं, 25 साल बाद इसके लिए करीब 2.15 लाख रुपये महीने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए रिटायरमेंट प्लान बनाते समय हमेशा भविष्य की महंगाई को ध्यान में रखें।

रिटायरमेंट प्लानिंग में इन गलतियों से बचें

  • पूरा रिटायरमेंट फंड FD में न रखें, क्योंकि इससे महंगाई को मात देना मुश्किल हो सकता है।
  • जरूरत से ज्यादा निकासी न करें, वरना कॉर्पस तय समय से पहले खत्म हो सकता है।
  • हेल्थ इंश्योरेंस जरूर रखें, ताकि मेडिकल खर्च के लिए निवेश न तोड़ना पड़े।
  • महंगाई को नजरअंदाज न करें, क्योंकि भविष्य में खर्च आज से काफी ज्यादा हो सकते हैं।
  • हर 2-3 साल में प्लान की समीक्षा करें, ताकि जरूरत के हिसाब से निवेश और निकासी में बदलाव किया जा सके।
  • सारा पैसा एक ही निवेश विकल्प में न लगाएं, बल्कि अलग-अलग एसेट में संतुलित निवेश करें।

Retirement Planning: क्या हो रिटायरमेंट की बेस्ट प्लानिंग, कितना फंड रहेगा पर्याप्त? एक्सपर्ट ने समझा दिया पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।



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