Thursday, May 14, 2026

Work From Home in Delhi: वर्क फ्रॉम होम पर दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान, अब हफ्ते में इतने दिन करना होगा घर से काम

Delhi Work From Home: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तेल संकट के बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज राजधानी के लिए कई सख्त फैसलों का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील के बाद, दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी क्षेत्र के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन उपायों का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देना है।

हफ्ते में 2 दिन 'वर्क फ्रॉम होम' अनिवार्य

मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि सभी दिल्ली सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम (WFH) अनिवार्य होगा। सीएम रेखा गुप्ता ने निजी कंपनियों से भी अपील की है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार हफ्ते के कोई भी दो दिन रिमोट वर्किंग के लिए चुनें। श्रम विभाग इस व्यवस्था के कार्यान्वयन पर कड़ी नजर रखेगा ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम की जा सके।

'मेट्रो मंडे' और ऑफिस के समय में बदलाव

ईंधन बचाने के लिए सरकार ने सोमवार को 'मेट्रो मंडे' के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसके तहत सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही ऑफिस के समय में भी बदलाव किया गया है:

दिल्ली सरकार के ऑफिस: सुबह 10:30 बजे से शाम 7:00 बजे तक।

MCD ऑफिस: सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक।

यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि पीक ऑवर्स में भीड़ और ट्रैफिक जाम से बचा जा सके।

मंत्रियों और अफसरों पर खर्च में कटौती

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद उदाहरण पेश करते हुए सरकारी खर्चों में भारी कटौती का एलान किया है। अगले एक साल तक दिल्ली का कोई भी मंत्री या अधिकारी आधिकारिक विदेशी दौरे पर नहीं जाएगा। कल से सभी अधिकारियों के पेट्रोल भत्ते में 20 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। अगले तीन महीनों के लिए सभी बड़े सरकारी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है। मंत्रियों ने अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम कर दी है और अब वे कारपूलिंग या इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देंगे।

PWD और जल बोर्ड के लिए 'नो कार डे'

पीडब्ल्यूडी, दिल्ली जल बोर्ड और सिंचाई विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता दें। साथ ही इन विभागों के लिए हफ्ते में एक दिन 'नो कार डे' मनाया जाएगा, जहां किसी भी आधिकारिक कार्य के लिए निजी या सरकारी कारों का उपयोग नहीं होगा।



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Wednesday, May 13, 2026

गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, अब रिसाइकल सोना खरीदने में ज्यादा फायदा; समझ लीजिए पूरा हिसाब

सरकार ने सोना, चांदी और दूसरे कीमती धातुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी है। इसका असर ज्वेलरी बाजार में दिखने लगा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे गोल्ड ज्वेलरी और गोल्ड कॉइन की बिक्री में तेज गिरावट आ सकती है। लेकिन, पुराने सोने को एक्सचेंज करने का ट्रेंड तेजी से बढ़ सकता है।

दिल्ली के पुराने ज्वेलरी बाजार दरीबा कलां में इसका असर भी दिखने लगा है। मार्केट एसोसिएशन के ट्रेजरर और Radhey Kishan Gopal Kishan Jewellers के मालिक गौरव गुप्ता ने कहा कि पिछले दो दिनों में ज्वेलरी और गोल्ड कॉइन की मांग करीब 25 फीसदी तक घट गई है। उनके मुताबिक इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिससे मांग पर और दबाव पड़ सकता है।

रिसाइक्लिंग गोल्ड पर कितनी बचत?

सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी है। यानी अब विदेश से आने वाला नया सोना पहले के मुकाबले काफी महंगा पड़ेगा। इसका सीधा असर ज्वेलरी की कीमतों पर भी दिख सकता है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि सिर्फ ड्यूटी बढ़ने की वजह से 10 ग्राम सोना करीब 13,000 से 14,000 रुपये तक महंगा हो सकता है।

अब मान लीजिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से 10 ग्राम सोने की बेस कीमत 1.40 लाख रुपये है। पहले 6 फीसदी ड्यूटी लगने पर इसमें करीब 8,400 रुपये जुड़ते थे। लेकिन अब 15 फीसदी ड्यूटी लगने पर करीब 21,000 रुपये जुड़ेंगे। यानी सिर्फ टैक्स बढ़ने की वजह से करीब 12,000 से 13,000 रुपये का अतिरिक्त असर पड़ सकता है। इसके ऊपर GST और मेकिंग चार्ज अलग से लगते हैं।

अब अगर कोई ग्राहक पुराना सोना एक्सचेंज करके नई ज्वेलरी लेता है, तो उसे पूरे नए आयातित गोल्ड का खर्च नहीं उठाना पड़ता। उदाहरण के तौर पर अगर आपके पास 50 ग्राम पुरानी ज्वेलरी है, तो ज्वेलर उसी गोल्ड को पिघलाकर नई डिजाइन बना सकता है। ऐसे में ग्राहक को सिर्फ मेकिंग चार्ज, थोड़ा बहुत वेस्टेज और अगर वजन बढ़ा है तो उतने अतिरिक्त गोल्ड का पैसा देना पड़ता है।

यही वजह है कि रिसाइकल या एक्सचेंज गोल्ड मॉडल में ग्राहक हजारों रुपये बचा सकता है। खासकर मौजूदा समय में, जब गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी 15 फीसदी हो चुकी है, तब पुराना सोना एक्सचेंज करना नए सोने की सीधी खरीदारी से काफी किफायती विकल्प बन सकता है।

पुराने सोने का एक्सचेंज बढ़ सकता है

Dhirsons Jewellers के डायरेक्टर राघव धीर ने कहा कि यह बड़ा नीतिगत बदलाव है, जिससे सप्लाई चेन की लागत बढ़ेगी। लेकिन इससे ग्राहकों को यह सोचने का मौका भी मिलेगा कि वे गोल्ड को किस तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब ग्राहकों के लिए घर में पड़ा पुराना सोना एक्सचेंज कर नई ज्वेलरी लेना ज्यादा समझदारी वाला विकल्प बन सकता है।

पुणे की PNG Sons के डायरेक्टर और CEO अमित मोडक का कहना है कि नई ड्यूटी ज्वेलर्स के पास मौजूद पुराने स्टॉक और ग्राहकों के पुराने सोने की वैल्यू भी बढ़ जाएगी। ऐसे माहौल में पुराने गोल्ड के एक्सचेंज और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा मिल सकता है।

सोना 13,500 रुपये तक महंगा हो सकता है

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया ने कहा कि नई ड्यूटी के बाद सोना करीब 9 फीसदी महंगा हो सकता है।

उन्होंने अनुमान जताया कि इससे प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत में करीब 13,500 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके चलते अप्रैल-जून तिमाही में गोल्ड इंपोर्ट और ज्वेलरी डिमांड दोनों में तेज गिरावट आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अब ज्यादा ग्राहक पुराने सोने को बेचकर या एक्सचेंज करके नई ज्वेलरी खरीदने की तरफ बढ़ सकते हैं।

Recycled Gold: गोल्ड नहीं खरीदने की अपील के बीच रिसाइकल गोल्ड पर क्या लगा सकते हैं दांव? इसका कॉन्सेप्ट और कीमत भी जान लीजिए

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Tuesday, May 12, 2026

साउथ दिल्ली में 2500 स्क्वॉयर फीट के फ्लैट की कीमत आपके होश उड़ा देगी, 3 महीने में ही प्रॉपर्टी कीमत में 32% तक इजाफा

South Delhi property prices: दक्षिण दिल्ली का लग्जरी हाउसिंग मार्केट 2026 की पहली तिमाही में भी मजबूत बना रहा। अमीर खरीदारों की लगातार मांग के चलते यहां लग्जरी बिल्डर फ्लोर की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।

रियल एस्टेट फोकस्ड अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड यानी AIF ‘Golden Growth Fund’ के डेटा के मुताबिक जनवरी से मार्च 2026 के दौरान दक्षिण दिल्ली के लग्जरी बिल्डर फ्लोर की कीमतों में 32 फीसदी तक उछाल आया।

कैटेगरी B कॉलोनियों ने मारी बाजी

दिलचस्प बात यह रही कि कीमतों में बढ़ोतरी के मामले में Category B कॉलोनियों ने Category A कॉलोनियों को पीछे छोड़ दिया। डेटा के मुताबिक Category B कॉलोनियों में कीमतें 23 फीसदी से 32 फीसदी तक बढ़ीं। वहीं Category A कॉलोनियों में यह बढ़त 14 फीसदी से 22 फीसदी के बीच रही।

हालांकि कीमतों की बात करें तो Category A कॉलोनियां अब भी ज्यादा महंगी बनी हुई हैं। यहां लग्जरी फ्लोर की कीमतें 14 करोड़ रुपये से लेकर 55 करोड़ रुपये तक पहुंच रही हैं। वहीं Category B कॉलोनियों में प्रॉपर्टी की कीमत 9 करोड़ रुपये से 19 करोड़ रुपये के बीच है।

आखिर क्यों बढ़ रही हैं कीमतें

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि दक्षिण दिल्ली में HNI यानी हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। वहीं प्रीमियम इंडिपेंडेंट फ्लोर की सप्लाई सीमित है।

इसके अलावा दक्षिण दिल्ली का मजबूत सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर लोकेशन और स्थापित लग्जरी मार्केट भी कीमतों को सपोर्ट कर रहा है। यही वजह है कि देश के दूसरे कई प्रॉपर्टी बाजारों में सुस्ती के बावजूद यहां तेजी बनी हुई है।

दूसरे इलाकों से भी आ रहे खरीदार

Golden Growth Fund के CEO अंकुर जालान का कहना है कि दक्षिण दिल्ली एक जैसा बाजार नहीं है। अलग अलग कॉलोनियों और माइक्रो मार्केट्स में कीमतों में काफी अंतर देखने को मिलता है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के दूसरे हिस्सों से भी अब खरीदार दक्षिण दिल्ली की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। मजबूत मांग और सीमित सप्लाई के चलते आने वाले समय में भी कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है। जालान के मुताबिक अगर NCR के बाकी हिस्सों में सुस्ती बढ़ती है, तो दक्षिण दिल्ली के प्रीमियम प्रॉपर्टी मार्केट को इसका और फायदा मिल सकता है।

कौन सी कॉलोनियां हैं सबसे महंगी

दिल्ली नगर निगम यानी MCD ने राजधानी की कॉलोनियों को A से लेकर H तक कुल 8 कैटेगरी में बांटा हुआ है। प्रॉपर्टी टैक्स, सर्किल रेट और स्टांप ड्यूटी इन्हीं कैटेगरी के आधार पर तय होती है।

Category A कॉलोनियों में गोल्फ लिंक्स, पंचशील पार्क, वसंत विहार, चाणक्यपुरी, जोर बाग, सुंदर नगर और महारानी बाग जैसी पॉश लोकेशन शामिल हैं।

वहीं Category B कॉलोनियों में ग्रेटर कैलाश, डिफेंस कॉलोनी, ग्रीन पार्क, गुलमोहर पार्क, सफदरजंग एंक्लेव और कैलाश कॉलोनी जैसी लोकेशन आती हैं।

कितनी पहुंच गई हैं कीमतें

डेटा के मुताबिक Category A कॉलोनियों में 2500 वर्गफुट के फ्लोर की कीमत 14 करोड़ रुपये से 25 करोड़ रुपये के बीच पहुंच चुकी है। इनमें औसतन 22 फीसदी सालाना बढ़त दर्ज की गई। वहीं 6000 वर्गफुट के फ्लोर की कीमत 25 करोड़ रुपये से 55 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जिसमें 14 फीसदी की बढ़त हुई।

Category B कॉलोनियों में 2500 वर्गफुट के फ्लोर की कीमत 9 करोड़ रुपये से 12.5 करोड़ रुपये के बीच रही और इनमें 23 फीसदी सालाना तेजी आई।

इसी तरह 3200 वर्गफुट के फ्लोर की कीमत 14 करोड़ रुपये से 19 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जहां 32 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई।

6.5 लाख करोड़ का बड़ा मौका

रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण दिल्ली की 42 Category A और B कॉलोनियों में करीब 18,500 प्लॉट मौजूद हैं। इन कॉलोनियों का कुल रीडेवलपमेंट पोटेंशियल लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। इसे रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है।

पश्चिम एशिया तनाव का भी असर

अंकुर जालान का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव फिलहाल वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता जरूर पैदा कर रहा है। लेकिन मध्यम अवधि में दक्षिण दिल्ली जैसे प्रीमियम रियल एस्टेट बाजार को इसका फायदा मिल सकता है। उनके मुताबिक अमीर भारतीय परिवार और NRI निवेशक सुरक्षित और स्थापित लग्जरी मार्केट्स में निवेश बढ़ा सकते हैं।

Mutual Funds Investment: अनिश्चितता का माहौल... अब म्यूचुअल फंड में कैसे करें निवेश? जानिए एक्सपर्ट से



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Monday, May 11, 2026

Stock Market Analysis : बाजार में किसी बड़े करेक्शन की आशंका नहीं है, ज्वेलरी शेयरों में पोजीशन करें हल्की

Stock Market Analysis : मार्केट आउटलुक पर चर्चा करते हुए एलिक्सिर इक्विटीज़ (Elixir Equities) के डायरेक्टर दीपन मेहता ने कहा कि आज गिरावट को छोड़ दें तो अब तक सभी ज्वेलरी स्टॉक्स में काफी अच्छा करंट देखने को मिला है। पिछले कुछ क्वार्टर्स से इनके नतीजे भी बहुत ही बढ़िया आ रहे हैं। गोल्ड के भाव में तेजी देखने को मिली है।। इनको हायर मेकिंग चार्जेस का फायदा भी मिला है। गोल्ड और गोल्ड ज्वेलरी ओनरशिप के इन्वेस्टमेंट के अच्छा विकल्प बनने का भी इनको फायदा मिला है। लेकिन अब ऐसा लग रहा है गोल्ड के भाव और इसकी खरीदारी अपने पीक पर पहुंच चुकी है। ऐसे में इन लेवल्स इनके वैल्यू्एशन काफी महंगे दिख रहे हैं। ऐसे में ज्वेलरी शेयरों का रिस्क रिटर्न प्रोफाइल अच्छा नहीं दिख रहा। इनमें बेस इफेक्ट भी आ जाएगा और शायद इनके लिए अगली तिमाहियां इतनी बढ़िया नहीं होंगी। वैसे भी हर तिमाही में 40-50% ग्रोथ मुमकिन नहीं। इसलिए में अब ज्वेरली शेयरों को लेकर सेंटीमेंट थोड़ा थोड़ा नेगेटिव हो सकता है।

दीपन मेहता ने इस बातचीत में आगे कहा कि हालांकि टाइटन में और बाकी कुछ ज्वेलरी स्टॉक्स में उनका निवेश है लेकिन इस समय ज्वेलरी इंडस्ट्री में थोड़ा हल्का हो जाना चाहिए। उन्होनें यह भी बताया कि स्काई गोल्ड में भी उनका एक्सपोजर है।

बैंक शेयरों पर बात करते हुए दीपन मेहता ने कहा कि बैंकिंग इंडस्ट्री इस समय एक रेड ओशन बन चुकी है। पीएसयू बैंक अब तक स्लो ग्रोथ में थे। बैलेंस शीट की वजह से लेंडिंग के मामले में ये इतने एग्रेसिव नहीं थे। लेकिन अब ये भी मार्केट में आ गए हैं। इनका एक कॉमन ट्रेंड यह है कि जो बड़े बैंक हैं उनका बैलेंस शीट बहुत ही बड़ा है। इसमें एसबीआई, HDFC बैंक, ICICI बैंक Axis बैंक और इंडसइंड बैंक शामिल हैं। इनकी ग्रोथ इंडस्ट्री से कम है। आगे इनके लोन बुक या डिपॉजिट ग्रोथ के लिए काफी चुनौतियां हो सकती हैं। इनकी तुलना में छोटे बैंक ज्यादा अच्छा कर रहे हैं, क्योंकि उनकी लोन उनकी बेस इफेक्ट थोड़ी कम है। नए-नए प्रोडक्ट्स नए इलाको में ब्रांच एक्सपेंशन की वजह छोटे बैंक मोमेंटम बनाए रखने में कामयाब रहे हैं। लेकिन कुल मिलाकर देखें तो बैंकिंग सेक्टर में और लेंडिंग सेक्टर में थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि अगर आप देखेंगे तो भारी कंपटीशन की वजह से इस सेक्टर के नेट इंटरेस्ट मार्जिन ग्रोथ रेट पर असर आ सकता है। इसके अलावा हमारी इकोनॉमी पर गल्फ वॉर का पूरा असर अभी तो देखने को भी नहीं मिला है। ऐसे में बड़े बैंकों की ग्रोथ सपाट रह सकती है।

बाजार की चाल पर बात करते हुए दीपन मेहता ने आगे कहा कि रिटेल निवेशकों से फ्लो लगातार बना हुआ है। जब युद्ध थमेगा तो कच्चे तेल की कीमतें घटेंगी। बाजार में बड़े करेक्शन की आशंका नहीं है। कई मिड-स्मॉलकैप कंपनियों के नतीजे अच्छे रहे हैं। उन्होंने बताया कि FMCG में उन्होंने कोई निवेश नहीं किया है। तेजी आने पर FMCG में होल्डिंग घटानी चाहिए। FMCG सेक्टर से अभी दूर रहना चाहिए। हालांकि, FMCG में होनासा और नायिका जैसी कंपनियां बेहतर नजर आ रही हैं।

 

Stock Market outlook : भारी गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 12 मई को कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।



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Sunday, May 10, 2026

Celina Jaitly: मदर्स डे पर छलका सेलिना जेटली का दर्द, बेटे की कब्र पर फूट-फूटकर रोईं अभिनेत्री

बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के लिए इस साल का 'मदर्स डे' खुशियों के बजाय गहरे दर्द और आंसुओं से भरा रहा। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह अपने दिवंगत बेटे शमशेर की कब्र पर बैठकर बिलखती नजर आ रही हैं। इस वीडियो के साथ उन्होंने एक लंबा नोट लिखकर अपने पति पीटर हाग पर मानसिक उत्पीड़न, बच्चों से दूर करने और उनके 'ब्रेनवॉश' करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

15 साल की शादी और 'धोखे' का अंत

सेलिना ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्होंने अपने पति के करियर और परिवार की खातिर अपना देश, माता-पिता और बॉलीवुड करियर सब कुछ छोड़ दिया था। उन्होंने दुबई, सिंगापुर और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में रहकर अपने बच्चों की परवरिश की। लेकिन आज स्थिति यह है कि उन्हें अपने ही बच्चों से बात करने तक की अनुमति नहीं है। अभिनेत्री का आरोप है कि उनके पति ने उन्हें तलाक का नोटिस भी धोखे से दिया। उन्हें लगा कि शादी की 15वीं सालगिरह पर कोई तोहफा मिलने वाला है, लेकिन हाथ में तलाक के कागजात थमा दिए गए।

बच्चों को 'कट्टर' बनाने का आरोप

सेलिना ने अपने पोस्ट में सबसे चौंकाने वाला दावा यह किया है कि उनके तीन जीवित बच्चों को उनके पिता और दादा द्वारा किसी गुप्त स्थान पर ले जाया गया है। अभिनेत्री के अनुसार, बच्चों को उनकी मां और उनके हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काया जा रहा है और उन्हें कट्टरपंथी बनाने की कोशिश की जा रही है। ऑस्ट्रियाई अदालत के आदेश के बावजूद, सेलिना को बच्चों से मिलने या संचार करने से रोका जा रहा है।

दिवंगत बेटे की कब्र पर ही मिला सुकून

साझा किए गए वीडियो में सेलिना ऑस्ट्रिया में अपने दिवंगत बेटे शमशेर की कब्र के पास बैठी दिखाई दे रही हैं। उन्होंने लिखा, "अदालत में आश्वासन के बावजूद मेरे जीवित बच्चों को मुझसे नहीं मिलने दिया गया। जिस एकमात्र बच्चे को मैं अपनी गोद में ले सकी, वह मेरा दिवंगत फरिश्ता शमशेर था।" सेलिना के लिए यह मदर्स डे मातृत्व के सुख का नहीं, बल्कि न्याय की एक लंबी लड़ाई का प्रतीक बन गया है।

कानूनी कार्रवाई और भारत वापसी

इस मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। मुंबई पुलिस ने अभिनेत्री की शिकायत के आधार पर पीटर हाग के खिलाफ घरेलू हिंसा, क्रूरता और आपराधिक धमकी के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस ने पीटर के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया है।

सेलिना ने अपने नोट के अंत में खुद को 'मां काली और दुर्गा' की बेटी बताते हुए संकल्प लिया है कि वह अपने बच्चों, अपनी गरिमा और सच्चाई की रक्षा के लिए अब भारत लौट रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह इस अन्याय के खिलाफ अपनी पूरी ताकत से लड़ेंगी।



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Saturday, May 9, 2026

New Labour Codes: आज से लागू हो गए सभी नए लेबर कोड्स, आप पर पड़ेगा क्या-क्या असर?

नए लेबर कोड्स 9 मई से पूरी तरह से लागू हो गए हैं। सरकार ने इस बारे में नए नियमों को नोटिफाय कर दिया है। इसके साथ ही चारों नए लेबर कोड्स के प्रावधान पूरी तरह लागू हो गए है। इसके साथ ही 29 अलग-अलग नियमों का वजूद खत्म हो गया है। नए लेबर कोड्स का मकसद एंप्लॉयीज के हितों की रक्षा है। साथ ही बिजनेसेज के लिए भी अब नियम पहले से आसान हो गए हैं।

सरकार ने कई पक्षों से विचार के बाद नए नियम नोटिफाय किए 

चार नए लेबर कोड्स 21 नवंबर, 2025 को लागू हो गए थे। लेकिन, कुछ से जुड़े डिटेल नियम पेंडिंग होने से वे पूरी तरह से लागू नहीं हुए थे। अब यह कमी दूर हो गई है। चारों नए लेबर कोड्स और उनसे जुड़े नियम पूरी तरह से लागू हो गए हैं। सरकार ने अलग-अलग पक्षों के साथ विचार करने के बाद नए नियम नोटिफाय कर दिए हैं।

राज्यों के नए लेबर कोड्स से जुड़े अपने नियम अलग से नोटिफाय करने होंगे

एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि नए नियम Gazette में पब्लिश हो जाने के बाद नए लेबर कोड्स अपने पूरे फ्रेमवर्क के साथ पूरी तरह से लागू हो गए हैं। हालांकि, राज्यों को इनसे जुड़े खुद के नियमों को नोटिफाय करना पड़ेगा। इसमें थोड़ा समय लग सकता है।

पुराने 29 श्रम कानूनों का वजूद अब पूरी तरह से खत्म हुआ 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए लेबर कोड्स के पूरी तरह लागू होने के साथ ही लेबर से जुड़े बड़े रिफॉर्म्स पूरे हो गए हैं। सरकार ने 29 पुराने नियमों की जगह चार लेबर कोड्स लागू किए हैं। इसका व्यापक असर पड़ेगा। एंप्लॉयीज के साथ ही बिजनेसेज के लिए चीजें आसान हो जाएंगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ेगा। एंप्लॉयीज का सोशल सिक्योरिटीज कवर भी बढ़ेगा।

हर हफ्ते एंप्लॉयीज या वर्कर्स के लिए 48 घंटे से ज्यादा काम की मनाही

वर्कर्स के लिए कई चीजें अब बदल जाएंगी। खासकर वर्कर्स के राइट्स, सेफ्टी और कंपनसेशन से जुड़ी शर्तों पर असर पड़ेगा। सबसे बड़ा बदलाव काम के घंटों को लेकर है। नए नियम में कहा गया है कि काम के घंटे हर हफ्ते 48 घंटे से ज्यादा नहीं हो सकते। इससे अलग-अलग सेक्टर में काम के घंटों को लेकर समानता आएगी।

हर एप्लॉयीज और वर्कर्स को हफ्ते में आराम के लिए कम से कम 1 दिन मिलेगा

एंप्लाॉयीज को हर हफ्ते आराम के लिए कम से कम एक दिन मिलेगा। अगर एंप्लॉयीज ओवरटाइम करता है तो उसे इसके लिए अलग से पैसे मिलेंगे। अभी कई सेक्टर में एंप्लॉयीज को नियमित काम के घंटों के बाद भी ऑफिस में रुकना पड़ता है। यही हाल वर्कर्स के मामले में भी है। लेकिन, अतिरिक्त काम के घंटों के लिए उन्हें कोई भुगतान नहीं मिलता है।

एंप्लॉयर्स के लिए वर्कर्स और एंप्लॉयीज को अप्वाइंटमेंट लेटर जारी करना होगा

नए लेबर कोड्स के पूरी तरह से लागू होने के बाद एंप्लॉयर्स के लिए सभी वर्कर्स को अप्वाइंटमेंट लेटर जारी करना अनिवार्य हो गया है। इससे एंप्लॉयर और एंप्लॉयीज के रिश्ते में पारदर्शिता आएगा। एंप्लॉयीज का शोषण करना मुश्किल हो जाएगा। बगैर नियम और शर्त के कोई एंप्लॉयर किसी वर्कर से काम नहीं ले सकेगा।

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40 से ज्यादा उम्र के एंप्लॉयीज को साल में एक बार फ्री मेडिकल चेक-अप सुविधा

40 साल से ज्यादा उम्र के एंप्लॉयीज को साल में कम से कम एक बार कंपनी की तरफ से फ्री हेल्थ-चेकअप की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। महिला एंप्लॉयीज को सभी शिफ्ट्स में काम करने की इजाजत दी गई है। लेकिन, एंप्लॉयर को उनकी सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन गंभीरता से करना होगा। सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव से जुड़े नियम पहले ही लागू हो चुके हैं। एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी उसकी सीटीसी की कम से कम 50 फीसदी होनी चाहिए।



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RR vs GT IPL 2026 Match Live Score: जीत की लय में लौटना चाहेगी राजस्थान, गुजरात से मुकाबला, कैसी होगी दोनों टीमों की प्लेइंग 11

RR vs GT IPL 2026 Match Live Score: आईपीएल 2026 का 52वां मुकाबला राजस्थान रॉयल्स (RR) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच खेला जाएगा। जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम में खेले जाने वाले इस मैच में दोनों टीमों की नजरें जीत पर रहेंगी। राजस्थान की टीम अपना पिछला मुकाबला हारकर तो वहीं गुजरात की टीम अपना पिछला मैच जीतकर यहां आई है। दोनों टीमें इस समय प्लेऑफ की रेस में बनी हुई हैं, इसलिए यह मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है।

दोनों टीमों का ये दूसरा मुकाबला है, इससे पहले 4 अप्रैल को हुए मुकाबले में राजस्थान ने गुजरात को 6 रन से मात दी थी। वहीं शुभमन गिल की टीम मुकाबले में इस हार को बदला लेने के इरादे से उतरेगी।

राजस्थान रॉयल्स ने अब तक 10 मैचों में 6 जीत दर्ज की हैं और टीम अंक तालिका में चौथे स्थान पर मौजूद है। वहीं, गुजरात टाइटंस ने भी 10 में से 6 मुकाबले जीते हैं और वह पॉइंट्स टेबल में पांचवें नंबर पर है। राजस्थान की कमान रियान पराग के हाथों में हैं तो वहीं गुजरात टाइटंस की कप्तानी शुभमन गिल संभाल रहे हैं।



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