US Iran Peace Deal Update: अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों से चल रहे भीषण युद्ध को खत्म करने के लिए जिस 'शांति समझौते' का ऐलान हो चुका है। अब इसमें एक बड़ा चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। युद्ध खत्म होने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने एक बड़ा दावा ठोक दिया है। तेहरान का कहना है कि ट्रंप प्रशासन के साथ हुए इस अंतिम समझौते में स्पष्ट रूप से यह माना गया है कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से ईरान और ओमान टैक्स या रेवेन्यू वसूल सकते हैं।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स' के मुताबिक, आखिरी पलों में इस ऐतिहासिक समझौते के मसौदे में कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं, जिसने वाशिंगटन को बैकफुट पर धकेल दिया है। आइए समझते हैं कि आखिर 'लास्ट मिनट' में क्या खेल हुआ है और कैसे अब दुनिया भर के तेल सप्लाई रूट पर ईरान का शिकंजा और मजबूत होने वाला है।
आखिरी मिनट में बदला गया डील का टेक्स्ट
ईरानी सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के बिल्कुल अंतिम चरण में समझौते के ड्राफ्ट में ऐसी भाषा जोड़ी गई, जिसने ईरान के हाथ मजबूत कर दिए हैं। सोर्स ने बताया, 'बातचीत के आखिरी पलों में समझौते के टेक्स्ट में बदलाव किए गए, जो निश्चित और स्पष्ट रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान और ओमान की संप्रभुता को रेखांकित करते हैं'।
पुराने ड्राफ्ट के विपरीत, अब फाइनल टेक्स्ट में साफ लिखा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में 'मैरीटाइम सर्विसेज' के प्रशासन का भविष्य केवल ईरान और ओमान ही तय करेंगे। तेहरान इस 'मैरीटाइम सर्विसेज' शब्द के शामिल होने को अमेरिका की तरफ से मिली एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहा है।
अमेरिका को मिला सिर्फ 60 दिनों का 'डिस्काउंट'
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने जहाजों से टैक्स वसूलने के ईरान के इस अधिकार को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है। ईरान शुरुआती 60 दिनों के लिए जहाजों को बिना किसी शुल्क के गुजरने देने पर राजी हुआ है। ईरानी सोर्स का कहना है, 'अमेरिका ने टैक्स वसूलने के सिद्धांत को मान लिया है, उसने केवल ईरान से 60 दिनों का डिस्काउंट हासिल किया है।' इस अवधि के खत्म होते ही ईरान वहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों से पैसा वसूलना शुरू कर देगा।
किस नाम पर वसूला जाएगा पैसा और कहां होगा इस्तेमाल?
ईरान इस जलमार्ग से होने वाली मोटी कमाई को अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने में लगाने की योजना बना रहा है। 60 दिन बीत जाने के बाद, ईरान जहाजों को सुरक्षा, नेविगेशन, पर्यावरण और इंश्योरेंस सेवाएं प्रदान करने के नाम पर वित्तीय रेवेन्यू वसूलेगा।
इस टैक्स से होने वाली अरबों डॉलर की कमाई का इस्तेमाल ईरान अपने देश के आर्थिक विकास के लिए करेगा। इस पूरे अरेंजमेंट में ओमान का सहयोग सबसे अहम है, क्योंकि स्ट्रेट का दूसरा हिस्सा ओमान के दायरे में आता है। इसके लिए ओमान के साथ जरूरी बातचीत पहले ही पूरी की जा चुकी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां दुनिया के सामने यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 'टोल-फ्री' खुलवा दिया है, वहीं ईरान के इस नए दावे ने उनके दावों पर पानी फेर दिया है। फिलहाल इस मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है और न ही समझौते का पूरा टेक्स्ट सामने आया है। लेकिन अगर ईरान का यह दावा सच साबित होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि दुनिया का एक-चौथाई समुद्री तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
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