Saturday, May 30, 2026

Ola Electric Share Price: 6 दिन में 20% उछला ओला, 3 महीने में कर दिए पैसे डबल; जानिए तूफानी तेजी के 5 बड़े कारण

Ola Electric Share Price: ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में लंबी गिरावट के बाद अब तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। शुक्रवार, 29 मई को ओला का शेयर 5.94% की बढ़त के साथ 41.57 रुपये पर बंद हुआ। खास बात यह है कि केवल दो कारोबारी सत्रों में ही शेयर करीब 14% तक चढ़ गया।

पिछले छह कारोबारी सत्रों में शेयर करीब 20% तक उछल चुका है। आइए जानते हैं कि ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में किन 5 कारणों से तेजी दिख रही है। लेकिन, पहले जान लेते हैं कि इसने 3 महीने में कैसे निवेशकों के पैसे डबल कर दिए।

तीन महीने में 100% से ज्यादा रिटर्न

ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों ने पिछले तीन महीने से भी कम समय में निवेशकों का पैसा डबल कर दिया है। 2 मार्च 2026 को कंपनी का शेयर 21.21 रुपये के अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर पर था। इसके बाद शेयर में लगातार रिकवरी देखने को मिली और 29 मई 2026 को कारोबार के दौरान यह 42.84 रुपये तक पहुंच गया।

इस तरह निचले स्तर से शेयर में करीब 102% की तेजी दर्ज की गई। अगर किसी निवेशक ने मार्च की शुरुआत में इस शेयर में 50 हजार रुपये लगाए होते, तो वो बढ़कर 1 लाख रुपये हो जाते।

1. मार्च तिमाही में घाटा घटा

पिछले हफ्ते कंपनी ने मार्च 2026 तिमाही के नतीजे जारी किए थे। नतीजों के बाद से शेयर में तेजी देखने को मिल रही है। कंपनी की चौथी तिमाही की कमाई एक साल पहले के 611 करोड़ रुपये से घटकर 265 करोड़ रुपये रह गई। हालांकि अच्छी बात यह रही कि कंपनी का शुद्ध घाटा काफी कम हुआ। यह 870 करोड़ रुपये से घटकर 500 करोड़ रुपये पर आ गया। इसी तरह EBITDA घाटा भी 690 करोड़ रुपये से घटकर 281 करोड़ रुपये रह गया। पहली बार कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो पॉजिटिव रहा।

2. सर्विस से जुड़ी समस्याओं में सुधार

ओला के मैनेजमेंट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के दौरान सर्विस समस्याओं का असर काफी बिक्री पर पड़ रहा था। उनमें अब काफी सुधार आ चुका है। अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच औसत सर्विस टर्नअराउंड टाइम में 88% की कमी आई है। साथ ही लंबित सर्विस मामलों की संख्या भी काफी घट गई है। इससे ग्राहकों के अनुभव में सुधार हुआ है और मांग को भी सहारा मिला है।

3. जून तिमाही को लेकर अनुमान

ओला इलेक्ट्रिक ने जून तिमाही के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। कंपनी का अनुमान है कि इस तिमाही में उसकी बिक्री 40,000 से 45,000 यूनिट के बीच रह सकती है। कंपनी ने अप्रैल में 12,206 यूनिट और 28 मई तक 12,790 यूनिट के रजिस्ट्रेशन दर्ज किए हैं। इस तरह चालू तिमाही में अब तक कुल रजिस्ट्रेशन करीब 25,000 यूनिट तक पहुंच चुके हैं।

4. बैटरी गीगाफैक्टरी के विस्तार पर फोकस

5. कंपनी ने अपने शेयरधारकों को भेजे पत्र में बताया कि उसकी बैटरी गीगाफैक्टरी अब विस्तार के अगले चरण में प्रवेश कर रही है। ओला इलेक्ट्रिक का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के दौरान अपनी व्यावसायिक बैटरी निर्माण क्षमता को बढ़ाकर 6 GWh तक पहुंचाना है। कंपनी का मानना है कि इससे भविष्य की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

5. कारोबार में बढ़ रहा है AI का इस्तेमाल

ओला इलेक्ट्रिक ने बताया कि उसके कारोबार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है। फिलहाल कंपनी के AI सिस्टम हर दिन करीब 2 लाख कनेक्टेड कॉल्स संभाल रहे हैं। इनका इस्तेमाल बिक्री, सर्विस और अन्य परिचालन गतिविधियों में किया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि इससे कामकाज की दक्षता बढ़ी है और ग्राहकों को बेहतर सेवा मिल रही है।

आगे भी चुनौतियां रहेंगी

कंपनी प्रबंधन ने यह भी माना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कुछ चुनौतियां बनी रह सकती हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और बाजार में आक्रामक प्राइसिंग रणनीति के कारण ग्रॉस मार्जिन पर दबाव आ सकता है। हालांकि कंपनी का कहना है कि उसके पास पर्याप्त मार्जिन मौजूद है, जिससे वह विकास योजनाओं को जारी रखते हुए लाभप्रदता पर भी ध्यान बनाए रख सकती है।

आईपीओ प्राइस से अभी भी नीचे है शेयर

ओला इलेक्ट्रिक का शेयर हालिया तेजी के बावजूद 76 रुपये के आईपीओ प्राइस से काफी नीचे है।

इतना ही नहीं, लिस्टिंग के बाद शेयर ने 157 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ था। मौजूदा कीमत उस रिकॉर्ड स्तर से भी काफी कम है। पिछले एक साल में ओला इलेक्ट्रिक का शेयर करीब 21.92% तक गिरा हुआ है।

IPO में क्या होता है फिक्स्ड प्राइस और बुक बिल्डिंग, दोनों मेथड एक-दूसरे से कैसे अलग

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Friday, May 29, 2026

Viral Video: पैकेट बंद चने को धोते ही निकलने लगा पीला रंग, इसे खाने पर क्या होगा हाल! क्विक डिलिवरी ऐप से मंगाते हैं सामान तो इसे देखिए

Viral Video: एक वायरल वीडियो ने इंटरनेट पर एक बार फिर फूड सेफ्टी और मिलावट को लेकर चिंताजनक बहस छेड़ दी है। आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर एक शख्स का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने दावा किया है कि एक क्विक डिलीवरी ऐप के जरिए मंगाए गए पैकेट बंद भुने चने को धोते ही उसमें से भारी मात्रा में पीला रंग निकलने लगा। वीडियो में दिख रहे इस नजारे ने सोशल मीडिया यूजर्स को हैरान और परेशान कर दिया है। अगर आप भी ब्लिंकिट जैसे क्विक कॉमर्स ऐप्स से रोजाना खाने-पीने का सामान मंगाते हैं तो यह रिपोर्ट आपके लिए बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला...

इस वीडियो क्लिप में एक शख्स भुने हुए चनों को पानी से धोता हुआ नजर आ रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि चने को धोते ही पीला रंग उसके हाथों और कटोरी में चारों तरफ फैल जाता है।

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शख्स का दावा: हल्दी नहीं, केमिकल वाला आर्टिफिशियल रंग है

वीडियो में शख्स ने दावा किया कि उसने क्विक डिलीवरी ऐप ब्लिंकिट के माध्यम से भुना हुआ चना ऑर्डर किया था। जब उसने प्रॉडक्ट की जांच की तो धोने के बाद चने से असामान्य मात्रा में रंग बाहर आने लगा। उसने आगे दावा किया कि यह रंग हल्दी नहीं बल्कि कोई आर्टिफिशयल रंग है।

शख्स ने पैकेट पर छपी सामग्री की सूची पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनके अनुसार पैकेजिंग पर सामग्री के नाम पर सिर्फ चना लिखा हुआ था, जबकि उसका मानना है कि इसमें कृत्रिम रंग मिलाया गया था। उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि हजारों ग्राहकों की समीक्षाओं के आधार पर इस प्रॉडक्ट को 4.5-स्टार की रेटिंग मिली हुई है। शख्स ने कहा कि इस प्रॉडक्ट को तैंतीस हजार (33,000) लोगों की समीक्षाओं के आधार पर 4.5 स्टार की रेटिंग मिली हुई है।

शख्स ने बाद में जानकारी दी कि उसने इस सामान को वापस कर दिया है और तस्वीरें अटैच करके अपना रिव्यू भी पोस्ट कर दिया है। उसने चेतावनी देते हुए कहा कि जो कोई भी रोजाना भुने चने का सेवन करता है, वो ऐसी मिलावटों को लेकर बेहद सतर्क रहे।

डिलीवरी ऐप्स की क्वालिटी चेक पर उठे सवाल

जैसे ही यह क्लिप इंटरनेट पर वायरल हुई, कई यूजर्स ने पैकेट बंद खाद्य पदार्थों को लेकर अपने अनुभव और चिंताएं साझा करना शुरू कर दिया। एक यूजर ने कमेंट किया कि मैं स्थानीय किराना दुकान से जो भुना चना खरीदता हूं, वह इससे कहीं बेहतर है। मुझे कभी रंग की ऐसी समस्या नहीं हुई। एक अन्य यूजर ने लिखा कि सिर्फ टाटा ब्रांड सही है। रिफंड प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए एक व्यक्ति ने कमेंट किया कि रिफंड मिला या नहीं? मेरा तो रिफंड भी नहीं करते। वहीं एक अन्य यूजर ने पूछा, "यार ब्लिंकिट पर रिटर्न कैसे करते हैं।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल यूजर जेनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। मनी कंट्रोल वायरल पोस्ट में किए गए किसी दावे की पुष्टि या खंडन नहीं करता है।



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Thursday, May 28, 2026

Anshula Kapoor Wedding: इस दिन मंगेतर रोहन संग सात फेरे लेंगी अर्जुन कपूर की बहन अंशुला, जाह्नवी-खुशी समेत ये स्टार्स होंगे शामिल

Anshula Kapoor Wedding: रिपोर्ट्स के मुताबिक अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर 6 जुलाई को स्क्रीन राइटर रोहन ठक्कर से शादी करने जा रही हैं। यह शादी बॉलीवुड की बिग फैट पंजाबी वेडिंग होने वाली है। कपूर परिवार ने जश्न की तैयारियां शुरू कर दी हैं। शादी में जाह्नवी कपूर, खुशी कपूर, सोनम कपूर और अर्जुन कपूर के साथ-साथ कई और बड़े सितारे नजर आ सकते हैं।

खबरों के मुताबिक, फिल्म निर्माता बोनी कपूर ने अपने करीबी लोगों को शादी की तारीख के बारे में बता दिया है। रूमी जाफरी और अभिनेता अक्षय खन्ना समेत कई लोगों को शादी की तारीख नोट करने के लिए कहा गया है। अनिल कपूर और संजय कपूर को भी, अपने व्यस्त शूटिंग शेड्यूल के बावजूद फैमली फंक्शन के लिए 6 जुलाई का दिन खाली रखने के लिए कहा गया है।

कहा जा रहा है कि शादी की तैयारियां ज़ोरों से चल रही हैं। अर्जुन कपूर अपनी बहन के इस खास दिन के लिए कई तैयारियों में व्यक्तिगत रूप से शामिल हैं। कपूर परिवार के एक करीबी सूत्र ने बताया, “वह अंशुला के साथ सभी ज़रूरी खरीदारी करने, जगह चुनने, खाने-पीने की व्यवस्था देखने और हर छोटी-छोटी बात का ध्यान रखने में मदद करते हैं। भाई-बहन सब कुछ देख रहे हैं।”

अंशुला की सौतेली बहनें जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर भी शादी समारोह में शामिल होंगी। जाह्नवी फिलहाल राम चरण के साथ अपनी आने वाली फिल्म 'पेड्डी' के प्रमोशन में व्यस्त हैं, जो 4 जून को रिलीज हो रही है। वहीं, खुशी हाल ही में बोनी कपूर की सीक्वल 'मॉम 2' की शूटिंग पूरी करके ग्रीस से लौटी हैं।

शादी में परिवार के अन्य सदस्यों में हर्षवर्धन कपूर, शनाया कपूर और रिया कपूर बूलानी शामिल हैं। सोनम कपूर आहूजा अपने दूसरे बेटे रुद्रलोक कपूर आहूजा के जन्म के बाद फिलहाल लंदन में हैं। हालांकि, खबरों के मुताबिक, सोनम, उनके पति आनंद आहूजा और उनके बच्चे भी अंशुला की शादी में शामिल हो सकते हैं, क्योंकि अर्जुन और अंशुला के साथ उनका गहरा रिश्ता है।

खबरों के मुताबिक रोहन ठक्कर का फिल्म निर्माता करण जौहर से धर्माटिक एंटरटेनमेंट के जरिए पेशेवर संबंध है, जहां उन्होंने फ्रीलांस लेखक के रूप में काम किया था। करण जौहर को हाल ही में वरुण धवन की फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' से जुड़े एक कार्यक्रम में अर्जुन कपूर के साथ देखा गया था, जिससे इस जोड़े के साथ उनके संबंधों को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। खबरों के अनुसार, अंशुला की मुलाकात रोहन से डेटिंग ऐप पर हुई थी, जिसके बाद पिछले साल दोनों की आधिकारिक तौर पर सगाई हो गई थी।



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Wednesday, May 27, 2026

SIP की तारीख बदलने से कितना फायदा होता है? 30 साल के आंकड़ों ने दिया चौंकाने वाला जवाब

SIP returns: बाजार में उतार-चढ़ाव आते ही SIP निवेशकों के मन में एक सवाल जरूर आता है। क्या निवेश कुछ समय के लिए रोक देना चाहिए? बाजार में और गिरावट आने का इंतजार करना चाहिए? या बेहतर रिटर्न के लिए SIP की तारीख बदल देनी चाहिए?

कई लोगों को लगता है कि महीने की सही तारीख चुनने या बाजार की कमजोरी के दौरान निवेश से बचने पर लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। लेकिन बीएसई सेंसेक्स TRI के करीब 30 साल के आंकड़ों पर गौर करने से दिलचस्प बात पता चलती है।

SIP की टाइमिंग से कितना फर्क पड़ा?

यह समझने के लिए कि निवेश की टाइमिंग कितनी अहम है, व्हाइटओक म्यूचुअल फंड ने अगस्त 1996 से अप्रैल 2026 के बीच बीएसई सेंसेक्स TRI में अलग-अलग तारीखों पर किए गए SIP निवेश का अध्ययन किया।

रिपोर्ट में यह देखा गया कि अगर कोई निवेशक हर महीने सबसे अच्छे दिन निवेश करता और दूसरा निवेशक हर महीने सबसे खराब दिन निवेश करता, तो दोनों के रिटर्न में कितना अंतर आता।

Chart gold 223

आखिर रिटर्न में कितना दिखा अंतर?

स्टडी के मुताबिक, जो निवेशक हर महीने सबसे बेहतर दिन पर SIP करता, उसे पूरे दौर में 13.80 प्रतिशत का XIRR (एक्सटेंडेड इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न) मिलता।

वहीं, जो निवेशक लगातार हर महीने सबसे खराब दिन पर निवेश करता, उसे भी 13.32 प्रतिशत का XIRR मिलता। यानी करीब 30 साल में सबसे अच्छी और सबसे खराब टाइमिंग के बीच रिटर्न का अंतर सिर्फ 0.48 प्रतिशत अंक रहा।

तय तारीख पर SIP से भी अच्छा रिटर्न

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि जो निवेशक बिना बाजार की टाइमिंग पकड़ने की कोशिश नहीं करते। हर महीने एक तय तारीख पर SIP करते रहे, उन्हें 13.58 प्रतिशत का XIRR मिला।

यह रिटर्न सबसे अच्छी टाइमिंग वाले निवेशक के रिटर्न के काफी करीब रहा। इससे पता चलता है कि बाजार की सही टाइमिंग पकड़ने की कोशिश से ज्यादा फायदा नियमित निवेश से मिलता है।

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अलग-अलग तारीखों पर रिटर्न 

रिपोर्ट में महीने की अलग-अलग तारीखों पर किए गए SIP निवेश का भी एनालिसिस किया गया। इसमें पता चला कि महीने की शुरुआत, बीच या आखिर में निवेश करने पर रिटर्न में बहुत ज्यादा फर्क नहीं आया।

कोई भी ऐसी तारीख नहीं मिली जिसने लगातार दूसरी तारीखों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया हो। उदाहरण के लिए:

  • हर महीने 1 तारीख को SIP करने वाले निवेशकों को 13.59 प्रतिशत रिटर्न मिला।
  • 10 तारीख को निवेश करने वालों का रिटर्न 13.55 प्रतिशत रहा।
  • 20 तारीख को SIP करने वालों को 13.58 प्रतिशत रिटर्न मिला।
  • 28 तारीख को निवेश करने वालों को 13.61 प्रतिशत रिटर्न हासिल हुआ।

सभी तारीखों पर रिटर्न का अंतर बेहद मामूली

इस स्टडी के मुताबिक, ज्यादातर तारीखों पर SIP का रिटर्न 13.55 प्रतिशत से 13.61 प्रतिशत के बीच रहा। यानी अलग-अलग तारीखों के बीच प्रदर्शन का अंतर बेहद मामूली था। सीधे शब्दों में कहें तो लंबी अवधि में SIP की तारीख बदलने से रिटर्न में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ा।

निवेशकों के लिए क्या है सीख?

करीब तीन दशक के इस स्टडी से पता चलता है कि SIP में सबसे जरूरी चीज सही तारीख चुनना नहीं, बल्कि लगातार निवेश करते रहना है। चाहे निवेश सबसे अच्छे दिन किया गया हो, सबसे खराब दिन या हर महीने एक तय तारीख पर, लंबे समय में रिटर्न का अंतर बहुत सीमित रहा।

आंकड़े बताते हैं कि जो निवेशक अनुशासन के साथ नियमित SIP करते रहे, उनके रिटर्न लगभग उन निवेशकों के बराबर रहे जिन्होंने बाजार की टाइमिंग पकड़ने की कोशिश की। यानी SIP में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र बाजार की चाल का अनुमान लगाना नहीं, बल्कि लंबे समय तक लगातार निवेश बनाए रखना है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।



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Tuesday, May 26, 2026

CM Suvendu Adhikari: 'सरकार की कार्रवाई से पहले भाग जाओ...' CM शुभेंदु अधिकारी ने किसे दे दी ये चेतावनी

पश्चिम बंगाल में सरकार बनते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी लगातार एक्शन में नजर आ रहे हैं। वहीं अब उन्होंने राज्य में रह रहे अवैध घुसपैठियों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने घुसपैठियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही उन्हें यहां से चले जाना चाहिए। इस मुद्दे पर बात करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह कार्रवाई किसी नए कानून के तहत नहीं, बल्कि पहले से लागू विदेशी अधिनियम के आधार पर की जा रही है। उन्होंने कहा, “यह कोई नया कानून नहीं है। यह पहले से मौजूद विदेशी अधिनियम है और अवैध रूप से रह रहे लोगों को तुरंत यहां से निकल जाना चाहिए।”

घुसपैठियों को जेल में न रखने के निर्देश

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अपने नागरिकों को वापस लेना बांग्लादेश की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश पहले ही कह चुका है कि वह भारत में रह रहे अपने नागरिकों को वापस लेने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया है कि कथित घुसपैठियों को जेल में न रखा जाए। इस पर उन्होंने कहा, “हम उन्हें यहां क्यों रखें? भारत के संसाधन क्यों खर्च करें? क्या ये घुसपैठिए हमारे दामाद हैं?” शुभेंदु अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर लोग अपनी मर्जी से यहां से नहीं जाते, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “जल्दी यहां से चले जाओ, नहीं तो सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी।”

 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट'  की नीति

मंगलवार सुबह उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर सीमा इलाके में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। माना जा रहा है कि ये लोग बांग्लादेश वापस जाने के लिए वहां पहुंचे थे। दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इससे पहले भी “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” (SIR) प्रक्रिया के दौरान ऐसे ही नजारे देखने को मिले थे। हाल ही में राज्य सरकार ने संदिग्ध विदेशी नागरिकों के लिए अस्थायी हिरासत केंद्र शुरू किए हैं। इसके साथ ही सरकार ने “पहचान करो, हटाओ और वापस भेजो” नीति के तहत सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।

बता दें कि, शुभेंदु अधिकारी सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर कड़ा ऐक्शन लेते हुए कुछ समय पहले ही 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' की नीति का ऐलान किया था। इसके लिए राज्य में 'होल्डिंग कैंप' भी बनाए गए थे। वहीं न्यूज 18 से बात करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश के लिए खतरा बताया और कहा कि इन्हें एक दिन भी भारत में नहीं रुकने देना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से अनुरोध करूंगा कि इन्हें होल्डिंग सेंटर में नहीं रखा जाए। ऐसे लोगों को एक भी दिन मुफ्त में बिरयानी क्यों खिलाना?

डेमोग्राफिक चेंज पर केंद्र सरकार ने बनाई हाईलेवल कमेटी

इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने डेमोग्राफिक चेंज पर हाईलेवल कमेटी का गठन किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि यह कमिटी, अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे डेमोग्राफिक चेंज का मूल्यांकन करेगी। उन्होंने कहा, 'घुसपैठ और अन्य कारणों से अनेचुरल डेमोग्राफिक चेंज किसी भी राष्ट्र के वर्तमान व भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेमोग्राफिक चेंज को लेकर हाई लेवल कमेटी की घोषणा की थी। मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि सरकार ने इस कमिटी का गठन कर लिया है।



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Monday, May 25, 2026

'झूठ बोल रहा है अमेरिका...', ट्रंप के दावे पर बुरी तरह भड़का ईरान; डील टूटने से बढ़ सकता है तेल संकट!

Trump-Iran Deal Updates: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच होने वाली पीस डील पूरी तरह खटाई में पड़ती नजर आ रही है। ईरान ने अमेरिका के दावों को सिरे से खारिज करते हुए बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। ईरान ने दोटूक कहा है कि 'हम अमेरिका के साथ किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करने जा रहे हैं' और जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि डील करीब है, वे सफेद झूठ बोल रहे हैं।

तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी यह तनातनी अब इस हद तक बढ़ चुकी है कि ईरानी अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान इस पूरी बातचीत को ही रद्द करने की कगार पर पहुंच गया है। 8 अप्रैल को हुए सीजफायर के बाद से इसे कूटनीति का सबसे नाजुक दौर माना जा रहा है।

यूरेनियम पर ईरान ने किया झुकने से इनकार

इस विवाद की सबसे बड़ी वजह परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे हैं। अमेरिकी मीडिया में आ रही उन खबरों को ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि तेहरान अपने समृद्ध यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने पर राजी हो गया है। ईरान ने इसे 'सरासर झूठ' बताया है।

ईरान का कहना है कि किसी भी ड्राफ्ट में यूरेनियम सौंपने जैसी कोई शर्त न तो शामिल है और न ही कभी होगी। ईरान का रुख साफ है कि यूरेनियम संवर्धन पर कोई भी बात शुरुआती समझौता होने के बाद ही की जाएगी, उससे पहले नहीं।

होर्मुज में टोल पर आर-पार की जंग

परमाणु विवाद के अलावा 'होर्मुज' पर ईरान का नियंत्रण दूसरा सबसे बड़ा तनाव का केंद्र बना हुआ है। अप्रैल में युद्धविराम के बावजूद ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से 'सर्विस फीस' और पर्यावरण सुरक्षा के नाम पर टैक्स वसूलना जारी रखा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इस नीति का बचाव किया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली दौरे के समय साफ कहा था कि ईरान का यह टोल सिस्टम किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। अमेरिका का मानना है कि जब तक ईरान इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह प्रतिबंध मुक्त नहीं करता, तब तक कोई कूटनीतिक समझौता असंभव है।

ट्रंप और नेतन्याहू की जुगलबंदी: 'परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म हो'

ईरान की यह तल्खी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों के बाद और ज्यादा बढ़ गई है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा था कि उन्होंने अपने वातार्कारों से कहा है कि वे 'डील के लिए जल्दबाजी न करें, क्योंकि समय हमारे साथ है।' साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी।

इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि उनके और ट्रंप के बीच सहमति बनी है कि ईरान के साथ होने वाले किसी भी अंतिम समझौते का मतलब सिर्फ और सिर्फ 'ईरान के परमाणु खतरे का पूरी तरह खात्मा' होना चाहिए।

पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता भी बेअसर!

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान और चीन मिलकर दोनों देशों के बीच बीच-बचाव करने की कोशिशों में जुटे हैं। सोमवार को ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर शांति बहाली पर चर्चा की थी। लेकिन ईरान के ताजा रुख ने इन कोशिशों पर पानी फेर दिया है।

क्रूड ऑयल मार्केट में हड़कंप

ईरान की इस आक्रामक प्रतिक्रिया के बाद वैश्विक तेल बाजारों में एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल है। इससे पहले जब ट्रंप ने डील के संकेत दिए थे, तब ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) की कीमतों में 5 फीसदी की भारी गिरावट आई थी। लेकिन अब बातचीत टूटने के डर से होर्मुज जलमार्ग पर दोबारा संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।



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Sunday, May 24, 2026

होर्मुज को लेकर आ गई गुड न्यूज...ईरान रास्ता खोलने को हुआ तैयार! इतने दिनों सामान्य होगा जहाजों का ट्रैफिक

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग के कारण बीते दो महीने से होमुर्ज जलमार्ग बंद है, इस कारण दुनिया तेल और गैस की कमी का सामना कर रही है। वहीं अब ईरान ने एक बड़ा ऐलान किया है। उसने कहा है कि अगले 30 दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की तादाद फिर से पहले जैसी हो सकती है। बता दें कि, अमेरिका और ईरान पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध को खत्म करने के लिए समझौते के करीब पहुंच गए हैं।

ईरान का कहना है कि अहम समुद्री रास्ता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही अगले 30 दिनों में फिर से पहले जैसी सामान्य हो सकती है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते को लगभग बंद कर दिया था। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई और कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया। हालात तब और बिगड़ गए, जब अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकेबंदी कर दी।

हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद यह उम्मीद बढ़ गई है कि यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। कई ईरानी और अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि दोनों देश एक “समझौता” (MOU) तैयार करने पर काम कर रहे हैं। इस समझौते का मकसद पिछले कई महीनों से चल रहे संघर्ष को खत्म करना, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ को फिर से खोलना और अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकेबंदी को हटाना बताया जा रहा है।

होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर बड़ा अपडेट

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तैयार हो रहे समझौते में 60 दिनों तक युद्धविराम बढ़ाने की बात शामिल है। इस दौरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ को फिर से खोला जाएगा, ताकि ईरान बिना रोक-टोक अपना तेल बेच सके। साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी बातचीत जारी रहेगी। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तसनीम’ ने बताया कि संभावित समझौते में यह शर्त रखी गई है कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ से गुजरने वाले जहाजों की संख्या 30 दिनों के भीतर युद्ध से पहले जैसी सामान्य हो जाएगी।

ईरान ने मांग की है कि अमेरिका 30 दिनों के अंदर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह हटा ले। इसके अलावा, समझौते के पहले चरण में ईरान के कुछ जब्त किए गए फंड भी जारी किए जाएं। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी भी एक-दो मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं, जिनमें परमाणु कार्यक्रम का मामला भी शामिल है।

समझौते को लेकर सामने आई ‘अच्छी खबर’

रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संकेत दिए कि ईरान के साथ चल रही बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ घंटों में इस मामले में कोई बड़ी घोषणा हो सकती है। नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रूबियो ने कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि अगले कुछ घंटों में दुनिया को कोई अच्छी खबर मिल सकती है।”

उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के रुख को भी दोहराया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि अगर ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद इस समझौता ज्ञापन (MOU) को मंजूरी दे देती है, तो इसे अंतिम मंजूरी के लिए देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के पास भेजा जाएगा। एक्सियोस की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस मसौदा समझौते में ईरान की ओर से यह वादा शामिल है कि वह कभी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा।



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