Thursday, April 16, 2026

Heavy Rain Alert: 18 से 20 अप्रैल के बीच मौसम विभाग ने इन राज्यों में जारी किया भारी बारिश और तूफान का अलर्ट

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 16 अप्रैल 2026 को ताजा बुलेटिन जारी करते हुए देश के कई हिस्सों के लिए दोहरी चुनौती की चेतावनी दी है। एक तरफ जहां पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के राज्यों में 18 से 20 अप्रैल के बीच धुआंधार बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया गया है वहीं मध्य और पूर्वी भारत के कई जिले हीटवेव (लू) की चपेट में रहेंगे।

पूर्वोत्तर में 18-20 अप्रैल के बीच भारी बारिश का अलर्ट

हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आने वाले 48 से 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। अरुणाचल प्रदेश में 18 से 20 अप्रैल के बीच अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश के साथ बिजली गिरने और गरज के साथ तूफान आने की संभावना जताई जा रही है। इसी तरह असम और मेघालय में 16 से 19 अप्रैल के दौरान भी मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। सिक्किम में 18 अप्रैल को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा मिजोरम में 16 अप्रैल यानी आज ओले गिरने की चेतावनी दी गई है।

उत्तर-पश्चिम भारत: पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बौछारें

मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत का मौसम भी बदलेगा. पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में 17 से 19 अप्रैल के बीच बारिश और बर्फबारी के साथ 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। 17 अप्रैल को इन क्षेत्रों में ओलावृष्टि की भी आशंका है। इसके अलावा मैदानी राज्यों पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में 17 अप्रैल को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

मध्य और पूर्वी भारत में हीटवेव (लू) का असर

एक तरफ बारिश का अलर्ट है, तो दूसरी तरफ लू यानी हीटवेव का प्रकोप बढ़ने वाला है. पूर्वी मध्य प्रदेश (16-19 अप्रैल), पश्चिमी मध्य प्रदेश (17-19 अप्रैल), विदर्भ और छत्तीसगढ़ (17-20 अप्रैल) में हीटवेव की स्थिति बनी रहेगी। ओडिशा और झारखंड में 18-20 अप्रैल के दौरान भीषण गर्मी के साथ पारा सामान्य से काफी ऊपर जा सकता है। गुजरात, तमिलनाडु, केरल, कोंकण और तटीय कर्नाटक में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान करेगी।

दक्षिण और पश्चिम भारत का हाल

इसी तरह तटीय आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के अंदरूनी हिस्सों में 16 से 20 अप्रैल के बीच हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 18 से 21 अप्रैल के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है, जिससे तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट आने का अनुमान है।

देश का Temperature Forecast

मध्य भारत: 16 से 19 अप्रैल के दौरान तापमान में 2 डिग्री की वृद्धि होगी, लेकिन 20 अप्रैल के बाद 2-3 डिग्री की गिरावट आ सकती है।

उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली-एनसीआर समेत आसपास के इलाकों में 22 अप्रैल तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।

मौसम विभाग की विशेष सलाह

बिजली से बचाव: पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लोग तूफान के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें।

हीटवेव से बचाव: लू प्रभावित इलाकों में दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहर न निकलें और पर्याप्त पानी पिएं।

गंगा के मैदानी इलाके: 16 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में 50-70 किमी/घंटा की रफ्तार से 'थंडरस्क्वॉल' आने का खतरा है।



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Wednesday, April 15, 2026

सुकन्या योजना से PPF तक... कितना सही है स्मॉल सेविंग्स स्कीम में पैसा लगाना? जानिए फायदे और नुकसान

Small Savings Scheme: जब भी निवेश की बात आती है, सबसे पहले दिमाग में 'सुरक्षा' का ख्याल आता है। यही वजह है कि बहुत से लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे स्मॉल सेविंग स्कीम्स में पैसा लगा देते हैं। जैसे कि सुकन्या समृद्धि योजना, सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम और PPF। ये स्कीम्स आसान लगती हैं, भरोसेमंद लगती हैं और इनमें निवेश करना भी आसान होता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इनमें पैसा लगाते हैं। क्योंकि इन स्कीमों के साथ सरकार की गारंटी भी रहती है।

लेकिन सवाल यह है कि जो चीज सुरक्षित दिखती है, क्या वह हमेशा आपके पैसे के लिए सबसे सही विकल्प भी होती है? सबसे पहले स्मॉल सेविंग स्कीम के फायदे जान लेते हैं। फिर इसकी दिक्कतों को भी समझेंगे।

स्मॉल सेविंग्स स्कीम के फायदे

पैसों की सेफ्टी : सरकार इन स्कीम्स की गारंटी लेती है। मतलब कि आपका पैसा डूबने का खतरा लगभग नहीं के बराबर होता है।

स्थिर और तय रिटर्न : आपको पहले से पता होता है कि कितना रिटर्न मिलेगा। इससे फाइनेंशियल प्लानिंग करना आसान हो जाता है।

बाजार के जोखिम से दूरी : इन स्कीम्स का शेयर बाजार से कोई नाता नहीं। बाजार गिरता भी है, तो आपके निवेश पर असर नहीं पड़ेगा।

टैक्स बेनिफिट : PPF और सुकन्या योजना में निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी- तीनों पर टैक्स नहीं लगता। इससे असली कमाई बढ़ती है।

नियमित आय का विकल्प : SCSS जैसी योजनाएं नियमित ब्याज देती हैं, जो खासकर रिटायर लोगों के लिए फायदेमंद होती हैं।

आसान निवेश : इन स्कीम्स में निवेश करना काफी आसान होता है। यह उन लोगों के लिए अच्छा है जो जटिल फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स से दूर रहना चाहते हैं।

निवेशकों को मिली राहत! छोटी बचत योजनाओं पर सरकार ने नहीं घटाया ब्याज - small savings interest rates unchanged april 2026 ppf nsc sukanya scheme returns remain stable government decision ...

स्मॉल सेविंग स्कीम्स के साथ दिक्कत

स्मॉल सेविंग स्कीम्स सुरक्षित जरूर होती हैं, लेकिन इनकी सबसे बड़ी कमी है लंबा लॉक-इन, जिससे जरूरत के समय पैसा निकालना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा रिटर्न सीमित होता है, जो कई बार महंगाई के बराबर ही रह जाता है, यानी असली कमाई बहुत कम होती है।

कुछ स्कीम्स में ब्याज पर टैक्स भी लगता है, जिससे नेट रिटर्न और घट जाता है। साथ ही ये बाजार से जुड़ी नहीं होतीं, इसलिए ज्यादा ग्रोथ का फायदा नहीं मिलता और आप बेहतर अवसरों से चूक सकते हैं।

स्मॉल सेविंग स्कीम्स निवेशकों की गलती

सबसे बड़ी गलती तब होती है जब लोग सिर्फ 'सुरक्षित' शब्द देखकर अपना पैसा लंबे समय के लिए लॉक कर देते हैं। बिना यह सोचे कि उन्हें भविष्य में इस पैसे की जरूरत पड़ सकती है। यहां जोखिम पैसा खोने का नहीं है, बल्कि जरूरत के समय पैसा न मिल पाने का है।

कागज पर दिखने वाला रिटर्न और असली कमाई अलग हो सकती है। मान लीजिए किसी स्कीम पर 8% ब्याज मिल रहा है, लेकिन अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में हैं, तो आपका वास्तविक रिटर्न करीब 5.6% रह जाएगा। अगर महंगाई भी 5-6% है, तो आपका पैसा असल में ज्यादा नहीं बढ़ रहा, बस अपनी वैल्यू बनाए रख रहा है।

FD vs Small Savings Schemes: किसमें करें निवेश, कौन देगा ज्यादा फायदा; समझिए पूरा हिसाब - fd vs small savings schemes which investment gives better returns for conservative investors | Moneycontrol Hindi

लॉक-इन पीरियड भी एक बड़ा फैक्टर

कई स्मॉल सेविंग स्कीम्स में लंबा लॉक-इन होता है। जैसे PPF में 15 साल का लॉक-इन है। अगर बीच में बेहतर निवेश विकल्प मिल जाएं या आपकी जरूरत बदल जाए, तो आप आसानी से पैसा नहीं निकाल पाएंगे।

आज के समय में सिर्फ सुरक्षित रहना ही काफी नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर पैसा इस्तेमाल कर पाना भी उतना ही जरूरी है। कई बार सही मौके पर निवेश न कर पाना या पैसा फंसा रह जाना भी एक तरह का जोखिम बन जाता है।

सबसे ज्यादा लॉक-इन वाली स्कीम्स

  • सबसे लंबा लॉक-इन Public Provident Fund (PPF) में होता है। इसमें पैसा 15 साल के लिए लॉक रहता है।
  • सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) भी लंबी अवधि की स्कीम है। इसमें निवेश लड़की के 21 साल की उम्र तक या शादी तक लॉक रहता है।
  • नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) में पैसा 5 साल के लिए लॉक रहता है। इसमें बीच में निकासी की सुविधा लगभग नहीं के बराबर होती है।
  • सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) का लॉक-इन 5 साल का होता है। समय से पहले निकासी की सुविधा है, लेकिन पेनल्टी लगती है।

हालांकि, पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (POTD) 1, 2, 3 और 5 साल के विकल्प के साथ आता है। इसमें 6 महीने के बाद प्रीमैच्योर निकासी की सुविधा होती है, लेकिन कुछ पेनल्टी के साथ। किसान विकास पत्र (KVP) में फिक्स लॉक-इन जैसा नहीं है, लेकिन यह करीब 115 महीने (लगभग 9.5 साल) में पैसा डबल करता है।

संतुलन बनाना ही सही तरीका

बेशक स्मॉल सेविंग स्कीम्स आज भी भरोसेमंद हैं, लेकिन इन्हें पूरे निवेश का आधार नहीं बनाना चाहिए। बेहतर तरीका यह है कि आप संतुलन बनाकर चलें। कुछ पैसा सुरक्षित विकल्पों में रखें और कुछ ऐसे निवेश में लगाएं, जहां ग्रोथ और लिक्विडिटी दोनों मिल सकें। जैसे कि म्यूचुअल फंड SIP, शेयर मार्केट या फिर गोल्ड।

क्योंकि निवेश सिर्फ रिटर्न कमाने के लिए नहीं होता, बल्कि सही समय पर सही फैसले लेने की आजादी भी उतनी ही अहम होती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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Tuesday, April 14, 2026

Nifty Outlook: 15 अप्रैल को 24000 पर रहेगी बुल्स की नजर, एक्सपर्ट्स से जानिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

Nifty Outlook: भारतीय शेयर बाजार फिलहाल काफी अजीब लेवल पर है। यहां नीचे की तरफ सपोर्ट बना हुआ है, लेकिन ऊपर जाते ही रुकावट आ रही है। ऐसे में बुधवार को बाजार खुलने पर पिछले दो दिनों के ग्लोबल घटनाक्रम का असर साफ देखने को मिल सकता है।

अगर सोमवार की बात करें, तो वीकली एक्सपायरी और मंगलवार की छुट्टी से पहले बाजार पर दबाव नजर आया। कमजोर ग्लोबल संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के चलते निफ्टी 24,000 के नीचे फिसल गया। हालांकि गिरावट के बाद बाजार ने मजबूती भी दिखाई। निफ्टी ने हाल का गैप भरने की कोशिश की और दिन के निचले स्तर से रिकवरी करते हुए आखिर में 23,800 के ऊपर बंद हुआ।

शुरुआती झटका से संभला बाजार

बाजार की शुरुआत करीब 460 अंकों की गिरावट के साथ हुई थी। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में आई रुकावट रही। लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी आई, जिससे इंडेक्स अपने लो से करीब 300 अंक रिकवर कर सत्र के उच्च स्तर के करीब बंद हुआ।

इन शेयरों में रही हलचल

निफ्टी में HDFC Life, Adani Enterprises और ICICI Bank टॉप गेनर्स रहे। वहीं Eicher Motors, Maruti Suzuki और Bajaj Finance टॉप लूजर्स में शामिल रहे।

इंट्राडे रिकवरी के बावजूद सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी ऑटो, ऑयल एंड गैस और FMCG सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट रही। ब्रॉडर मार्केट भी कमजोर रहे। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.57% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.46% की गिरावट दर्ज की गई।

रुपया भी लगातार कमजोर

रुपया लगातार तीसरे सत्र में कमजोर हुआ और 65 पैसे गिरकर 93.38 पर पहुंच गया। यह दो हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट है, जिसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव है।

गिफ्ट निफ्टी का हाल

गिफ्ट निफ्टी बुधवार के लिए बड़ी राहत का संकेत दे रहा है। यह मंगलवार को 1% से ज्यादा उछाल के साथ 24,000 के अहम लेवल के पार पहुंच गया। इससे बुधवार के सत्र में निफ्टी के लिए गैप-अप ओपनिंग की उम्मीद बढ़ी है। एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख देखने को मिला। जापान और दक्षिण कोरिया का बाजार 2% से ज्यादा उछल गया। वहीं, 14 अप्रैल यानी मंगलवार को अंबेडकर जयंती के वजह से भारतीय शेयर बाजार बंद है।

बुधवार को इन शेयरों पर नजर

बुधवार के सत्र में ICICI Prudential Life, ICICI Prudential AMC और Just Dial जैसे स्टॉक्स अपने तिमाही नतीजों के चलते फोकस में रहेंगे। वहीं LG Electronics India, Bharat Coking Coal और Rubicon Research में लॉक-इन खत्म होने का असर देखने को मिल सकता है।

निफ्टी पर एक्सपर्ट्स की राय

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, सोमवार की कमजोरी के बावजूद बाजार का शॉर्ट टर्म ट्रेंड टूटा नहीं है। उन्होंने 23,500 को अहम सपोर्ट और 24,100 को तुरंत रेजिस्टेंस बताया है।

Centrum Finverse के नीलेश जैन का कहना है कि बाजार की ओवरऑल स्ट्रक्चर अभी भी पॉजिटिव है। जब तक इंडेक्स 23,270 (21 दिन के मूविंग एवरेज) के ऊपर बना रहता है, तब तक 'बाय ऑन डिप्स' की स्ट्रैटेजी काम कर सकती है। अगर 24,000 के ऊपर मजबूत ब्रेक मिलता है, तो शॉर्ट कवरिंग आ सकती है और इंडेक्स 24,200 से 24,400 तक जा सकता है।

20 दिन के EMA पर लिया सपोर्ट

HDFC Securities के नंदीश शाह के मुताबिक, निफ्टी ने 20 दिन के EMA पर सपोर्ट लिया और 300 अंकों से ज्यादा की रिकवरी दिखाई, जो अंदरूनी मजबूती का संकेत है। इंडेक्स अभी 5 दिन और 20 दिन के EMA के ऊपर ट्रेड कर रहा है, जिससे शॉर्ट टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। 23,555 का स्तर मजबूत सपोर्ट रहेगा, जबकि 24,000 से 24,075 का दायरा अहम रेजिस्टेंस रहेगा।

SBI Securities के सुदीप शाह का कहना है कि 55,900 से 56,000 का जोन बैंक निफ्टी के लिए बड़ा रेजिस्टेंस रहेगा। अगर यह 56,000 के ऊपर टिकता है, तो 56,500 और 57,200 तक तेजी आ सकती है। वहीं 55,100 से 55,000 का स्तर अहम सपोर्ट रहेगा।

Gift Nifty: गिफ्ट निफ्टी में उछाल, 15 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में आ सकती है बंपर तेजी

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।



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Monday, April 13, 2026

West Asia Crisis : वेस्ट एशिया में युद्ध से महंगे हुए खिलौने, 70% तक बढ़े रॉ मटेरियल के दाम

West Asia Crisis : वेस्ट एशिया में युद्ध के चलते खिलौने महंगे हो गए हैं। टॉय मैन्युफैक्चरिंग में अहम रॉ-मटेरियल ABS प्लास्टिक और ग्रेन्यूल्स के दामों में पिछले 2 महीनों में करीब 70-80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही इंपोर्टेड कंपोनेंट की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है,जिससे घरेलू बाजार में खिलौनों की कीमत 20 फीसदी तक बढ़ गई है। सीएनबीसी-आवाज़ संवाददाता आलोक प्रियदर्शी ने दिल्ली के झंडेवालान टॉय मार्केट का जायजा लिया। इससे पता चलता है कि युद्ध के चलते खिलौने महंगे हो गए हैं। इससे भारतीय खिलौनों का बाजार प्रभावित हुआ है।

 प्लास्टिक की लागत बढ़ने से खिलौने भी हुए महंगे 

जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव की शुरुआत हुई है तब से कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी देखने को मिली है। इसके कारण कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत बढ़ती जा रही है। जिसका असर अब प्लास्टिक की लागत में तेजी के तौर पर भी देखने को मिल रहा है। प्लास्टिक की लागत बढ़ने से खिलौने भी महंगे हो रहे हैं।

ग्लोबल टेंशन से घरेलू बाजार में महंगे हुए खिलौने

ग्लोबल टेंशन से रॉ मटेरियल के दामों में 70 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। ABS,PP,PVC और रेजिंस की कीमतें बढ़ीं हैं। चीन और ताइवान से आने वाले इंपोर्टेड कंपोनेंट की सप्लाई में भी दिक्कत आ रही है। घरेलू टॉय मैन्युफैक्चरिंग का सालाना टर्नओवर करीब 2-3 अरब डॉलर है। खिलौनों का सालाना एक्सपोर्ट करीब 15 करोड़ डॉलर का है। खिलौनों की मैन्युफैक्चरिंग में 4000 से ज्यादा MSMEs यूनिटें शामिल हैं।

प्लास्टिक की कीमतों में 70% की बढ़त

ऑल इंडिया टॉय मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शब्बीर गबाजीवाला ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ रहे तनाव के कारण प्लास्टिक की कीमतों में 70% की वृद्धि हो चुकी है। 100 रुपये प्रति किलो के भाव से मिलने वाली प्लास्टिक की कीमत 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। हालांकि युद्ध विराम की खबरों ने थोड़ी राहत दी जिसके बाद प्लास्टिक की कीमत 150 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है।

कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के पार 

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता फेल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में फिर आग लग गई है। अमेरिका की होर्मुज की नाकेबंदी की धमकी के बाद कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के पार निकल गई हैं। पिछले एक महीने में ही क्रूड की कीमतों में करीब 12% का उछाल आ चुका है।

 

 

Market outlook : 13 अप्रैल को गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 15 अप्रैल को कैसी रह सकती है इसकी चाल



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Sunday, April 12, 2026

Asha Bhosle Death: खुशी से लेकर उदासी तक... हर एहसास की आवाज हुई खामोश! सुरों की दुनिया में अमर हुईं आशा भोसले

Asha Bhosle Death: खुशी से लेकर उदासी भरे नगमों तक और पॉप से लेकर गजलों तक, हर संगीत को अपने सुरों से अमर करने वाली आशा भोसले के निधन के साथ ही भारतीय संगीत की वह बहुरंगी आवाज खामोश हो गई। उन्होंने पीढ़ियों तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया। अपनी अनूठी आवाज से हिंदी पार्श्व गायन में अलग मुकाम हासिल करने वाली दिग्गज गायिका आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं।

आशा भोसले ने अपनी बहन एवं महान गायिका लता मंगेशकर की छाया में रहकर अपनी अलग पहचान बनाई थी। दोनों बहनों ने मिलकर करीब सात दशक तक हिंदी पार्श्वगायन को अपने सुरों से समृद्ध किया। वह एक ऐसे भारत की पहचान बनीं, जो बदलते समय के साथ दुनिया से कदमताल कर रहा था।

लता और आशा दोनों ऐसी आवाजें थीं, जिन्होंने पूरे उपमहाद्वीप पर राज किया। ऐसी साझा पहचान बनाई, जो सीमाओं से परे थी। यह संयोग ही है कि संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली दोनों बहनों ने 92 वर्ष की आयु में ही दुनिया को रविवार (12 अप्रैल) के दिन अलविदा कहा। बड़ी बहन लता मंगेशकर को पहले शोहरत मिली। लेकिन जिंदादिल आशा ने भी जल्द ही अपनी अलग जगह बना ली और अपनी जीवंतता एवं अद्भुत बहुमुखी प्रतिभा से संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।

आशा भोसले ने 2023 में अपने 90वें जन्मदिन से पहले पीटीआई से कहा था, "हमारी सांस नहीं होती, तो आदमी मर जाता है। मेरे लिए संगीत मेरी सांस है। मैंने अपनी जिंदगी इसी सोच के साथ बिताई है।" रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस लेने वाली आशा भोसले की बहुरंगी आवाज ने एक ओर जहां श्रोताओं को 'आजा, आजा' जैसे जोशीले गीत पर थिरकने को मजबूर किया, तो दूसरी ओर 'जुस्तजू जिसकी थी' जैसे शास्त्रीय विधा वाले गीतों के साथ उन्हें भावनाओं की गहराई में उतारा।

उन्होंने दोनों तरह के गीतों को समान सहजता से निभाया। आशा भोसले को संगीत की दुनिया में केवल उनके लंबे सफर ने सबसे अलग नहीं बनाया, बल्कि हर दौर में खुद को समय के अनुसार नए सिरे से गढ़ लेने की उनकी अद्भुत क्षमता ने भी उन्हें अलग पहचान दिलाई। श्वेत-श्याम सिनेमा से लेकर वैश्विक मंचों तक, ग्रामोफोन रिकॉर्ड से लेकर स्ट्रीमिंग के दौर तक, उन्होंने अपनी आवाज को समय के अनुसार लगातार नया रूप दिया। इसी वजह से वह हर पीढ़ी में प्रासंगिक बनी रहीं।

मीना कुमारी और मधुबाला से लेकर काजोल और उर्मिला मातोंडकर तक परदे की नायिकाएं बदलती रहीं। लेकिन आशा एक ऐसी कड़ी बनी रहीं, जिसने अतीत को वर्तमान से जोड़े रखा। साड़ी पहने, माथे पर सलीके से सजी बिंदी और करीने से बंधे बाल आशा भोसले की यही छवि उनके प्रशंसकों के दिलों में सदा जीवित रहेगी।

12,000 गीत गाए

उन्होंने करीब 12,000 गीत गाए, जिनमें से ज्यादातर हिंदी में थे। लेकिन उन्होंने इसके अलावा लगभग 20 अन्य भाषाओं में भी गीतों को आवाज दी। यह एक ऐसा विराट सफर है, जिसे एक साथ समेट पाना आसान नहीं। आशा और उनके भाई-बहनों- लता, उषा, मीना और हृदयनाथ के लिए संगीत केवल पेशा नहीं, शायद नियति भी था। जहां लता और उषा गायिका थीं। वहीं मीना और हृदयनाथ संगीतकार हैं।

10 साल की उम्र में गाया पहला गाना

वर्ष 1933 में जन्मीं आशा को उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर ने अपने अन्य बच्चों की तरह शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी। उन्होंने अपने पिता के निधन के बाद मात्र 10 वर्ष की उम्र में अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया। यह 1943 में फिल्म 'माझा बाल' के लिए गाया मराठी गीत 'चला चला नव बाला' था। उन्होंने 1948 में 'चुनरिया' के लिए 'सावन आया..' गीत के साथ हिंदी फिल्म गायन के क्षेत्र में कदम रखा।

फिल्म जगत में उनके शुरुआती वर्ष संघर्ष भरे रहे। उन्हें शुरुआत में कमतर दर्जे की फिल्मों में गाने के लिए ही चुना जाता था। पहले से ही अपनी मजबूत पहचान बना चुकी लता की छाया से बाहर आना भी उनके लिए चुनौती थी।

लेकिन आशा ने कुछ ऐसा किया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। उन्होंने पार्श्वगायिका होने के मायने ही बदल दिए। उन्हें बड़ी सफलता 1950 के दशक में मिली। उन्हें खासकर संगीतकार ओ. पी. नैयर के साथ उनके जोशीले और चुलबुले गीतों ने नयी पहचान दी। उस समय पार्श्वगायन पर शास्त्रीय शुद्धता की ज्यादा छाप थी। लेकिन आशा ने उसमें अदा, शोखी और आधुनिकता का रंग भरा।

वह क्लब गीतों, कैबरे गीतों और प्रेम गीतों की आवाज बन गईं। ये ऐसे क्षेत्र थे, जिन्हें अपनाने में अन्य गायक संकोच करते थे। उनके करियर का अगला मोड़ तब आया जब 1960 और 1970 के दशक में आर. डी. बर्मन के साथ उनकी साझेदारी ने हिंदी फिल्म संगीत को नयी दिशा दी।

फेमस गाने

'पिया तू अब तो आजा' और 'दम मारो दम' जैसे गीतों ने उनकी बेजोड़ बहुमुखी प्रतिभा को सामने रखा। उनकी आवाज में मादकता भी थी, शरारत भी, विद्रोह भी था, प्रेम भी और दर्द भी लेकिन हर बार उसमें भावों की गहराई थी। आशा ने 'मांग के साथ', 'अभी न जाओ छोड़ कर', 'पिया तू अब तो आजा', 'दम मारो दम' और 'मेरा कुछ सामान' जैसे कई यादगार गीत गाए।

आशा ने 'दिल चीज क्या है' जैसी गजलों, शास्त्रीय गीतों, पॉप संगीत के क्षेत्रों के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्हें कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, अनेक फिल्मफेयर पुरस्कार, भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वैश्विक संगीत इतिहास में संभवतः सबसे लंबे समय तक सक्रिय रहने वाली गायिकाओं में शामिल आशा का निजी जीवन भी उनके पेशेवर जीवन की तरह साहसी फैसलों से भरा रहा।

निजी जिंदगी

हमेशा विद्रोही स्वभाव की मानी जाने वाली आशा ने 1949 में केवल 16 वर्ष की आयु में अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध गणपतराव भोसले से विवाह किया। यह विवाह सफल नहीं रहा। लेकिन गणपतराव ने आशा को गायिका बनने के लिए प्रेरित किया। जब यह रिश्ता समाप्त हुआ, तब आशा के दो बच्चे थे। वह अपने तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं।

इसके बाद वह अपने मायके लौट आईं और उन्होंने अपने संगीत सफर को फिर से आगे बढ़ाया। शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादातर खलनायिकाओं और नर्तकियों के लिए गीत मिलते थे। कभी-कभी उन्हें कुछ लोकप्रिय फिल्मों में एक-दो गीत गाने का मौका मिलता, जैसे राज कपूर की टबूट पॉलिश' में उनका लोकप्रिय गीत 'नन्हे मुन्ने बच्चे'।

उनके करियर ने तब नयी उड़ान भरी, जब नैयर ने उन्हें 'नया दौर' में मौका दिया, जिसमें उन्होंने वैजयंतीमाला के लिए 'मांग के साथ तुम्हारा' गाया। इस गीत ने उनके लिए उद्योग में कई नए दरवाजे खोल दिए। इसके बाद उन्होंने 'वक्त' एवं 'गुमराह' जैसी फिल्मों के लिए गीतों को अपनी आवाज दी।

बाद के आशा ने संगीतकार आर. डी. बर्मन से विवाह किया, जिनके साथ उन्होंने कई चर्चित गीत दिए। अलग-अलग दशकों में रिलीज हुईं 'उमराव जान' और 'रंगीला' दो ऐसी फिल्में हैं, जो गायन की विभिन्न विधाओं में उनकी पकड़ की बेहतरीन मिसाल हैं। एक ओर 'दिल चीज…' है, तो दूसरी ओर 'तन्हा तन्हा...'।

आशा के परिवार में उनके बेटे आनंद हैं। उनके एक बेटे हेमंत का 2015 में स्कॉटलैंड में कैंसर से निधन हो गया था। पत्रकार के रूप में काम करने वाली उनकी बेटी वर्षा का 2012 में निधन हो गया था।

इंटरनेशनल पहचान

आशा ने केवल फिल्मी गीतों के लिए ही आवाज नहीं दी। उन्होंने 1990 के दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने बॉय जॉर्ज के 'बाउ डाउन मिस्टर' में अपनी आवाज दी और बॉय बैंड 'कोड रेड' के साथ भी गाया।

उसी वर्ष उन्हें 'लेगेसी' के लिए पहली बार ग्रैमी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। उन्होंने 'इंडीपॉप' को भी उसी निडरता के साथ अपनाया। उनके 1997 में रिलीज हुए गैर-फिल्मी एलबम 'जानम समझा करो' का 'रात शबनमी' गीत काफी लोकप्रिय हुआ। इस गीत ने उन्हें एमटीवी और चैनल वी पुरस्कार दिलाए। साथ ही ऐसे श्रोताओं की पीढ़ी तक पहुंचाया, जो रीमिक्स के दौर में बड़ी हुई थी।

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उन्होंने अदनान सामी के साथ 'कभी तो नजर मिलाओ' और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ब्रेट ली के साथ 'यू आर द वन फॉर मी' तथा 'हां मैं तुम्हारा हूं..' जैसे गीत दिए। उन्हें 2006 में दूसरा ग्रैमी नामांकन 'यू हैव स्टोलन माई हार्ट: सांग्स फ्रॉम आर. डी. बर्मन्स बॉलीवुड' के लिए मिला।

स्वयं को लगातार नए रूप में ढालती रहने वाली आशा ने सोशल मीडिया पर भी अपनी पहचान बनाए रखी। इंस्टाग्राम पर उनके 7.5 लाख से अधिक फोलोवर्स हैं। उनके जाने से भारतीय संगीत का एक पूरा युग मौन हो गया है।



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Saturday, April 11, 2026

Akshay Kumar: अक्षय कुमार की एक झलक पाने को नोएडा के मॉल में उमड़ा जनसैलाब, एक्टर ने 36 साल के करियर में पहली बार देखा ऐसा नजारा

बॉलीवुड के 'खिलाड़ी' अक्षय कुमार अक्सर अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए अलग-अलग शहरों का रुख करते हैं, लेकिन हाल ही में नोएडा में जो हुआ, उसने खुद अक्षय को भी हैरान कर दिया। अपनी आगामी हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'भूत बंगला' के प्रमोशन के लिए अक्षय कुमार शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित गौर सिटी मॉल पहुंचे थे। वहां जुटी हजारों की भीड़ को देखकर अक्षय के मुंह से निकला— "मुझे इंडस्ट्री में 36 साल हो गए हैं, लेकिन किसी मॉल के अंदर मैंने आज तक इतने लोग नहीं देखे।"

प्रमोशन के दौरान दिखा फैंस का जबरदस्त क्रेज

अक्षय कुमार के साथ उनकी सह-कलाकार वामिका गब्बी और मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव भी इस इवेंट का हिस्सा थे। जैसे ही सितारों ने मॉल में कदम रखा, फैंस का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि मॉल की हर मंजिल लोगों से खचाखच भरी हुई थी। लोग न केवल गैलरी में खड़े थे, बल्कि कई फैंस तो अक्षय की एक झलक पाने के चक्कर में मॉल की एस्केलेटर की रैलिंग और ऊपरी मंजिलों के खतरनाक किनारों पर भी लटके नजर आए।

'भूत बंगला' की टीम ने किया दर्शकों का मनोरंजन

मॉल के ग्राउंड फ्लोर पर बनाए गए एक अस्थाई मंच से अक्षय और उनकी टीम ने भीड़ का अभिवादन किया। सितारों ने वहां मौजूद हजारों लोगों के साथ बातचीत की और अपनी फिल्म 'भूत बंगला' के बारे में मजेदार बातें साझा कीं। यह फिल्म इसलिए भी खास है क्योंकि इसके जरिए अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की सुपरहिट जोड़ी करीब 14 साल बाद पर्दे पर वापसी कर रही है। फिल्म में अक्षय और राजपाल के अलावा तब्बू, परेश रावल और असरानी जैसे दिग्गज कलाकार भी नजर आएंगे।

उत्साह के बीच 'सिविक सेंस' पर उठे सवाल

जहां एक ओर अक्षय की लोकप्रियता की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर इस कार्यक्रम के बाद मॉल की स्थिति को लेकर इंटरनेट पर तीखी बहस छिड़ गई है। इवेंट खत्म होने के बाद के कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें भीड़ द्वारा मॉल के स्टैंडीज, सजावट और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाते हुए देखा जा सकता है।

सोशल मीडिया यूजर्स ने इस व्यवहार की कड़ी आलोचना की है। एक यूजर ने लिखा, "अक्षय कुमार एक अच्छे अभिनेता हैं, लेकिन उनके लिए अपनी जान जोखिम में डालना समझदारी नहीं है।" वहीं कई लोगों ने मॉल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए कि इतनी बड़ी भीड़ को इस तरह खतरनाक तरीके से रैलिंग पर चढ़ने की अनुमति कैसे दी गई।

कब रिलीज होगी फिल्म?

अक्षय कुमार की यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 'भूत बंगला' 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। नोएडा में मिले इस अभूतपूर्व प्यार ने यह तो साफ कर दिया है कि दर्शकों के बीच अक्षय और प्रियदर्शन की कॉमेडी का जादू आज भी बरकरार है।



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Friday, April 10, 2026

UP SIR: यूपी में बढ़े 84 लाख वोटर, फाइनल लिस्ट में भी नहीं है नाम, तो ये फॉर्म भरकर जुड़वाएं नाम

उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइल आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। यूपी में कुल मतदाताओं की संख्या 84 लाख से अधिक बढ़कर 13.39 करोड़ हो गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने कहा कि एसआईआर में मतदाता सूची का प्रकाशन हो गया है। 27 अक्टूबर को एसआईआर कराने की घोषणा हुई और 4 नवंबर से ये प्रक्रिया शुरू हुई।

166 दिनों तक चली प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिन्वा ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 से 10 अप्रैल 2026 तक चलाई गई। इस दौरान राज्य के सभी 75 जिले, 403 विधानसभा क्षेत्र और सभी मतदान केंद्र शामिल किए गए। उन्होंने बताया कि 166 दिन तक चली इस प्रक्रिया को 75 जिला निर्वाचन अधिकारियों, 403 निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, 12,758 सहायक अधिकारियों, 18,026 बूथ स्तर के पर्यवेक्षकों और 1,77,516 बूथ स्तर के अधिकारियों की मदद से पूरा किया गया।

इसके अलावा, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के 5,82,877 बूथ स्तर के एजेंटों और करोड़ों मतदाताओं ने भी इसमें सहयोग दिया। लोगों को जागरूक करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया ने भी अहम भूमिका निभाई। नवदीप रिन्वा ने यह भी बताया कि 6 जनवरी को जारी मसौदा मतदाता सूची में कुल 12,55,56,025 मतदाता शामिल थे। इनमें 6.88 करोड़ पुरुष, 5.67 करोड़ महिला और 4,119 तीसरे लिंग के मतदाता थे।

सामने आए ये आंकड़े

नवदीप रिन्वा ने बताया कि, पहले 18-19 साल के मतदाताओं की संख्या 3,33,981 थी। उस समय हर 1,000 पुरुष मतदाताओं पर 824 महिला मतदाता थीं। उन्होंने जानकारी दी कि 10 अप्रैल को जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, अब कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 13,39,84,792 हो गई है। इनमें 7,30,71,071 पुरुष (लगभग 54%), 6,09,09,525 महिलाएं (करीब 45.46%) और 4,206 तीसरे लिंग के मतदाता शामिल हैं। 18-19 साल के मतदाताओं की संख्या अब बढ़कर 17,63,360 हो गई है, जो कुल मतदाताओं का 1.32% है। वहीं, लिंग अनुपात भी सुधरकर अब हर 1,000 पुरुषों पर 834 महिलाएं हो गया है। ड्राफ्ट और फाइनल सूची की तुलना में कुल मतदाताओं की संख्या में 84,28,767 की बढ़ोतरी हुई है। इसमें 42,27,902 पुरुष, 42,00,778 महिला और 87 तीसरे लिंग के मतदाता बढ़े हैं। साथ ही, 18-19 साल के आयु वर्ग में 14,29,379 नए मतदाता जुड़े हैं और लिंग अनुपात में भी 10 अंकों का सुधार हुआ है, जो 824 से बढ़कर 834 हो गया है।

प्रयागराज में बढ़े सबसे ज्यादा वोटर

जिलों की बात करें तो प्रयागराज में सबसे ज्यादा 3,29,421 नए मतदाता जुड़े। इसके बाद लखनऊ में 2,85,961, बरेली में 2.57 लाख से ज्यादा, गाज़ियाबाद में 2,43,666 और जौनपुर में 2,37,590 वोटरों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिन्वा ने कहा कि मतदाता सूची को बेहतर बनाने का काम सफलतापूर्वक पूरा हुआ है। यह पूरे राज्य में चुनाव अधिकारियों, राजनीतिक दलों और मतदाताओं के मिलकर किए गए प्रयासों का नतीजा है। विधानसभा क्षेत्रों के स्तर पर गाजियाबाद के साहिबाबाद में सबसे ज्यादा 82,898 नए वोटर जुड़े। इसके बाद जौनपुर (विधानसभा क्षेत्र संख्या 366) में 56,118 मतदाता बढ़े। इसके अलावा लखनऊ पश्चिम में 54,822, गाज़ियाबाद के लोनी में 53,679 और फिरोजाबाद विधानसभा क्षेत्र में 47,757 नए मतदाता जोड़े गए।

फॉर्म-6 के तहत जुड़वा सकेंगे नाम

नवदीप रिन्वा ने बताया कि मतदाता सूची सुधार के दौरान करीब 1.04 करोड़ वोटरों को “नॉन-मैप्ड” पाया गया, यानी उनका पता सही तरीके से दर्ज नहीं था। वहीं, 2.22 करोड़ मामलों में अलग-अलग तरह की गड़बड़ियां सामने आईं। उन्होंने साफ कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी मतदाता का नाम बिना सही जांच और नियमों का पालन किए नहीं हटाया गया। उनका कहना है कि अगर किसी का नाम ड्राफ्ट सूची में था लेकिन फाइनल सूची में नहीं है, तो उसके पीछे या तो फॉर्म-6 के तहत किया गया आवेदन है या फिर संबंधित अधिकारी द्वारा सुनवाई के बाद लिया गया फैसला है। किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल नहीं हो पाया है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म 6 भरकर आवेदन कर अपना नाम जुड़वा सकता है।



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