Thursday, March 5, 2026

EPF, NPS और पीपीएफ, इन तीनों में से किसमें निवेश करने पर मुझे सबसे ज्यादा फायदा होगा?

बात जब रिटायरमेंट प्लानिंग की होती है तो इनवेस्टर्स अक्सर ईपीएफ, पीपीएफ और एनपीएस के बीच कनफ्यूज्ड हो जाते हैं। सच यह है कि इन तीनों पर विचार करते वक्त न सिर्फ रिटर्न पर गौर करना जरूरी है बल्कि टैक्स और रिस्क को भी ध्यान में रखना जरूरी है। हालांकि, रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए ये तीनों बहुत अच्छे विकल्प हैं।

पीपीएफ, EPF, NPS की खास बातें

Employees' Provident Fund (EPF) नौकरी करने वाले लोगों के लिए अनुशासित निवेश का सबसे अच्छा विकल्प है। इसमें हर महीने सैलरी (बेसिक प्लस डीए) का एक हिस्सा इसमें जमा होता है। एंप्लॉयर भी उतना ही पैसा आपके ईपीएफ अकाउंट में हर महीने जमा करता है। Public Provident Fund (PPF) लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार करने का सबसे पुराना और लोकप्रिय विकल्प है। National Pension System (NPS) तीनों विकल्पों में से सबसे नया है। इसकी खास बात यह है कि यह मार्केट-लिंक्ड इनवेस्टमेंट ऑप्शन है।

पीपीएफ टैक्स के लिहाज से काफी अट्रैक्टिव

प्लानरुपी इनवेस्टमेंट सर्विसेज के फाउंडर अमोल जोशी ने कहा, "हर प्रोडक्ट का अपना नफा-नुकसान है। पीपीएफ EEE यानी एग्जेम्प्ट, एग्जेम्प्ट, एग्जेम्प्ट के तहत आता है। इसका मतलब है कि कंट्रिब्यूशन, इंटरेस्ट और मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगता है। लेकिन, इसमें निवेश की सालाना लिमिट 1.5 लाख रुपये है। एनपीएस का अपना अलग टैक्स-डिडक्शन सेक्शन है। लेकिन लिक्विडिटी और एन्युटी की वजह से इसे सब लोग पंसद नहीं करते हैं।"

तीनों स्कीम में रिस्क नहीं के बराबर

जोशी का कहना है कि इन तीनों में ऐसा कोई सिंगल प्रोडक्ट नहीं है जो सभी के लिए समान रूप से बेस्ट हो। इनवेस्टर को लिक्विडिटी, इनवेस्टमेंट पीरियड और टैक्सेशन को ध्यान में रख इनमें से किसी एक या दो का चुनाव करना ठीक रहेगा। तीनों प्रोडक्ट्स में रिस्क नहीं के बराबर है। इसकी वह यह है कि इन तीनों स्कीमों को सरकार का सपोर्ट हासिल है। इन तीनों के नियम और शर्तें स्पष्ट हैं। तीनों में बड़ी संख्या में लोग इनवेस्ट करते आ रहे हैं।

ईपीएफ सिर्फ नौकरी करने वाले लोगों के लिए

ईपीएफ ऐसी स्कीम है, जिसमें सिर्फ नौकरी करने वाले लोग कंट्रिब्यूट करते हैं। यह ऑप्शनल नहीं है। हर महीने एंप्लॉयी की सैलरी का एक हिस्सा इसमें जमा होता है। एंप्लॉयर भी उतना ही पैसा इसमें हर महीने जमा करता है। इससे लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार हो जाता है। इसमें रिस्क नहीं के बराबर है। रिटायरमेंट पर मिलने वाला पैसा टैक्स-फ्री होता है। खास बात यह है कि इस पर मिलने वाला सालाना रिटर्न काफी अट्रैक्टिव है। इससे लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है।

पीपीएफ में 15 सालों तक निवेश की शर्त

नौकरी करने वाले और नौकरी नहीं करने वाले, दोनों तरह के इनवेस्ट पीपीएफ में निवेश कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि 15 साल तक निवेश करने पर उनके लिए आसानी से बड़ा फंड तैयार हो जाता है। खासकर, अगर इनवेस्टर शेयरों से जुड़े किसी स्कीम में निवेश नहीं करना चाहता है तो पीपीएफ उसके लिए बेस्ट है। टैक्स के नियम इसका अट्रैक्शन काफी बढ़ा देते हैं। इससे रियल रिटर्न बढ़ जाता है।

आपके लिए तीनों में से कौन है बेस्ट?

एनपीएस उन लोगों के लिए सही है, जो मार्केट लिंक्ड स्कीम में निवेश करना चाहते हैं। मार्केट लिंक्ड रिटर्न की वजह से लंबी अवधि में इसका रिटर्न काफी अट्रैक्टिव है। इसमें टैक्स बेनेफिट भी मिलता है। हाल में पीएफआरडीए ने एनपीएस के नियमों में कई बदलाव किए हैं, जिससे इसका अट्रैक्शन और बढ़ गया है।

यह भी पढ़ें: Income Tax: मैं नई रीजीम में स्विच करने के बारे में सोच रहा हूं? क्या मुझे PPF, ELSS में निवेश जारी रखना चाहिए?

इनवेस्टर अगर चाहे तो वह इन तीनों स्कीम में निवेश कर सकता है। हालांकि, तीनों में निवेश का विकल्प सिर्फ नौकरी करने वाले लोगों के लिए है। जो लोग नौकरी नहीं करते हैं वे पीपीएफ और एनपीएस में निवेश कर सकते हैं। अगर कोई इनवेस्टर मार्केट लिंक्ड इनवेस्टमेंट ऑप्शन में निवेश नहीं करना चाहता तो पीपीएफ उसके लिए बेस्ट रहेगा।



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Wednesday, March 4, 2026

SA vs NZ T20 World Cup Match Live Score: मुश्किल में साउथ अफ्रीका की टीम, आधी टीम लौटी पवेलियन

SA vs NZ T20 World Cup Match Score: टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले में साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड की टीम आमने-सामने हैं। कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान में खेले जा रहे इस मैच में न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। सेमीफाइनल मुकाबले में साउथ अफ्रीका की टीम पहले बल्लेबाजी कर रही है।

टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने आई साउथ अफ्रीका की टीम को दूसरे ओवर में दो बड़े झटके लगे हैं। कोल मैककॉन्ची ने क्विंटन डी कॉक 10 रन और रयान रिकेल्टन बिना खाता खोले आउट किया। 2 ओवर के बाद साउथ अफ्रीका का स्कोर 2 विकेट के नुकसान पर 16 रन है।

8वें ओवर में 55 रन के स्कोर पर साउथ अफ्रीका को तीसरा झटका लगा है। रचिन रवींद्र की गेंद पर एडेन मार्करम 18 रन बनाकर आउट हुए। एडेन मार्करम और डेवाल्ड ब्रेविस के बीच 35 गेंदों में 43 रन का साझेदारी हुई थी। 8 ओवर के बाद साउथ अफ्रीका का स्कोर 3 विकेट के नुकसान पर 57 रन है।

10वें ओवर में साउथ अफ्रीका को चौथा झटका लगा है। रचिन रवींद्र की गेंद पर डेविड मिलर 6 रन बनाकर आउट हुए। डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रेविस के बीच 14 गेंदों में 22 रन का साझेदारी हुई थी। वहीं 11वें ओवर में जेम्स नीशम ने डेवाल्ड ब्रेविस 34 रन पर पवेलियन भेजा। साउथ अफ्रीका का स्कोर 5 विकेट के नुकसान पर 77 रन है।

साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच ये सेमीफाइनल मुकाबला फाइनल में पहुंचने वाली पहली टीम तय करेगा। दोनों ही टीमें इस मैच को जीतकर फाइनल में अपनी जगह बनाना चाहेंगी। सेमीफाइनल में भारत, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड ने जगह बनाई है। टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला 5 मार्च को भारत और इंग्लैंड के बीच मुंबई में खेला जाएगा।



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Dollar Vs INR : रुपया नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर हुआ बंद, जल्द ही छू सकता है 93 रुपये का लेवल!

Currency Check : बुधवार 4 मार्च को भारतीय रुपया 67 पैसे गिरकर 92.14 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ,जबकि सोमवार को यह 91.47 पर बंद हुआ था। ट्रेडर्स के मुताबिक इंट्राडे में रुपया 92.31 तक गिर गया। हमारी करेंसी में आज करीब 70 पैसे की गिरावट आई,जो हाल के महीनों की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। भारतीय रुपया इतिहास में पहली बार 92 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ है। मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ने से इन्वेस्टर्स US डॉलर और सोने जैसे सेफ-हेवन एसेट्स की ओर भाग रहे हैं, इसके चलते रुपए पर दबाव बन रहा है।

ऐसे में अब एनालिस्ट और डीलर्स को डर है कि अगर RBI करेंसी में और ज़्यादा गिरावट को रोकने के लिए डॉलर बेचने के साथ स्पॉट और ऑफ़शोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में दखल नहीं देता तो आने वाले दिनों में रुपया 93 रुपये प्रति डॉलर के निशान से भी नीचे गिर सकता है। बता दें कि जब रुपया 91 रुपये प्रति डॉलर के करीब था तब RBI ने गिरावट को रोकने के लिए दखल दिया था।

OCBC बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट लावण्या वेंकटेश्वरन ने कहा RBI लिक्विडिटी की स्थिति को मैनेज करने के लिए बहुत सोच-समझकर काम किया है। ग्रोथ की तस्वीर मज़बूत है। ये अच्छी बात है। इससे पॉलिसी बनाने वालों को काउंटर-साइक्लिकल पॉलिसी से निपटने के लिए एक बफ़र मिलता है।

4 मार्च को, रुपया डॉलर के मुकाबले 92.15 रुपये पर बंद हुआ, जबकि पिछले सेशन में यह 91.47 रुपये था। ट्रेडर्स के मुताबिक, दिन में रुपया 92.31 तक गिर गया, जिसके बाद RBI के रुपये में फ्री फॉल को रोकने के लिए मार्केट में मौजूद रहने की उम्मीद है। करेंसी एक ही दिन में लगभग 70 पैसे गिरी, जो हाल के महीनों में सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट में से एक है।

HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार का कहना है कि भारतीय रुपये में मई 2025 के बाद से दो सेशन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। एनर्जी की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ने और बढ़ते ट्रेड डेफिसिट के डर को बढ़ा दिया। बाजार में जोखिम से बचने की भावना के साथ-साथ एनर्जी लागत बढ़ने के कारण शॉर्ट टर्म में करेंसी पर दबाव बने की उम्मीद है।

इन्वेस्टर मिडिल ईस्ट संघर्ष पर करीब से नज़र रख रहे हैं। अगर यह गतिरोध लंबे समय तक बना रहता है तो एनर्जी और कीमती मेटल की इंपोर्ट लागत बढ़ सकती है, जबकि एक्सपोर्ट ग्रोथ में रुकावट आ सकती है। स्पॉट USDINR को 92.60 पर तत्काल रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है,जबकि इसके लिए अहम सपोर्ट 91.80 पर बना हुआ है।

Market Mayhem: डेली चार्ट पर निफ्टी 24570–24600 के अहम सपोर्ट से नीचे फिसला, क्या अब देखने को मिलेगी एक रिलीफ रैली?

कोटक सिक्योरिटीज के हेड करेंसी और कमोडिटी रिसर्च, अनिंद्य बनर्जी का कहना है कि US$-INR स्पॉट मार्केट में 92.30 के करीब नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी और ईरान-US और इज़राइल के बीच बढ़ते झगड़े के बीच ग्लोबल मार्केट में डॉलर की सप्लाई में कमी से कारण रुपए पर दबाव बढ़ा है। उम्मीद है कि RBI समय-समय पर बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव और रुपये में बेतरतीब गिरावट को रोकने के लिए दखल देगा। हालांकि,जब तक क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी,रुपये पर गिरावट का दबाव बना रह सकता है।

अगर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति खराब बनी रहती है तो तेल की कीमतें और ज़्यादा बढ़ेंगी,जिससे रुपए पर और दबाव आ सकता है। वहीं, अगर मिडिल ईस्ट में स्थितियों में सुधार के संकेत मिलते हैं तो क्रूड ऑयल की कीमतें स्थिर हो सकती हैं और रुपये को कुछ राहत मिल सकती है। उम्मीद है कि निकट भविष्य में USDINR स्पॉट 91–93 रुपए की रेंज में ट्रेड करेगा।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।



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Tuesday, March 3, 2026

Holi Special: बॉलीवुड की इन फिल्मों से बनीं होली की रंगीन यादें, मूवी के प्लॉट ने क्रिएट की जबरदस्त सीन

Holi Special: होली का त्योहार रंगों, उमंग और नई शुरुआत का प्रतीक है, और बॉलीवुड ने इसे अपनी कई यादगार फिल्मों में ऐसा इस्तेमाल किया कि ये सीन पूरी कहानी का टर्निंग पॉइंट बन गए। रंगों की भवें भरते ये दृश्य न केवल मनोरंजन देते हैं, बल्कि प्यार, दुश्मनी, रहस्य या संघर्ष को उजागर कर देते हैं। होली 2026 के उत्साह के बीच इन फिल्मों को याद करना मजेदार है, जहां त्योहार ने स्क्रिप्ट को हमेशा के लिए बदल दिया।

शोले:

रमेश सिप्पी की कल्ट क्लासिक 'शोले' (1975) में होली का गाना 'होली के दिन दिल खिल जाते हैं' फिल्म का पहला बड़ा एक्शन मोमेंट लाता है। अमिताभ बच्चन (जय) और धर्मेंद्र (वीरू) रंगों की होली खेलते गांववालों संग नाच-गान कर रहे होते हैं। तभी खूंखार डाकू गब्बर सिंह (अमजद खान) की धमाकेदार एंट्री होती है। जय रंगों की थाली फेंक गब्बर की आंखों में धूल झोंकता है, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो जाती है। यहीं ठाकुर के हाथ कटने की फ्लैशबैक स्टोरी भी खुलती है। यह सीन रामगढ़ की होली को खूनी रंग दे देता है और पूरी कहानी का क्लाइमैक्स तय कर देता है।

सिलसिला:

यश चोपड़ा की 'सिलसिला' (1981) में होली प्यार के त्रिकोण को उजागर करती है। अमिताभ बच्चन अपने भाई शशि कपूर की पत्नी रेखा से नशे में होली खेलते हैं, गाना 'रंग बरसे' गाते हुए। जया बच्चन और संजीव कुमार को यह नजदीकी नागवार गुजरती है। शादी के बाद भी बुझ न पाया प्यार यहां फूट पड़ता है, जो परिवार में दरार डाल देता है। यह इमोशनल सीन फिल्म को रोमांटिक ड्रामा से फैमिली कंफ्लिक्ट की ओर मोड़ देता है।

दामिनी:

राजकुमार संतोषी की 'दामिनी' (1993) में होली एक सामाजिक मुद्दे का ट्रिगर बनती है। सनी देओल की पत्नी दामिनी (मीनाक्षी शेषाद्री) होली के जश्न में अपने देवर को नौकरानी के साथ रेप करते देख लेती है। वह न्याय के लिए घर छोड़ देती है और कोर्ट में लड़ाई लड़ती है। यह सीन फिल्म को फैमिली ड्रामा से कोर्टरूम थ्रिलर में बदल देता है, जहां दामिनी का 'लहरों से डरकर नौका कभी पार नहीं होती' डायलॉग इतिहास बन जाता है।

मोहब्बतें:

अदित्य चोपड़ा की 'मोहब्बतें' (2000) में शाहरुख खान होली का बहाना बनाकर अमिताभ बच्चन के सख्त गुरुकुल नियम तोड़ते हैं। लड़के-लड़कियां कैंपस से बाहर पहली बार होली खेलते हैं। नारायण शंकर को यह विद्रोह बर्दाश्त नहीं होता, जो प्यार बनाम अनुशासन के संघर्ष को तेज कर देता है। यह सीन फिल्म के रोमांटिक म्यूजिकल टोन को ड्रामा से भर देता है।

गोलियों की रासलीला रामलीला:

संजय लीला भंसाली की 'रामलीला' (2013) में होली रासलीला के जरिए रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण के बीच प्यार फूटता है। गुंडों के बीच रंगों का खेल भेदभाव मिटा देता है और रोमांस शुरू होता है। यह सीन गुजराती संस्कृति से प्रेरित होकर फिल्म को गैंगस्टर लव स्टोरी का अनोखा रंग देता है।

ये सीन साबित करते हैं कि होली बॉलीवुड में सिर्फ गाना नहीं, बल्कि कहानी का दिल है। रंगों ने हमेशा इमोशंस को उभार दिया।

होली के सीन बॉलीवुड फिल्मों में सिर्फ रंगों की खूबसूरती नहीं दिखाते, बल्कि कई बार कहानी का टर्निंग पॉइंट बन जाते हैं। चाहे वह शोले का खौफनाक मोड़ हो या सिलसिलाका भावनात्मक खुलासा होली ने बार-बार साबित किया है कि यह त्योहार सिनेमा में सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि कहानी कहने का एक शक्तिशाली माध्यम भी है।



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Monday, March 2, 2026

Promoter Buying Stocks: इन तीन कंपनियों में प्रमोटर ने बढ़ाई हिस्सेदारी, क्या आप भी लगाएंगे दांव?

Promoter Buying Stocks: प्रमोटर हिस्सेदारी में बढ़ोतरी को आम तौर पर सकारात्मक संकेत माना जाता है। प्रमोटर कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, जोखिम और भविष्य की योजनाओं को सबसे बेहतर समझते हैं। जब वे बाजार से अपने ही शेयर खरीदते हैं, तो यह संकेत होता है कि उन्हें मौजूदा कीमत आकर्षक लग रही है और भविष्य पर भरोसा है। यहां तीन ऐसे शेयर हैं, जिनमें हाल की तिमाही में प्रमोटरों ने हिस्सेदारी बढ़ाई है।

Infosys

Infosys एक वैश्विक आईटी सर्विस और कंसल्टिंग कंपनी है, जो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, इंजीनियरिंग और आउटसोर्सिंग सेवाएं देती है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में प्रमोटर हिस्सेदारी 14.30% से बढ़कर 14.52% हो गई। यानी 0.22% की बढ़ोतरी। इसी दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी भी हल्की बढ़ी, जबकि म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी घटी।

हाल के हफ्तों में आईटी सेक्टर दबाव में रहा है। बाजार में चिंता है कि AI के कारण पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग और कीमतों पर असर पड़ सकता है। तीसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 45,479 करोड़ रुपये रहा, जो 8.8% की ग्रोथ दिखाता है। नेट प्रॉफिट 6,654 करोड़ रुपये रहा, जो 2.2% घटा। मुनाफे पर नए श्रम कोड लागू करने से जुड़ा 1,289 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च असर डाल गया।

कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान 2-3% से बढ़ाकर 3-3.5% कर दिया है। आगे की ग्रोथ काफी हद तक अमेरिका और यूरोप में टेक खर्च पर निर्भर करेगी। AI कंपनी के लिए अवसर भी है और जोखिम भी।

Vardhman Textiles

Vardhman Textiles यार्न और फैब्रिक सेगमेंट में मजबूत वैश्विक मौजूदगी वाली बड़ी टेक्सटाइल कंपनी है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में प्रमोटर हिस्सेदारी 64.21% से बढ़कर 64.44% हो गई। यानी 0.23% की बढ़ोतरी। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी में हल्की कमी आई।

इस तिमाही में रेवेन्यू 2.3% बढ़कर 2,533 करोड़ रुपये रहा। लेकिन नेट प्रॉफिट 16.5% घट गया। मार्जिन पर दबाव और 23.6 करोड़ रुपये के एकमुश्त श्रम कोड प्रावधान का असर दिखा।

कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 में बदलाव के दौर से गुजर रही है। यह पारंपरिक कॉटन यार्न से हटकर सिंथेटिक और टेक्निकल टेक्सटाइल पर ज्यादा फोकस कर रही है। साथ ही बड़ा पूंजीगत व्यय कार्यक्रम इसकी लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है।

Godrej Industries

यह गोदरेज ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। इसका कारोबार केमिकल, एग्री, रियल एस्टेट और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कई क्षेत्रों में फैला है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में प्रमोटर हिस्सेदारी 71.31% से बढ़कर 74.64% हो गई। यानी 3.33% की बड़ी बढ़ोतरी, जो तीनों कंपनियों में सबसे ज्यादा है। म्यूचुअल फंड ने भी हिस्सेदारी बढ़ाई, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी घटी।

इस तिमाही में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5,051 करोड़ रुपये रहा और नेट प्रॉफिट 241 करोड़ रुपये पहुंचा। कंपनी अब पारंपरिक होल्डिंग स्ट्रक्चर से आगे बढ़कर हाई ग्रोथ समूह बनने की दिशा में काम कर रही है। Godrej Capital को ग्रोथ इंजन के रूप में मजबूत किया जा रहा है। ग्रीन केमिस्ट्री और फाइनेंशियल सर्विसेज में विस्तार भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा है।

क्या सिर्फ प्रमोटर खरीद के आधार पर निवेश करें?

जब प्रमोटर अपनी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, तो यह मजबूत संकेत जरूर होता है। इसका मतलब है कि उन्हें लगता है मौजूदा बाजार कीमत कंपनी की असली वैल्यू से कम है।

लेकिन यह गारंटी नहीं है। प्रमोटर भी समय के मामले में गलत हो सकते हैं। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल, बैलेंस शीट और ग्रोथ संभावनाओं का एनालिसिस जरूरी है। प्रमोटर की खरीद को संकेत मानें, लेकिन अंतिम फैसला आंकड़ों के आधार पर लें।

Stock Market Crash: स्टॉक मार्केट क्रैश के बाद क्या करें निवेशक, एक्सपर्ट से जानिए आगे की रणनीति

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Sunday, March 1, 2026

US-Israel Attacks Iran: दो पूर्व विधायक और 84 छात्रों समेत 700 भारतीय यात्री UAE में फंसे, ईरान के हमलों से दुबई में दहशत

US-Israel Attacks Iran: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उड़ानें रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश के दो पूर्व विधायक समेत राज्य के 700 से ज्यादा यात्री संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में फंस गए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के पुणे स्थित एक संस्थान में MBA की पढ़ाई करने वाले 84 छात्र दुबई में फंसे हुए हैं। UAE ने इजरायल और अमेरिका के हमले के जवाब में दागे गए कई ईरानी मिसाइलों को रोका। इन हमलों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई। जबकि 7 लोग घायल हो गए हैं।

ट्रेवल एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की मध्य प्रदेश इकाई के चेयरमैन अमोल कटारिया ने पीटीआई को बताया, "फिलहाल प्रदेश के 700 से ज्यादा यात्री संयुक्त अरब अमीरात में फंसे हैं। ये लोग पर्यटन और कारोबार के लिए वहां गए थे।" उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के हालात के मद्देनजर प्रदेश के कई लोगों ने दुबई और शारजाह के अपने हवाई टिकट रद्द कराते हुए आगामी दिनों में यात्रा का कार्यक्रम निरस्त कर दिया है।

दुबई में फंसे यात्रियों में इंदौर-1 क्षेत्र के पूर्व विधायक और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता संजय शुक्ला शामिल हैं। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा, "वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण दुबई एयरपोर्ट अस्थायी रूप से बंद होने से हमारी आज (रविवार) भारत वापसी संभव नहीं हो सकी है। इस दौरान दुबई के प्रशासन और भारत सरकार द्वारा हमें पूरा सहयोग प्राप्त हो रहा है। परिस्थितियां सामान्य होते ही हम शीघ्र इंदौर लौटेंगे।"

शुक्ला के चिंतित परिजन ईश्वर से उनकी सुरक्षित घर वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। उनके बेटे सागर ने पीटीआई को बताया, "मेरे पिता तीन दिन पहले इंदौर जिले के देपालपुर क्षेत्र के पूर्व विधायक विशाल पटेल और अपने कुछ उद्योगपति दोस्तों के साथ दुबई गए थे। उन्हें आज (रविवार) इंदौर लौटना था। लेकिन उड़ान रद्द होने से वे दुबई में ही फंसे हैं।"

उन्होंने बताया, "मेरी कुछ देर पहले पिता से फोन पर बात हुई थी। मैंने खुद इस बातचीत के दौरान वहां (दुबई) में धमाके सुने। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर मेरे पिता और उनके दोस्त एक सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं।" पूर्व विधायक के बेटे ने उम्मीद जताई कि भारत सरकार के प्रयासों से उनके पिता और उनके दोस्तों की जल्द स्वदेश वापसी होगी।

इस बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा, "दुबई और शारजाह के हवाई अड्डों पर मध्य प्रदेश के 100 से अधिक नागरिक इजराइल-ईरान युद्ध की स्थिति के कारण फंसे हुए हैं। महिलाएं, बच्चे और परिजन कई घंटों से असुविधा में हैं। उनकी उड़ानें निरस्त होने के बाद चिंता बढ़ गई है।"

पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह तत्काल हस्तक्षेप करें और संयुक्त अरब अमीरात में फंसे सभी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उनकी शीघ्र स्वदेश वापसी की व्यवस्था कराएं। संयुक्त अरब अमीरात में एयरपोर्ट और कई अन्य स्थलों को निशाना बनाकर किए गए ईरान के हमलों ने शनिवार रात को लोगों को जगाए रखा।

84 MBA छात्र दुबई में फंसे

पुणे स्थित एक संस्थान में MBA की पढ़ाई करने वाले 84 छात्र पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर हवाई क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण दुबई में फंसे हुए हैं। इंदिरा स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज (ISBS) के अधिकारियों ने बताया कि संस्थान के छात्र वार्षिक पांच दिवसीय स्टडी टूर के तहत दुबई गए थे। उन्होंने बताया कि सभी स्टूडेंट सुरक्षित हैं। उन्हें एक होटल में ठहराया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि 40 छात्रों को शनिवार को पुणे लौटना था। बाकी 44 छात्र-छात्राओं को रविवार को उड़ान भरनी थी। हालांकि, पश्चिम एशिया में संघर्ष एवं उसके परिणामस्वरूप हवाई क्षेत्र को बंद किए जाने के कारण वे लौट नहीं सकें। शैक्षिक संस्थान के डीन जनार्दन पवार ने बताया, "सभी सुरक्षित हैं। उन्हें एक होटल में ले जाया गया है।"

ये भी पढ़ें- Karachi Protest: खामेनेई की मौत पर पाकिस्तान में भारी बवाल! कराची में अमेरिकी दूतावास पर भीड़ का हमला, फायरिंग में 9 लोगों की मौत

इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स की चेयरपर्सन तारिता शंकर ने बताया कि एमबीए के छात्र और स्टाफ सदस्य स्टडी टूर के तहत दुबई गए थे। लेकिन हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण वे वहीं फंस गए हैं। उन्होंने बताया, "सभी छात्र और स्टाफ सदस्य सुरक्षित हैं। हम उनके साथ लगातार संपर्क में हैं। हम विदेश मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय के साथ भी समन्वय कर रहे हैं। उन्हें जल्द से जल्द वापस लाया जाएगा।"



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Saturday, February 28, 2026

The Kerala Story 2 Review: रोंगटे खड़े कर देगी सच्ची घटना पर आधारित ये कहानी....

The Kerala Story 2 Review: ‘द केरल स्टोरी 2 गोज बियॉन्ड’ एक ऐसी फिल्म है, जो खोजबीन करने के बजाय तर्क पेश करती है। यह अपनी कहानी को ज़ोरदार और स्पष्ट रूप से अपनी बात कहती है। दर्शकों की राय बंटी हुई होगी, इस बात पर निर्भर करते हुए कि वे इसे चेतावनी मानते हैं या एकतरफा दावा।

कामाख्या नारायण सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' 28 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई और इसमें उल्का गुप्ता, ऐश्वर्या ओझा, अदिति भाटिया, सुमित गहलावत, अर्जन सिंह औजला और युक्तम खोसला ने अभिनय किया है।

‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ की कहानी रिश्तों में धोखे और जबरन धर्म परिवर्तन के इर्द-गिर्द बुनी गई है। यह खुद को वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म बताती है और अपने रुख को नरम करने का कोई प्रयास नहीं करती। शुरुआत से ही यह स्पष्ट है कि फिल्म एक सशक्त संदेश देना चाहती है।

इसका उद्देश्य हल्के-फुल्के ढंग से मनोरंजन करना नहीं है। इसके बजाय, यह अपने तीन लीड रोल के द्वारा झेले गए भय, विश्वासघात और भावनात्मक आघात पर केंद्रित है। फिल्म का लहजा शुरू से अंत तक गंभीर है और कहानी कहने का तरीका दर्शकों को सुकून देने के बजाय विचलित करने के लिए बनाया गया है। लेकिन फिर भी यह एक ऐसी फिल्म है जो शोरगुल भरी और बोझिल है, कमजोर लेखन और अपने तर्क के अनुरूप गढ़ी गई कहानी के कारण बोझिल हो जाती है।

यह फिल्म तीन युवतियों, सुरेखा (उल्का गुप्ता), दिव्या (अदिति भाटिया) और नेहा (ऐश्वर्या ओझा) की कहानी है, जिनके जीवन में तब बदलाव आता है जब वे ऐसे रिश्तों में बंध जाती हैं जो फिल्म के अनुसार धोखे और छिपे इरादों पर आधारित होते हैं। तीनों अलग-अलग पृष्ठभूमि और शहर से आती हैं। कोच्चि की सुरेखा को महत्वाकांक्षी और भरोसेमंद दिखाया गया है।

जोधपुर की दिव्या को भावनात्मक रूप से कमजोर दिखाया गया है। ग्वालियर की नेहा भाला फेंक में माहिर बनने की ख्वाहिश रखती है और उसके सपने अपने शहर से कहीं आगे तक फैले हुए हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, फिल्म दिखाती है कि कैसे उन्हें बहकाया जाता है, उनके परिवारों से अलग किया जाता है और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। हालात तेजी से बिगड़ते जाते हैं।

फिल्म की कमजोरी कहानी कहने के तरीके में है। यह लोगों के व्यवहार के कारणों को समझने के लिए शायद ही कभी रुकती है। फिल्म में पुरुषों को ज्यादातर एक ही रंग में दिखाया गया है, जिनमें गहराई का अभाव है। महिलाओं को अक्सर पहले पीड़ित और फिर एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है। इसी वजह से, कई सीन किसी बात को साबित करने के लिए रचे गए प्रतीत होते हैं, न कि वास्तविक लोगों के बारे में कुछ बताने के लिए।

कहानी कहने का तरीका मुखर और सीधा है। इसमें संदेह, जटिलता या विरोधाभास के लिए बहुत कम गुंजाइश है। जो दर्शक इसके संदेश से सहमत हैं, उन्हें यह मुखर लग सकता है। जो दर्शक असहमत हैं, उन्हें यह अतिरंजित और अनुचित लग सकता है।

‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को ज्यादा बांध नहीं पाती है। यह स्पष्ट रूप से एक विशेष नजरिए का समर्थन करती है और हर सीन को उसी के अनुरूप ढालती है। कुछ लोग इसे चेतावनी के रूप में देखेंगे, जबकि अन्य इसे एकतरफा और हानिकारक मानेंगे। सिनेमा के लिहाज से, यह एक ऐसी कहानी है जो बताने के बजाय मैसेज देने पर अधिक केंद्रित प्रतीत होती है। यह फिल्म दर्शकों को कितनी पसंद आती है, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप फिल्म से क्या अपेक्षा रखते हैं।



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