Wednesday, September 2, 2026

Dividend Stock: हर शेयर पर ₹94 का डिविडेंड, 4 सितंबर से पहले बनना होगा शेयरहोल्डर; 3 महीनों में कीमत 45% चढ़ी

फेडरल-मोगुल गोएट्ज (इंडिया) अपने शेयरहोल्डर्स को 94 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देने वाली है। इस अमाउंट में 7.50 रुपये का अंतरिम और 86.50 रुपये का स्पेशल डिविडेंड शामिल है। दोनों ही तरह के डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 4 सितंबर है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे।

इसका मतलब है कि अगर आप पहले से कंपनी के शेयरहोल्डर नहीं हैं और डिविडेंड पाना चाहते हैं तो आपको 3 सितंबर को ट्रेडिंग खत्म होने से पहले शेयर खरीदने होंगे। डिविडेंड का ऐलान अगस्त महीने में हुआ था। अंतरिम और स्पेशल डिविडेंड का पेमेंट 25 सितंबर को या उससे पहले कर दिया जाएगा।

फेडरल-मोगुल गोट्ज (इंडिया) लिमिटेड भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए पिस्टन, पिस्टन रिंग, पिन, वॉल्व सीट जैसे ऑटोमोटिव पार्ट्स बनाती, सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूट करती है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है।

Federal-Mogul Goetze का शेयर 2 सप्ताह में 30 प्रतिशत मजबूत

शेयर की कीमत 2 सितंबर को BSE पर 612.85 रुपये पर बंद हुई। शेयर एक सप्ताह में 11 प्रतिशत और 2 सप्ताह में 30 प्रतिशत चढ़ा है। 3 महीनों में कीमत 45 प्रतिशत और 6 महीनों में 55 प्रतिशत उछली है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 74.98 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी का मार्केट कैप 3400 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 640 रुपये और एडजस्टेड लो 359 रुपये है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 515.81 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 41.36 करोड़ रुपये रहा। इस बीच प्रति शेयर अर्निंग 7.43 करोड़ रुपये दर्ज की गई। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान फेडरल-मोगुल गोएट्ज (इंडिया) का रेवेन्यू 1,924.12 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 168.91 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 30.36 करोड़ रुपये रही।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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Tuesday, September 1, 2026

FD Interest Rates: वरिष्ठ नागरिकों के लिए गुड न्यूज! इन बैंकों ने बदलीं FD की दरें, जानें किसमें मिलेगा सबसे ज्यादा रिटर्न

FD Interest Rates for Senior Citizens: एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और फेडरल बैंक ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में बदलाव किया है। ये बैंक आम नागरिकों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों को अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं।

अगर आप या आपके घर के सीनियर सिटीजन ₹3 करोड़ से कम की एफडी में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो जानिए किस बैंक में सबसे ज्यादा रिटर्न मिल रहा है और निवेश करने से पहले किन जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD ब्याज दरें

तीन प्रमुख बैंकों द्वारा सीनियर सिटीजन्स को दी जाने वाली अधिकतम और सामान्य ब्याज दरों की तुलना:

Axis Bank दे रहा है सबसे ज्यादा 7.25% ब्याज

एक्सिस बैंक ने अपने डोमेस्टिक एफडी रेट्स में संशोधन किया है। बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सबसे आकर्षक ब्याज दर की पेशकश कर रहा है। 5 साल से लेकर 10 साल तक की लंबी अवधि की एफडी पर अधिकतम 7.25% प्रति वर्ष का ब्याज दे रहा है। सीनियर सिटीजन्स के लिए कुल ब्याज दरें 3.50% से 7.25% के बीच हैं।

Federal Bank 48 महीने की FD पर 7.20% रिटर्न

फेडरल बैंक ने भी ₹3 करोड़ से कम की फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक अधिकतम 7.20% का ब्याज प्रति वर्ष दे रहा है जो 48 महीने यानी 4 साल की एफडी कराने पर मिलेगी। ऐसे ही 15 महीने की एफडी पर 7.15% और 24 महीने से 48 महीने से कम की एफडी पर 7.00% का ब्याज दिया जा रहा है।

HDFC Bank: लंबी अवधि की एफडी पर बढ़ीं दरें

देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank ने कुछ स्पेशल अवधियों के लिए दरों में बढ़ोतरी की है। बैंक अधिकतम ब्याज दर 7.10% प्रति वर्ष दे रहा है जो पहले 7.00% थी। 3 साल 1 दिन से लेकर 4 साल 7 महीने से कम की अवधि वाली एफडी पर 7.10% का ब्याज मिलेगा।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD ब्याज दरें

FD कराने से पहले ध्यान रखें ये 3 जरूरी बातें

केवल सबसे ऊंची ब्याज दर देखकर ही फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा न लगाएं। निवेश से पहले इन 3 पहलुओं का मूल्यांकन जरूर करें:

लॉक-इन अवधि: देखें कि आपका पैसा कितने समय के लिए ब्लॉक हो रहा है। अगर आपको बीच में पैसों की जरूरत पड़ सकती है, तो बहुत लंबी अवधि की एफडी चुनने से बचें।

समय से पहले निकासी शुल्क: मैच्योरिटी से पहले एफडी तोड़ने पर बैंक कितना पेनाल्टी या चार्ज काटते हैं, इसकी जानकारी पहले ही ले लें।

ब्याज पर टैक्स: एफडी से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से कर योग्य होता है। आयकर कानून की धारा 80TTB के तहत वरिष्ठ नागरिकों को एक वित्तीय वर्ष में एफडी/सेविंग्स ब्याज पर ₹50,000 तक की छूट मिलती है। इससे अधिक ब्याज होने पर टीडीएस कटता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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Monday, August 31, 2026

‘नेशनल क्रश’ मेजर ऋषभ सांब्याल ने अचानक लिया Premature Retirement, जानें क्यों छोड़ी 12 साल पुरानी नौकरी

मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल को सोशल मीडिया पर शायद ही कोई भूल पाया हो। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC रहते हुए उनकी तस्वीरें और वीडियो अक्सर इंटरनेट पर वायरल होते थे। उनकी शख्सियत और राष्ट्रपति के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूदगी ने उन्हें सोशल मीडिया पर खासा लोकप्रिय बना दिया था। लोग मजाकिया अंदाज में उन्हें भारत का ‘नेशनल क्रश’ तक कहने लगे थे। लेकिन अब सांब्याल एक बार फिर चर्चा में हैं। करीब 12 साल तक भारतीय सेना में सेवा देने के बाद उन्होंने समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली है।

राष्ट्रपति भवन में आखिरी दौर के बाद लिया रिटायरमेंट

सांब्याल के रिटायरमेंट की जानकारी राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक डिजिटल फोटो लाइब्रेरी में उन्हें ‘रिटायर्ड फॉर्मर ADC’ के तौर पर सूचीबद्ध किए जाने के बाद सामने आई। सेना से विदाई के बाद उन्होंने 21 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात भी की। उन्होंने इस मुलाकात की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए राष्ट्रपति के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए आभार जताया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की सीख और आशीर्वाद ने उन्हें एक बेहतर इंसान बनने में मदद की। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति के परिवार से दोबारा मिलने की खुशी भी जाहिर की।

जम्मू-कश्मीर से हैं गहरे रिश्ते

मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल का संबंध जम्मू-कश्मीर से जुड़े डोगरा राजपूत परिवार से बताया जाता है। सेना में जाने की उनकी यात्रा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानी NDA से शुरू हुई। उन्होंने 2013 में NDA की परीक्षा पास की और 2014 में 133वें NDA कोर्स में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंध और मामलों में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। 2017 में वह भारतीय सैन्य अकादमी पहुंचे, जहां उन्होंने सैन्य अध्ययन और रक्षा प्रबंधन से जुड़ी पढ़ाई की।

गणतंत्र दिवस परेड ने दिलाई पहली बड़ी पहचान

सांब्याल को पहली बड़ी पहचान 2021 में मिली। उस समय वह कैप्टन के पद पर जाट रेजिमेंट में तैनात थे और उन्होंने गणतंत्र दिवस परेड में रेजिमेंट के दल का नेतृत्व किया। उनकी अगुवाई में इस दल ने प्रतिष्ठित सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दल की ट्रॉफी अपने नाम की। इस उपलब्धि ने उनके सैन्य करियर में एक अहम पहचान बनाई।

स्पेशल फोर्सेज का भी हिस्सा रहे

संब्याल ने सेना की एलीट 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज में भी सेवा दी। इस यूनिट को ‘डैगर्स’ के नाम से भी जाना जाता है। स्पेशल फोर्सेज में सेवा के दौरान उन्हें बलिदान बैज भी मिला। यह पैराशूट रेजिमेंट की स्पेशल फोर्सेज से जुड़ा एक खास सम्मान है।

राष्ट्रपति के ADC बने तो बढ़ी सोशल मीडिया पर लोकप्रियता

मार्च 2023 में संब्याल को राष्ट्रपति के ADC पद के लिए चुना गया। इसके बाद वह राष्ट्रपति के साथ कई आधिकारिक कार्यक्रमों, समारोहों और विदेशी दौरों में नजर आने लगे। इस जिम्मेदारी ने उन्हें आम लोगों के बीच भी पहचान दिलाई। राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर होने लगे और देखते ही देखते वह इंटरनेट पर चर्चित चेहरा बन गए।

अपने लिंक्डइन प्रोफाइल में सांब्याल ने खुद को 12 साल के सैन्य अनुभव वाला पेशेवर बताया है। उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में टीम का नेतृत्व करने, रणनीतिक योजना बनाने और अलग-अलग एजेंसियों के साथ काम करने का अनुभव भी साझा किया है।

PMO से लेकर विदेशी दौरों तक का अनुभव

अपने प्रोफाइल के मुताबिक, सांब्याल ने प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेशी प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के साथ भी काम किया। उन्होंने राष्ट्रपति से जुड़े आधिकारिक राजनयिक दौरों के दौरान आठ देशों की यात्राओं में भी जिम्मेदारियां निभाईं। इस दौरान उन्हें अलग-अलग संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ काम करने का मौका मिला।

आखिर क्यों लिया समय से पहले रिटायरमेंट?

करीब 12 साल की सैन्य सेवा के बाद सांब्याल के समय से पहले रिटायरमेंट लेने की वजह को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है। रिपोर्ट्स में उनके इंस्टाग्राम लाइव का हवाला देते हुए बताया गया है कि व्यक्तिगत और पारिवारिक कारण उनके इस फैसले के पीछे हो सकते हैं। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि जिंदगी में कुछ परिस्थितियां और अनुभव इंसान की दिशा बदल देते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि फिलहाल शादी करने की उनकी कोई तत्काल योजना नहीं है।

सेना से विदाई, लेकिन सफर यहीं खत्म नहीं

लेफ्टिनेंट से कैप्टन और फिर मेजर तक का सफर तय करने के बाद सांब्याल ने सेना को अलविदा कह दिया है। राष्ट्रपति के ADC के तौर पर मिली पहचान ने उनके सैन्य करियर को एक अलग तरह की सार्वजनिक पहचान भी दी।

अब सेना की वर्दी में उनकी तस्वीरें भले ही कम नजर आएं, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता और 12 साल के सैन्य अनुभव के बाद आगे की उनकी नई पारी को लेकर लोगों की नजर बनी हुई है।

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Sunday, August 30, 2026

Shivani Mehrotra: 'उम्र के साथ सपने धुंधले नहीं पड़ते'; 43 साल की शिवानी ने हौसलों से फतह की यूरोप की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एल्ब्रुस पर फहराया तिरंगा

Who is Shivani Mehrotra: कुछ सपने उम्र के साथ धुंधले नहीं पड़ते, बल्कि जिम्मेदारियों के बीच और मजबूत होते जाते हैं। इसका जीवंत उदाहरण 43 साल की शिवानी मेहरोत्रा हैं, जिन्होंने 18 वर्षीय बेटी की परवरिश, परिवार की जिम्मेदारियां एवं रोजमर्रा की जिंदगी के बीच अपने पर्वतारोहण के जुनून को कभी पीछे नहीं छोड़ा। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर लगातार अपने हौसले तथा हदों को परखती रहीं।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की निवासी शिवानी मेहरोत्रा की शादी 24 साल की उम्र में लखनऊ में हुई और अब वह अपने परिवार के साथ मुंबई में रहती हैं। इस साल स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी रूस स्थित 'माउंट एल्ब्रुस' पर तिरंगा फहराकर इस दिन को अपने लिए यादगार बना दिया।

'हौसले की परीक्षा थी'

शिवानी ने रूस से भारत लौटने के दौरान न्यूज एजेंसी पीटीआई से फोन पर कहा कि 15 अगस्त को चोटी तक पहुंचना जितना शरीर की ताकत का इम्तिहान था। उतना ही मन के हौसले की भी परीक्षा थी।उन्होंने कहा, उम्र सिर्फ एक नंबर भर है। असली ताकत लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और उसे पाने के लिए जरूरी अनुशासन में होती है।"

शिवानी के लिए पर्वतारोहण अपने सपनों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की कहानी भी है। वह अपने माता-पिता, पति, बेटी और दोस्तों को अपनी ताकत मानती हैं। शिवानी बताती हैं कि खासकर 40 वर्ष की उम्र पार कर चुकी महिला पर्वतारोहियों और ट्रेकर की संख्या बहुत कम है।

शिवानी ने कहा, "मुझे पहाड़ों पर 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं बहुत कम ही दिखाई देती हैं।" उन्होंने कहा, "मेरे परिवार ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे यह करने का साहस दिया।" वह अपने पर्वतारोहण अभियानों का खर्च भी काफी हद तक अपनी बचत से उठाने की कोशिश करती हैं।

कैसे हुआ पहाड़ों से लगाव?

शिवानी ने बताया कि पहाड़ों से उनका लगाव 2019 में गहरा हुआ, जब उन्होंने अपनी सबसे करीबी दोस्त के साथ 'माउंट एवरेस्ट' आधार शिविर तक ट्रेकिंग की योजना बनाई थी। एक यात्रा की वह छोटी-सी योजना कब जुनून में बदल गई, उन्हें खुद पता नहीं चला। इसके बाद कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और हिमालय के कई हिस्से उनकी मंजिल बनते चले गए।

इसके बाद शिवानी ने 'फ्रेंडशिप पीक' और 'माउंट किलिमंजारो' जैसी कठिन चोटियों पर भी चढ़ाई की। कैलाश से जुड़े पांच प्रमुख पर्वत अभियानों में से चार वह अब तक पूरा कर चुकी हैं। हालांकि, उनका सबसे बड़ा सपना अभी बाकी है 'माउंट एवरेस्ट' फतह करना। साथ ही दुनिया की सातों सबसे ऊंची चोटियों पर भारतीय तिरंगा फहराना।

दुबई होते हुए पहुंचीं रूस

'माउंट एल्ब्रुस' अभियान के लिए शिवानी ने आठ अगस्त को मुंबई से अपनी यात्रा शुरू की। दुबई होते हुए वह रूस के मिनरल्नी वोडी पहुंचीं। 10 दिन के इस अभियान का आयोजन रूस की 'चतुर टूर्स' नामक कंपनी ने किया था। शिखर पर मौसम के अचानक बदलने की आशंका को देखते हुए अभियान में एक अतिरिक्त दिन भी रखा गया था।

खराब मौसम ने चढ़ाई को और कठिन बना दिया। तेज बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और ऊंचाई की चुनौती के बीच दल ने अंतिम चढ़ाई से पहले खुद को मौसम और ऊंचाई के अनुकूल बनाने के लिए कई अभ्यास चढ़ाइयां कीं। इनमें करीब 3,000, 4,000 और 4,700 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना शामिल था।

"रुकना नहीं है, चलते रहना है..."

शिखर पर पहुंचने वाले दिन दल ने रात करीब दो बजे चढ़ाई शुरू की। इस दौरान अंधेरा से लेकर जमा देने वाली ठंड, तेज हवाएं, भारी सामान और कम ऑक्सीजन लेवल तक... हर कदम मुश्किल था। लेकिन शिवानी के भीतर एक ही बात गूंजती रही- "रुकना नहीं है, चलते रहना है।" करीब साढ़े चार घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद उन्होंने शिखर पर कदम रखा।

उन्होंने कहा कि इतनी ऊंचाई पर पहुंचकर छोटे से छोटा काम भी मुश्किल हो जाता है। 5,000 मीटर के बाद ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम होने लगता है। बर्फीले मौसम से बचाव के लिए भारी भरकम कपड़ों और जूतों में लगे कांटेदार उपकरणों के साथ एक-एक कदम बढ़ाना भी शरीर के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

'सेल्फ-अरेस्ट' तकनीकों की ट्रेनिंग भी ली

इस अभियान में शिवानी ने खुद को बचाने की तकनीक का ट्रेनिंग भी लिया। बर्फ पर फिसलने की स्थिति में खुद को रोकना और आपात स्थिति में सही तरीके से प्रतिक्रिया देना इसका हिस्सा था। शिवानी ने कहा कि चढ़ाई का आखिरी पड़ाव अक्सर शरीर से ज्यादा मन के हौसले की परीक्षा लेता है।

उन्होंने कहा, "पहले की यात्राओं में जहां मुझे लगता था कि अब मैं इससे आगे नहीं जा सकती, वहीं मैंने सीखा कि असल शुरुआत तो वहीं से होती है।" शिखर पर पहुंचते ही वह घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने पहाड़, अपने दोस्तों और उन पर विश्वास जताने वालों के प्रति आभार जताया।

उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने माउंट एल्ब्रुस के सामने सिर झुकाया और कहा-धन्यवाद।" उनके लिए यह चोटी उस बड़े सपने की एक सीढ़ी थी, जिसे वह अभी पूरा करना चाहती हैं।

फिटनेस पर काफी ध्यान देती हैं शिवानी

शिवानी फिटनेस पर भी बहुत ध्यान देती हैं। वह फुल मैराथन, हाफ मैराथन के अलावा 50 किलोमीटर की दौड़ भी पूरी कर चुकी हैं। कोरोना वायरस महामारी के दौरान उन्होंने योग को अपनाया। बाद में उन्होंने एडवांस्ड योग इंस्ट्रक्टर और थेरेपिस्ट के तौर पर ट्रेनिंग लिया। करीब छह वर्षों से वह योग सिखा रही हैं। इनमें गर्भावस्था से पहले और बाद की महिलाओं तथा कैंसर रोगियों के लिए विशेष योग कार्यक्रम भी शामिल हैं।

कैसी है दिनचर्या?

उनकी दिनचर्या भी उनके संकल्प जैसी ही सख्त है। वह तड़के करीब साढ़े तीन बजे उठती हैं और योग, जिम में कसरत, दौड़ तथा पर्वतारोहण की तैयारी करती हैं। खान-पान को लेकर भी वह बेहद अनुशासित रहती हैं। शिवानी के लिए पर्वतारोहण सिर्फ किसी निश्चित ऊंचाई तक पहुंचने का नाम नहीं है।

Shivani Mehrotra

वह कहती हैं, "मैं नहीं मानती कि ऊंचाई के आधार पर कोई चोटी कम या ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। हर पहाड़ अपने साथ एक अलग अनुभव लाता है और हर पहाड़ सम्मान मांगता है।" अब उनकी नजर नेपाल की ऊंचाई वाली चोटियों पर है। यह तैयारी उन्हें अपने सबसे बड़े लक्ष्य माउंट एवरेस्ट तक ले जाएगी।

पैसे की चुनौती आई सामने

उन्होंने विश्वास के साथ कहा, "एवरेस्ट मेरा मुख्य लक्ष्य है। मुझे इसे करना ही है।" हालांकि, इस सपने की राह में पैसे भी बड़ी चुनौती है। एवरेस्ट अभियान पर करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। दूसरे अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियानों का खर्च भी कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है।

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शिवानी ने अब तक अपने योग पेशे से हुई बचत से ही अधिकांश अभियानों का खर्च उठाया है। उन्होंने कहा, "मैं यह अपने दम पर करना चाहती हूं।" इस उम्र में भी शिवानी के कदम रुके नहीं हैं। उनका कहना है, "अगर आपने मन में ठान लिया है कि आपको कुछ हासिल करना है, तो आप उसे कर सकते हैं। बस अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना होता है।"



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Upcoming IPO: 31 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में 7 नए IPO खुलेंगे, 15 कंपनियों की लिस्टिंग होगी

Upcoming IPO: 31 अगस्त से शुरू होने वाला नया हफ्ता IPO बाजार के लिए काफी व्यस्त रहेगा। शेयर बाजार में पिछले करीब एक महीने से सुस्ती है। इसके बावजूद IPO मार्केट में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। अगले हफ्ते 7 कंपनियों के IPO खुलेंगे। इनके जरिए ₹1,415 करोड़ जुटाने की योजना है। साथ ही 15 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होंगी।

₹1,265 करोड़ के 3 मेनबोर्ड IPO

अगले हफ्ते 3 मेनबोर्ड IPO खुलेंगे। इनका कुल साइज ₹1,265 करोड़ है। सबसे पहले Purple Style Labs का IPO आएगा। कंपनी Pernia's Pop-Up Shop ब्रांड चलाती है।

कंपनी का ₹680 करोड़ का IPO 31 अगस्त को खुलेगा। इसमें 2 सितंबर तक पैसा लगाया जा सकेगा। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है। प्राइस बैंड ₹546 से ₹575 प्रति शेयर है।

1 सितंबर को खुलेंगे दो IPO

Rays of Belief और Deepa Jewellers के IPO 1 सितंबर को खुलेंगे। दोनों में 3 सितंबर तक निवेश किया जा सकेगा। MOM's Belief की पैरेंट कंपनी Rays of Belief ₹125 करोड़ जुटाना चाहती है। इसका प्राइस बैंड ₹227 से ₹239 प्रति शेयर है। यह भी पूरी तरह फ्रेश इश्यू है।

Deepa Jewellers ₹459.71 करोड़ जुटाएगी। इसमें ₹250 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे। बाकी ₹209.71 करोड़ OFS के जरिए जुटाए जाएंगे। प्रमोटर अपने शेयर बेचेंगे। प्राइस बैंड ₹168 से ₹177 प्रति शेयर है।

4 SME IPO भी आएंगे

अगले हफ्ते 4 SME IPO भी खुलेंगे। इनका कुल साइज ₹150.17 करोड़ है। Ashutosh Fibre, Shanti Inorganics और Phychem Technologies के IPO 31 अगस्त को खुलेंगे। Farm Peace का IPO 1 सितंबर को आएगा।

विजय केडिया के निवेश वाली Ashutosh Fibre ₹56.34 करोड़ जुटाना चाहती है। इसका प्राइस बैंड ₹87 से ₹92 प्रति शेयर है। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है। कंपनी ने IPO खुलने से पहले एंकर निवेशकों से ₹16.04 करोड़ जुटा लिए हैं। इसमें 5 निवेशकों ने हिस्सा लिया है।

Shanti Inorganics ₹47.23 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। कंपनी सल्फर बेस्ड इनऑर्गेनिक केमिकल बनाती है। इसका प्राइस बैंड ₹79 से ₹83 प्रति शेयर है।

Phychem Technologies ₹14.58 करोड़ जुटाएगी। कंपनी रोटेशनल मोल्डिंग कंपाउंड बनाती है। इसका इस्तेमाल खोखले प्लास्टिक प्रोडक्ट बनाने में होता है। प्राइस बैंड ₹51 से ₹54 प्रति शेयर है।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कंपनी Farm Peace ₹32 करोड़ जुटाएगी। इसका IPO 1 सितंबर को खुलेगा। प्रति शेयर कीमत ₹59 तय की गई है।

अगस्त में ₹23,679 करोड़ के IPO

अगस्त में IPO बाजार में काफी हलचल रही। मेनबोर्ड और SME सेगमेंट में कुल 46 IPO आए। इनके जरिए ₹23,679 करोड़ जुटाए गए। इस साल अगस्त तक IPO के जरिए ₹79,829 करोड़ की फंडिंग हो चुकी है।

इन IPO में निवेश का आखिरी मौका

Lumino Industries का ₹700 करोड़ का IPO 31 अगस्त को बंद होगा। कंपनी पावर केबल और इलेक्ट्रिकल वायर समेत कई प्रोडक्ट बनाती है। अब तक इस IPO को 4.87 गुना सब्सक्रिप्शन मिल चुका है।

ESDS Software Solution का ₹720 करोड़ का IPO 1 सितंबर तक खुला रहेगा। कंपनी AI, क्लाउड और डेटा सेंटर सर्विसेज देती है। Priority Jewels का ₹91.5 करोड़ का IPO भी 1 सितंबर को बंद होगा। ESDS के IPO को अब तक 2.1 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। Priority Jewels का IPO 1.93 गुना भर चुका है।

SME सेगमेंट में Kwick Forensic Solutions का IPO 31 अगस्त को बंद होगा। Complete Sports & Management India और Paluck Technologies के IPO 1 सितंबर तक खुले रहेंगे।

अगले हफ्ते 15 कंपनियों की लिस्टिंग

अगले हफ्ते 15 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होंगी। इनमें 8 मेनबोर्ड और 7 SME कंपनियां शामिल हैं।

Augmont Enterprises 31 अगस्त को डेब्यू करेगी। इसके बाद Hy-Tech Engineers, Skyways Air Services और Symbiotec Pharmalab 1 सितंबर को लिस्ट होंगी।

Annu Projects 2 सितंबर को लिस्ट होगी। Lumino Industries की लिस्टिंग 3 सितंबर को होगी। ESDS Software Solution और Priority Jewels के शेयरों में 4 सितंबर से ट्रेडिंग शुरू होगी।

SME सेगमेंट में Madhur Knit Crafts और ABH Healthcare 1 सितंबर को NSE Emerge पर लिस्ट होंगी। Sumax Engineering की लिस्टिंग 2 सितंबर को होगी।

Kwick Forensic Solutions 3 सितंबर को BSE SME पर डेब्यू करेगी। Complete Sports & Management India और Paluck Technologies की लिस्टिंग 4 सितंबर को होगी।

Augmont Enterprises की तगड़ी होगी लिस्टिंग या फुस्स, ग्रे मार्केट से मिल रहे ये संकेत

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PM Modi in Uzbekistan: पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, 36वें अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

PM Modi in Uzbekistan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार (30 अगस्त) को उज्बेकिस्तान के प्रतिष्ठित सम्मान 'ऑर्डर ऑफ ओली दराजाली दोस्तलिक' से नवाजा गया। उन्होंने यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच स्थायी संबंधों को समर्पित किया। PM मोदी व्यापार, क्लीन एनर्जी और कनेक्टिविटी समेत कई क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने के लिए उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री को यह सम्मान उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रदान किया। यह प्रधानमंत्री मोदी को मिलने वाला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।

'सम्मानित होना मेरे लिए बहुत गर्व की बात'

PM मोदी ने सोशल मीडिया प्लटेफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "'ओली दराजाली दोस्तलिक' सम्मान प्राप्त कर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। मैं यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच स्थायी संबंधों को समर्पित करता हूं।" पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित होना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।" उन्होंने कहा कि भारत के लोग इस सम्मान के नाम में प्रयुक्त शब्द 'दोस्तलिक' से भली-भांति परिचित हैं।

'1.4 अरब भारतीयों का सम्मान'

उन्होंने कहा, "भारत में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा, जहां 'दोस्तलिक' शब्द दिन में 100 बार न बोला जाता हो। आज आपने वास्तव में इस शब्द के सार को सामने ला दिया है। 'दोस्तलिक' का अर्थ मित्रता है। यह शब्द अपने आप में भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों के केंद्र में मौजूद भावना को खूबसूरती से व्यक्त करता है।" PM मोदी ने कहा कि यह सम्मान प्राप्त करना उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि 1.4 अरब भारतीयों का सम्मान है।

PM मोदी ने आगे कहा, ‘‘सभी भारतीयों की ओर से मैं उज्बेकिस्तान की जनता, सरकार और अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मैं इस सर्वोच्च सम्मान को बहुत विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। इसे हमारे दोनों देशों के सदियों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों तथा हमारी साझा विरासत को समर्पित करता हूं।"

पीएम मोदी ने मिर्जियोयेव के साथ की वार्ता 

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने मिर्जियोयेव के साथ वार्ता की, जिसके बाद भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SEO) के 26वें शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ताशकंद से किर्गिस्तान की यात्रा करेंगे।

दोनों देशों ने अपने संबंधों को बढ़ाने का फैसला किया

प्रधानमंत्री मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच हुई वार्ता के बाद, भारत और उज्बेकिस्तान ने रविवार को अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया। दोनों देशों ने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक व्यवस्था बनाने पर सहमति जताई। वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, महत्वपूर्ण खनिजों, खनन, रक्षा और सुरक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, टेक्नोलॉजी, UPI समेत डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एजुकेशन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार दोनों पक्षों ने 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को पांच अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। दोनों देशों के बीच वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार का कुल मूल्य एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया, जो सहयोग के विस्तृत दायरे को दर्शाता है।

दोनों नेताओं की मौजूदगी में खनन, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन और आयुर्वेद समेत कई अन्य क्षेत्रों से जुड़े समझौतों का आदान-प्रदान हुआ। उज्बेकिस्तान में बौद्ध स्थलों फयाज तेपा और कारा तेपा के पुनरुद्धार और संरक्षण के लिए एक आशय पत्र पर भी सहमति बनी। भारत असैन्य उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा के उत्पादन के लिए उज्बेकिस्तान से यूरेनियम खरीदने पर विचार कर रहा है।

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Saturday, August 29, 2026

कभी भी टूट सकती है झील: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, चीन ने दी चेतावनी

Nepal Flood Alert: नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यह खतरा उस भीषण फ्लैश फ्लड के सिर्फ चार दिन बाद सामने आया है, जिसमें देश के कई इलाकों में भारी तबाही हुई थी। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने चेतावनी दी है कि ऊपर की ओर बनी एक अस्थायी झील किसी भी समय टूट सकती है।

चीन के अधिकारियों ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को इस बारे में जानकारी दी है। अधिकारियों ने बताया कि झील में कुछ बदलाव देखे गए हैं, जिसमें पानी का रंग लगातार गहरा होना शामिल है। बीजिंग ने यह भी कहा है कि उसके मॉडल के मुताबिक, अगर झील को रोकने वाले प्राकृतिक बांध का कुछ हिस्सा टूटता है, तो नदी में अधिकतम करीब 500 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी आ सकता है। इससे नेपाल के कई इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

नई चेतावनी किस वजह से जारी की गई?

चीनी अधिकारियों ने झील के बदलते रूप को संभावित चेतावनी का संकेत बताया है।

नेपाल को भेजे गए संदेश में कहा गया, "परसों बननी शुरू हुई झील का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है। इसका मतलब है कि यह फट सकती है।"

चीन ने कहा कि झील में अभी पानी की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं है। उसने यह भी कहा कि अगर रुकावट टूटती है, तो नदी के निचले बहाव में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना कम है।

फिलहाल, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

कितना पानी जमा हुआ है?

ग्लेशियर के ढहने से मलबे की एक प्राकृतिक रुकावट बन गई, जिससे ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी हिस्से में एक अस्थायी झील बन गई है। कहा जा रहा है कि इसी घटना के कारण इस हफ्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत में अचानक बाढ़ आई थी।

यह झील चीन की तरफ चोचेन नदी और नेपाल की तरफ पुरेपु नदी के संगम के पास स्थित है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, झील का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शुक्रवार तक लगभग 25 लाख (2.5 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था।

चीनी अधिकारियों ने पहले अनुमान लगाया था कि अगले तीन दिनों में झील में और 30 लाख (3 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो सकता है।

अगर प्राकृतिक रुकावट टूट जाए तो क्या होगा?

चीन ने इस बात का अंदाजा लगाने के लिए बाढ़ की मॉडलिंग की है कि अगर अस्थायी रुकावट का कोई हिस्सा टूटता है, तो कितना पानी नीचे की ओर बह सकता है। चीनी संदेश में कहा गया, "अगर बांध का कोई हिस्सा टूटता है, तो पानी का अधिकतम बहाव 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड हो सकता है। यह नदी के किनारों के भीतर ही रहेगा।"

अधिकारी ड्रोन और सैटेलाइट का इस्तेमाल करके भी इलाके पर नजर रख रहे हैं।

झील से पानी पहले ही बहने लगा है

शुक्रवार को झील का पानी ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदियों में बहने लगा। चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के अनुसार, दोपहर तक इस बहाव से होने वाले तुरंत खतरे को काबू में माना जा रहा था।

हालांकि, इस आकलन के बावजूद, झील के टूटने की आशंका को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि नेपाल अभी भी बुधवार को आई अचानक बाढ़ के असर से उबरने की कोशिश कर रहा है।

बाढ़ की तबाही से अब भी जूझ रहा नेपाल

नेपाल में बचाव और राहत कार्य जारी हैं और अधिकारी नदी के ऊपरी हिस्से में भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। नेपाल में कम से कम 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तिब्बत में कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

ताजा चेतावनी के बाद निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है। अधिकारी अब अस्थायी झील में पानी के स्तर के साथ-साथ उसे रोकने वाले प्राकृतिक बांध की मजबूती पर भी लगातार नजर रख रहे हैं।

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