Sunday, August 9, 2026

'खामोशी द म्यूजिकल' के 30 साल हुए पूरे, इन 7 वजहों से संजय लीला भंसाली की फिल्म बनीं क्लासिक

रिलीज के तीन दशक बाद भी, खामोशी द म्यूजिकल को इंडियन सिनेमा की सबसे दिल को छूने वाली और इमोशनल फिल्मों में से एक के तौर पर याद किया जाता है। सिर्फ़ एक क्रिटिक्स द्वारा सराही गई ड्रामा से कहीं ज़्यादा, यह संजय लीला भंसाली का डायरेक्टोरियल डेब्यू था, जिसने दर्शकों को एक ऐसे फिल्ममेकर से मिलवाया, जिसका कहानी कहने का पैशन इंडियन सिनेमा को फिर से डिफाइन करेगा। आज भी, यह फिल्म अनगिनत कारणों से पसंदीदा बनी हुई है।

1. इसने दुनिया को संजय लीला भंसाली के सिनेमैटिक विज़न से इंट्रोड्यूस कराया

खामोशी: द म्यूजिकल भंसाली की ज़बरदस्त कहानी कहने की कला की पहली झलक थी। इमोशन, म्यूजिक और शानदार विजुअल्स को मिलाने की उनकी काबिलियत उनकी पहली ही फिल्म से साफ़ थी, जिसने एक ऐसे फिल्ममेकिंग स्टाइल की नींव रखी जो बाद में आइकॉनिक बन गया।

2. एक कहानी जो आज भी टाइमलेस लगती है

असल में, खामोशी परिवार, प्यार, त्याग और हिम्मत के बारे में एक दिल को छू लेने वाली कहानी है। एक सुनने वाली बेटी और उसके बहरे-गूंगे माता-पिता के बीच के रिश्ते को ईमानदारी और दया के साथ दिखाकर, भंसाली ने एक ऐसी फिल्म बनाई जिसके इमोशन पीढ़ियों तक गूंजते रहेंगे।

3. म्यूज़िक जो एक इमोशनल भाषा बन गया

संजय लीला भंसाली के लिए, म्यूज़िक हमेशा मनोरंजन से कहीं ज़्यादा रहा है, यह कहानी कहने का ज़रिया है। खामोशी ने इस सोच को खूबसूरती से दिखाया, हर गाने ने कहानी को बेहतर बनाया और किरदारों के इमोशन को बढ़ाया। तीन दशक बाद भी, इसका साउंडट्रैक यादगार है।

4. भंसाली के सिग्नेचर विज़ुअल स्टाइल का जन्म

दर्शकों के देवदास या बाजीराव मस्तानी की शान देखने से पहले ही, खामोशी ने भंसाली की हर छोटी-बड़ी बात पर नज़र रखने की कला दिखाई। हर फ्रेम, हर रंग और हर कंपोज़िशन में वह विज़ुअल खूबसूरती झलकती थी जो बाद में उनका ट्रेडमार्क बन गई।

5. परफॉर्मेंस जो हमेशा असर छोड़ती हैं

भंसाली की अपनी कास्ट से गहरी इमोशनल परफॉर्मेंस निकलवाने की काबिलियत शुरू से ही साफ़ थी। फिल्म के किरदार अपनी असलियत, कमज़ोरी और इमोशनल गहराई की वजह से यादगार बने रहते हैं, जिससे खामोशी परफॉर्मेंस पर आधारित कहानी कहने के लिए एक बेंचमार्क बन जाती है।

6. अपने समय से आगे की फिल्म

इनक्लूसिविटी के बारे में बातचीत आम होने से बहुत पहले, खामोशी ने दिव्यांग किरदारों को अपनी कहानी के केंद्र में गरिमा, हमदर्दी और संवेदनशीलता के साथ रखा। भंसाली ने इस विषय को परंपरा के बजाय दया के साथ लिया, जिससे यह फिल्म आज भी उतनी ही रेलिवेंट है जितनी तीन दशक पहले थी।

7. एक असाधारण विरासत की शुरुआत

आज पीछे मुड़कर देखें तो, खामोशी: द म्यूजिकल एक शानदार डेब्यू से कहीं ज़्यादा है, यह भारत के सबसे महान फिल्ममेकर्स में से एक के जन्म की निशानी है। इस फ़िल्म ने संजय लीला भंसाली के शानदार सफ़र का रास्ता बनाया, जिसमें उन्होंने हम दिल दे चुके सनम, देवदास, ब्लैक, गोलियों की रासलीला राम-लीला, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत, गंगूबाई काठियावाड़ी और हीरामंडी: द डायमंड बाज़ार जैसी फ़िल्में कीं। इन सालों में, भंसाली ने सात नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड, कई फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड, पद्म श्री, एक BAFTA अवॉर्ड नॉमिनेशन जीता है, और रिपब्लिक डे पर एक झांकी, भारत गाथा डिज़ाइन करने वाले पहले फ़िल्ममेकर बने, जो भारतीय सिनेमा के कर्तव्य पथ पर सफ़र का जश्न मनाती है, जिससे भारत के सबसे महान सिनेमाई दूरदर्शी लोगों में से एक के रूप में उनकी जगह और पक्की हो गई।

तीस साल बाद, खामोशी: द म्यूज़िकल सिर्फ़ एक पसंदीदा फ़िल्म नहीं है, बल्कि यह संजय लीला भंसाली की असाधारण विरासत की नींव है। जैसे-जैसे दर्शक उनकी अगली फ़िल्म, लव एंड वॉर का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, यह इंतज़ार ही उस भरोसे और तारीफ़ का सबूत है जो भंसाली ने तीन दशकों में बनाया है। अगर खामोशी ने एक जीनियस के जन्म को दिखाया, तो लव एंड वॉर एक ऐसे फिल्ममेकर के शानदार सफ़र में एक और मील का पत्थर साबित होगी, जो इंडियन सिनेमा का भविष्य बना रहा है।



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Saturday, August 8, 2026

कश्मीरी पंडितों को फिर आतंकी धमकी! LeT से जुड़े टेरर ग्रुप ने जारी की हिट लिस्ट, घाटी के बाहर भी हमले की चेतावनी

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी संगठन ने कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को धमकी दी है। सीएनएन-न्यूज18 के मनोज गुप्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने एक नया धमकी भरा नोट जारी किया है, जिसमें कुछ कर्मचारियों की निजी जानकारी साझा की गई है। साथ ही, कश्मीर घाटी और जम्मू में उन्हें निशाना बनाकर हमले करने की चेतावनी दी गई है। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी यूएलसी को भारतीय खुफिया एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा का एक छद्म संगठन मानती हैं। यूएलसी ने कश्मीरी पंडित अधिकारियों की एक कथित ‘हिट लिस्ट’ जारी की है। इसमें छह सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर शामिल हैं।

यह धमकी खास तौर पर उन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को दी गई है, जो सरकारी रोजगार योजनाओं के तहत काम कर रहे हैं। संगठन ने यह भी धमकी दी है कि अगर आतंकियों और उनके समर्थकों की संपत्तियों को जब्त या कुर्क किया गया, तो सुरक्षा बलों और प्रशासन के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

‘हिट लिस्ट’ में कश्मीरी पंडित कर्मचारी

धमकी भरे नोट में दावा किया गया है कि संगठन सरकारी विभागों पर नजर रख रहा है। इनमें खास तौर पर राजस्व विभाग शामिल है, जहां सरकारी पैकेज के तहत कई कश्मीरी पंडित कर्मचारी तैनात हैं। नोट में छह कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी दिए गए हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस तरह निजी जानकारी सार्वजनिक करने का मकसद कर्मचारियों में डर पैदा करना और उन्हें संभावित टारगेट के रूप में पहचानना हो सकता है। हालांकि, सीएनएन-न्यूज18 ने सुरक्षा कारणों से धमकी में शामिल कर्मचारियों के नाम और उनके संपर्क नंबर सार्वजनिक नहीं किए हैं।

घाटी से जम्मू जाने पर भी हमले की धमकी

संगठन ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे कश्मीर घाटी से जम्मू चले भी जाते हैं, तो वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगे। धमकी में कहा गया है कि उन्हें कश्मीर के बाहर भी निशाना बनाया जा सकता है। संगठन ने प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए दी जा रही प्रशासनिक सुविधाओं का भी विरोध किया है। इनमें घर से काम करने और दूर रहकर काम करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। संगठन ने ऐसी सुविधाएं जारी रखने पर भी धमकी दी है।

एलजी, डीजीपी और केंद्र को खुली चेतावनी

धमकी भरे नोट में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और दिल्ली में मौजूद अधिकारियों को भी चेतावनी दी गई है। संगठन ने दावा किया है कि भविष्य में होने वाले हमलों के दौरान वह लोगों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगा। नोट के एक अन्य हिस्से में स्थानीय पुलिस को लेकर भी धमकी दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय पुलिसकर्मी स्थानीय इलाकों में ही रहते और आते-जाते हैं। संगठन ने इसी आधार पर पुलिसकर्मियों पर कहीं भी और कभी भी हमले का खतरा बताया है।

लश्कर ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए करता है काम: खुफिया सूत्र

भारत के वरिष्ठ खुफिया सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन कई बार अलग-अलग नामों से बने ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए काम करते हैं। इनमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) और पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) जैसे नाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन संगठनों का इस्तेमाल खास तौर पर आम लोगों और धार्मिक समुदायों के खिलाफ होने वाले हमलों की जिम्मेदारी लेने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य इन हमलों को पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के बजाय किसी स्थानीय और धर्मनिरपेक्ष प्रतिरोध के रूप में पेश करना हो सकता है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि ऐसे प्रॉक्सी संगठनों के जरिए आतंकी संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली जांच और आतंकवाद के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों से बचने की कोशिश भी करते हैं। इनमें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध शामिल हैं।

कर्मचारियों का डेटा जारी करना सोची-समझी साजिश

खुफिया जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत भर्ती किए गए कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर और उनकी तैनाती की जगहों की जानकारी सार्वजनिक करना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस जानकारी का इस्तेमाल इन कर्मचारियों को डराने या उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पाया है कि ‘हाइब्रिड आतंकियों’ द्वारा की जाने वाली लक्षित हत्याओं में छोटे और आसानी से छिपाए जा सकने वाले हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनमें पिस्तौल और रिवॉल्वर जैसे हथियार शामिल हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, हाइब्रिड आतंकी ऐसे लोग होते हैं जो सामान्य नागरिकों की तरह अपनी नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी जीते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। ऐसे लोगों का इस्तेमाल खास लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाई गई

सरकारी कर्मचारियों को मिल रही धमकियों और आतंकवादियों की मदद करने वालों की संपत्ति जब्त किए जाने के बाद सामने आई धमकियों को देखते हुए सुरक्षा बलों ने प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ा दी है। उनके रहने की जगहों के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां कर्मचारियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सुरक्षित रास्ते तय कर रही हैं। इसके साथ ही, कर्मचारियों की निजी जानकारी ऑनलाइन साझा करने वाले आतंकी गुटों के खिलाफ खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान भी तेज किए गए हैं। इन अभियानों का मकसद ऐसे आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना है।



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Friday, August 7, 2026

Sugar Price : इस साल फेस्टिवल सीजन में चीनी बिगाड़ सकती है मूड, 15% तक बढ़े शुगर के दाम

Sugar Price : फेस्टिवल सीजन में चीनी का स्वाद फीका पड़ सकता है। पिछले एक महीने में कुछ राज्यों में चीनी के दाम 15% तक बढ़े हैं। इसका उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी मिलों ने शुगर क्रशिंग पहले शुरू करने का फैसला लिया है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले एक महीने के अंदर चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़ गए हैं। ऐसे में चीनी का उत्पादन बढ़ा कर इसके बढ़ते दाम को थामने के लिए चीनी मिलों ने इस साल शुगर क्रशिंग पहले शुरू करने का फैसला किया है।

इस साल फेस्टिवल सीजन में चीनी का स्वाद फीका हो सकता है। दरअसल,इस साल अनुमान के मुताबिक चीनी का उत्पादन नहीं हुआ है। इस साल चीनी का उत्पादन 293 लाख टन रहने का अनुमान था लेकिन ये 280 लाख टन ही रहा,जो अनुमान के मुकाबले करीब 5% कम है। पिछले साल का करीब 50 लाख टन स्टॉक उपलब्ध है लेकिन देश में कुल चीनी की खपत 280 लाख टन होती है। इस साल करीब 8 लाख टन चीनी निर्यात हुई है। पिछले महीने चीनी के होलसेल दाम में 400 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इसे देखते हुए कंपनियों ने इस साल चीनी का उत्पादन 10-15 दिन पहले शुरू करने का फैसला किया है।

अगर सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली में 1 महीने पहले चीनी का दाम 45 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 49 रुपए प्रति किलो हो गया है। वहीं,पश्चिम बंगाल में 1 महीने पहले इसका दाम 49 रुपए प्रति किलो था जो अब 55 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। चेन्नई में 1 महीने पहले चीनी का दाम 46 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 53 रुपए प्रति किलो हो गया है। मुंबई में 1 महीने पहले चीनी का दाम 46 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 52 रुपए प्रति किलो हो गया है। इसी तरह रांची में 1 महीने पहले चीनी का दाम 47 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 51 रुपए प्रति किलो हो गया है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़े हैं। कुछ राज्यों में तो चीनी के दाम में 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई है। साथ ही चीनी मिलों के स्टॉक की भी जांच की है। लेकिन एल नीनो और अगले साल चीनी का उत्पादन कम होने की आशंका से दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

चीनी कंपनियों मार्जिन में आएगा सुधार

चीनी की कीमतों में बढ़त से उपभोक्ता भले ही परेशान हों लेकिन इससे चीनी मिल कंपनियों को फायदा होगा। चीनी के दाम बढ़ने से बलरामपुर चीनी,द्वारिकेश शुगर,श्री रेणुका शुगर और डालमिया भारत शुगर जैसी कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी की उम्मीद है। ऊंचे दाम से उनके मार्जिन सुधर सकते हैं। साथ ही यह सरकार के महत्वाकांक्षी इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए भी झटका साबित हो सकता है। ऊंची कीमतों की वजह से मिलें इथेनॉल बनाने के बजाय चीनी बेचना ज्यादा फायदेमंद समझ सकती हैं, जिससे देश में इथेनॉल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

 

 

Market Outlook : निफ्टी-सेंसेक्स गिरावट के साथ हुए बंद, जानिए 10 अगस्त को कैसी रह सकती है इनकी चाल



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Thursday, August 6, 2026

Retirement Planning: हर महीने ₹50000 की पेंशन के लिए कितना रिटायरमेंट फंड चाहिए? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Retirement Planning: नौकरी के दौरान हर महीने सैलरी खाते में आ जाती है। इसलिए खर्च की ज्यादा चिंता नहीं होती। लेकिन रिटायरमेंट के बाद यही सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। सैलरी बंद हो जाती है, लेकिन खर्च नहीं रुकते। हर महीने राशन खरीदना है, बिजली का बिल भरना है, दवाइयां लेनी हैं और रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी करनी हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रिटायरमेंट तक कितना पैसा जोड़ना होगा, ताकि हर महीने 50,000 रुपये आराम से मिलते रहें और बीच में पैसा खत्म होने का डर भी न रहे।

₹50000 पेंशन के लिए कितना फंड ?

अगर आपको हर महीने 50,000 रुपये चाहिए, तो सालभर में आपकी जरूरत होगी 6 लाख रुपये। फाइनेंशियल प्लानिंग में एक लोकप्रिय नियम है 4% Withdrawal Rule। इस नियम के मुताबिक, रिटायरमेंट के पहले साल आप अपने कुल कॉर्पस का 4% निकालते हैं। बाद के वर्षों में निकासी की रकम महंगाई के हिसाब से बढ़ाई जा सकती है। माना जाता है कि अगर निवेश पर ठीक-ठाक रिटर्न मिलता रहे, तो आपका पैसा 25-30 साल या उससे ज्यादा समय तक चल सकता है।

इस नियम के मुताबिक, अगर आपका रिटायरमेंट कॉर्पस करीब 1.5 करोड़ रुपये है, तो आप लगभग 50,000 रुपये महीना निकाल सकते हैं। इसमें कोशिश यह रहती है कि हर साल इतना ही पैसा निकाला जाए, जिससे बाकी रकम निवेश में बनी रहे और उस पर मिलने वाला रिटर्न भविष्य के खर्च में मदद करता रहे।

30 हजार से 1 लाख की पेंशन के जरूरी फंड

हर महीने चाहिएसालाना जरूरत

4% नियम के हिसाब से जरूरी कॉर्पस

₹30,000₹3.60 लाख₹90 लाख
₹50,000₹6 लाख₹1.50 करोड़
₹75,000₹9 लाख₹2.25 करोड़
₹1,00,000₹12 लाख₹3 करोड़

अगर रिटायरमेंट में 20 साल या 10 साल बाकी हैं

मान लीजिए आपका लक्ष्य रिटायरमेंट तक 1.5 करोड़ रुपये का कॉर्पस बनाना है। अगर आपकी उम्र 40 साल है और रिटायरमेंट में अभी 20 साल बाकी हैं, तो हर महीने अपेक्षाकृत कम SIP से भी यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। लेकिन अगर आप 50 साल की उम्र में निवेश शुरू करते हैं और रिटायरमेंट में सिर्फ 10 साल बचे हैं, तो हर महीने कहीं ज्यादा निवेश करना पड़ेगा।

अनुमानित सालाना रिटर्न20 साल बाकी (मासिक SIP)

10 साल बाकी (मासिक SIP)

10%₹19,800₹72,000
12%₹15,000₹66,000
15%₹10,500₹57,000

यह तुलना साफ दिखाती है कि रिटायरमेंट प्लानिंग में समय सबसे बड़ी ताकत है। 20 साल पहले शुरुआत करने वाला निवेशक 15-20 हजार रुपये की SIP से लक्ष्य तक पहुंच सकता है। वहीं, सिर्फ 10 साल बचे होने पर उसी लक्ष्य के लिए 60-70 हजार रुपये महीना निवेश करना पड़ सकता है। इसलिए जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, उतना कम मासिक बोझ पड़ेगा और कंपाउंडिंग का फायदा भी ज्यादा मिलेगा।

Chart SIPS

महंगाई आपकी सबसे बड़ी चुनौती है

रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी गलती यह मान लेना है कि आज जितने पैसों में खर्च चल रहा है, उतने ही पैसों में भविष्य में भी काम चल जाएगा। जबकि सच यह है कि समय के साथ महंगाई हर चीज को महंगा कर देती है। दवाइयों से लेकर बिजली, राशन और यात्रा तक लगभग हर खर्च बढ़ता रहता है।

मान लीजिए आज आपका मासिक खर्च 50,000 रुपये है। अगर महंगाई औसतन 6% सालाना रहती है, तो 20 साल बाद यही खर्च करीब 1.60 लाख रुपये महीना हो सकता है। वहीं, 25 साल बाद इसके लिए करीब 2.15 लाख रुपये महीने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए रिटायरमेंट प्लान बनाते समय हमेशा भविष्य की महंगाई को ध्यान में रखें।

रिटायरमेंट प्लानिंग में इन गलतियों से बचें

  • पूरा रिटायरमेंट फंड FD में न रखें, क्योंकि इससे महंगाई को मात देना मुश्किल हो सकता है।
  • जरूरत से ज्यादा निकासी न करें, वरना कॉर्पस तय समय से पहले खत्म हो सकता है।
  • हेल्थ इंश्योरेंस जरूर रखें, ताकि मेडिकल खर्च के लिए निवेश न तोड़ना पड़े।
  • महंगाई को नजरअंदाज न करें, क्योंकि भविष्य में खर्च आज से काफी ज्यादा हो सकते हैं।
  • हर 2-3 साल में प्लान की समीक्षा करें, ताकि जरूरत के हिसाब से निवेश और निकासी में बदलाव किया जा सके।
  • सारा पैसा एक ही निवेश विकल्प में न लगाएं, बल्कि अलग-अलग एसेट में संतुलित निवेश करें।

Retirement Planning: क्या हो रिटायरमेंट की बेस्ट प्लानिंग, कितना फंड रहेगा पर्याप्त? एक्सपर्ट ने समझा दिया पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।



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Wednesday, August 5, 2026

Mark Zuckerberg: भारत सरकार के सामने झुके मार्क जुकरबर्ग! Meta प्लेटफॉर्म पर डीपफेक कंटेंट और खामियों के लिए मांगी माफी

Mark Zuckerberg apologizes: दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी Meta के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार के साथ हालिया बातचीत के दौरान कंपनी के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM), डीपफेक कंटेंट और कामकाज में कमियों को लेकर खेद जताया है। यह जानकारी हमारे सहयोगी Moneycontrol को सूत्रों ने दी है।

सूत्रों के मुताबिक, जुकरबर्ग ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, डीपफेक कंटेंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गवर्नेंस में नाकामियों के लिए माफी मांगी है। रिपोर्ट के अनुसार, जुकरबर्ग ने इन घटनाओं पर अफसोस व्यक्त करते हुए स्वीकार किया कि हानिकारक और आपत्तिजनक कंटेंट से निपटने में Meta से कुछ कमियां रह गई थीं।

मेटा ने यह माना है कि कुछ खास तरह की सामग्री को बढ़ावा देने के लिए काफी धन दिया गया। अमेरिकी कंपनी ने इन गलतियों पर खेद जताया और माफी मांगी।सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार ने मेटा से कहा है कि वह 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) की परिभाषा में नहीं आती है, क्योंकि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही तय करता है कि कंटेंट किसे मिलेगा।

MeitY अधिकारियों से हुई अहम बैठक

5 अगस्त को Meta के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान और कंपनी के अन्य वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में भारत सरकार ने Meta के कंटेंट मॉडरेशन, यूजर सुरक्षा और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए।

सरकार ने 'सेफ हार्बर' पर उठाए सवाल

सूत्रों के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों ने Meta से कहा कि कंपनी केवल एक निष्क्रिय (Passive) इंटरमीडियरी की भूमिका नहीं निभाती। बल्कि यह तय करती है कि किस तरह का कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा और किन पोस्टों की सिफारिश (Recommendation) की जाएगी।

अधिकारियों का कहना था कि जब कोई प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम के जरिए कंटेंट के वितरण और प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) सुरक्षा का लाभ उसी रूप में मिलना चाहिए।

क्या है 'सेफ हार्बर' प्रावधान?

आईटी अधिनियम के तहत 'सेफ हार्बर' प्रावधान सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। बशर्ते वे कानून के अनुसार आवश्यक सावधानियां बरतें और अवैध सामग्री के खिलाफ निर्धारित नियमों का पालन करें।

हालांकि, यदि कोई प्लेटफॉर्म कंटेंट के चयन, प्रचार या वितरण में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो उसकी इस कानूनी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो सकते हैं। फिलहाल Meta या भारत सरकार की ओर से इस बैठक और कथित माफी को लेकर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए रिपोर्ट में सामने आई जानकारी सूत्रों के हवाले से बताई गई है।

ये भी पढ़ें- El Nino and Monsoon update: अल नीनो पर सरकार का बड़ा अपडेट, IMD ने पहले ही दे दी थी कमजोर मानसून की चेतावनी



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Tuesday, August 4, 2026

आपके पेट डॉग के लिए 67 मिनट की वॉक और 16 बार स्निफ जरूरी! सिर्फ 10 मिनट टहलाकर लाने वाले जान लें ये बात

आज के समय में बहुत से लोग अपने घर में कुत्ता पाल रहे हैं। कई लोग अपने पेट को सिर्फ पालतू जानवर नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। लेकिन कुत्ता पालना सिर्फ खाना देने और उसकी देखभाल करने तक ही सीमित नहीं है। कुत्ते को रोज बाहर घुमाना और खेलने का समय देना भी उसकी अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। वहीं अक्सर आपने देखा होगा टहलते समय आपका कुत्ता बार-बार रुककर आसपास की चीजों को सूंघता है, पानी में खेलने की कोशिश करता है या दूसरे कुत्तों के पास जाने लगता है। कई लोगों को यह बेवजह रुकना लग सकता है, लेकिन कुत्तों के लिए यही सैर का सबसे मजेदार हिस्सा होता है। वे सूंघकर अपने आसपास की नई-नई चीजों को पहचानते हैं और इसी तरह बाहर घूमने का आनंद लेते हैं।

अगर आप अपने कुत्ते को मात्र 10 मिनट में टहलाकर वापस ले जाते हैं तो ये खबर आपके लिए हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे में बताया गया है कि, कुत्तों के लिए 67 मिनट की सैर बेहतर मानी जाती है। आइए जानते हैं इसके बारे में

कुत्तों के लिए कितने मिनट का सैर बेहतर

हाल ही में सामने आए एक सर्वे में पता चला कि, कुत्तों के लिए अच्छी सैर सिर्फ चलना नहीं, बल्कि नई-नई चीजों को महसूस करना भी होती है। ब्रिटेन में 1,800 डॉग ओनर्स पर किए गए इस सर्वे के मुताबिक, एक कुत्ते के लिए करीब 67 मिनट की सैर सबसे बेहतर मानी गई। इस दौरान उसे अलग-अलग जगहों को सूंघने, खुली जगह में घूमने, पानी में खेलने और रास्ते में दूसरे कुत्तों से मिलने-जुलने का भी मौका मिलना चाहिए। ये जानकारी भारत के लिए काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि देश में खासकर बड़े शहरों में पालतू कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

कुत्ते को टहलाना मेंटल एक्सरसाइज

इंसान अपने आसपास की दुनिया को समझने के लिए सबसे ज्यादा आंखों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुत्ते अपनी नाक के जरिए चीजों को पहचानते और समझते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, कुत्तों की सूंघने की क्षमता इंसानों से कहीं अधिक तेज होती है। इसी वजह से वे सिर्फ गंध के आधार पर दूसरे जानवरों, लोगों और अपने आसपास के माहौल के बारे में कई तरह की जानकारी हासिल कर लेते हैं। उनके लिए पेड़, घास या रास्ते में मौजूद दूसरी चीजें सिर्फ सामान नहीं, बल्कि जानकारी का एक अहम स्रोत होती हैं। इसीलिए बिहेवियरिस्ट अक्सर वॉक को सिर्फ फिजिकल एक्टिविटी के बजाय “मेंटल एक्सरसाइज़” बताते हैं।

कुत्तों को टहलाना जरुरी

आजकल शहरों में रहने वाले कई पालतू कुत्ते सिर्फ थोड़ी देर के लिए ही बाहर घूम पाते हैं। ज्यादातर लोग उन्हें अपार्टमेंट या सोसाइटी के आसपास कुछ मिनट ही टहलाते हैं। ऐसे में कुत्तों को नई जगह देखने, चीजों को सूंघने और खुलकर घूमने का मौका नहीं मिल पाता। जानकारों का कहना है कि अगर कुत्तों को लंबे समय तक ऐसा मौका न मिले, तो वे बोर हो सकते हैं, ज्यादा भौंक सकते हैं, सामान चबा सकते हैं और बेचैन रहने लगते हैं। फिली पॉज क्लॉज़ के अनुसार, जिन कुत्तों को "लगातार एक्सरसाइज़ मिलती है, उन्हें ट्रेन करना आसान होता है और वे कमांड पर ज़्यादा रिस्पॉन्सिव होते हैं।"

आजकल ट्रेंड बन गया है कुत्ता पालना

पिछले कुछ सालों में लोगों का पालतू जानवरों को देखने का नजरिया काफी बदल गया है। अब ज्यादातर लोग उन्हें परिवार का हिस्सा मानते हैं और उनकी अच्छी देखभाल करते हैं। बढ़ती कमाई, छोटे परिवार और शहरों में रहने के कारण खासकर युवा बड़ी संख्या में कुत्ते पाल रहे हैं। लेकिन कुत्ता पालना सिर्फ उसे खाना खिलाने, नहलाने और टीका लगवाने तक ही सीमित नहीं है। उसे रोज बाहर घुमाना, नई जगहों को सूंघने और अपनी मर्जी से थोड़ा घूमने का मौका देना भी उसकी अच्छी सेहत और खुशी के लिए बहुत जरूरी है।



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Monday, August 3, 2026

Ather Energy Q1 Results: घाटे में बड़ी कमी, रेवेन्यू 88% उछला; 1 साल में 223% चढ़ा स्टॉक

Ather Energy Q1 Results: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी Ather Energy ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का शुद्ध घाटा घटकर ₹51 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹178.2 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 88.8% बढ़कर ₹1,217 करोड़ पहुंच गया।

कंपनी का EBITDA घाटा भी काफी कम होकर ₹33.4 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹134.3 करोड़ था। इसका मतलब है कि बिक्री बढ़ने के साथ कंपनी की ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी बेहतर हुई है।

EV बाजार में दिख रहा बड़ा मौका

Ather Energy का कहना है कि भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी के मुताबिक, दिल्ली EV पॉलिसी और केंद्र सरकार की PM E-Drive जैसी योजनाएं इस सेक्टर को मजबूती दे रही हैं।

इसके अलावा पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और ईंधन की उपलब्धता को लेकर चिंता भी है। इससे ग्राहक EV अपनाने की तरफ बढ़ रहे हैं। कंपनी का कहना है कि हालिया पेट्रोल कीमतों में बढ़ोतरी से पहले ही EV की मांग तेज होने लगी थी।

जल्द लॉन्च होगा नया स्कूटर

Ather अब अपने नए EL स्कूटर को लॉन्च करने की तैयारी में है। जून तिमाही में इसका होमोलोगेशन पूरा हो गया है और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन ट्रायल भी शुरू हो चुके हैं।

कंपनी के होसुर प्लांट में FY27 की दूसरी तिमाही से इसका कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होगा। अगस्त में होने वाले Ather Community Day के दौरान इस स्कूटर को लॉन्च किया जाएगा।

कंपनी आने वाले समय में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 60,000 गाड़ी प्रति माह करने की योजना पर काम कर रही है।

हाल ही में जुटाए ₹1,300 करोड़

Ather Energy ने इसी महीने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए ₹1,300 करोड़ जुटाए हैं। कंपनी ने 1.08 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,202 प्रति शेयर के भाव पर जारी किए।

टेक्नोलॉजी फीचर्स पर भी फोकस

एथर एनर्जी लगातार अपने सॉफ्टवेयर फीचर्स भी मजबूत कर रही है। हाल ही में उसने 'Pothole+ Alerts' फीचर लॉन्च किया है। यह फीचर 450 Apex, 450X और Rizta Z समेत Gen 2 और उसके बाद के स्कूटरों में उपलब्ध है।

यह फीचर Ather के कनेक्टेड स्कूटरों से मिले डेटा की मदद से रास्ते में गड्ढों, टूटी सड़कों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और स्पीड ब्रेकर की पहले से जानकारी देता है। इससे राइडिंग ज्यादा सुरक्षित और आसान हो सके।

Ather Energy के शेयरों का हाल

एथर एनर्जी का शेयर सोमवार को 1.56% की बढ़त के साथ 1,280 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में इसने 89.38% का रिटर्न दिया है। वहीं 1 साल में इसने 223.27% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 50.16 हजार करोड़ रुपये है।

आईपीओ टलते ही अनलिस्टेड मार्केट में मची खलबली! 5 दिनों में 23% टूटा जेप्टो का शेयर, ऑल-टाइम हाई से 60% गिरा भाव

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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