Tuesday, September 3, 2024

बंगाल विधानसभा में पास एंटी-रेप बिल में क्या है प्रावधान? कोलकाता कांड को लेकर घिरीं ममता ने खेला नया दांव

Anti-Rape Bill Passed: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने विपक्ष के पूर्ण समर्थन के साथ राज्य का बलात्कार विरोधी विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। हालांकि, सदन ने विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी द्वारा विधेयक में प्रस्तावित संशोधन स्वीकार नहीं किए। इसके साथ ही, बंगाल बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने वाले केंद्रीय कानूनों में संशोधन लाने वाला पहला राज्य बन गया है। संक्षिप्त चर्चा के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में मंगलवार (3 सितंबर) को बलात्कार विरोधी 'अपराजिता' विधेयक पारित कर दिया। इसमें बलात्कार और यौन अपराधों के लिए दोषी व्यक्तियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है।

विधेयक के मसौदे में बलात्कार पीड़िता की मौत होने या उसके स्थायी रूप से अचेत अवस्था में चले जाने की सूरत में ऐसे दोषियों के लिए मृत्युदंड के प्रावधान का प्रस्ताव किया गया है। पीटीआई के मुताबिक, मसौदे में प्रस्ताव किया गया है कि बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के दोषी व्यक्तियों को आजीवन कारावास की सजा दी जाए।

साथ ही उन्हें पेरोल की सुविधा न दी जाए। 'अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक (पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून एवं संशोधन) विधेयक 2024' शीर्षक वाले इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य बलात्कार और यौन अपराधों से संबंधित नए प्रावधानों के जरिए महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा मजबूत करना है।

कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पिछले महीने एक डॉक्टर के साथ कथित बलात्कार और हत्या की घटना के बाद सोमवार को विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया। राज्य के कानून मंत्री मलय घटक ने विधानसभा में यह विधेयक पेश किया।

अब यह विधेयक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस और उसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास उनकी मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। नए बिल में बलात्कार के दोषियों के लिए बिना पैरोल के आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।

BJP का हमला

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक डॉक्टर की हत्या को लेकर जनता के गुस्से और विरोध से ध्यान भटकाने के लिए नया बिल पेश किया। विधेयक पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता ने कहा, "हम नए विधेयक का पूरा समर्थन करेंगे और इस पर वोटिंग की मांग नहीं करेंगे।" उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल के दौरान महिलाओं से दुष्कर्म और यौन शोषण की घटनाओं को रोकने में विफल रही। अधिकारी ने विधेयक के पारित होने के बाद राज्य सरकार से इसे तुरंत लागू करने की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष ने पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में यौन शोषण और दुष्कर्म के संबंध में मीडिया की खबरों का हवाला दिया। अधिकारी ने आरोप लगाया कि इनमें से किसी भी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच नहीं संभाली। फिर भी राज्य की जांच एजेंसियां ​​दोषियों को गिरफ्तार करने और उन्हें कड़ी सजा दिलाने में विफल रहीं।

अधिकारी ने कहा, "हम चाहते हैं कि विधेयक पारित होने के बाद इसे तत्काल लागू किया जाए। मैं मांग करता हूं कि मेरे द्वारा सुझाए गए संशोधनों जिनमें शिकायत पर कार्रवाई करने में किसी भी विफलता के लिए संबंधित पुलिस थाने के खिलाफ कार्रवाई करना और जांच में विफलता साबित होने पर संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की मेरी सिफारिश को विधेयक में शामिल किया जाना चाहिए।"

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अधिकारी ने कहा, ठमुख्यमंत्री पिछले माह एक सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहीं, क्योंकि उनकी सरकार पिछली घटनाओं के दोषियों के खिलाफ दंडनीय कार्रवाई नहीं कर सकी। अधिकारी ने कुछ संशोधनों को पढ़ते हुए कहा कि पीड़ितों या उनके परिजनों की FIR दर्ज न करने पर संबंधित पुलिस थाने के अधिकारियों को कड़ी सजा दी जाए। लेकिन कानून मंत्री मलय घटक द्वारा कानूनी पहलुओं का हवाला दिए जाने के कारण इन संशोधनों पर वोटिंग नहीं हो सकी।



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Monday, September 2, 2024

Indian Railways: सुपरफास्ट, मेल-एक्सप्रेस, ट्रेन में क्या है अंतर? कितनी होती है स्पीड, यहां जानिए पूरी डिटेल

भारत में ट्रेन का इस्तेमाल एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए लोग ज्यादा करते हैं। इसके जरिए माल ढुलाई भी की जाती है। सफर के लिए यह सबसे बेस्ट ऑप्शन माना जाता है। भारतीय रेलवे (Indian Railways) देश की लाइफ लाइन भी मानी जाती है। हर दिन करोड़ों लोग किसी न किसी दूरी के सफर के लिए ट्रेन की यात्रा करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि एक ही रूट पर रेलवे पैसेंजर, मेल और एक्सप्रेस नाम से अलग-अलग गाड़ियां क्यों चलाता है?

अगर आपको इन सवालों का जवाब नहीं पता है, तो आइए समझते हैं कि आखिर मेल, एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों के बीच में क्या अंतर होता है और रेलवे कैसे किसी ट्रेन की कैटेगरी को तय करती है।

जानिए सुपरफास्ट ट्रेन की कितनी होती है स्पीड

भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट indianrailways.gov.in के मुताबिक, अगर किसी ट्रेन की अप और डाउन दोनों दिशाओं में गति, बड़ी लाइन पर 55 कि.मी. प्रतिघंटा और मीडियम लाइन पर 45 कि.मी. प्रति घंटा है तो उसे सुपरफास्ट गाड़ी (Superfast Train) माना जाएगा। औसत गति की गणना एंड-टू-एंड दूरी को यात्रा को कुल दूरी से भाग करके किया जाता है। कुछ सुपरफास्ट ट्रेन की स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा है। ये एक राज्य से दूसरे राज्य में चलती हैं। इनमें भी जनरल, स्लीपर और एसी डिब्बे होते हैं। ये अपनी यात्रा में बहुत कम स्‍टेशनों पर रुकती हैं। ज्‍यादातर ये ट्रेनें लंबी दूरी को कवर करती हैं।

पैसेंजर ट्रेन

रेलवे बहुत छोटी दूरी के लिए पैसेंजर ट्रेन को चलाती है। इन पैसेंजर ट्रेनों में ज्यादातर सभी डिब्बे जनरल के होते हैं। ये रास्ते में पड़ने वाले हर छोटे-बड़े स्टेशनों पर रूकते हुए चलती है। इस कारण से इन पैसेंजर ट्रेन की स्पीड भी काफी कम होती है।

मेल ट्रेन

पुराने समय में रेलवे ट्रेनों में एक डाक का डिब्बा लगा देती थी। जिससे डाक भेजा जाता था। इसी से इनका नाम मेल एक्सप्रेस पड़ गया। आज के समय में गाड़ियों से ये डाक के डिब्बे तो हट गए हैं, लेकिन इन्हें आज भी मेल एक्सप्रेस ही कहा जाता है। औसतन ये 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं। बीच में कई स्टेशनों पर रूकती हुई जाती हैं। इन ट्रेनों का नंबर आमतौर पर 123 से शुरू होता है।

एक्सप्रेस ट्रेन की स्पीड

भारत में एक्सप्रेस ट्रेन सेमी प्रायोरिटी वाली रेल सर्विस है। इन ट्रेनों की स्पीड करीब 55 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है। एक्सप्रेस ट्रेन की स्पीड जहां मेल-ट्रेन से ज्यादा होती है। वहीं इसके सुपरफास्टट ट्रेन से कम होती है। एक्सप्रेस ट्रेन, मेल ट्रेन की तरह जगह-जगह और हाल्ट नहीं करती है। एक्सप्रेस ट्रेन का नाम ज्यादातर किसी शहर, जगह या किसी व्यक्ति के नाम से हो सकती है। इसमें जनरल ,स्लीपर और एसी कोच लगे होते हैं।

Indian Railways: यह है अनोखा रेलवे स्टेशन, यात्री टिकट खरीदते हैं, लेकिन सफर नहीं करते, आखिर क्यों



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किसानों के हित में कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले, मुंबई-इंदौर रेल कनेक्टिविटी को भी मिली मंजूरी

कैबिनेट ने किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। आज कैबिनेट ने किसानों से जुड़े आठ प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने मुंबई से इंदौर रेलवे लाइन बिछाने और गुजरात में एक नया सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने को भी हरि झंडी दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 2817 करोड़ की लगात से सरकार डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन शुरू करने का फैसला किया है। किसानों लेकर मोदी कैबिनेट ने लिए 8 अहम फैसले लिए हैं। इस योजना के लागू होने से किसानों को आसानी से लोन मिलेगा। एक क्लिक पर उनको फसलों की जानकारी मिलेगी।

डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के लिए 2,817 करोड़ रुपए को मंजूरी दी गई है

कैबिनेट के फैसलों की डिटेल से समझते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के असीम मनचंदा ने बताया कि कैबिनेट में आज किसानों के लिए 8 प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के लिए 2,817 करोड़ रुपए को मंजूरी दी गई है। 3979 करोड़ रुपए की लागत वाली क्रॉप साइंस स्कीम

को मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा 1,702 करोड़ रुपए की पशुधन हेल्थ स्कीम को भी मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट की तरफ से आज नेचुरल फार्मिंग के लिए नेशनल मिशन (NMNF) को भी मंजूरी दे दी गई है।

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मुंबई-इंदौर रेल कनेक्टिविटी को भी मिली मंजूरी

इसके अलावा कैबिनेट की आज हुई इस अहम बैठक में मुंबई-इंदौर रेल कनेक्टिविटी के लिए 18,000 करोड़ रूपए की मंजूरी दी गई है। साथ Kaynes के सेमीकंडक्टर प्लांट को भी मिली मंजूर मिल गई है। इसके तहत 3300 करोड़ रुपए की लागत से तैसाणंद में एक प्लांट लगेगा।



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IPO Fraud: 90% SME IPO में फर्जीवाड़ा, विजय केडिया ने उठाए सवाल

IPO Fraud: आईपीओ निवेशकों के लिए पिछले कुछ वर्ष शानदार रहे हैं। इस साल 2024 की ही बात करें तो तो आईपीओ निवेशकों को लिस्टिंग के दिन ही 400 फीसदी से अधिक तक का रिटर्न मिल गया यानी कि लिस्टिंग पर ही आईपीओ निवेशकों का पैसा पांच गुना से अधिक बढ़ गया। हालांकि आईपीओ निवेशकों को सिर्फ SME के आईपीओ ने ही नहीं बल्कि मेनबोर्ड यानी बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने वाली कंपनियों के आईपीओ ने भी निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। लिस्टिंग के दिन की ताबड़तोड़ तेजी को लेकर काफी सवाल उठ चुके हैं और एनएसई ने तो एसएमई के लिए अधिकतम लिस्टिंग गेन का कैप ही लगा दिया है। अब दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने भी कहा है कि 10 में 9 एसएमई के आईपीओ में मैनिपुलेशन हुआ है यानी कि निवेशकों को गुमराह किया गया। उन्होंने सिर्फ एसएमई ही नहीं बल्कि मेनबोर्ड के आईपीओ लेकर भी ऐसे आरोप लगाए हैं।

400% से ज्यादा लिस्टिंग गेना मिला आईपीओ निवेशकों को

सबसे अधिक सवाल SME को लेकर हैं और इस साल एसएमई ने आईपीओ के जरिए रिकॉर्ड पैसे जुटाए। जनवरी से जुलाई के बीच 144 एसएमई ने 4800 करोड़ रुपये के आईपीओ लाए जबकि पिछले साल 182 एसएमई ने 4686 करोड़ रुपये का आईपीओ लाया था। इनकी लिस्टिंग को ट्रैक करने वाले BSE SME IPO इंडेक्स की बात करें तो इस साल यह 124 फीसदी मजबूत हुआ जबकि इस दौरान बीएसई सेंसेक्स 14 फीसदी है।

अब लिस्टिंग गेन की बात करें तो इस साल सबसे तगड़ा लिस्टिंग गेन सोलर और विंड पावर जेनेरेशन कंपनियों को सर्विसेज मुहैया कराने वाली विंनसॉल इंजीनियरिंग के शेयरों ने दिया। इसके 75 रुपये के शेयर 365 रुपये पर लिस्ट हुए थे यानी कि आईपीओ निवेशकों को 386 फीसदी से अधिक लिस्टिंग गेन मिला। दिन के आखिरी में यह NSE SME पर 383.25 रुपये के अपर सर्किट पर बंद हुआ यानी कि आईपीओ निवेशकों का पैसा पहले कारोबारी दिन 411 फीसदी बढ़ा यानी कि आईपीओ निवेशकों का पैसा पहले ही दिन 5 गुना से अधिक बढ़ गया।

विनसॉल इंजीनियरिंग के अलावा और भी कंपनियों के शेयरों ने ताबड़तोड़ पैसा बढ़ाया। जैसे कि Kay Cee Energy & Infra, मेडिकामेन ऑर्गेनिक्स, जीपी इको सॉल्यूशंस इंडिया और मैक्सपोजर के शेयरों ने लिस्टिंग के दिन आईपीओ निवेशकों का पैसा चार गुना से अधिक बढ़ाया।

किस तरह के मैनिपुलेशन की हो रही है बात?

एसएमई आईपीओ को लेकर निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा है और धड़ाधड़ सब्सक्राइब हो रहे हैं। इसकी वजह ये है कि पहले ही दिन ये पैसे डबल, ट्रिपल, चार गुना और पांच गुना तक कर रहे थे। हालांकि अब NSE ने लिमिट लगा दिया है और अब SME के शेयर अधिक 90 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हो सकते हैं और इसके बाद 5 फीसदी के अपर सर्किट को जोड़ लें तो पहले दिन आईपीओ निवेशकों का पैसा डबल तक हो सकता है, इससे अधिक नहीं बढ़ेगा। ध्यान दें कि यह नियम सिर्फ एसएमआई आईपीओ की लिस्टिंग के लिए है, मेनबोर्ड आईपीओ के लिए नहीं। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने भी निवेशकों को सतर्क किया है और टिप्स या सोशल मीडिया चैनल के भरोसे एसएमई में पैसे नहीं लगाने को कहा है। सेबी ने आगाह किया है कि एसएमई कंपनियां लिस्टिंग के बाद बोनस इश्यू स्टॉक स्प्लिट और प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट जैसे पहलों की झूठी तस्वीर पेश कर रही हैं। विजय केडिया ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कहा कि एसएमआई आईपीओ में फर्जीवाड़ा हो रहा है और मेनबोर्ड आईपीओ में भी निवेशकों को मैनिपुलेट किया जा रहा है।

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Lancer Container Share: 4 साल में 1470% रिटर्न, कंपनी ने इंडोनेशियाई फर्म के साथ किया समझौता

लांसर कंटेनर लाइन्स लिमिटेड ने इंडोनेशियाई कंपनी के साथ 10000 TEU लीज पर देने के लिए समझौता किया है। कंपनी का लक्ष्य अपनी TEU क्षमता को FY24 में लगभग 20,000 से बढ़ाकर FY26 तक 45,000 तक करना है। कंपनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी है। कंपनी भारत और विदेशों में शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सर्विसेज के बिजनेस में है। कंपनी के शेयरों में आज 2 सितंबर को 2.59 फीसदी की गिरावट आई है और यह स्टॉक BSE पर 47.40 रुपये के भाव पर बंद हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप 1,128 करोड़ रुपये है। इस शेयर ने अपने निवेशकों को पिछले 4 साल में 1470 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है।

Lancer Container ने इंडोनेशियाई फर्म से मिलाया हाथ

भारत में लीडिंग इंटीग्रेटेड शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशन प्रोवाइडर में से एक लांसर कंटेनर लाइन्स ने इंडोनेशिया की एक प्रमुख कंपनी पी.टी. मैप ट्रांस लॉजिस्टिक सुरबाया के साथ 10,000 TEU (ट्वेंटी-फुट कंटेनर और फोर्टी-फुट कंटेनर) लीज पर देने के लिए समझौता किया है।

कंपनी ने कहा कि लांसर कंटेनर लाइन्स पूरी तरह से इंटीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर बनने के लिए एक नया जहाज खरीदने के अवसरों की तलाश कर रही है। Q1FY25 में कंपनी ने मौजूदा पोर्टफोलियो में 3,008 TEU जोड़े, जिससे कंपनी का विस्तारित कंटेनर फ्लीट अब 22,707 TEU पर है।

कंपनी फ्रेट फॉरवर्डर्स की बढ़ती मांग के जवाब में हर महीने 200-300 कंटेनर जोड़कर अपने कंटेनर इन्वेंट्री को लगातार बढ़ाने का इरादा रखती है। लांसर कंटेनर की मौजूदगी 30 से अधिक देशों में है और यह 86 पोर्ट्स और 36 ICD लोकेशन पर अपनी सर्विस देती है। कंपनी नए ट्रेड रूट्स की खोज करके और कंटेनरों को कई डेस्टिनेशन तक पहुंचाकर अपनी पहुंच का विस्तार कर रही है।

कंपनी का फाइनेंशियल

लांसर कंटेनर ने Q1FY25 में 172.4 करोड़ रुपये का रेवेन्यू, 15.91 करोड़ रुपये का EBITDA और 12.1 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। अपने ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार करते हुए FY24 में कंपनी ने 646.8 करोड़ रुपये का कुल रेवेन्यू, 88.1 करोड़ रुपये का EBITDA (EBITDA मार्जिन 13.9%) और 58.3 करोड़ रुपये का PAT (पीएटी मार्जिन 9.2%) दर्ज किया।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी शेयर परफार्मेंस के आधार पर दी गई है। यह बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)



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Sunday, September 1, 2024

Indian Railways: यह है अनोखा रेलवे स्टेशन, यात्री टिकट खरीदते हैं, लेकिन सफर नहीं करते, आखिर क्यों

भारतीय रेलवे एशिया का सबसे बड़ा, जबकि दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने के लिए ट्रेन सबसे आसान जरिया है। ट्रेन से यात्रा के लिए रेल टिकट होना बेहद जरूरी होता है। बिना टिकट लिए आप ट्रेन से यात्रा नहीं कर सकते हैं। क्‍या हो जब लोग रेल टिकट खरीदे लेकिन यात्रा न करें। जी हां आप सही सुन रहे । उत्तर प्रदेश का एक ऐसा रेलवे स्‍टेशन है, जहां लोग टिकट खरीदते हैं। लेकिन कभी यात्रा नहीं करते है। इसके पीछे की कहानी जानकर हर किसी के होश उड़ जाएंगे।

प्रयागराज में स्थित इस रेलवे स्टेशन का नाम दयालपुर रेलवे स्टेशन है। जहां के लोग टिकट खरीद लेते हैं। लेकिन सफर करना जरूरी नहीं समझते। आप भी सोच रहे होंगे। आखिर ऐसा क्या कारण है, तो चलिए आज हम आपको इस रेलवे स्टेशन के बारे में थोड़ी और जानकारी देते हैं।

साल 2006 में बंद हो गया था दयालपुर रेलवे स्टेशन

दयालपुर रेलवे स्टेशन को बनाने की प्रक्रिया साल 1954 में हुई थी। इसे बनाने में सबसे बड़ा योगदान भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का रहा था। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में, उस समय के रेलवे मंत्री लाल बहादुर शास्त्री से बात करके दयालपुर में रेलवे स्टेशन बनाने की मांग की थी। स्टेशन बनने के बाद लोगों के लिए एक जगह से दूसरी जगह तक सफर करना काफी आसान हो गया था। बता दें, करीबन 50 साल तक इस रेलवे स्टेशन पर सब कुछ सही चलता रहा। लेकिन साल 2006 में इस रेलवे स्टेशन को किसी कारण से बंद करना पड़ गया। स्‍टेशन बंद करने के पीछे की वजह इस क्षेत्र से टिकट की कम बिक्री होना बताया गया। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, अगर मेन रेलवे लाइन पर कोई स्टेशन है तो वहां रोजाना कम से कम 25 टिकट बिकना चाहिए। दयालपुर स्टेशन पर ऐसा नहीं हो रहा था। इसलिए यह बंद हो गया।

साल 2022 में फिर से शुरू हो गया स्टेशन

स्‍थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रयास से साल 2020 में इस स्‍टेशन को दोबारा शुरू कर दिया गया। अब क्षेत्रवासियों को डर है कि कहीं ये यह स्‍टेशन दोबारा न बंद हो जा। इसके लिए गांव के लोग अपनी क्षमतानुसार टिकट खरीद रहे हैं। टिकट खरीदने के मानक को पूरा करना बहुत जरूरी है। इसीलिए लोग टिकट खरीद लेते हैं लेकिन सफर नहीं करते हैँ। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी दयालपुर रेलवे स्टेशन पर सिर्फ एक ही ट्रेन रूकती है। अन्य ट्रेनों के ठहराव के लिए लंबे समय से यहां के लोगों की ओर से मांग की जा रही है।

Indian Railways: इस स्टेशन के पास ट्रेन के पहुंचते ही लाइट चली जाती है, वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए, जानिए क्या है रहस्य



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Saturday, August 31, 2024

बिना कार्ड के ATM में भी जमा कर सकते हैं कैश! RBI की नई सर्विस, ये है तरीका

अब ग्राहक बैंक ATM पर भी कैश जमा कर सकते हैं। RBI ने ग्राहकों के लिए नई सर्विस शुरू की है। अब आप ATM जाकर UPI के माध्यम से कैश जमा कर सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर टी रबीशंकर ने ग्राहकों के लिए कैश जमा को और भी आसान बनाने के लिए एक नई सर्विस की घोषणा की है। अब ग्राहक बिना डेबिट कार्ड का इस्तेमाल किए UPI के जरिए अपने या किसी और के बैंक खाते में ATM से पैसे जमा कर सकेंगे। इस सर्विस का नाम UPI इंटरऑपरेबल कैश डिपॉजिट (UPI-ICD) है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने डेवलप किया है।

UPI-ICD कैसे करेगा काम?

UPI-ICD का मकसद ATM के माध्यम से कैश जमा करने की प्रोसेस को आसान और सुविधाजनक बनाना है। यहां जानें कि यह कैसे काम करेगा।

ATM का पता लगाएं: सबसे पहले उस ATM का पता लगाएं जिसमें कैश रिसाइक्लिंग मशीनें हों और जो UPI-ICD को सपोर्ट करते हों।

पैसा जमा करने का प्रोसेस: ATM स्क्रीन पर कैश जमा करने के विकल्प को चुनें और ओके का बटन दबाएं।

मोबाइल नंबर या VPA दर्ज करें: UPI आईडी से जुड़ा मोबाइल नंबर, वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) या खाता IFSC कोड डालें।

कैश जमा करें: पैसे को स्लॉट में रखें और वह पैसा चुने गए बैंक खाते में जमा हो जाएगी।

इस नई सुविधा के फायदे

UPI-ICD की सबसे खास बात यह है कि अब ग्राहकों को पैसे जमा करने के लिए डेबिट कार्ड ले जाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी। इससे कार्ड के इस्तेमाल में भी कमी आएगी, जो कार्ड से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को कम करने में मदद करेगा। यह सुविधा पहले से ही मौजूद UPI कार्डलेस कैश निकालने की प्रणाली के साथ जुड़ी हुई है, जिससे ग्राहकों के लिए कैश जमा करना आसान हो जाएगा। NPCI के अनुसार यह नई सुविधा अगले महीने से शुरू होगी। बैंक इस सुविधा को स्टेप बाय स्टेप तरीके से लागू करेंगे, ताकि आने वाले महीनों में ज्यादा से ज्यादा ATM में यह सुविधा मिल सके। इससे कैश जमा करना और भी सरल और सुरक्षित हो जाएगा।

गाजियाबाद में 48 घंटे में बिक गए लग्जरी फ्लैट्स! 1200 घरों के लिए मिले 3000 करोड़ रुपये



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