आज के समय में बहुत से लोग अपने घर में कुत्ता पाल रहे हैं। कई लोग अपने पेट को सिर्फ पालतू जानवर नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। लेकिन कुत्ता पालना सिर्फ खाना देने और उसकी देखभाल करने तक ही सीमित नहीं है। कुत्ते को रोज बाहर घुमाना और खेलने का समय देना भी उसकी अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। वहीं अक्सर आपने देखा होगा टहलते समय आपका कुत्ता बार-बार रुककर आसपास की चीजों को सूंघता है, पानी में खेलने की कोशिश करता है या दूसरे कुत्तों के पास जाने लगता है। कई लोगों को यह बेवजह रुकना लग सकता है, लेकिन कुत्तों के लिए यही सैर का सबसे मजेदार हिस्सा होता है। वे सूंघकर अपने आसपास की नई-नई चीजों को पहचानते हैं और इसी तरह बाहर घूमने का आनंद लेते हैं।
अगर आप अपने कुत्ते को मात्र 10 मिनट में टहलाकर वापस ले जाते हैं तो ये खबर आपके लिए हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे में बताया गया है कि, कुत्तों के लिए 67 मिनट की सैर बेहतर मानी जाती है। आइए जानते हैं इसके बारे में
कुत्तों के लिए कितने मिनट का सैर बेहतर
हाल ही में सामने आए एक सर्वे में पता चला कि, कुत्तों के लिए अच्छी सैर सिर्फ चलना नहीं, बल्कि नई-नई चीजों को महसूस करना भी होती है। ब्रिटेन में 1,800 डॉग ओनर्स पर किए गए इस सर्वे के मुताबिक, एक कुत्ते के लिए करीब 67 मिनट की सैर सबसे बेहतर मानी गई। इस दौरान उसे अलग-अलग जगहों को सूंघने, खुली जगह में घूमने, पानी में खेलने और रास्ते में दूसरे कुत्तों से मिलने-जुलने का भी मौका मिलना चाहिए। ये जानकारी भारत के लिए काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि देश में खासकर बड़े शहरों में पालतू कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
कुत्ते को टहलाना मेंटल एक्सरसाइज
इंसान अपने आसपास की दुनिया को समझने के लिए सबसे ज्यादा आंखों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुत्ते अपनी नाक के जरिए चीजों को पहचानते और समझते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, कुत्तों की सूंघने की क्षमता इंसानों से कहीं अधिक तेज होती है। इसी वजह से वे सिर्फ गंध के आधार पर दूसरे जानवरों, लोगों और अपने आसपास के माहौल के बारे में कई तरह की जानकारी हासिल कर लेते हैं। उनके लिए पेड़, घास या रास्ते में मौजूद दूसरी चीजें सिर्फ सामान नहीं, बल्कि जानकारी का एक अहम स्रोत होती हैं। इसीलिए बिहेवियरिस्ट अक्सर वॉक को सिर्फ फिजिकल एक्टिविटी के बजाय “मेंटल एक्सरसाइज़” बताते हैं।
कुत्तों को टहलाना जरुरी
आजकल शहरों में रहने वाले कई पालतू कुत्ते सिर्फ थोड़ी देर के लिए ही बाहर घूम पाते हैं। ज्यादातर लोग उन्हें अपार्टमेंट या सोसाइटी के आसपास कुछ मिनट ही टहलाते हैं। ऐसे में कुत्तों को नई जगह देखने, चीजों को सूंघने और खुलकर घूमने का मौका नहीं मिल पाता। जानकारों का कहना है कि अगर कुत्तों को लंबे समय तक ऐसा मौका न मिले, तो वे बोर हो सकते हैं, ज्यादा भौंक सकते हैं, सामान चबा सकते हैं और बेचैन रहने लगते हैं। फिली पॉज क्लॉज़ के अनुसार, जिन कुत्तों को "लगातार एक्सरसाइज़ मिलती है, उन्हें ट्रेन करना आसान होता है और वे कमांड पर ज़्यादा रिस्पॉन्सिव होते हैं।"
आजकल ट्रेंड बन गया है कुत्ता पालना
पिछले कुछ सालों में लोगों का पालतू जानवरों को देखने का नजरिया काफी बदल गया है। अब ज्यादातर लोग उन्हें परिवार का हिस्सा मानते हैं और उनकी अच्छी देखभाल करते हैं। बढ़ती कमाई, छोटे परिवार और शहरों में रहने के कारण खासकर युवा बड़ी संख्या में कुत्ते पाल रहे हैं। लेकिन कुत्ता पालना सिर्फ उसे खाना खिलाने, नहलाने और टीका लगवाने तक ही सीमित नहीं है। उसे रोज बाहर घुमाना, नई जगहों को सूंघने और अपनी मर्जी से थोड़ा घूमने का मौका देना भी उसकी अच्छी सेहत और खुशी के लिए बहुत जरूरी है।
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