नौकरी करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी एक बड़ा सहारा होती है। यह वह रकम है जो कंपनी अपने कर्मचारियों को लंबे समय तक सेवा देने के बाद धन्यवाद स्वरूप देती है। पहले नियम यह था कि ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक नौकरी करना जरूरी था। लेकिन अब नए लेबर कोड्स ने इस नियम को बदल दिया है और कर्मचारियों के लिए इसे और आसान बना दिया है।
क्या बदला है नियमों में?
नए लेबर कोड्स के तहत अब सिर्फ 1 साल की नौकरी करने पर भी कर्मचारी ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे। यानी अगर कोई कर्मचारी किसी वजह से जल्दी नौकरी छोड़ता है, तो भी उसे ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। यह बदलाव खासकर उन युवाओं और पेशेवरों के लिए राहत है जो अक्सर बेहतर अवसरों के लिए नौकरी बदलते रहते हैं।
ग्रेच्युटी कैसे कैलकुलेट होगी?
- बेसिक सैलरी: आपकी मूल तनख्वाह
- सर्विस के साल: आपने कितने साल नौकरी की
- 15/26: यह तय अनुपात है, जिससे रकम निकाली जाती है
उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹20,000 है और उसने 3 साल नौकरी की है, तो उसे हजारों रुपये की ग्रेच्युटी मिलेगी। सबसे अच्छी बात यह है कि यह रकम पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है।
कर्मचारियों के लिए फायदे:
- नौकरी बदलने वालों को भी सुरक्षा मिलेगी।
- रिटायरमेंट या इस्तीफे के समय अतिरिक्त रकम हाथ में आएगी।
- कंपनियों के प्रति कर्मचारियों का भरोसा बढ़ेगा।
नए लेबर कोड्स ने ग्रेच्युटी को लेकर कर्मचारियों की चिंताओं को काफी हद तक दूर कर दिया है। अब यह सुविधा सिर्फ लंबे समय तक नौकरी करने वालों तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर कर्मचारी को इसका लाभ मिलेगा। यह बदलाव न केवल कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि उन्हें अपने करियर विकल्पों में ज्यादा स्वतंत्रता भी देता है।
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