EPF Scheme 2026: केंद्र सरकार ने नई कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 2026 को नोटिफाई कर दिया है। इसके तहत ईपीएफ खातों से आंशिक निकासी को लेकर एक आसान और नया फ्रेमवर्क पेश किया गया है। आपको बता दें कि सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत नोटिफाई की गई यह नई स्कीम छह दशक पुरानी ईपीएफ योजना, 1952 की जगह लागू हुई है।
नए नियमों में पीएफ सदस्यों को अपनी अलग-अलग जरूरतों के लिए अपने एलिजिबल बैलेंस का 100 प्रतिशत तक हिस्सा निकालने की इजाजत है। इसके अलावा एक नया नियम भी जोड़ा गया है। इस नियम के तहत अब हर सदस्य को अपने ईपीएफ खाते में एक न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना अनिवार्य होगा।
क्या बदल रहा है निकासी का नियम?
नए नियमों के तहत ईपीएफ सदस्य आंशिक निकासी के लिए डेजिगनेटेड पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यहां जानना जरूरी है कि ये विड्रॉल एक जरूरी शर्त के अधीन होगा। योजना के नियमों के मुताबिक कमिश्नर निर्दिष्ट पोर्टल पर किसी सदस्य के आवेदन पर आंशिक निकासी को मंजूरी दे सकता है, जो कि सदस्य के खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की आवश्यकता के अधीन होगा। नई योजना में इस मिनिमम बैलेंस को पहली बार परिभाषित किया गया है।
क्या होता है Eligible Member Balance और Minimum Balance?
नोटिफिकेशन के मुताबिक मिनिमम बैलेंस का गणित कुछ इस तरह तय किया गया है। न्यूनतम बैलेंस का मतलब उस राशि से है जो सदस्य के खाते में जमा कुल योगदान (जिसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा और उस पर मिलने वाला ब्याज शामिल है) के 25 प्रतिशत के बराबर हो। किसी भी आंशिक निकासी का लाभ देने के बाद यह राशि सदस्य के खाते में अनिवार्य रूप से बची रहनी चाहिए। आसान शब्दों में कहें तो आपकी अब तक की कुल ईपीएफ बचत (आपका योगदान + कंपनी का योगदान + ब्याज) का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा विड्रॉल के बाद भी आपके खाते में ब्लॉक रहेगा।
इस अनिवार्य 25 प्रतिशत मिनिमम बैलेंस को घटाने के बाद जो रकम बचती है उसे एलिजिबल मेंबर बैलेंस कहा जाता है। कोई भी कर्मचारी सिर्फ इसी एलिजिबल मेंबर बैलेंस को ही खाते से निकाल सकता है।
1 साल के अंदर नौकरी छोड़ने पर क्या हैं नियम?
यह योजना उन कर्मचारियों को बड़ी राहत देती है जो अपनी नौकरी शुरू करने के 12 महीने पूरे होने से पहले ही काम छोड़ देते हैं। नए नियमों के मुताबिक कोई सदस्य 1 साल के अंदर भी नौकरी छोड़ देता है तो भी वह अपने पीएफ के पार्शियल विड्रॉल का हकदार होगा। हालांकि ऐसा सदस्य सिर्फ विड्रॉल की तारीख तक उपलब्ध अपने एलिजिबल मेंबर बैलेंस की सीमा तक ही पैसा निकाल सकेगा।
कब और किन जरूरतों के लिए निकाल सकते हैं 100% एलिजिबल बैलेंस?
ईपीएफ की कुल 12 महीने की सदस्यता पूरी करने के बाद, सदस्य अपनी अलग अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों के लिए अपने एलिजिबल मेंबर बैलेंस का 100 प्रतिशत तक हिस्सा निकाल सकते हैं। इन जरूरतों में नीचे दी गई बातें शामिल हैं-
खुद या परिवार का इलाज
खुद या परिवार में शिक्षा
खुद या परिवार में शादी
घर या फ्लैट खरीदना
घर बनाने के लिए जमीन खरीदना
घर का निर्माण करना
होम लोन चुकाना
मौजूदा घर का रेनोवेशन/सुधार करना
इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में भी 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद 100% एलिजिबल मेंबर बैलेंस निकालने की अनुमति दी जा सकती है।
कितनी बार निकाला जा सकता है पैसा?
नई योजना में इस बात की भी सीमा तय की गई है कि कोई सदस्य अपनी पूरी सदस्यता के दौरान अलग-अलग उद्देश्यों के लिए कितनी बार पैसा निकाल सकता है-
शिक्षा के लिए: पूरी सदस्यता के दौरान अधिकतम 10 बार विड्रॉल
शादी के लिए: पूरी सदस्यता के दौरान अधिकतम 5 बार विड्रॉल
घर/आवास संबंधी काम के लिए: अधिकतम 5 बार विड्रॉल।
विशेष परिस्थितियों में: एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 2 बार विड्रॉल।
क्यों जरूरी है मिनिमम बैलेंस का यह नया नियम?
इससे पहले लागू ईपीएफ निकासी के नियम अलग-अलग उद्देश्यों और अलग-अलग शर्तों से जुड़े होते थे जिसके कारण कई मामलों में सदस्य अपने खाते का अधिकांश बैलेंस निकाल लेते थे। नया फ्रेमवर्क एलिजिबल मेंबर बैलेंस की एक समान अवधारणा को लागू करके पूरे विड्रॉल प्रोसेस निकासी प्रक्रिया को स्टैंडराइज करता है। इसके साथ ही यह नियम यह भी सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा हमेशा इन्वेस्टेड रहे ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे।
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