Tuesday, May 19, 2026

Jyeshtha Adhik Purnima 2026: ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा की तारीख को लेकर हो रहा कंफ्यूजन यहां तुरंत दूर करें, आइए जानें कब होगी ये दुर्लभ पूर्णिमा

Jyeshtha Adhik Purnima 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित होती है1 माना जाता है कि इस दिन स्वयं मां लक्ष्मी शाम के समय अपने भक्तों का हाल जानने के लिए पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। यह दिन चंद्र दोष शांति के लिए भी अहम माना जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त, पूरे आकार और तेज में होते हैं, इसलिए इस दिन उन्हें अर्घ्य जरूर अर्पित करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से कुंडली में चंद्र दोष शांत होता है। चंद्रमा को ज्येतिष में मन और स्त्री तत्व का कारक माना जाता है।

इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा पर अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह पूर्णिमा सामान्य पूर्णिमा तिथियों से भन्न है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लग रहा है। इसकी शुरुआत 17 मई से हो चुकी है और ये 15 जून तक चलेगा। इस हिसाब से अब जो पूर्णिमा तिथि आएगी, वो ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा होगी। उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि यह तिथि साल की सबसे शुभ तिथियों में मानी जाती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान चंद्र अपनी सोलहों कलाओं से पूर्ण रूप में विराजमान होते हैं। इस दिन पवित्र स्नान, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। लेकिन इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोगों के बीच थोड़ी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा की सही तारीख

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026, शनिवार सुबह 11:57 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 02:14 बजे तक रहेगी। ऐसे में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का व्रत जहां 30 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा, वहीं स्नान-दान की पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार के दिन रहेगी। ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम के समय 07:36 बजे होगा।

ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पावन दिन स्नान-दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है। मान्यता है कि पवित्र नदी में स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितृ दोष दूर होता है।

ज्येष्ठ अधिक माह पूर्णिमा पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • घर और पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें।
  • इसके बाद चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं।
  • पूजा के दौरान कथा और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
  • फल-मिठाई का भोग लगाकर जरूरतमंदों को दान दें।
  • इस दिन विवाद व तामसिक भोजन से दूर रहें।

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