बात जब रिटायरमेंट प्लानिंग की होती है तो इनवेस्टर्स अक्सर ईपीएफ, पीपीएफ और एनपीएस के बीच कनफ्यूज्ड हो जाते हैं। सच यह है कि इन तीनों पर विचार करते वक्त न सिर्फ रिटर्न पर गौर करना जरूरी है बल्कि टैक्स और रिस्क को भी ध्यान में रखना जरूरी है। हालांकि, रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए ये तीनों बहुत अच्छे विकल्प हैं।
पीपीएफ, EPF, NPS की खास बातें
Employees' Provident Fund (EPF) नौकरी करने वाले लोगों के लिए अनुशासित निवेश का सबसे अच्छा विकल्प है। इसमें हर महीने सैलरी (बेसिक प्लस डीए) का एक हिस्सा इसमें जमा होता है। एंप्लॉयर भी उतना ही पैसा आपके ईपीएफ अकाउंट में हर महीने जमा करता है। Public Provident Fund (PPF) लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार करने का सबसे पुराना और लोकप्रिय विकल्प है। National Pension System (NPS) तीनों विकल्पों में से सबसे नया है। इसकी खास बात यह है कि यह मार्केट-लिंक्ड इनवेस्टमेंट ऑप्शन है।
पीपीएफ टैक्स के लिहाज से काफी अट्रैक्टिव
प्लानरुपी इनवेस्टमेंट सर्विसेज के फाउंडर अमोल जोशी ने कहा, "हर प्रोडक्ट का अपना नफा-नुकसान है। पीपीएफ EEE यानी एग्जेम्प्ट, एग्जेम्प्ट, एग्जेम्प्ट के तहत आता है। इसका मतलब है कि कंट्रिब्यूशन, इंटरेस्ट और मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगता है। लेकिन, इसमें निवेश की सालाना लिमिट 1.5 लाख रुपये है। एनपीएस का अपना अलग टैक्स-डिडक्शन सेक्शन है। लेकिन लिक्विडिटी और एन्युटी की वजह से इसे सब लोग पंसद नहीं करते हैं।"
तीनों स्कीम में रिस्क नहीं के बराबर
जोशी का कहना है कि इन तीनों में ऐसा कोई सिंगल प्रोडक्ट नहीं है जो सभी के लिए समान रूप से बेस्ट हो। इनवेस्टर को लिक्विडिटी, इनवेस्टमेंट पीरियड और टैक्सेशन को ध्यान में रख इनमें से किसी एक या दो का चुनाव करना ठीक रहेगा। तीनों प्रोडक्ट्स में रिस्क नहीं के बराबर है। इसकी वह यह है कि इन तीनों स्कीमों को सरकार का सपोर्ट हासिल है। इन तीनों के नियम और शर्तें स्पष्ट हैं। तीनों में बड़ी संख्या में लोग इनवेस्ट करते आ रहे हैं।
ईपीएफ सिर्फ नौकरी करने वाले लोगों के लिए
ईपीएफ ऐसी स्कीम है, जिसमें सिर्फ नौकरी करने वाले लोग कंट्रिब्यूट करते हैं। यह ऑप्शनल नहीं है। हर महीने एंप्लॉयी की सैलरी का एक हिस्सा इसमें जमा होता है। एंप्लॉयर भी उतना ही पैसा इसमें हर महीने जमा करता है। इससे लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार हो जाता है। इसमें रिस्क नहीं के बराबर है। रिटायरमेंट पर मिलने वाला पैसा टैक्स-फ्री होता है। खास बात यह है कि इस पर मिलने वाला सालाना रिटर्न काफी अट्रैक्टिव है। इससे लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है।
पीपीएफ में 15 सालों तक निवेश की शर्त
नौकरी करने वाले और नौकरी नहीं करने वाले, दोनों तरह के इनवेस्ट पीपीएफ में निवेश कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि 15 साल तक निवेश करने पर उनके लिए आसानी से बड़ा फंड तैयार हो जाता है। खासकर, अगर इनवेस्टर शेयरों से जुड़े किसी स्कीम में निवेश नहीं करना चाहता है तो पीपीएफ उसके लिए बेस्ट है। टैक्स के नियम इसका अट्रैक्शन काफी बढ़ा देते हैं। इससे रियल रिटर्न बढ़ जाता है।
आपके लिए तीनों में से कौन है बेस्ट?
एनपीएस उन लोगों के लिए सही है, जो मार्केट लिंक्ड स्कीम में निवेश करना चाहते हैं। मार्केट लिंक्ड रिटर्न की वजह से लंबी अवधि में इसका रिटर्न काफी अट्रैक्टिव है। इसमें टैक्स बेनेफिट भी मिलता है। हाल में पीएफआरडीए ने एनपीएस के नियमों में कई बदलाव किए हैं, जिससे इसका अट्रैक्शन और बढ़ गया है।
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इनवेस्टर अगर चाहे तो वह इन तीनों स्कीम में निवेश कर सकता है। हालांकि, तीनों में निवेश का विकल्प सिर्फ नौकरी करने वाले लोगों के लिए है। जो लोग नौकरी नहीं करते हैं वे पीपीएफ और एनपीएस में निवेश कर सकते हैं। अगर कोई इनवेस्टर मार्केट लिंक्ड इनवेस्टमेंट ऑप्शन में निवेश नहीं करना चाहता तो पीपीएफ उसके लिए बेस्ट रहेगा।
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