Karur Stampede Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (12 दिसंबर) को करूर भगदड़ मामले में मद्रास हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की भेजी गई रिपोर्ट पर गंभीर टिप्पणी की। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की तरफ से करूर भगदड़ मामले में भेजी गई रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'हाई कोर्ट में कुछ गड़बड़' है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट पार्टियों के वकीलों के साथ शेयर की जाए। उसके बाद उनसे जवाब मांगा जाए।
पीठ 27 सितंबर को अभिनेता से नेता बने विजय की रैली के दौरान करूर में हुई भगदड़ से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें 41 लोग मारे गए थे। इससे पहले विजय की राजनीतिक पार्टी TVK की एक रैली के दौरान हुई भगदड़ की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के दखल देने के तरीके पर सवाल उठाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि हाई कोर्ट की चेन्नई बेंच ने सिर्फ स्टेट पुलिस अधिकारियों वाली SIT बनाने का निर्देश कैसे दिया। जबकि करूर मदुरै बेंच के अधिकार क्षेत्र में आता है। शीर्ष अदालत ने यह भी नोट किया कि चेन्नई बेंच में फाइल की गई याचिका सिर्फ गाइडलाइंस बनाने की मांग कर रही थी। अदालत ने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से एक रिपोर्ट मांगी।
शुक्रवार को रिपोर्ट देखने के बाद जस्टिस माहेश्वरी ने कहा, "हाई कोर्ट में कुछ गलत हो रहा है। HC में जो हो रहा है वह सही नहीं है…रजिस्ट्रार जनरल ने एक रिपोर्ट भेजी है।" अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ की CBI जांच का आदेश दिया था। पिछले हफ्ते तमिलनाडु सरकार ने एक हलफनामा दायर किया। इसमें सुप्रीम कोर्ट पर आरोप लगाया गया कि राज्य के जवाबी हलफनामा दायर करने से पहले ही जांच CBI को ट्रांसफर करके उसने नैचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है।
2 दिसंबर को तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 27 सितंबर को करूर में हुई दुखद भगदड़ तमिलगा वेत्री कजगम (TVK) पार्टी के ऑर्गनाइजर और कैडर की लापरवाही, लापरवाही और बिना तालमेल के काम का नतीजा थी।
राज्य सरकार ने कहा कि पुलिस ने घटना के दौरान बहुत हिम्मत और अनुशासन के साथ काम किया। साथ ही अंधेरे, अफरा-तफरी और भीड़ के डर के बावजूद लोगों को बाहर निकलने के रास्ते दिखाए और इमरजेंसी रास्ते साफ किए।
इस बीच, TVK ने भगदड़ की जांच के लिए SIT बनाने के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। TVK और विजय के खिलाफ कोर्ट की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज से स्वतंत्र जांच की मांग की।
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