Nepal Latest News: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण तेल संकट को देखते हुए भारत के पड़ोसी देश नेपाल की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। बालेन शाह की सरकार ने नेपाल में सभी प्रकार के सार्वजनिक वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने की घोषणा की है। नेपाल सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब पड़ोसी देश में ईंधन संकट और बढ़ती पेट्रोलियम निर्भरता को लेकर चिंता बढ़ रही है।
डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट ने बिगड़ते वायु प्रदूषण, बढ़ते ट्रैफिक जाम और शहरी आवागमन में आ रही दिक्कतों का हवाला देते हुए अगले आदेश तक पूरे देश में नए सार्वजनिक परिवहन वाहनों का रजिस्ट्रेशन रोकने का फैसला किया है। सभी प्रांतीय मंत्रालयों और स्थानीय अधिकारियों को एक सर्कुलर जारी करते हुए डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन का प्रबंधन व्यवस्थित नहीं रहा है।
उन्होंने कहा कि इससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। साथ ही ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ रही है और शहरी आवागमन में मुश्किलें आ रही हैं। नोटिस में आगे कहा गया है कि यह फैसला 'मोटर वाहन और परिवहन प्रबंधन अधिनियम, 1993' की धारा 24(3) के तहत लिया गया है।
यह धारा अधिकारियों को पर्यावरण प्रदूषण, सड़कों की स्थिति और ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़ी चुनौतियों जैसे कारणों से जनहित में वाहनों का रजिस्ट्रेशन रोकने का अधिकार देती है। आदेश में आगे कहा गया है कि मौजूदा हालात और सार्वजनिक परिवहन के बेहतर मैनेजमेंट की जरूरत को देखते हुए नए सार्वजनिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन अगले आदेश तक निलंबित रहेगा।
क्यों लिया फैसला?
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के आदेश में केवल पेट्रोल और डीजल से चलने वाले ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक सार्वजनिक वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। एक अधिकारी ने बताया किइनमें इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन वाहन भी शामिल हैं। यह निर्देश सभी सात प्रांतीय सरकारों और स्थानीय स्तरों को इसके पालन के लिए भेज दिया गया है।
डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट के डायरेक्टर मणि राम भुसाल द्वारा जारी एक लेटर देश के सात प्रांतों में संबंधित मंत्रालयों और स्थानीय निकायों को भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि सार्वजनिक परिवहन के मैनेजमेंट की कमी, अत्यधिक वायु प्रदूषण, वाहनों के बढ़ते दबाव, ट्रैफिक जाम और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण सार्वजनिक परिवहन का संचालन लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
दो भारतीय पर्वतारोहियों की मौत
इस बीच, नेपाल से भारत के लिए एक दुखद खबर भी सामने आई है। एवरेस्ट के शिखर से उतरते वक्त दो भारतीय पर्वतारोहियों की मौत हो गई है। नेपाल अभियान संचालक संघ के महासचिव ऋषि भंडारी ने बताया कि अरुण कुमार तिवारी और संदीप अरे नामक पर्वतारोही शिखर से नीचे आते समय बुरी तरह थक गए थे। गाइड ने उन्हें बचाने के बहुत प्रयास किए लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। भंडारी ने पीटीआई को बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि अरे ने बुधवार को और तिवारी ने गुरुवार शाम लगभग 5:30 बजे शिखर पर चढ़ाई की।
उन्होंने कहा कि गाइड ने बहुत कोशिश की, लेकिन वे उन्हें (पर्वतारोहियों को) बचा नहीं सके। अभियान का आयोजन करने वाले 'पायनियर एडवेंचर्स' के निदेशक निवेश कार्की ने बताया कि शिखर से ठीक नीचे हिलेरी स्टेप के पास गुरुवार शाम उतरते समय तबीयत बिगड़ने के बाद तिवारी की मौत हो गई। बीमार पड़ने पर चार शेरपा पर्वतारोही उनकी सहायता कर रहे थे।
कार्की ने बताया कि संदीप अरे ने बुधवार को शिखर पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी। लेकिन उतरते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई। शेरपा गाइडों ने उन्हें साउथ समिट से बचाया। लेकिन शुक्रवार तड़के कैंप-2 पहुंचने के कुछ ही समय बाद उनकी मौत हो गई। कार्की ने कहा कि मृत पर्वतारोहियों के शवों को काठमांडू वापस लाने के प्रयास जारी हैं।
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इसके साथ ही, इस सीजन में एवरेस्ट पर मरने वालों की संख्या पांच हो गई है। इससे पहले, तीन नेपाली पर्वतारोहियों की एवरेस्ट पर मौत हो चुकी है। बुधवार को अरे सहित तीन भारतीय उन 274 पर्वतारोहियों के दल में शामिल थे जिन्होंने 8,848.86 मीटर ऊंची चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की। यह एक दिन में अब तक दर्ज सबसे अधिक सफल चढ़ाइयों का नया रिकॉर्ड था। अन्य दो पर्वतारोही तुलसी रेड्डी पालपुनूरी और अजय पाल सिंह धालीवाल थे।
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