IT Stocks: आईटी सेक्टर के स्टॉक्स में फिलहाल भारी तेज दबाव दिख रहा है। निफ्टी आईटी इंडेक्स 4.91 प्रतिशत गिरकर 30,001.2 पर आ गया है। ब्रोकरेज हाउस इसे सिर्फ तिमाही नतीजों की कमजोर प्रतिक्रिया नहीं मान रहे। असली चिंता इस बात को लेकर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आने वाले सालों में बिजनेस मॉडल, मार्जिन और पूरी अर्थव्यवस्था को कैसे बदल सकता है।
जहां Jefferies ने बड़ी आईटी कंपनियों पर सतर्क रुख अपनाया है और CLSA ने हार्डवेयर लागत बढ़ने का खतरा बताया है, वहीं JPMorgan का कहना है कि आईटी सर्विसेज की मांग इतनी आसानी से कमजोर नहीं होगी।
श्रीलंका-वेनेजुएला की GDP से ज्यादा मार्केट कैप साफ
पिछले एक साल में 75 भारतीय IT कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा घट गया है। IMF के मुताबिक वेनेजुएला का 2026 का GDP 79.92 बिलियन डॉलर आंका गया है। वहीं, श्रीलंका का 2024 का GDP 98.96 बिलियन डॉलर रहा था।
सोमवार को 75 लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 30,32,473 करोड़ रुपये था। 24 फरवरी 2025 को यही आंकड़ा 38,93,309 करोड़ रुपये था। यानी एक साल में 8,60,836 करोड़ रुपये की गिरावट। अगर इसमें मंगलवार, 24 फरवरी की गिरावट भी जोड़ दें, तो कुल गिरावट करीब 9,44,836 करोड़ रुपये या लगभग 104 बिलियन डॉलर बैठती है।

CitriniResearch ने AI को सिस्टम स्तर का खतरा बताया
टेक सेक्टर में अनिश्चितता और बढ़ी जब CitriniResearch की एक रिपोर्ट- 'The 2028 Global Intelligence Crisis' सामने आई। इसमें AI को सिर्फ टेक सेक्टर की कहानी नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला संभावित ट्रिगर बताया गया है। इसमें यह समझाने की कोशिश की गई है कि अगर AI की क्षमता बहुत तेजी से बढ़ती है और अलग-अलग इंडस्ट्री में फैलती है, तो क्या असर हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक AI एजेंट कई हफ्तों तक चलने वाले रिसर्च और डेवलपमेंट के काम संभाल सकते हैं। यह भी कहा गया है कि सबसे एडवांस्ड सिस्टम लगभग हर क्षेत्र में ज्यादातर इंसानों से ज्यादा सक्षम हो सकते हैं। इसका मतलब सिर्फ उत्पादकता बढ़ना नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर नौकरियों पर असर भी हो सकता है।
CitriniResearch ने एक पुरानी धारणा पर भी सवाल उठाया है। आम तौर पर कहा जाता है कि टेक्नोलॉजी पहले नौकरियां खत्म करती है, लेकिन बाद में उससे ज्यादा नई नौकरियां पैदा भी करती है। रिपोर्ट पूछती है कि अगर AI सामान्य बौद्धिक काम बड़े पैमाने पर करने लगे, तो क्या यह पुराना पैटर्न जारी रहेगा?
Jefferies की चिंता, बदल सकता है रेवेन्यू का स्ट्रक्चर
इस पृष्ठभूमि में Jefferies ने भारतीय आईटी कंपनियों के रेवेन्यू स्ट्रक्चर पर फोकस किया है। इसने अपनी रिपोर्ट 'P(AI)n Not Over Yet; Stay Selective' में लिखा कि AI आईटी बिजनेस मिक्स को कंसल्टिंग और इम्प्लीमेंटेशन की ओर मोड़ सकता है, जबकि मैनेज्ड सर्विसेज का हिस्सा घट सकता है।
Jefferies के मुताबिक, एप्लिकेशन मैनेज्ड सर्विसेज कई कंपनियों के रेवेन्यू का 22 से 45 प्रतिशत तक हिस्सा हैं। अगर AI इस काम का बड़ा हिस्सा ऑटोमेट कर देता है, तो इन सेगमेंट में रेवेन्यू घट सकता है। इससे बिजनेस ज्यादा चक्रीय हो सकता है। फिर कंपनियों को अपने टैलेंट और ऑपरेटिंग मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है।

ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के तिमाही नतीजों के बाद कमाई के अनुमान जरूर बढ़े हैं, लेकिन AI से जुड़े नए बदलावों ने मध्यम और लंबी अवधि की ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ा दी है। उसके मुताबिक अब स्टॉक्स की चाल सिर्फ तिमाही नतीजों से नहीं, बल्कि लंबे समय के बिजनेस आउटलुक से तय होगी।
वैल्यूएशन को लेकर Jefferies ने कहा कि पिछले दशक जैसी रेवेन्यू ग्रोथ बनाए रखना ही सबसे अच्छा सूरतेहाल होगा। अगर ऐसा नहीं होता, तो स्टॉक्स में 30 से 65 प्रतिशत तक और गिरावट आ सकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ कंपनियां Accenture के मुकाबले 32 प्रतिशत पीई प्रीमियम पर ट्रेड कर रही हैं, जबकि ग्रोथ समान है। निफ्टी के समान मल्टीपल पर होने के बावजूद कम आय वृद्धि भी जोखिम मानी गई है।
CLSA की चेतावनी: हार्डवेयर लागत बढ़ने का असर
जहां Jefferies सर्विसेज मॉडल पर चिंतित है, वहीं CLSA ने हार्डवेयर सेक्टर पर फोकस किया है। इसने अपनी रिपोर्ट में उसने कहा कि AI से जुड़ी मांग के कारण हाई बैंडविड्थ मेमोरी और DDR5 की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इससे वैश्विक मेमोरी इंडस्ट्री सुपर साइकिल में जा सकती है। CLSA का कहना है कि मेमोरी की कीमतें बढ़ने से स्मार्टफोन के औसत बिक्री मूल्य 10 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर लोअर एंड उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और स्मार्टफोन की बिक्री घट सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वैश्विक मेमोरी मांग का 4 प्रतिशत से भी कम हिस्सा रखता है और आयात पर निर्भर है। अगर वैश्विक सप्लाई तंग रहती है, तो घरेलू निर्माता दबाव में आ सकते हैं। CLSA ने कहा कि Dixon उन कंपनियों में से हो सकती है, जिन पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा। इसी वजह से उसके कमाई के अनुमान घटाए गए हैं।
JPMorgan का नजरिया: आईटी सेक्टर खत्म नहीं होगा
सतर्क आकलन के बीच JPMorgan का रुख थोड़ा अलग है। उसने भारतीय आईटी कंपनियों को 'टेक वर्ल्ड के प्लंबर' बताया है। उसकी दलील है कि भले ही AI कोड लिख सकता है, लेकिन बड़े एंटरप्राइज सिस्टम को चलाना और जोड़ना अब भी जटिल काम है। JPMorgan के मुताबिक, ऑटोमेटेड एजेंट सही कोड तैयार कर सकते हैं, लेकिन बड़े कॉरपोरेट सिस्टम में स्थिरता, नियमों का पालन और पुराने सिस्टम के साथ तालमेल बैठाना अब भी इंसानी महारत मांगता है।
ब्रोकरेज का मानना है कि AI के पास कंपनियों के अंदरूनी वर्कफ्लो और वर्षों में बने जटिल संबंधों की गहरी समझ नहीं होती। यही वजह है कि ऑटोमेशन बढ़ने के बावजूद आईटी सर्विसेज की मांग पूरी तरह खत्म नहीं होगी।
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