RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने माना है कि अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए केंद्रीय बैंक का इनफ्लेशन (Inflation) का अनुमान कम (Conservative) है और क्रूड ऑयल की कम कीमतों से इंडिया को फायदा हो सकता है। RBI के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग के समापन पर दास ने कहा कि इनफ्लेशन का अनुमान लगाने में सभी बातों को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा कि फॉरवर्ड मार्केट्स ऑयल की कीमतें थोड़ी ज्यादा रहने का अनुमान लगा रहा है। लेकिन हमारा अनुमान बहुत कम है। इसलिए अगर ऑयल की कीमतें बहुत नीचे जाती हैं और दूसरे कमोडिटीज की कीमतों का भी फायदा मिलता है तो यह इनफ्लेशन के नीचे जाने में मददगार होगा। अगले फाइनेंशियल ईयर में इनफ्लेशन 5.3% रहने का अनुमान RBI ने 8 फरवरी को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के फैसलों के बारे में बताते हुए इनफ्लेशन का अनुमान जारी किया था। उसने अगले फाइनेंशियल ईयर यानी 2023-24 में औसत रिटेल इनफ्लेशन 5.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। यह इस फाइनेंशियल ईयर (2022-23) में इनफ्लेशन के 6.5 फीसदी के अनुमान से कम है। आरबीआई ने क्रूड ऑयल बास्केट का भाव 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है। यह क्रूड की मौजूदा कीमत के मुकाबले करीब 20 फीसदी ज्यादा है। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में इनफ्लेशन आरबीआई के अनुमान से 30-50 बेसिस प्वॉइंट्स कम रह सकता है। यह भी पढ़ें : IMF से आर्थिक मदद के लिए पाकिस्तान किसी हद तक जाने को तैयार, अब सरकार ने बिजली पर लगाया नया टैक्स बढ़ सकती हैं क्रूड ऑयल की कीमतें शक्तिकांत दास ने 11 फरवरी को कहा कि ऑयल की ग्लोबल डिमांड बढ़ सकती है। इसकी वजह यह है कि इकोनॉमिक ग्रोथ का अनुमान उतना खराब नहीं है, जितना खराब वह कुछ महीने पहले था। उन्होंने कहा, "विकसित इकोनॉमीज सहित कई देशों में बड़ी चिंता की चर्चा को हम पीछे छोड़ चुके हैं। अब दुनिया में सिर्फ हल्की मंदी या स्लोडाउन की चर्चा हो रही है। इसलिए रिस्क बैलेंस दिखाई देता है और यह देखना होगा कि चीजें किस तरह से सामने आती हैं।" अब रियल पॉलिसी रेट करीब 0.9 फीसदी बढ़ते रियल इंटरेस्ट रेट्स पर टिप्पणी करते हुए RBI गवर्नर ने कहा कि लंबी समय तक निगेटिव इंटरेस्ट रेट जारी रहने से फाइनेंशियल सिस्टम में अस्थिरता की स्थिति बन सकती है। मॉनेटरी पॉलिसी के बाद मीडिया से बातचीत में RBI के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा था कि रियल पॉलिसी रेट अब करीब 0.9 फीसदी है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने से डिपॉजिटर्स को फायदा होम लोन की EMI पर बढ़ते इंटरेस्ट रेट के असर पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में दास ने कहा कि हमें डिपॉजिटर्स को होने वाले फायदों के बारे में नहीं भूलना चाहिए। लेकिन, अहम बात यह है कि कानून के तहत हमारे ऊपर कीमतों में स्थिरता बनाए रखने की जिम्मेदारी है। इसे ध्यान में रखकर मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी कई तरह के फैसले ले रही है। इंटरेस्ट रेट बढ़ाना हमारी इसी कोशिश का हिस्सा है।
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