Fiscal Deficit : अप्रैल-अक्टूबर, 2022 के दौरान केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पूरे वित्त वर्ष के टारगेट का 45.6 फीसदी है। कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स द्वारा 30 नवंबर को जारी डेटा से यह बात सामने आई है। वहीं अप्रैल-अक्टूबर, 2021 में राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 22 के टारगेट का 36.3 फीसदी रहा था। पिछले वित्त वर्ष के शुरुआती सात महीने में यह 5.47 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस प्रकार, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अक्टूबर अवधि का राजकोषीय घाटा सालाना आधार पर 39 फीसदी ज्यादा है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 23 के लिए 16.61 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी (GDP) के 6.4 फीसदी राजकोषीय घाटे का लक्ष्य तय किया है। अक्टूबर में 7 गुना हुआ राजकोषीय घाटा अक्टूबर के लिए, केंद्र ने 1.38 लाख करोड़ रुपये का fiscal deficit दर्ज किया, जो बीते साल के समान महीने की तुलना में सात गुना है। अक्टूबर में राजकोषीय घाटा बढ़ने की मुख्य वजह कुल प्राप्तियों का स्थिर रहना था, जबकि खर्च में बढ़ोतरी दर्ज की गई। अक्टूबर में केंद्र की कुल प्राप्तियां महज 0.7 फीसदी बढ़कर 1.82 लाख करोड़ रुपये हो गईं, वहीं कुल खर्च 59.5 फीसदी बढ़कर 3.20 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। Budget 2023: क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री को निर्मला सीतारमण के बजट से हैं ये उम्मीदें गैर कर राजस्व ने दिया झटका प्राप्तियों के मामले में कमजोर प्रदर्शन की मुख्य वजह गैर कर राजस्व रहा, जो अक्टूबर में सिर्फ 21,179 करोड़ रुपये रहा। वहीं बीते साल समान महीने में यह 46,486 करोड़ रुपये रहा था। वहीं सकल कर राजस्व 20.8 फीसदी और कुल कर संग्रह 20.2 फीसदी बढ़कर क्रमशः 2.18 लाख करोड़ रुपये और 1.59 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। Ashok Leyland ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ जाकर बेचे BS-III व्हीकल्स? ED कर रही मामले की जांच
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