बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री नीना गुप्ता आज 66 बरस की उम्र में भी फिटनेस और बेबाकी का प्रतीक हैं। ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने करियर के ऐसे राज खोले, जो दिल को छू गए। नीना ने बिना लाग-लपेट कहा, "कई मौकों पर सोचा - आज की नायिकाओं से ज्यादा सुंदरता और टैलेंट मेरे पास था। बड़े रोल मिलते तो क्या कमाल होता!" लेकिन उन्होंने खुद को जिम्मेदार ठहराया। गलत चुनावों और आत्मविश्वास की कमी ने उन्हें पीछे धकेला।
80 के दशक में 'गांधी', 'जाने भी दो यारों' जैसी आर्ट फिल्मों से डेब्यू किया। एक्ट्रेस ने 'साथ-साथ' में सपोर्टिंग रोल भी निभाए इसका साथ ही 'मिर्जा गालिब', 'सांस' जैसे टीवी सीरियल्स ने घर-घर पहचान दिलाई। लेकिन 90 के दशक में कमर्शियल सिनेमा में लीड हीरोइन बनने का मौका हाथ न आया। नीना बोलीं, "धैर्य की कमी रही। गलत चीजों के पीछे भागी। इंडस्ट्री को बिजनेस समझने में देर हुई। यहां भावनाओं का कोई स्थान नहीं, सिर्फ खेल के नियम चलते हैं।" नीना गु्प्ता का कहना था कि उनका आत्मविश्वास डगमगाता रहा, जिसने उनसे कई चांस छिन लिए।
2018 में 'बधाई हो' ने एक्ट्रेस की किस्मत पलट दी। प्रेग्नेंसी वाली मां का रोल इतना असरदार रहा कि नेशनल अवॉर्ड तक मिल गया। उसके बाद 'पंचायत', 'मेट्रो... इन दिन', 'तू मेरी मैं तेरा' जैसी हिट्स फिल्में लगातार आईं। अब एक्ट्रेस 6 फरवरी को 'वध 2' में संजय मिश्रा संग धमाल मचाएंगी।
नीना का कहना है कि उनके दौर में इंडस्ट्री की सोच अलग थी। हीरोइनों को एक खास तरह के लुक और इमेज में फिट होना पड़ता था। अगर कोई उस पैटर्न में नहीं बैठती तो उसे लीड रोल नहीं मिलता। यही वजह रही कि वे अपने टैलेंट और खूबसूरती के बावजूद मुख्यधारा की फिल्मों में लीड नहीं बन पाईं।
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