Saturday, November 29, 2025

ED की बड़ी कार्रवाई, भारत और म्यामांर सीमा पर पकड़ा बड़ा ड्रग नेटवर्क, GST के मनमाने इस्तेमाल से फैलाया जाल

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने एक क्रॉस बॉर्डर नार्कोटिक्स नेटवर्क पकड़ा है। ईडी के मुताबिक इस नेटवर्क में शामिल म्यांमार के नागरिकों ने कथित रूप से भारतीय नागरिकों की जीएसटी आईडी का इस्तेमाल किया। उन्होंने भारतीय नागरिकों की इस आईडी का इस्तेमाल ड्रग बनाने में इस्तेमाल होने वाली केमिकल्स की खरीदारी के लिए किया। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ईडी का कहना है हालिया छापों में पता चला है कि कुछ भारतीयों ने म्यांमार में स्थित तस्करों की तरफ से सूडोएफेड्रिन (Pseudoephedrine) टैबलेट और कैफीन एनहाइड्रस (Caffeine Anhydrous) की खरीदारी की। ईडी के मुताबिक इस खरीदारी से बड़े पैमाने पर मेथामफेटामिन का उत्पादन और कई राज्यों में लॉन्ड्रिंग संभव हुआ। ईडी ने यह जानकारी 27 नवंबर को भारत-म्यांमार सीमा पर पहली बार की गई छापेमारी में हासिल की है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मिजोरम के आइजोल और चंपाई, असम के श्रीभूमि (करीमगंज) और गुजरात के अहमदाबाद में की गई तलाशी के दौरान ₹46.7 लाख की नकदी जब्त हुई और 21 बैंक खातों को फ्रीज किया गया। साथ ही ऐसे दस्तावेज भी बरामद किए गए जो कथित तौर पर भारतीय बिचौलियों को म्यांमार में स्थित खरीदारों से जोड़ते हैं।

अभी क्यों हुई यह छापेमारी?

ईडी की छापेमारी मिजोरम पुलिस की मनी लॉन्ड्रिंग की एक जांच से जुड़ी है जिसमें ₹1.41 करोड़ की 4.72 किग्रा हेरोइन जब्त हुई थी। मिजोरम पुलिस की एफआईआर और म्यांमार में बढ़ते मेथामफेटामिन उत्पादन और भारत की 1,643 किमी की खुली सीमा के जरिए बढ़ रही तस्करी को लेकर बढ़ती चिंता के बाद यह छापेमारी की गई। यह इलाका अब एक प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर बनता जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि ईडी इस जांच को और आगे बढ़ा सकती है और सप्लाई नेटवर्क और वित्तीय बिचौलियों की भी जांच होगी। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक जैसे-जैसे कई राज्यों में मनी ट्रेल का नक्शा तैयार होगा, और अधिक समन और संपत्तियों की कुर्की हो सकती है।

ऐसे तैयार हुआ पूरा सप्लाई चेन नेटवर्क

ईडी के मुताबिक सबूतों से संकेत मिलता है कि म्यांमार के नागरिकों ने कच्चा माल हासिल करने और पेमेंट के लिए भारतीयों के जीएसटी क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल किया, तो भारतीय नागरिकों ने खरीदारी और ट्रांसपोर्टेशन का काम संभाला। इन दोनों के मिलने से मेथामफेटामाइन के प्रोडक्शन के लिए पूरी सप्लाई चैन बन गई। ईडी का कहना है कि इस नेटवर्क के तार भारत के कई राज्यों में वित्तीय, लॉजिस्टिकल और तस्करी से जुड़े थे, और हवाला ऑपरेटर नशीले पदार्थों के व्यापार से पैसों की आवाजाही और मुनाफे को वैध बनाने में अहम भूमिका निभाते थे।

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