इस बार जुलाई के पहले-दूसरे हफ्तों में ही देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति बन गई है। दिल्ली में तो चार दशक के बाद इतनी बारिश हुई है। राजधानी के कई इलाकों में पानी भर गया है। इससे गाड़ियों को भी नुकसान हुआ है। देश के दूसरे इलाकों में तो गाड़ियों के पानी में बहने तक की खबर आई है। खासकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में ऐसे मामले देखने को मिले हैं। हालात को देखते हुए जनरल इंश्योरेंस कंपनियां (General Insurance Companies) खुद को तैयार कर रही हैं, क्योंकि उन्हें ज्यादा बारिश वाले इलाकों से ज्यादा क्लेम आने का अनुमान है। कुछ दिन बाद ही डैमेज का अंदाजा लग पाएगा Bajaj Allianz General Insurance के चीफ टेक्निकल ऑफिसर टीए रामालिंगम ने कहा, "हमें ग्राहकों से क्लेम के करीब 50-55 इंटिमेशन मिल चुके हैं। भारी बारिश ने कुछ राज्यों में तबाही मचाई है। हालांकि, क्लेम की संख्या के बारे में 2-4 दिन बाद ही कुछ अंदाजा लग पाएगा।" उन्हें होम इंश्योरेंस के ज्यादा क्लेम आने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि इंडिया में होम इंश्योरेंस कम लोग कराते हैं। यह भी पढ़ें : एंप्लॉयी की मौत 58 साल से पहले होने पर क्या उसकी पत्नी को पेंशन मिलेगी? टोटल लॉस के नियम क्या हैं? अगर आपकी कार पानी में बह गई है और उसके रिकवर नहीं किया जा सका है या रिकवर होने के बाद उसे बहुत नुकसान पहुंचा है तो बीमा कंपनी उसे टोटल लॉस मानती है। अगर आपकी कार को रिपेयर करने की कॉस्ट उसकी इंश्योर्ड डेक्लेयर्स वैल्यू (IDV) के 75 फीसदी से ज्यादा आती है तो आपको IDV वैल्यू का पेमेंट बीमा कंपनी कर देगी। अगर डैमेज इससे कम है तो कार की रिपेयरिंग के लिए बीमा कंपनी की मंजूरी लेनी होगी। उसके बाद रिपेयरिंग की कॉस्ट रिइंबर्स हो जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स का भी ध्यान जुनो जनरल इंश्योरेंस के चीफ टेक्निकल अफसर नितिन देव ने कहा, "बीमा कंपनियां और OEM ने लॉस की परिभाषा तय की है जो इस बात पर निर्भर करता है कि कार पानी में कितना डूबी है। अगर यह डैशबोर्ड या उसके ऊपर के लेवल तक डूबी है तो उसे टोटल लॉस माना जाएगा। महंगी गाड़ियों में इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स लोअर लेवल में स्थिति होते हैं। इसलिए उनके लॉस के मामले में इसका भी ध्यान रखना पड़ता है।" कंपल्सरी डिडेक्टबल क्या है? कंपल्सरी डिडक्टेबल अमाउंट वह पैसा है जो पॉलिसीहोल्डर को अपनी जेब से चुकाना पड़ता है। यह कार के इंजन की क्षमता से तय होता है। 1500 सीसी से ज्यादा क्षमता की कार पर यह 2000 रुपये है। इससे कम क्षमता की गाड़ी के लिए 1,000 रुपये है। कुछ मामलों पुलिस जांच जरूरी क्लेम फाइल करने के लिए एफआईआर और पुलिस इंवेस्टिगेशन जरूरी है। फर्स्ट पॉलिसी इंश्योरेंस ब्रोकर्स के रीजनल डायरेक्टर हरि राधाकृष्णनन ने कहा कि अगर पानी में बहने के बाद कार को रिवकर नहीं किया गया है तो इस बारे में कोई सबूत नहीं होगा। सिंपल एफआईआर कई बार पर्याप्त नहीं होता है। बीमा कंपनियां पुलिस के नॉन-ट्रेसेबल सर्टिफिकेट मांगती हैं। यह सर्टिफिकेट व्यापक जांच के बाद ही देती है। अलग-अलग पार्ट्स के लिए अलग-अलग नियम बारिश या बाढ़ की वजह से आपकी कार के कुछ पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में पॉलिसी में बताए गए डिप्रेशिएशन के नियम को ध्यान नें रख ग्राहक को क्लेम का पेंमेंट कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए प्लास्टिक पाटर्स के मामले में डिप्रेशिएशन 50 फीसदी बताया गया है। फाइबर पार्ट्स के लिए यह 30 फीसदी और ग्लास के लिए निल होता है। बाकी पार्ट्स के लिए डिप्रशिएशन गाड़ी की आईडीवी पर निर्भर करता है।
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