कयास लगाए जा रहे हैं कि पंजाब (Punjab) के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की संभावना है। News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि उन्होंने पंजाब में कुछ बीजेपी नेताओं से मुलाकात की, यहां तक कि कांग्रेस (Congress) ने उन्हें रिझाने की कोशिश की। पूर्व पीसीसी प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के जमानत के बाद पटियाला जेल से बाहर निकलने के साथ कई सत्ता केंद्रों के डर के बीच अफवाह फैल गई। पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस की हार के बाद चन्नी राजनीतिक सुर्खियों से गायब हो गए थे, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) को भारी जनादेश मिला था। भ्रष्टाचार के मामलों में अपने भतीजे की गिरफ्तारी के बाद भी उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा था। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ने मारे गए पंजाब गायक सिद्धू मूसे वाला के गांव का औचक दौरा कर राज्य की राजनीति में फिर से प्रवेश किया। वह मृतक गायक के माता-पिता के साथ रात भर रहे, जिसने पार्टी में हलचल मचा दी थी। विदेश यात्रा से लौटने के बाद चन्नी को राजस्थान में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी देखा गया था। उन्होंने प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मुलाकात की थी। कई लोगों ने महसूस किया कि ये एक सोचा समझा कदम था, जिससे पार्टी में उनके विरोधियों को संदेश गया कि वह अभी भी प्रासंगिक हैं। एक वरिष्ठ नेता ने दिसंबर में News18 को बताया था, “आपको ये याद रखना होगा कि कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनावों में वापसी करना चाहती है और चन्नी को इसकी भनक लग गई है। हो सकता है कि उन्हें विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उनकी जाति की संबद्धता अभी भी उन्हें आरक्षित सीट से टिकट के लिए आकांक्षी बना सकती है।” पंजाब लौटने पर भी, उन्होंने मूसे वाला परिवार से मिलने का विकल्प चुना। कई लोगों का मानना है कि ये कदम रणनीतिक रूप से उनके लिए सही था। चन्नी की रणनीतिक चाल रंग ला रही है? कांग्रेस अब जालंधर संसदीय उपचुनाव में प्रचार के लिए पूर्व मुख्यमंत्री को अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है। पार्टी अलग-अलग आवाज उठाने वाले नेताओं के बीच शांति भंग करने का भी कोशिश कर रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीएम के रूप में अपने संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान, चन्नी ने रविदासिया/आदि-धर्मी समुदाय में एक अच्छा समर्थन तैयार करने में कामयाबी हासिल की। चन्नी फैक्टर ने कुछ सीटों पर काम भी किया। दोआबा क्षेत्र और जालंधर निर्वाचन क्षेत्र के नौ विधानसभा क्षेत्रों में से पांच में कांग्रेस पार्टी की जीत में इसे फैक्टर ने बड़ा योगदान दिया। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि चन्नी भी सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। इतना ही नहीं जब तक उम्मीदवार तय नहीं हुआ था, तब तक उन्होंने जालंधर निर्वाचन क्षेत्र के कुछ चक्कर लगाए थे, लेकिन खुद को कुछ चुनिंदा बैठकों तक ही सीमित रखा था। 'जीभ काट देंगे...' तमिलनाडु कांग्रेस नेता ने दिया विवादित बयान, दर्ज हुई FIR, राहुल गांधी की अयोग्यता के खिलाफ कर रहे थे प्रदर्शन TOI की रिपोर्ट में पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि उन्हें विधानसभा क्षेत्र में प्रचार करने के लिए मनाने की कोशिश की जा रही है। यह भी पता चला है कि अलग-अलग स्वरों में बोलने वाले नेताओं को जालंधर उपचुनाव से पहले अपने बयानों को लेकर सतर्त रहने के लिए कहा जा रहा है। इस बीच, पार्टी के नेता नवजोत सिंह सिद्धू के अगले कदमों पर भी उत्सुकता से नजर रख रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की।
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