भारतीय बैंकों के बैड लोन में हालिया निचले स्तर से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। खासतौर से रिटेल और स्मॉल बिजनेस बैंकिंग सेगमेंट से जुड़े लोन में। देश के सबसे बड़े के एक अधिकारी ने गुरुवार 23 फरवरी को ये बाते कहीं। इस सेगमेंट को दिए जाने वाला लोन काफी तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी तक इसमें डिफॉल्ट के मामले कम कर रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, अश्विनी कुमार तिवारी ने कहा, "ऐसी सिस्टम नहीं हो सकता है जहां हमें MSME और रिटेल सेगमेंट के लोन में सालाना 20% की बढ़ोतरी देखने को मिले और फिर उसका NPA (रेशियो) भी 1% से नीचे बना रहे।" अश्विनी ने कहा, "यह लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा।" गुरुवार को मुंबई में बैंकिंग इंडस्ट्री से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अश्विनी ने ये बातें कहीं। RBI की फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2022 में भारतीय बैंकों को ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross NPA) घटकर 5 फीसदी पर आ गया था, जो इसका पिछले 7 सालों का सबसे निचला स्तर था। वहीं स्मॉल बिजनेसेज के लिए बैड लोन रेशियो 7.7 फीसदी था। यह भी पढ़ें- Share Market: लगातार 5वें दिन लुढ़का शेयर बाजार, निवेशकों की संपत्ति ₹30,000 करोड़ घटी एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और क्रिसिल रेटिंग्स ने गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि मार्च 2024 तक स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (SME) का ग्रॉस NPA रेशियो बढ़कर 10-11% हो सकता है। अश्विनी तिवारी ने कहा कि इन बिजनसो में अक्सर कमजोर कैश फ्लो या बेहद कम इक्विटी होती है, जो तनाव के समय में जल्दी खत्म हो जाती है और जो अंत में डिफॉल्ट की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा, "लेकिन स्पष्ट तौर से, MSME (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) से जुड़ा तनान कुछ ऐसा है जो हमें देखने को मिल सकता है।" RBI के 31 दिसंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय बैंकों ने MSME सेक्टर को करीब 19 लाख करोड़ रुपये का लोन दिया हुआ था। यह उनके कुल लोन बुक का करीब 14 फीसदी है।
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