इनवेस्टमेंट और पैसे-रुपये से जुड़ी कई ऐसी धारणाएं हैं जो लोगों के दिमाग में लंबे समय से बैठी हैं। दरअसल लोगों में वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) का अभाव है। इन गलत धारणाओं की वजह से लोग निवेश पर शानदार रिटर्न कमाने के मौके चूक जाते हैं। इसका असर उनके फाइनेंशियल हेल्थ (Financial Health) पर पड़ता है। हम आपको कुछ ऐसी ही धारणाओं के बारे में बता रहे हैं। कम NAV वाले म्यूचुअल फंड्स सस्ते होते हैं इंडिया में 1990 के दशक में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के विस्तार के वक्त से ही एनएवी को लेकर कई लोग गलत तरीके से सोचते हैं। उन्हें लगता है कि म्यूचुअल फंड की जिस स्कीम की एनएवी कम होती है, वह सस्ती होती है। कई बार एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के डिस्ट्रिब्यूटर्स न्यू फंड ऑफर को बेचने के लिए इस दलील का इस्तेमाल करते हैं। आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि एनएवी कम या ज्यादा होने और किसी स्कीम के सस्ती होने के बीच कोई संबंध नहीं है। किसी स्कीम की एनएवी कई बातों पर निर्भर करती है। यह भी पढ़ें : Indian Railway Platform Ticket: उत्तर रेलवे ने त्योहारों के बाद घटाया प्लेटफॉर्म टिकट का दाम, 50 की जगह किया 10 रुपये अगर आप यंग हैं तो रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बहुत वक्त है नौकरी या अपना रोजगार शुरू करने वाले 25-30 साल के युवा अक्सर रिटायरमेंट प्लानिंग के बारे में सोचना जरूरी नहीं समझते। उन्हें लगता है कि इसके लिए अभी बहुत समय बचा है। इसके बजाय वे कार और घर खरीदने या देश और विदेश में छुट्टियां मनाने को ज्यादा जरूरी समझते हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि वे पावर ऑफ कंपाउंडिंग का लाभ उठाने से चूक जाते हैं। इसका मतलब है कि कंपाउंडिंग बेनेफिट की वजह से लंबे समय में निवेश के शानदार रिटर्न मिलते हैं। उदाहरण के लिए अगर 30 साल का कोई व्यक्ति हर महीने SIP के जरिए इक्विटी फंड में 10,000 रुपये इनवेस्ट करता है तो उसके 60 साल तक होने पर उसका पैसा बढ़कर करीब 3.49 करोड़ रुपये हो जाता है। हमने इक्विटी फंड से सालाना 12 फीसदी रिटर्न का अनुमान लगाया है। डिविडेंड देने वाला म्यूचुअल फंड अच्छा होता है कई निवेशक यह मानते हैं कि डिविडेंड देने वाला म्यूचुअल फंड अच्छा होता है। इस वजह से वे डिविडेंड ऑप्शन वाली म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश शुरू करते हैं। वे यह नहीं समझते कि स्कीम जो डिविडेंड देती है वह फंड के अपने एसेट अंडर मैनेजमेंट का हिस्सा होता है। यही वजह है कि डिविडेंड का ऐलान होते ही स्कीम की NAV घट जाती है। मेरे पास निवेश के लिए पैसे नहीं बचते हैं यंग इनवेस्टर्स खासकर 20 साल के ज्यादा उम्र के निवेशकों को लगता है कि जब तक उनके पास खूब पैसे नहीं जमा हो जाए, उन्हें निवेश शुरू नहीं करना चाहिए। इस वजह से वे इनवेस्टमेंट शुरू करने के लिए पैसा इकट्ठा होने का इंतजार करते हैं। ऐसा वक्त कभी नहीं आता। क्योंकि जैसे-जैसे हमारी कमाई बढ़ती है वैसे-वैसे हमारे खर्चें भी बढ़ते रहते हैं। सच्चाई यह है कि सिर्फ 5000 रुपये से म्यूचुअल फंड की स्कीम में एकमुश्त निवेश किया जा सकता है। आप सिप से 500 या 1000 रुपये हर महीने की दर से निवेश कर सकते हैं। रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इक्विटी से बेहतर हैं फिक्स्ड रिटर्न इनवेस्टमेंट कई लोग रिटायरमेंट के लिए निवेश करते वक्त शेयरों से दूर रहने की कोशिश करते हैं। वे अक्सर PPF, NSC, बैंक या पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसे डालते हैं। मुश्किल यह है कि फिक्स्ड रिटर्न इंस्ट्रूमेंट का रिटर्न इनफ्लेशन के मुकाबले बहुत ज्यादा नहीं होता है। चूंकि रिटायरमेंट प्लानिंग लंबी अवधि का लक्ष्य है, जिससे शेयरों में निवेश से लंबी अवधि में बहुत अच्छा रिटर्न मिलने का अनुमान होता है।
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