इंडिया में अच्छी सैलरी वाली नौकरी नहीं मिलने पर अब्दुल ने विदेश में मौके तलाशने का फैसला किया। उसकी बातचीत एक ट्रेवल एजेंसी से हुई। उसने थाईलैंड में उसे डाटा-एंट्री ऑपरेटर की नौकरी के बारे में बताया। उसे एक लाख रुपये हर महीने की सैलरी का वादा किया। तेलंगाना का 26 साल का अब्दुल तुरंत इस ऑफर के लिए तैयार हो गया। अब्दुल ने मनीकंट्रोल को बताया, "पहले हमें बस से बेंगलुरु ले जाया गया। वहां से फ्लाइट से हम थाईलैंड पहुंचे। हमारे साथ पांच और लोग थे। बैंकॉक एयरपोर्ट पर 3-4 घंटे इंतजार करने के बाद हमारे पास एक लोकल व्यक्ति आया। हम उसके साथ कार में वहां से निकल गए।" उसने बताया कि हमें नहीं पता था कि हम कहां जा रहे हैं। करीब 7-8 घंटे के सफर के बाद हम एक जगह पहुंचे। इस बीच दो बार हमारी कार बदली गई। हमने ड्राइवर से पूछा कि हम कहां जा रहे हैं, लेकिन उसे अंग्रेजी नहीं आती थी। बाद में हमे पता चला कि हम थाईलैंड के Mae Sot में हैं। यह भी पढ़ें : RBI जल्द डिजिटल करेंसी के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा अब्दुल ने कहा, "Mae Sot से हमें करीब 100 दूर बोट ले जाया गया। हम लगातार पूछते रहे कि हमें कहां ले जाया जा रहा है, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। रात में हम एक जगह पहुंचे जहां हमें अंडा और चावल दिया गया। हमें फिर आराम करने को कहा गया। हम बहुत डर गए थे। हमने अपने परिवार को अपना जीपीएस लोकेशन भेजा। फिर हमें पता चला कि हम ट्रैफिकिंग के शिकार हो गए हैं। हमें थाईलैंड से म्यांमार ले जाया गया है।" उन्होंने कहा कि अगली सुबह एक व्यक्ति से हमें मिलवाया गया। हमें बताया गया कि हमें लड़कियों की तरह पेश आना है। हमें लोगों से चैट कर जरिए उन्हें क्रिप्टोकरेंसी खरीदने के लिए लुभाना है। उन लोगों ने हमें बताया कि हमें रोजाना करीब 4-5 कस्टमर बनाने होंगे। हमें उन्हें बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी बेचनी होगी। अब्दुल ने कहा, "हमें कई ईमेल आईडी और फेक आईडी भी बनाने को कहा गया। हमें अमेरिका, कनाडा और यूरोप में संभावित ग्राहकों से संपर्क करने को कहा गया। हमें सुबह 10 बजे से रात में 1 बजे तक यह काम करना पड़ता था। हम तीनों ने यह काम करने से इनकार कर दिया।" अब्दुल ने कहा कि हमने उनसे कहा कि हमें यह काम नहीं करना है। यह सुनकर वे लोग बहुत गुस्सा हो गए। उन्होंने हमें धमकी देनी शुरू कर दी। उन्होंने कहा अगर तुमलोग यहां से जाना चाहते हैं तो 8-10 लाख रुपये देने होंगे। हैदराबाद के दो अन्य लोगों ने भी यहीं कहानी बताई। दरअसल इंडिया से लोगों को पहले थाईलैंड और फिर म्यांमार भेजा जा रहा है। वहां उनसे क्रिप्टो स्कैमर का काम कराया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने लोगों को इस ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जाल में फंसने से आगाह किया है। उसने इस बारे में एक चेतावनी जारी की है। इसमें कहा गया है, "भारतीय युवाओं को थाइलैंड में डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी के वादे के साथ लुभाया जा रहा है। उन्हें कॉल सेंटर में क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड का हिस्सा बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। बैंकॉक और म्यांमार में ऐसे कई मामलों की जानकारी मंत्रालय को मिली है। " विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय लोगों को इस जाल में फंसने से बचना चाहिए। उन्हें ऐसे किसी जॉब ऑफर पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उसने यह भी कहा है कि दुबई और देश में मौजूद एजेंट्स सोशल मीडिया पर इस तरह के जॉब को प्रमोट कर रहे हैं।
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