Labour Code: मोदी सरकार 1 जुलाई 2022 से लेबर कोड के नियमों को लागू करना चाहती थी, लेकिन राज्यों की तैयारी न होने के कारण इन्हें लागू नहीं किया जा सका। अब केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि लेबर कोड के नियम कब से लागू किये जा सकते हैं। लेबर कोड के नियम लागू होने से काम के घंटे 12 घंटे तक हो सकते हैं लेकिन हफ्ते में 2 की जगह 3 दिन छुट्टी मिलेगी। साथ ही हाथ में आने वाला कैश घट सकता है लेकिन पीएफ बढ़ सकता है। कब मिलेगी हफ्ते में 3 दिन छुट्टी एक बातचीत में भूपेंद्र यादव ने बताया कि लगभग सभी राज्यों ने चार श्रम संहिताओं पर नियम तैयार कर लिए हैं। यादव ने कहा कि वह इन संहिताओं को उचित समय पर लागू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राज्य मसौदा नियमों पर अभी काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान ने दो संहिताओं पर मसौदा नियम तैयार कर लिए जबकि दो पर काम किया जाना बाकी है। बंगाल में इन्हें अंतिम रूप देने पर काम चल रहा है। हफ्ते में 3 दिन मिलेगी छुट्टी 1 जुलाई से कंपनियों के पास अधिकार होगा कि वह काम के घंटों को बढ़ाकर 12 घंटे कर सकती है लेकिन फिर एक दिन छुट्टी अधिक मिलेगी। यानी 3 दिन कर्मचारियों को छुट्टी मिल सकेगी। नये नियम लागू होने के बाद कंपनियां, कर्मचारियों को तीन दिन की छुट्टी दे सकेंगी। कर्मचारियों को चार दिनों के लिए प्रति दिन 10 से 12 घंटे काम करना होगा। नए कानूनों का मतलब यह होगा कि ओवरटाइम के अधिकतम घंटे 50 (कारखाना अधिनियम के तहत) से बढ़कर 125 घंटे हो जाएंगे। सैलरी घटेगी लेकिन बढ़ेगा PF नए ड्राफ्ट रूल के अनुसार, बेसिक सैलरी कुल वेतन का 50% या अधिक होना चाहिए। इससे ज्यादातर कर्मचारियों की वेतन का स्ट्रक्चर बदल जाएगा, बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी का पैसा ज्यादा पहले से ज्यादा कटेगा। पीएफ बेसिक सैलरी पर आधारित होता है। पीएफ बढ़ने पर टेक होम या हाथ में आने वाला सैलरी कम हो जाएगी। बढ़ जाएगा रिटायरमेंट पर मिलने वाला पैसा ग्रेच्युटी और पीएफ में योगदान बढ़ने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला पैसा बढ़ जाएगा। इससे कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद बेहतर जीवन जीने में आसानी होगी। पीएफ और ग्रेच्युटी बढ़ने से कंपनियों के लिए लागत में भी बढ़ोतरी होगी क्योंकि उन्हें भी कर्मचारियों के लिए पीएफ में ज्यादा योगदान देना होगा। इसका सीधा असर उनकी बैलेंस शीट पर पड़ेगा। क्या है लेबर कोड के नियम – 4 कोड में बंटा है कानून भारत में 29 सेंट्रल लेबर कानून को 4 कोड में बांटा गया है। कोड के नियमों में वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध (Industrial Relations) और व्यवसाय सुरक्षा (Occupation Safety) और स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति आदि जैसे 4 लेबर कोड शामिल है। अभी तक 23 राज्यों ने इन ड्राफ्ट कानूनों को तैयार कर लिया है। संसद द्वारा इन चार संहिताओं को पारित किया जा चुका है, लेकिन केंद्र के अलावा राज्य सरकारों को भी इन संहिताओं, नियमों को अधिसूचित करना जरूरी है। उसके बाद ही ये नियम राज्यों में लागू हो पाएंगे। Cryptocurrency: रिजर्व बैंक क्रिप्टो पर बैन लगाना चाहता है लेकिन इसके लिए चाहिए ग्लोबल सपोर्ट-निर्मला सीतामरण
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