Tuesday, February 17, 2026

Small Cap Stocks: ऑल टाइम हाई से 40% नीचे हैं आधे स्मॉल कैप स्टॉक्स, निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब?

Small Cap Stocks: भारतीय शेयर बाजार में करीब आधे स्मॉल कैप शेयर इस समय अपने ऑल टाइम हाई से लगभग 40 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहे हैं। Abakkus Mutual Fund की एक आंतरिक स्टडी में यह सामने आया है। इससे साफ है कि हाल की बाजार गिरावट ने ब्रॉडर मार्केट की वैल्यूएशन को काफी प्रभावित किया है।

इस स्टडी में ₹2,000 करोड़ से ₹34,700 करोड़ के मार्केट कैप वाली कंपनियों को शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि इस दायरे की बड़ी संख्या में शेयर अपने पीक लेवल से तेज गिरावट झेल चुके हैं। रिटेल निवेशकों के लिए ऐसी गिरावट कम एंट्री प्राइस का मौका दे सकती है, लेकिन इसके साथ ज्यादा उतार चढ़ाव और जोखिम भी जुड़ा रहता है।

स्मॉल कैप शेयरों की पोर्टफोलियो में अहमियत

पिछले छह साल में स्मॉल कैप सेगमेंट का आकार तेजी से बढ़ा है। 2019 से 2025 के बीच इनका कुल मार्केट कैप ₹16 ट्रिलियन से बढ़कर ₹83 ट्रिलियन हो गया, यानी करीब 5.3 गुना बढ़ोतरी। इसी दौरान लार्ज कैप 2.55 गुना और मिड कैप 3.89 गुना बढ़े।

इसका असर यह हुआ कि कुल लिस्टेड मार्केट कैप में स्मॉल कैप की हिस्सेदारी 2019 के 11 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 19 प्रतिशत हो गई। यानी अब स्मॉल कैप भारतीय बाजार का कहीं ज्यादा अहम हिस्सा बन चुके हैं।

स्मॉल कैप में रिटर्न ज्यादा, लेकिन रिस्क भी

इतिहास बताता है कि लंबी अवधि में स्मॉल कैप ने लार्ज कैप से ज्यादा रिटर्न दिए हैं, लेकिन इनके भाव में तेज उतार चढ़ाव भी देखने को मिलता है।

1 सितंबर 2016 से 31 जनवरी 2026 के बीच Nifty Smallcap 250 और Nifty 50 में SIP रिटर्न की तुलना की गई। इस अवधि में Nifty Smallcap 250 में SIP पर 17 प्रतिशत का CAGR मिला। वहीं, Nifty 50 में यह 12 प्रतिशत रहा।

तीन और पांच साल के रोलिंग आधार पर स्मॉल कैप इंडेक्स ने क्रमशः 21 प्रतिशत और 22 प्रतिशत CAGR दिया। Nifty 50 में यह 13 प्रतिशत रहा।

हालांकि स्टडी में यह भी कहा गया कि स्मॉल कैप में स्टैंडर्ड डिविएशन ज्यादा होता है, यानी कीमतों में उतार चढ़ाव ज्यादा रहता है। इसलिए निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर निवेश करना चाहिए।

स्मॉल कैप से उभरते सेक्टरों तक पहुंच

स्मॉल कैप कंपनियां अक्सर उन सेक्टरों में काम करती हैं जो अभी तेजी से उभर रहे हैं और लार्ज कैप इंडेक्स में कम दिखते हैं। इनमें एयरोस्पेस और डिफेंस, फार्मा और बायोटेक, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज, इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी, एआई आधारित सेवाएं, रिन्यूएबल एनर्जी, मेडिकल डिवाइस, ट्रैवल और टूरिज्म और ऑटो कंपोनेंट शामिल हैं।

Abakkus Mutual Fund के सीईओ वैभव चुग के मुताबिक, मौजूदा गिरावट ने बाजार का समीकरण भी बदला है। अब ₹2,000 करोड़ से ₹34,700 करोड़ के मार्केट कैप वाली कई कंपनियों में जोखिम बनाम रिटर्न का संतुलन बेहतर हुआ है। उनका कहना है कि जो निवेशक बाजार के उतार चढ़ाव में टिके रहते हैं और बार बार एंट्री एग्जिट करने की कोशिश नहीं करते, वे लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा उठा सकते हैं।

यह पूरी स्टडी 31 दिसंबर 2025 तक के उद्योग आंकड़ों पर आधारित आंतरिक रिसर्च के आधार पर तैयार की गई है।

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