भारत और यूरोपीय यूनियन में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर सहमति बन गई है। 27 जनवरी को इंडिया-ईयू समिट में इसका ऐलान हो सकता है। ईयू के नेताओं ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' बताया है। यह डील ऐसे वक्त होने जा रही है, जब अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। इसका असर इंडिया के एक्सपोर्ट पर पड़ा है।
ज्यादातर मसलों पर दोनों पक्षों की सहमति
European Union (EU) के सीनियर लीडर्स दिल्ली में हैं। दोनों पक्षों की बातचीत में शामिल लोगों का कहना है कि कुछ चुनिंदा संवेदनशील मसलों पर सहमति बननी बाकी है। अगर यह डील हो जाती है तो इससे इंडिया की ट्रेड स्ट्रेटेजी में निर्णायक बदलाव आएगा। इस डील से गुड्स के सबसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर के साथ भारत के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।
2007 में हुई थी बातचीत की शुरुआत
भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी। लेकिन, मार्केट एक्सेस, लेबर स्टैंडर्ड्र्स, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और रेगुलेटरी रूल्स को लेकर कई बार बातचीत में रुकावट आई। दोबारा 2022 में बातचीत की शुरुआत हुई। बीते एक साल में ग्लोबल ट्रेड में बाधा और बढ़ते संरक्षणवाद के बीच भारत और ईयू के बीच बातचीत ने रफ्तार पकड़ी।
भारत का यह प्रस्ताव डील की सबसे खास बात
इस डील का वह प्रस्ताव काफी खास है, जिसमें इंडिया ने यूरोपीय कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ी कमी करने का ऑफर दिया है। यह जानकारी डील से जुड़े अधिकारियों और रायटर्स पर आधारित है। अभी यूरोप में बनी कारों पर इंडिया 70-110 फीसदी ड्यूटी लगाता है। डील के बाद ईयू में बनी 15,000 यूरोप से ज्यादा कीमत की कारों की निश्चित संख्या पर ड्यूटी घटकर 40 फीसदी रह जाएगा। धीरे-धीरे यह घटकर 10 फीसदी पर आ जाएगी।
इलेक्ट्रिक कारें 5 साल तक डील से बाहर रहेंगी
सूत्रों ने बताया कि इंपोर्ट ड्यूटी में शुरुआती कमी का लाभ सालाना करीब 2,00,000 लाख पेट्रोल-डीजल कारों को मिलेगा। कारों की संख्या पर अभी बातचीत चल रही है। इसमें बदलाव हो सकता है। घरेलू निवेश को बढ़ावा देने के लिए शुरुआती पांच सालों में इलेक्ट्रिक कारें इस डील से बाहर रहेंगी। डील होने पर फॉक्सवैगर, मर्सीडीज बेंच और बीएमडब्ल्यू जैसी यूरोपीय कार कंपनियों के लिए इंडिया के बाजार में एंट्री आसान हो जाएगी।
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इन सेक्टर्स के लिए मार्केट एक्सेस पर भारत का फोकस
भारत यूरोपीय यूनियन से टेक्सटाइल्स, गारमेंट्स, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स और प्रोसेस्ड फूड्स जैसे सेक्टर्स के लिए बेहतर मार्केट एक्सेस चाहता है। ये ऐसे सेक्टर्स हैं, जिनमें भारत में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार हासिल है। ईयू के 2023 में अपने जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफरेंस के तहत रियायतें वापस लेने पर इनमें से कई सेक्टर में टैरिफ के रूप में मिलने वाले फायदे खत्म हो गए हैं।
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