Monday, January 19, 2026

7.3% की रफ्तार से बढ़ेगी भारतीय इकॉनमी, IMF ने इस कारण किया अपग्रेड,अमेरिकी टैरिफ का झटका खत्म!

Indian Economy Outlook: इंडियन मॉनीटरी फंड (IMF) ने पिछले साल 2025 के लिए भारतीय इकॉनमी के ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 7.3% कर दिया है। आईएमएफ ने कंपनियों की उम्मीद से बेहतर दिसंबर तिमाही के कारोबारी नतीजे के चलते ऐसा कियया है। साथ ही आईएमएफ ने संकेत दिया है कि अमेरिकी टैरिफ के झटकों का इकॉनमी पर तुरंत जो असर पड़ना है, उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था ने काफी हद तक एब्जॉर्ब कर लिया है। अपनी नई वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में आईएमएफ ने भारतीय इकॉनमी के लिए 2025 की ग्रोथ के अनुमान को 0.7 पर्सेंटेज प्वाइंट बढ़ाकर 7.3% कर दिया। आईएमएफ ने वर्ष 2026 में 6.4% और वर्ष 2027 में भी 6.4% की ग्रोथ का अनुमान लगाया है।

बाकी देशों के लिए क्या है IMF का अनुमान?

वैश्विक स्तर पर बात करें तो आईएमएफ का कहना है कि उम्मीद के विपरीत वैश्विक अर्थव्यवस्था ने काफी लचीलापन दिखाया और अब उम्मीद की जा रही है कि उत्तरी अमेरिका और एशिया में एआई से जुड़े निवेश में उछाल के दम पर यह अमेरिकी टैरिफ से निपट सकती है। अब आईएमएफ का अनुमान है कि इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था 3.3% की रफ्तार से बढ़ सकती है जोकि पिछले वर्ष 2025 में ग्रोथ के मुकाबले समान ही है लेकिन अक्टूबर में वर्ष 2026 के लिए लगाए गए 3.1% की ग्रोथ के अनुमान से अधिक है। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री Pierre-Olivier Gourinchas और उनके सहयोगी Tobias Adrian के मुताबिक अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

आईएमएफ ने अमेरिका की ग्रोथ को लेकर अपने अनुमान को बढ़ाया है और इस वर्ष 2026 में 2.4% की ग्रोथ का अनुमान लगाया है। पहले यह अनुमान 2.1% था और पिछले साल इसी रफ्तार से वैश्विक इकॉनमी बढ़ी भी थी। इसे वर्ष 2001 के बाद से टेक्नोलॉजी में सबसे तेज स्पीड से निवेश से सपोर्ट मिलेगा। यह इस वर्ष और 2025 दोनों के लिए पहले के 2.1% के अनुमान से अधिक है। चीन को लेकर भी आईएमएफ का रुझान सुधरा है और उम्मीद लगाई है कि इसकी इकॉनमी 4.2% की बजाय 4.5% की रफ्तार से बढ़ सकती है। आईएमएफ के इस पॉजिटिव रुझान की वजह अमेरिका के साथ इसका कारोबार सौदा है जिससे चीन के निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ कम हुआ है।

भारतीय इकॉनमी बनी रही दुनिया में सबसे बड़ी

आईएमएफ ने भारतीय अर्थव्यवस्था के आउटलुक में सुधार ऐसे समय में किया है, कुछ समय पहले तक कॉरपोरेट अर्निंग्स में गिरावट ने आर्थिक गतिविधियों और शेयर मार्केट को तगड़ा झटका दिया था। इस कमजोर के चलते विदेशी निवेशक धड़ाधड़ निकासी करने लगे और निवेशक सतर्क हो गए। इसके अलावा वैश्विक कारोबारी तनाव, हाई वैल्यूएशन और अमेरिकी टैरिफ के चलते भी दबाव बना। हालांकि इन सबके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहा।



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