PM Modi Interview: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने रविवार को जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में G20 बैठक (G20 meetings) आयोजित करने पर पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) की आपत्तियों को खारिज कर दिया। PTI को दिए एक इंटरव्यू में, प्रधान मंत्री ने कहा कि देश के हर हिस्से में बैठकें आयोजित करना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा, "ऐसा सवाल वाजिब होगा, अगर हमने उन स्थानों पर बैठकें आयोजित करने से परहेज किया होता। हमारा देश इतना विशाल, सुंदर और विविधतापूर्ण है। जब G20 बैठकें हो रही हैं, तो क्या ये स्वाभाविक नहीं है कि बैठकें हमारे देश के हर हिस्से में आयोजित की जाएंगी।" न्यूज एजेंसी को दिए अपने इंटरव्यू में, PM मोदी ने G20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit), आतंकवाद, भारत की आर्थिक वृद्धि, 'सबका साथ सबका विकास' मॉडल आदि समेत कई मुद्दों पर बात की। पढ़ें, प्रधान मंत्री के इंटरव्यू की 5 बड़ी बातें। 1- प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने G20 में भारत की अध्यक्षता पर बात की और इसे महामारी से लड़ने की कोशिशों, मानव-केंद्रित विकास दृष्टिकोण और टीकाकरण अभियान से जोड़ा। उन्होंने कहा, "भारत के अनुभव को देखते हुए ये माना गया कि संकट के दौरान भी मानव-केंद्रित दृष्टिकोण काम करता है।" उन्होंने कहा, "साफ और समन्वित दृष्टिकोण के जरिए महामारी के प्रति भारत की प्रतिक्रिया, प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके सबसे कमजोर लोगों को सीधी सहायता, टीके के साथ आना और दुनिया का सबसे बड़ा टीका अभियान चलाना, और लगभग 150 देशों के साथ दवाएं और टीके साझा करना - नोट किया गया और खूब सराहा गया।" मोदी ने कहा, "जब तक भारत G20 का अध्यक्ष बना, दुनिया के लिए हमारे शब्दों और दृष्टिकोण को केवल विचारों के रूप में नहीं बल्कि भविष्य के रोडमैप के रूप में लिया जा रहा था।" 2- PM मोदी ने कर्ज संकट को दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा, "कर्ज संकट वास्तव में दुनिया, खासतौर से विकासशील देशों के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है। अलग-अलग देशों के नागरिक इस संबंध में सरकारों की तरफ से लिए जा रहे निर्णयों का उत्सुकता से अनुसरण कर रहे हैं। कुछ सराहनीय परिणाम भी मिले हैं।" मोदी ने कहा, "सबसे पहले, जो देश कर्ज संकट से गुजर रहे हैं या इससे गुजर चुके हैं, उन्होंने वित्तीय अनुशासन को ज्यादा महत्व देना शुरू कर दिया है। दूसरे, जिन देशों ने कुछ देशों को कर्ज संकट के कारण कठिन समय का सामना करते देखा है, वे उन्हीं गलत कदमों से बचने के प्रति सचेत हैं।" 3- PM मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों का भी आह्वान किया और कहा कि 20वीं सदी के बीच का 21वीं सदी में दुनिया की सेवा नहीं कर सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, "आज की दुनिया एक बहुध्रुवीय दुनिया है, जहां नियम-आधारित व्यवस्था के लिए संस्थाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं, जो निष्पक्ष और सभी चिंताओं के प्रति संवेदनशील हो। हालांकि, संस्थाएं तभी प्रासंगिक रह सकती हैं, जब वे समय के साथ बदलें।" 4- प्रधान मंत्री मोदी ने कहा कि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बन जाएगा, जबकि भारत की क्षमताओं में 'विश्वास न रखने' के लिए पिछली UPA सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से, पहले दिल्ली में, विज्ञान भवन में और उसके आस-पास ही काम पूरा करने का एक नजरिया हुआ करता था। शायद इसलिए क्योंकि, ये एक आसान रास्ता था, या शायद इसलिए कि सत्ता में बैठे लोगों को इतने बड़े पैमाने की योजनाओं को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों पर भरोसा नहीं था।" 5- इंटरव्यू के दौरान, PM मोदी ने आतंकवाद के बारे में बात की और बताया कि कैसे ये डार्क नेट, metaverse और crypto प्लेटफॉर्म जैसे उभरते डिजिटल तरीकों को कट्टरपंथी बनाने और भुनाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा, "साइबर आतंकवाद, ऑनलाइन कट्टरपंथ, मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर ड्रग्स और आतंकवाद तक धन पहुंचाने के लिए नेटवर्क प्लेटफार्मों का इस्तेमाल- बस हिमशैल का टिप है।" 6. यूक्रेन युद्ध पर, PM मोदी ने अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग संघर्षों को हल करने का एकमात्र तरीका "संवाद" और "कूटनीति" को बताया। PM Modi ने कहा 'वसुधैव कुटुंबकम' सिर्फ एक नारा नहीं, जी-20 में लिए गए फैसले होंगे दुनिया के लिए अहम 7- प्रधानमंत्री ने भारत के कुशल हाथों और अपनी सरकार के 'सबका साथ, सबका विकास' मॉडल के बारे में बात की। मोदी ने कहा, “लंबे समय तक, भारत को एक अरब से ज्यादा भूखे पेटों वाले देश के रूप में माना जाता था। लेकिन अब, भारत को एक अरब से ज्यादा आकांक्षी दिमागों, दो अरब से ज्यादा कुशल हाथों और करोड़ों युवाओं के देश के रूप में देखा जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, "सबका साथ सबका विकास मॉडल ने भारत को जो रास्ता दिखाया है, वो विश्व कल्याण के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकता है।" 8- प्रधानमंत्री ने देश की कुछ राज्य सरकारों के लोकलुभावन कदमों पर परोक्ष रूप से कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “लोकलुभावनवाद कम समय के लिए राजनीतिक परिणाम दे सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इसकी बड़ी सामाजिक और आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी, जो लोग सबसे ज्यादा परिणाम भुगतते हैं, वे अक्सर सबसे गरीब और सबसे कमजोर होते हैं।” 9- PM ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय जीवन में भ्रष्टाचार, जातिवाद और सांप्रदायिकता की कोई जगह नहीं होगी। मोदी ने कहा, "हमारे लोगों के जीवन की गुणवत्ता दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों के बराबर होगी। सबसे अहम बात यह है कि हम प्रकृति और संस्कृति दोनों की देखभाल करते हुए, ये सब हासिल करेंगे।" 10. मोदी ने अपनी सरकार को एक निर्णायक जनादेश का श्रेय दिया, जिसके कारण उनके अनुसार "एक स्थिर सरकार, पूर्वानुमानित नीतियां और समग्र दिशा में स्पष्टता" आई।
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