अक्षय तृतीया के दिन सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है। अगर पिछले एक साल में सोने का प्रदर्शन देखें तो घरेलू बाजार में इसकी कीमत करीब 7 फीसदी बढ़ी है। अक्षय तृतीया इस साल कल यानी मंगलवार 3 मई को पड़ रहा है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल है क्या सोना निवेश के लिहाज से अभी एक अच्छा विकल्प है? कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च हेड, रविंद्र वी राव की मानें तो सोना अभी भी निवेश के लिए लिहाल से एक अच्छा विकल्प है और अगले एक साल में इसमें मौजूदा स्तर से 5 से 7 फीसदी की तेजी देखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि अगर अगले एक साल के दौरान ग्लोबल अर्थव्यवस्था के लिहाज से कोई बड़ी घटना घटती है, तो यह रिटर्न बढ़ भी सकता है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के लिखे एक लेख में बताया कि पिछले काफी लंबे समय तक एक सीमित दायरे में कारोबार करता रहा, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच जंग शुरू होने और ग्लोबल लेवल पर महंगाई बढ़ने की आशंका से इसकी कीमतों में तेजी आई और यह अपने उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में आशंका के चलते सोने की कीमतों में पिछले कुछ समय में गिरावट आई है। यह भी पढ़ें- Veranda Learning के शेयरों में लगातार 8वें दिन लगा अपर सर्किट, सिर्फ 3 हफ्ते में 113% उछला स्टॉक उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सोने की कीमत इन्हीं तीन कारकों से प्रभावित होगी- भूराजनीतिक तनाव, महंगाई तेज होने की आशंका और केंद्रीय बैंकों की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी के ऐलान की संभावना। रूस और यूक्रेन के बीच जंग अपने तीसरे महीने में पहुंच गया है और अभी तक युद्ध खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इससे वैश्विक इकोनॉमी की ग्रोथ पर बादल छा सकते हैं और गोल्ड जैसे निवेश के सुरक्षित ठिकानों की मांग बढ़ सकती है। IMF ने पिछले हफ्ते रूस-यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुए 2022 के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 4.4% से घटाकर 3.6% कर दिया। साथ ही यह भी चेतावनी दी कि महंगाई पहले के अनुमान से अधिक समय तक बनी रह सकती है। रविंद्र राव ने इसके अलावा ग्लोबल लेवल पर महंगाई बढ़ने से भी आने वाले समय में सोने की मांग में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं के दाम में तेज बढ़ोतरी के साथ महंगाई की आशंका तेज हो गई है। जब तक रूस-यूक्रेन तनाव कम नहीं हो जाता, तब तक सप्लाई के मोर्च पर जोखिम बना रह सकता है और यह कमोडिटी की कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। हालांकि सोने की कीमतों को लेकर एक बड़ा जोखिम अमेरिकी फेडरल रिजर्व और दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों की तरफ अपनाई जाने वाली आक्रामक मॉनिटरी पॉलिसी है। महंगाई को कम करने के उपाय के तौर पर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इससे सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। रविंद्र राव ने कहा इन मिलेजुले कारकों के चलते सोना संघर्ष कर सकता है। हालांकि ग्लोबल इकोनॉमी के लिए बढ़ती चुनौतियों और शेयर बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के साथ, निवेशक अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा सोने में निवेश करना चुन सकते हैं। उन्होंने कहा कि जोखिमों के बावजूद, हमें मौजूदा स्तर से सोने की कीमत में करीब 5-7% का रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
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