मध्य प्रदेश के एक सब्जी विक्रेता की बेटी दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के दम पर सभी बाधाओं और मुश्किलों को पार करते हुए सिविल जज बन गई है। इंदौर में सब्जी बेचकर जीवन-यापन करने वाले परिवार की बेटी 29 वर्षीय अंकिता नागर (Ankita Nagar) अपने चौथे प्रयास में भर्ती परीक्षा को पास करने के बाद सिविल जज बनी हैं। उन्होंने परीक्षा में 5वीं रैंक हासिल की है। अंकिता नागर सिविल जज क्लास-II पद के लिए चयनित हुई है। संघर्ष की आंच में तपी इस युवती का कहना है कि जज भर्ती परीक्षा में तीन बार नाकाम होने के बाद भी उसकी निगाहें लक्ष्य पर टिकी रहीं। अंकिता नागर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि मैंने अपने चौथे प्रयास में सिविल जज क्लास-II भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है। अपनी खुशी को बयान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। ये भी पढ़ें- Tajinder Bagga Arrest Case: पंजाब पुलिस को बड़ा झटका, तजिंदर बग्गा को वापस राजधानी लेकर आ रही है दिल्ली पुलिस उन्होंने बताया कि उनके पिता अशोक नागर शहर के मूसाखेड़ी इलाके में सब्जी बेचते हैं। जज भर्ती परीक्षा की तैयारी के दौरान समय मिलने पर वह इस काम में उनका हाथ बंटाती रही हैं। LLM की शिक्षा हासिल करने वाली नागर ने बताया कि वह बचपन से कानून की पढ़ाई करना चाहती थीं। उन्होंने LLB के पढ़ाई के दौरान तय कर लिया था कि उन्हें जज बनना है। आत्मविश्वास से परिपूर्ण 29 वर्षीय नागर ने कहा कि जज भर्ती परीक्षा में तीन बार असफल होने के बाद भी मैंने हिम्मत नहीं हारी और मैं अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए तैयारी में जुटी रही। इस संघर्ष के दौरान मेरे लिए रास्ते खुलते गए और मैं इन पर चलती गई। "We wanted to give our daughter a fair chance in life. We compromised alot the past six years for her education. She studied without any privilege & cleared the exam. We are proud of her. No one should force their daughters to marry but rather get them educated," say her parents pic.twitter.com/GYBS1bTkSo — ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) May 5, 2022 नागर ने कहा कि सिविल जज के रूप में काम शुरू करने के बाद उनका ध्यान इस बात पर केंद्रित रहेगा कि उनकी अदालत में आने वाले हर व्यक्ति को इंसाफ मिले। जज भर्ती परीक्षा में अपनी संतान की सफलता से गदगद सब्जी विक्रेता अशोक नागर ने कहा कि उनकी बेटी एक मिसाल है, क्योंकि उसने जीवन में कड़े संघर्ष के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। माता-पिता ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि हम अपनी बेटी को जीवन में एक उचित मौका देना चाहते थे। हमने उसकी शिक्षा के लिए पिछले 6 वर्षों में बहुत समझौता किया। उसने बिना किसी विशेषाधिकार के पढ़ाई की और परीक्षा पास की। हमें उस पर गर्व है। किसी को भी अपनी बेटियों की शादी के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें शिक्षित करें।
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